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  • डिजिटल भारत की नई रफ्तार: अब टोल कटेगा ऑटोमैटिक, न रुकना पड़ेगा न कतार में लगना होगा

    डिजिटल भारत की नई रफ्तार: अब टोल कटेगा ऑटोमैटिक, न रुकना पड़ेगा न कतार में लगना होगा

    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाला समय एक बड़े तकनीकी बदलाव का संकेत लेकर आ रहा है। देश में टोल प्लाजा व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और बाधारहित बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और न ही लंबी कतारों का सामना करना पड़ेगा। पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक तकनीक पर आधारित होगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी।
    नई व्यवस्था में FASTag और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका होगी। अभी तक टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के पास रुककर स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, लेकिन भविष्य की प्रणाली में इन भौतिक बाधाओं को हटाया जा रहा है। हाईवे पर लगाए जाने वाले हाई-टेक कैमरे और सेंसर तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को तुरंत पहचान लेंगे। जैसे ही वाहन निर्धारित क्षेत्र से गुजरेंगे, टोल शुल्क अपने आप जुड़े बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगा। यह प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि ड्राइवर को इसका अनुभव भी लगभग नहीं होगा।
    इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी के रूप में सामने आएगा। बार-बार रुकने और चलने की प्रक्रिया खत्म होने से ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, राजमार्गों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और मैनुअल हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।
    नई प्रणाली के साथ नियमों को भी और सख्त बनाया गया है। अब टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित होगा। नकद भुगतान का विकल्प धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। यदि किसी वाहन में वैध फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो चालक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में टोल प्लाजा पर प्रवेश भी रोका जा सकता है। इसके अलावा UPI आधारित QR कोड स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान संभव हो सके।
    हालांकि, इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पूरे हाईवे नेटवर्क को कैशलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इससे न केवल लेनदेन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रा प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनेगी। लेकिन यह भी सच है कि जिन लोगों के पास डिजिटल साधनों की सुविधा नहीं है, उन्हें शुरुआती दौर में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
    यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को सक्रिय और अपडेट रखें। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंकिंग और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI एप्लिकेशन तैयार रखना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान में बाधा न आए।
    इस पूरी पहल का उद्देश्य केवल टोल संग्रह को सरल बनाना नहीं है, बल्कि देश के राजमार्गों को एक स्मार्ट और फ्यूचर-रेडी सिस्टम में बदलना है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय परिवहन प्रणाली को एक नई दिशा देगी, जहां यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह डिजिटल और व्यवस्थित भी होगी।
  • MP क्रूज हादसा: 29 यात्रियों की नाव पलटी, 9 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी..

    MP क्रूज हादसा: 29 यात्रियों की नाव पलटी, 9 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी..


    नई दिल्ली।
    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाला समय एक बड़े तकनीकी बदलाव का संकेत लेकर आ रहा है। देश में टोल प्लाजा व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और बाधारहित बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और न ही लंबी कतारों का सामना करना पड़ेगा। पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक तकनीक पर आधारित होगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी।

    नई व्यवस्था में FASTag और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका होगी। अभी तक टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के पास रुककर स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, लेकिन भविष्य की प्रणाली में इन भौतिक बाधाओं को हटाया जा रहा है।

    हाईवे पर लगाए जाने वाले हाई-टेक कैमरे और सेंसर तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को तुरंत पहचान लेंगे। जैसे ही वाहन निर्धारित क्षेत्र से गुजरेंगे, टोल शुल्क अपने आप जुड़े बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगा। यह प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि ड्राइवर को इसका अनुभव भी लगभग नहीं होगा।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी के रूप में सामने आएगा। बार-बार रुकने और चलने की प्रक्रिया खत्म होने से ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, राजमार्गों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और मैनुअल हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।

    नई प्रणाली के साथ नियमों को भी और सख्त बनाया गया है। अब टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित होगा। नकद भुगतान का विकल्प धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। यदि किसी वाहन में वैध फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो चालक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में टोल प्लाजा पर प्रवेश भी रोका जा सकता है।

    इसके अलावा UPI आधारित QR कोड स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान संभव हो सके।

    हालांकि, इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पूरे हाईवे नेटवर्क को कैशलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इससे न केवल लेनदेन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रा प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनेगी। लेकिन यह भी सच है कि जिन लोगों के पास डिजिटल साधनों की सुविधा नहीं है, उन्हें शुरुआती दौर में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

    यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को सक्रिय और अपडेट रखें। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंकिंग और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI एप्लिकेशन तैयार रखना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान में बाधा न आए।

    इस पूरी पहल का उद्देश्य केवल टोल संग्रह को सरल बनाना नहीं है, बल्कि देश के राजमार्गों को एक स्मार्ट और फ्यूचर-रेडी सिस्टम में बदलना है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय परिवहन प्रणाली को एक नई दिशा देगी, जहां यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह डिजिटल और व्यवस्थित भी होगी।

  • FASTag: सरकार ने लागू किए सख्त नियम….टोल नहीं कटा तो अब भरना होगा डबल जुर्माना

    FASTag: सरकार ने लागू किए सख्त नियम….टोल नहीं कटा तो अब भरना होगा डबल जुर्माना


    नई दिल्ली।
    हाईवे (Highway) पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार (Government) ने FASTag Rules में बदलाव करते हुए नया सख्त नियम (New Strict Rule) लागू किया है। अब अगर टोल प्लाजा पर किसी कारण से FASTag से भुगतान नहीं हो पाता है, तो वाहन मालिक को तय समय में भुगतान करना जरूरी होगा, वरना दोगुना जुर्माना देना पड़ेगा।


    72 घंटे में भुगतान नहीं किया तो देना होगा डबल चार्ज

    नए नियम के अनुसार, अगर कोई वाहन बिना टोल भुगतान किए बैरियर-फ्री टोल प्लाजा से गुजर जाता है और 72 घंटे के भीतर बकाया राशि नहीं चुकाता, तो उस पर दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। यानी अगर आपने समय पर भुगतान नहीं किया, तो आपको मूल टोल से दो गुना रकम चुकानी पड़ेगी।

    क्यों लाए गए ये नए नियम?
    सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि बिना भुगतान के टोल पार करने वालों पर रोक लगे और डिजिटल टोल सिस्टम को और मजबूत किया जा सके। नियमों का पालन सुनिश्चित हो। यह बदलाव नेशनल हाईवे फीस नियमों में संशोधन के तहत लागू किया गया है।


    टोल एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय

    सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि टोल एजेंसियों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर किसी उपभोक्ता की शिकायत पर टोल एजेंसी 5 दिनों के अंदर कार्रवाई नहीं करती है तो उस मामले में बकाया टोल की मांग अपने आप खत्म हो जाएगी। यानी अगर गलती एजेंसी की है और समय पर समाधान नहीं हुआ, तो आपको राहत मिल सकती है।


    क्या है ‘अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क’?

    संशोधित नियमों में ‘अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क’ को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। यह वह टोल है जो इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली द्वारा वाहन के गुजरने की पुष्टि के बावजूद प्राप्त नहीं होता है। ऐसे मामलों में, पंजीकृत वाहन मालिकों को एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें वाहन का विवरण, टोल पार करने की तारीख और स्थान, और देय राशि की जानकारी होगी।

    ये नोटिस एसएमएस, ईमेल, मोबाइल ऐप और एक विशेष पोर्टल के माध्यम से भेजे जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वाहन डेटाबेस ‘वाहन’ से जोड़ा जाएगा, ताकि बकाया राशि वाले वाहनों की आसानी से पहचान की जा सके।


    FASTag यूजर्स के लिए जरूरी सलाह

    FASTag में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें। ट्रांजैक्शन अलर्ट चेक करते रहें। कोई समस्या हो तो तुरंत शिकायत दर्ज करें। 72 घंटे के अंदर भुगतान जरूर करें। कुल मिलाकर, सरकार ने टोल वसूली को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इससे जहां नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी, वहीं सही यूजर्स को भी सुरक्षा और राहत मिलेगी।

  • FASTag: वार्षिक पास की कीमत बढ़ी….एक अप्रैल से चुकाने होंगे ज्यादा पैसे…

    FASTag: वार्षिक पास की कीमत बढ़ी….एक अप्रैल से चुकाने होंगे ज्यादा पैसे…


    नई दिल्ली।
    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highway Authority of India- NHAI) (एनएचएआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए FASTag Annual Pass (फास्टैग वार्षिक पास) की कीमत में बदलाव किया है। नए आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से गैर-व्यावसायिक वाहनों (कार, जीप और वैन) के लिए वार्षिक पास की कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। फास्टैग वार्षिक पास पिछले साल 15 अगस्त को शुरू किया गया था। ताकि टोल शुल्क के बोझ को कम किया जा सके और हाईवे पर यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सके।


    FASTag वार्षिक पास क्या है और कौन ले सकता है?

