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  • 1 नवंबर से लागू हुए 18 बड़े बदलाव, LPG से लेकर पेंशन और दूध-दही तक जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

    1 नवंबर से लागू हुए 18 बड़े बदलाव, LPG से लेकर पेंशन और दूध-दही तक जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

    नई दिल्ली ।नवंबर महीने की शुरुआत आम लोगों के लिए कई नए बदलाव लेकर आई है। 1 नवंबर 2026 से देश के अलग-अलग राज्यों में रोजमर्रा की जरूरतों, परिवहन, बैंकिंग, बिजली, टैक्स और सरकारी सेवाओं से जुड़े 18 महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं। इनका असर घरेलू बजट से लेकर कारोबारियों के खर्च और सरकारी पेंशन प्राप्त करने वालों की प्रक्रियाओं तक दिखाई दे सकता है। कहीं दूध-दही और CNG महंगी हुई है, तो कहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड, बिजली कनेक्शन और यातायात से जुड़े नियम भी बदले हैं।

    दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए 1 नवंबर से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP लागू किया गया है। इसके तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। कुछ श्रेणियों के ट्रकों और बसों पर भी पाबंदियां लागू हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना और वाहन जब्त होने की कार्रवाई हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में पार्किंग शुल्क बढ़ाने के साथ डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

    उत्तर प्रदेश के कई शहरों में CNG की कीमत बढ़ाई गई है। लखनऊ, आगरा, सुल्तानपुर और अयोध्या में एक रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जबकि उन्नाव में CNG 2.25 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है। इससे गैस से चलने वाले वाहनों का परिचालन खर्च बढ़ेगा। वहीं, कर्नाटक में दूध की कीमत आठ रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई है। इसमें सात रुपये किसानों और एक रुपया दूध यूनियनों को मिलेगा। राज्य में दही भी 14 रुपये प्रति किलो महंगा हो गया है।

    तमिलनाडु में शराब की बोतलों के दाम में 10 रुपये की वृद्धि की गई है। हालांकि, खाली बोतल सही स्थिति में वापस करने पर ग्राहकों को 10 रुपये लौटाने का प्रावधान है। दूसरी ओर, कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में 19 किलो वाला सिलेंडर अब 2,820 रुपये का हो गया है, जो पहले 2,810 रुपये था। घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पर स्थिर रखी गई है।

    बैंकिंग सेवाओं में भी नए शुल्क लागू हुए हैं। पंजाब नेशनल बैंक के Visa और RuPay क्रेडिट कार्ड पर रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम करने की पात्र रिक्वेस्ट के लिए 99 रुपये शुल्क लगेगा। एक बिलिंग साइकल में 50 हजार रुपये से अधिक के यूटिलिटी बिल भुगतान पर एक प्रतिशत तक शुल्क लग सकता है। SBI ने भी क्रेडिट कार्ड से संबंधित कुछ शुल्कों में बदलाव किया है।

    बिजली उपभोक्ताओं के लिए उत्तराखंड और बिहार में नए प्रावधान लागू किए गए हैं। उत्तराखंड में BPL कार्डधारकों के नए बिजली कनेक्शन का सर्विस लाइन शुल्क 100 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया है। हालांकि, प्रीपेड मीटर इस्तेमाल करने वालों को कुछ राहत दी गई है। बिहार में 150 किलोवाट तक के सभी नए बिजली कनेक्शन के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाना अनिवार्य होगा। कनेक्शन का शुल्क फेज के अनुसार तय किया जाएगा।

    सरकारी पेंशन पाने वाले 80 वर्ष से कम उम्र के पेंशनर्स 1 नवंबर से अपना वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। इसकी अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। निर्धारित समय में प्रमाण पत्र नहीं देने पर पेंशन भुगतान प्रभावित हो सकता है। 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेंशनर्स के लिए यह प्रक्रिया एक अक्टूबर से शुरू हो चुकी है।

    आयकर से जुड़े बदलाव के तहत असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए उन करदाताओं को ITR दाखिल करने की तारीख में राहत मिली है, जिनके खातों का ऑडिट जरूरी है। उनके लिए अंतिम तारीख बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है। यह विस्तार उन सभी करदाताओं पर लागू नहीं होगा, जिनके खातों का ऑडिट अनिवार्य नहीं है। GST के नियमों में भी बिक्री के बाद मिलने वाली छूट, क्रेडिट नोट और टैक्स रिफंड से संबंधित बदलाव किए गए हैं। इनसे कारोबारियों को कुछ परिस्थितियों में राहत मिल सकती है।

