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  • डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..

    डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..


    नई दिल्ली। क्रिकेट के सबसे बड़े मंच आईपीएल में रिकॉर्ड्स का बनना और टूटना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने अपनी निरंतरता से एक ऐसा मानदंड स्थापित कर दिया है जिसे छू पाना किसी भी नवागंतुक के लिए एक बड़ी चुनौती है। भुवनेश्वर कुमार ने अपने करियर की शुरुआत से ही पावरप्ले के दौरान नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की अद्भुत कला का प्रदर्शन किया है। उनके पास न केवल विकेट चटकाने की क्षमता है बल्कि वे रनों की गति पर अंकुश लगाने में भी माहिर माने जाते हैं। आईपीएल के शुरुआती सीजन से लेकर अब तक भुवनेश्वर ने खुद को एक भरोसेमंद गेंदबाज के रूप में पेश किया है और कई मौकों पर अपनी टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाई हैं।

    दूसरी तरफ जसप्रीत बुमराह का उत्थान आधुनिक क्रिकेट की सबसे बड़ी कहानियों में से एक है। एक अनोखे गेंदबाजी एक्शन के साथ उभरे बुमराह ने बहुत कम समय में खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों की श्रेणी में खड़ा कर लिया है। बुमराह की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक मजबूती और दबाव के क्षणों में शांत रहकर सटीक यॉर्कर फेंकने की क्षमता है। जब मैच अंतिम ओवरों में फंसा होता है तब कप्तान की पहली पसंद हमेशा बुमराह ही होते हैं। आंकड़ों के लिहाज से भी बुमराह ने कई बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं और उनकी विकेट लेने की दर उन्हें लीग के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक बनाती है।

    इन दोनों गेंदबाजों के बीच विकेटों की संख्या का अंतर बहुत कम रहता है जो इस बात का प्रमाण है कि दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है। भुवनेश्वर कुमार ने जहां लंबे समय तक खेलते हुए अनुभव और कौशल का बेहतरीन संगम दिखाया है वहीं बुमराह ने अपनी स्ट्राइक रेट और कम इकोनॉमी रेट से सभी को प्रभावित किया है। इन दोनों गेंदबाजों की गेंदबाजी शैली अलग होने के बावजूद उनका लक्ष्य हमेशा अपनी टीम को जीत दिलाना रहा है। भुवनेश्वर की ताकत शुरुआती झटके देना है तो बुमराह मध्यक्रम और निचले क्रम को ध्वस्त करने में महारत रखते हैं।

    आईपीएल के बदलते स्वरूप और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इन दोनों भारतीय तेज गेंदबाजों ने अपनी फिटनेस और फॉर्म को बरकरार रखते हुए युवा गेंदबाजों के लिए एक मिसाल पेश की है। यह देखना दिलचस्प रहता है कि कैसे एक ही दौर के दो महान गेंदबाज अलग-अलग हथियारों के साथ एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी जान लगा देते हैं। रिकॉर्ड की इस दौड़ में कभी भुवनेश्वर आगे निकलते हैं तो कभी बुमराह अपनी तेजी से उन्हें पीछे छोड़ देते हैं। अंततः यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के प्रशंसकों के लिए एक सुखद अनुभव लेकर आती है क्योंकि उन्हें विश्व स्तरीय गेंदबाजी देखने का अवसर मिलता है।

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  • चोट का झटका: इंग्लैंड के तीसरे तेज गेंदबाज एटकिंसन सिडनी में नहीं खेलेंगे

    चोट का झटका: इंग्लैंड के तीसरे तेज गेंदबाज एटकिंसन सिडनी में नहीं खेलेंगे


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज गस एटकिंसन चोट के कारण एशेज 2025 की निर्णायक कड़ीसिडनी टेस्टसे बाहर हो गए हैं। बाएं जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव के चलते एटकिंसन 4 जनवरी से सिडनी में होने वाले मुकाबले में चयन के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। यह जानकारी इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने मेडिकल जांच के बाद साझा की।

    एटकिंसन को यह चोट मेलबर्न में खेले गए चौथे टेस्ट के दौरान लगी थी। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में अपने पांचवें ओवर की अंतिम गेंद डालते समय उन्होंने असहजता महसूस की और तुरंत मैदान छोड़ दिया। अगले दिन कराए गए स्कैन में मांसपेशियों में खिंचाव की पुष्टि हुई। टीम मैनेजमेंट ने सुरक्षित विकल्प के तौर पर उन्हें सिडनी टेस्ट से बाहर रखने का फैसला किया।इस सीरीज में एटकिंसन चोटों के कारण बाहर होने वाले इंग्लैंड के तीसरे तेज गेंदबाज हैं। इससे पहले मार्क वुड घुटने की समस्या और जोफ्रा आर्चर साइड स्ट्रेन के कारण स्वदेश लौट चुके हैं। लगातार चोटों ने इंग्लैंड की तेज गेंदबाजी आक्रमण को कमजोर किया है। हालांकि टीम प्रबंधन का कहना है कि मौजूदा स्क्वॉड में पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि एटकिंसन की गैरमौजूदगी के बावजूद इंग्लैंड ने मेलबर्न टेस्ट में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। टीम ने ऑस्ट्रेलिया को दूसरी पारी में केवल 132 रन पर समेटा और 175 रनों का लक्ष्य चार विकेट शेष रहते हासिल किया। यह जनवरी 2011 के बाद विदेशी धरती पर इंग्लैंड की पहली एशेज टेस्ट जीत थीजिसने टीम का मनोबल काफी बढ़ाया।सिडनी टेस्ट के लिए टीम ने किसी नए खिलाड़ी को शामिल नहीं करने का निर्णय लिया है। टीम प्रबंधन के अनुसारमैथ्यू पॉट्स अब तक इस सीरीज में नहीं खेले हैं और तेज गेंदबाजी के विकल्प के तौर पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा मार्क वुड के बाहर होने के बाद मैथ्यू फिशर को पहले ही सीनियर स्क्वॉड में जोड़ा जा चुका है।

    स्पिन विभाग में भी रणनीतिक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। यदि इंग्लैंड अतिरिक्त स्पिनर के साथ उतरने का फैसला करता हैतो शोएब बशीर को मौका मिल सकता है। हालांकि सिडनी की पिच को देखते हुए तेज गेंदबाजों पर निर्भरता बनाए रखने की संभावना अधिक मानी जा रही है।एटकिंसन के लिए चोटें नया विषय नहीं हैं। इससे पहले भी वह हैमस्ट्रिंग समस्या के कारण भारत के खिलाफ शुरुआती टेस्ट नहीं खेल पाए थे। हालांकि वापसी पर उन्होंने प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनका प्रदर्शन औसत रहा और तीन टेस्ट में कुल छह विकेट लिए।अब निगाहें सिडनी टेस्ट पर हैंजहां इंग्लैंड चोटों के बावजूद सीरीज का समापन मजबूती से करने की कोशिश करेगा। यह मुकाबला न केवल सीरीज के नतीजे के लिएबल्कि इंग्लैंड के भविष्य के तेज गेंदबाजी संयोजन के लिए भी अहम माना जा रहा है।