    फास्टैग वार्षिक पास उन वाहन मालिकों के लिए है जिनके पास गैर-व्यावसायिक वाहन और सक्रिय फास्टैग है।

    इस पास के तहत:
    – यह 1 साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक मान्य रहता है
    – किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा पर लागू होता है
    – 200 बार टोल पार करने या 1 साल पूरा होने के बाद पास स्वतः समाप्त हो जाता है
    – इस पास को Rajmargyatra (राजमार्गयात्रा) मोबाइल एप या एनएचएआई की वेबसाइट के जरिए खरीदा जा सकता है।


    पास की कीमत हर साल क्यों बढ़ती है?

    सरकार ने नेशनल हाईवे फीस (डिटरमिनेशन ऑफ रेट्स एंड कलेक्शन) संशोधन नियम 2025 के तहत यह प्रावधान किया है कि फास्टैग वार्षिक पास की कीमत हर साल संशोधित की जाएगी। इसी नियम के अनुसार 2026-27 के लिए पास की कीमत में यह मामूली बढ़ोतरी की गई है।


    अभी कितने लोग FASTag वार्षिक पास का इस्तेमाल कर रहे हैं?

    सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अनुसार: देश में 50 लाख से अधिक लोग फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग कर रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले कुल कार टोल लेन-देन का लगभग 28 प्रतिशत अब इसी पास के जरिए होता है। इसके अलावा 2016 से अब तक 11.86 करोड़ फास्टैग जारी किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 5.9 करोड़ फास्टैग सक्रिय हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 98 प्रतिशत से अधिक टोल वसूली फास्टैग के माध्यम से होती है।


    किन टोल प्लाजा पर वार्षिक पास का उपयोग सबसे ज्यादा है?

    कुछ टोल प्लाजा पर फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग काफी अधिक है। दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर बिजवासन टोल प्लाजा – लगभग 57 प्रतिशत कारें फास्टैग वार्षिक पास से गुजरती हैं। दिल्ली के मुंडका टोल प्लाजा (UER-II) – लगभग 53 प्रतिशत उपयोग। झिंझोली टोल प्लाजा (NH-334P) – करीब 53 प्रतिशत गैर-व्यावसायिक वाहन फास्टैग वार्षिक पास का इस्तेमाल करते हैं।


    क्षेत्रीय स्तर पर:

    – चंडीगढ़ – 14 प्रतिशत
    – तमिलनाडु – 12.3 प्रतिशत
    – दिल्ली – 11.5 प्रतिशत
    – 15 अगस्त 2025 से जनवरी 2026 तक फास्टैग वार्षिक पास से 26.55 करोड़ से अधिक टोल लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं।


    क्या यह पास सभी टोल प्लाजा पर मान्य है?

    – नहीं। यह पास केवल राष्ट्रीय राजमार्ग और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे के लगभग 1150 टोल प्लाजा पर ही मान्य है। राज्य सरकार या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित एक्सप्रेसवे या स्टेट हाईवे के टोल प्लाजा पर फास्टैग वार्षिक पास सामान्य फास्टैग की तरह काम करेगा और सामान्य टोल शुल्क लागू होगा।


    क्या FASTag Annual Pass लेना अनिवार्य है?

    – नहीं। फास्टैग वार्षिक पास पूरी तरह वैकल्पिक है।
    – जो उपयोगकर्ता फास्टैग वार्षिक पास नहीं लेते हैं, उनके लिए मौजूदा फास्टैग सिस्टम पहले की तरह ही चलता रहेगा और वे प्रति टोल क्रॉसिंग के हिसाब से शुल्क देते रहेंगे।


    पास खत्म होने पर क्या होगा?