    टेलीकॉम क्षेत्र में CNAP सुविधा शुरू की जा रही है। इसके माध्यम से आने वाली कॉल के दौरान फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम दिखाई दे सकता है। हालांकि, इसकी उपलब्धता नेटवर्क और टेलीकॉम ऑपरेटर पर निर्भर करेगी। FASTag के तहत टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए सालाना पास की व्यवस्था की गई है। नगर सीमा से बाहर स्थित टोल प्लाजा के लिए इसकी फीस 1,500 रुपये और नगर सीमा के अंदर स्थित टोल प्लाजा के लिए 3,000 रुपये होगी।

    उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर भी गति सीमा घटाई गई है। कार और जीप जैसे हल्के वाहनों की अधिकतम रफ्तार 100 से घटाकर 80 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। भारी वाहनों के लिए यह सीमा 80 से घटाकर 60 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। सर्दियों में कोहरे के कारण दुर्घटनाओं को कम करना इसका उद्देश्य है।

    हवाई और रेल यात्रियों के लिए भी कुछ बदलाव किए गए हैं। आठ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों के लिए Digi Yatra सुविधा का ट्रायल शुरू किया जा रहा है। शुरुआत में एयर इंडिया और इंडिगो की चुनिंदा उड़ानों में इसका लाभ मिलेगा। ताज एक्सप्रेस अब नई दिल्ली स्टेशन के बजाय हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से संचालित होगी।

    अयोध्या के राम मंदिर में भी दर्शन और पूजा का समय बदल गया है। एक नवंबर से मंदिर के पट सुबह चार बजे खुलेंगे और रात 10 बजे बंद होंगे। मंगला आरती सुबह 4:30 से 4:40 बजे तक होगी, जबकि श्रद्धालुओं के लिए दर्शन सुबह सात बजे से शुरू होंगे।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी मासिक समीक्षा की प्रक्रिया जारी है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की स्थिति के आधार पर तेल कंपनियां दरों की समीक्षा करती हैं। हालांकि, एक नवंबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में किसी बदलाव की पुष्टि के लिए आधिकारिक घोषणा जरूरी होगी। इन सभी बदलावों के बीच लोगों को अपने भुगतान, यात्रा, पेंशन और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े नए प्रावधानों की जानकारी रखना जरूरी है।

  • नेशनल हाईवे को जाम फ्री बनाने की तैयारी…. फास्टैग और वाहन डेटाबेस की मदद से होगी एडवांस प्लानिंग

    नेशनल हाईवे को जाम फ्री बनाने की तैयारी…. फास्टैग और वाहन डेटाबेस की मदद से होगी एडवांस प्लानिंग


    नई दिल्ली।
    देश में नेशनल हाईवे (National Highway) के निर्माण और ट्रैफिक प्रबंधन की पुरानी परिपाटी बदलने जा रही है। अब हाईवे पर घंटों लंबे जाम और हादसों का इंतजार करने के बजाय सरकार (Government) फास्टैग (FASTag) और वाहन डेटाबेस (Vehicle Database) की मदद से एडवांस प्लानिंग करेगी। इसके तहत किसी हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से दो-तीन साल पहले ही उसके चौड़ीकरण या बाईपास निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फास्टैग अब सिर्फ टोल वसूली का जरिया नहीं रहेगा। इसके डेटा का उपयोग ट्रैफिक पैटर्न, गाड़ियों की रफ्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग में किया जाएगा। वर्तमान में किसी हाईवे सेक्शन पर वाहनों की संख्या उसकी कुल क्षमता के 75 से 80 प्रतिशत तक पहुंचेगी तो डिजिटल सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से चौड़ीकरण, बाईपास या एलिवेटेड कॉरिडोर की जरूरत के लिए अलर्ट कर देगा। इससे गंभीर जाम की स्थिति पैदा होने से 2 से 3 साल पहले ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो सकेगा।


    दूसरे रास्तों की सलाह से सफर आसान होगा

    अधिकारी ने बताया कि त्योहारों, लंबे सप्ताहांत या छुट्टियों के दौरान टोल प्लाजा पर अचानक गाड़ियों का दबाव बढ़ जाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एआई आधारित ट्रैफिक कंट्रोल रूम फास्टैग ट्रेंड्स का विश्लेषण कर पहले ही पहचान लेगा कि किस टोल पर कतारें लग सकती हैं। सिस्टम सड़क यात्रियों को राजमार्गयात्रा ऐप, गूगल मैप्स और हाईवे पर लगे वेरिएबल मैसेज साइनेज के जरिए टोल प्लाजा से 20-30 किलोमीटर पहले ही वैकल्पिक रास्तों की सटीक जानकारी दे दी जाएगी।