    यदि: 200 ट्रिप पूरी हो जाती हैं, या 1 साल की वैधता समाप्त हो जाती है तो फास्टैग वार्षिक पास अपने आप सामान्य फास्टैग में बदल जाएगा।हालांकि, अगर 200 ट्रिप पहले ही पूरी हो जाएं तो उपयोगकर्ता चाहें तो उसी साल के भीतर फिर से नया फास्टैग वार्षिक पास खरीद सकते हैं।


    खर्च और समय दोनों की बचत

    फास्टैग वार्षिक पास की कीमत में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद यह योजना हाईवे उपयोगकर्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह व्यवस्था टोल भुगतान को आसान बनाने के साथ-साथ नियमित यात्रियों के लिए खर्च और समय दोनों की बचत में मदद कर रही है।

  • Toll Tax: इस तारीख से नेशनल हाईवे पर नकद टोल बंद करने की तैयारी, फास्टैग-यूपीआई होंगे अनिवार्य

    Toll Tax: इस तारीख से नेशनल हाईवे पर नकद टोल बंद करने की तैयारी, फास्टैग-यूपीआई होंगे अनिवार्य

    नई दिल्ली । देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) 1 अप्रैल 2026 से सभी टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद करने पर विचार कर रहा है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो टोल शुल्क केवल डिजिटल माध्यमों जैसे FASTag और UPI के जरिए ही लिया जाएगा।

    फास्टैग का बढ़ता प्रयोग
    एनएचएआई के आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में फास्टैग का उपयोग 98 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।

    इससे टोल वसूली के तरीके में व्यापक बदलाव आया है और अधिकांश टोल लेनदेन अब RFID-सक्षम फास्टैग के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से हो रहे हैं। इससे संपर्क रहित और तेज आवागमन संभव हो गया है। इसके अलावा, देशभर के टोल प्लाजा पर UPI भुगतान सुविधा भी शुरू हो चुकी है, जो त्वरित और सुलभ विकल्प प्रदान करती है।

    नकद भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क
    राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों के मुताबिक, वैध और सक्रिय फास्टैग के बिना टोल प्लाजा में प्रवेश करने वाले वाहनों से नकद भुगतान करने पर दोगुना शुल्क लिया जाता है। वहीं UPI के माध्यम से भुगतान करने पर निर्धारित उपयोगकर्ता शुल्क का 1.25 गुना शुल्क देना होता है।

    एनएचएआई ने बताया कि नकद भुगतान के कारण व्यस्त समय में लंबी कतारें लगती हैं, प्रतीक्षा अवधि बढ़ती है और लेनदेन विवाद भी उत्पन्न होते हैं।

    डिजिटल टोलिंग से बेहतर संचालन
    देशभर के 1150 से अधिक टोल केंद्रों पर पूर्ण डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू होने से परिचालन दक्षता, यातायात प्रबंधन और समय की बचत में सुधार की उम्मीद है। यह पहल एनएचएआई के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत प्रौद्योगिकी आधारित, उच्च दक्षता वाला और उपयोगकर्ता-अनुकूल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, ताकि देशभर में आवागमन और अधिक सुगम और निर्बाध बनाया जा सके।

  • बदल गया टोल टैक्स चुकाने का तरीका, बिना टोल प्लाजा के कटेगा टोल..

    बदल गया टोल टैक्स चुकाने का तरीका, बिना टोल प्लाजा के कटेगा टोल..


    नई दिल्ली। Toll Tax Without Toll Plaza: देश में हाईवे नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और रोज लाखों वाहन लंबी दूरी तय करते हैं. लेकिन टोल प्लाजा पर रुकना यात्रियों के सफर को स्लो कर देता है. फास्टैग के बाद भी कई जगह कतारें, जाम और समय की बर्बादी आम है. अब इस परेशानी का समाधान नई तकनीक से किया जा रहा है.

    देश का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ गुजरात के सूरत में शुरू किया गया है. यहां वाहन बिना रुके निकल जाएंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. इस सिस्टम में हाई रिजोल्यूशन कैमरे, जीपीएस और ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. यानी अब टोल देने का तरीका पूरी तरह डिजिटल और स्मूथ होने जा रहा है. जान लें पूरी खबर.

    बिना टोल प्लाजा के टोल कलेक्शन
    नए टोल प्लाजा सिस्टम में टोल प्लाजा पर बैरियर नहीं होगा. सड़क पर लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे हर गुजरने वाले वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे. अगर गाड़ी पर फास्टैग नहीं भी है. तब भी नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान हो जाएगी. सिस्टम इसे टोल उल्लंघन के तौर पर दर्ज करेगा और वाहन मालिक को ई चालान भेजा जाएगा.

    हर लेन में रडार और लिडार आधारित कैमरे 360 डिग्री रिकॉर्डिंग करेंगे. पूरा डेटा कंट्रोल रूम और एनएचएआई सर्वर पर रियल टाइम दर्ज होगा. यानी कोई भी वाहन बिना पेमेंट के नहीं निकल सकेगा. यह टेक्नोलॉजी दुबई, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ही इस्तेमाल की जा रही है

    फास्टैग है लेकिन बैलेंस कम है तो क्या होगा?
    अगर आपकी गाड़ी में फास्टैग लगा है लेकिन उसमें बैलेंस कम है या ब्लैकलिस्टेड है. तब भी सिस्टम उसे पहचान लेगा. ऐसे मामलों में वाहन को डिफॉल्टर के रूप में दर्ज किया जाएगा. वाहन मालिक को एसएमएस और ऐप के जरिए अलर्ट मिलेगा. तय समय के भीतर रिचार्ज न करने पर ई चालान जारी होगा.

    जानबूझकर टोल चोरी करने की कोशिश करने वालों पर भी यह सिस्टम नजर रखेगा. कैमरे हर एंगल से रिकॉर्डिंग करते हैं. इसलिए बच निकलना मुश्किल होगा. आने वाले समय में यह बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम देश के बाकी हाईवे पर भी लागू किया जा सकता है. इससे सफर तेज और आसान हो जाएगा.

  • FASTag Annual Pass के नाम हो रही धोखाधड़ी, सतर्क रहें…. NHAI ने जारी की चेतावनी

    FASTag Annual Pass के नाम हो रही धोखाधड़ी, सतर्क रहें…. NHAI ने जारी की चेतावनी


    नई दिल्ली। अगर आप भी फास्टेग एनुअल पास (FASTag Annual Pass) खरीदने की सोच रहे हैं या पहले से इसे रिन्यू (Renew) करने का प्लान बना रहे हैं, तो बेहद सतर्क रहिए। NHAI ने हाल ही में एक बड़े धोखाधड़ी (fraud) चेतावनी जारी की है जिसमें फर्जी वेबसाइट्स और अनधिकृत लिंक के जरिए वाहन मालिकों को फंसाया जा रहा है। NHAI के अधिकारियों का कहना है कि कुछ फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और लिंक “Annual Pass” की बिक्री का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में वे धोखाधड़ी के जाल हैं। इन झूठे ऑफर्स पर भरोसा करने से न सिर्फ आपका पैसा लगभग 3,000 रुपए तक तथा इसे खरीदते समय दर्ज की गई व्यक्तिगत और वाहन संबंधित जानकारी का दुरुपयोग होने का खतरा भी बढ़ जाता है।


    वार्षिक FASTag पास क्या होता है?

    FASTag Annual Pass एक वार्षिक सुविधा है जिसे NHAI ने उन निजी वाहनों के लिए पेश किया है जो राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर अक्सर यात्रा करते हैं। इसके तहत एक ₹3,000 का एक-बार शुल्क देकर वाहन मालिक एक साल या 200 टोल (जो पहले पूरा हो) तक टोल शुल्क के बिना यात्रा कर सकता है।

    यह Annual Pass Rajmargyatra App या आधिकारिक NHAI वेबसाइट के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है। जैसे ही पास सक्रिय होता है, SMS के जरिए इसकी पुष्टि भी मिलती है। इसे टीकरी और निजी एक्सप्रेसवे जैसे कुछ टोलों पर लागू नहीं किया जा सकता इसलिए यात्रा से पहले मार्ग और टोल लिस्ट चेक करना महत्त्वपूर्ण है।


    क्या है Scam का तरीका?
    NHAI ने पाया है कि कुछ फर्जी वेबसाइट्स, अनधिकृत लिंक्स और अनधिकृत ऐप्स “FASTag Annual Pass” बेचने का दावा करते हैं। ये प्लेटफॉर्म अपने नकली विज्ञापनों और आकर्षक ऑफर्स के साथ लोगों को लुभाते हैं। जैसे ही यूज़र इन फर्जी लिंक्स पर क्लिक करता है और अपनी वाहन और व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करता है, कई बार पैसा पहले ही कट जाता है और पास कभी एक्टिव नहीं होता।

    कुछ यूजर्स ने ऑनलाइन पर ऐसे अनुभव भी साझा किए हैं जहां आधिकारिक ऐप पर भुगतान पेज फ्रीज़ हो जाता है या वाहन विवरण VAHAN डेटाबेस में ना होने के कारण पास नहीं बन पाता। ऐसे मामलों में सावधानी बरतना आवश्यक है।