    मार्च 2027 तक बैरियर मुक्त होंगे टोल

    पीक आवर्स में टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करने के लिए मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएचएफएफ) और स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) आधारित बैरियर-मुक्त व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे वाहन 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बिना थमे टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे। सड़क परिवहन मंत्रालय, एनएचएआई, अधिकारियों और गति शक्ति सेल की संयुक्त समीक्षा बैठक में इस डिजिटल रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया है।

  • FASTag चोरी या गुम होने पर तुरंत करें ये जरूरी काम, नहीं तो टोल भुगतान के साथ खाते से पैसे कटने का खतरा

    FASTag चोरी या गुम होने पर तुरंत करें ये जरूरी काम, नहीं तो टोल भुगतान के साथ खाते से पैसे कटने का खतरा

    नई दिल्ली ।FASTag ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल भुगतान की प्रक्रिया को काफी आसान बनाया है। वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा FASTag संबंधित बैंक खाते या वॉलेट से जुड़ा होता है और टोल प्लाजा से गुजरते समय निर्धारित राशि अपने आप कट जाती है। ऐसे में अगर FASTag चोरी हो जाए या वाहन से निकाल लिया जाए तो समय रहते उसे ब्लॉक करना जरूरी हो जाता है।

    FASTag के चोरी या गुम होने की जानकारी मिलते ही सबसे पहला कदम उसे बंद करवाना होना चाहिए। इसके लिए FASTag जारी करने वाले बैंक के टोल-फ्री कस्टमर केयर नंबर पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है। बैंक को FASTag के चोरी या गुम होने की जानकारी देकर उसे हॉटलिस्ट या ब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है।

    अगर संबंधित बैंक का कस्टमर केयर नंबर उपलब्ध नहीं है या तत्काल संपर्क करने में परेशानी हो रही है तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की हेल्पलाइन 1033 पर भी संपर्क किया जा सकता है। इस नंबर के माध्यम से FASTag की हॉटलिस्टिंग या ब्लॉकिंग के लिए अनुरोध दर्ज कराया जा सकता है।

    FASTag को ऑनलाइन भी बंद किया जा सकता है। इसके लिए जिस बैंक या वॉलेट से FASTag जुड़ा है, उसके आधिकारिक मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद FASTag से संबंधित सेक्शन में जाकर मैनेज FASTag या ब्लॉक/डीएक्टिवेट जैसे विकल्प को तलाशना होगा।

    ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान FASTag के बंद करने का कारण पूछा जा सकता है। ऐसी स्थिति में चोरी या गुम होने से संबंधित विकल्प का चयन करके FASTag को डीएक्टिवेट किया जा सकता है। इससे चोरी हुए या गुम FASTag के आगे इस्तेमाल की आशंका को कम करने में मदद मिलती है।

    अगर FASTag के साथ वाहन भी चोरी हुआ है या केवल FASTag ही चोरी किया गया है तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराना भी जरूरी कदम है। ऑनलाइन FIR या पुलिस शिकायत दर्ज कराने से चोरी की घटना का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार हो जाता है। इससे भविष्य में चोरी किए गए FASTag के किसी गलत इस्तेमाल से संबंधित स्थिति में वाहन मालिक के पास शिकायत का रिकॉर्ड मौजूद रहेगा।

    पुलिस शिकायत की जरूरत नया FASTag जारी कराने के दौरान भी पड़ सकती है। संबंधित बैंक नया FASTag जारी करने के लिए पुलिस रिपोर्ट की कॉपी मांग सकता है। इसलिए चोरी या गुम होने की स्थिति में ब्लॉक कराने के साथ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी पूरी करना उपयोगी है।

    पुराना FASTag पूरी तरह ब्लॉक होने के बाद वाहन मालिक संबंधित बैंक से नया FASTag जारी करने का अनुरोध कर सकता है। नया FASTag मिलने और सक्रिय होने के बाद पुराने FASTag से जुड़े बकाया वॉलेट बैलेंस के संबंध में बैंक की प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    पुराने FASTag में मौजूद राशि को लेकर भी बैंक से जानकारी लेना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद बचा हुआ वॉलेट बैलेंस नए FASTag से जुड़े खाते में स्थानांतरित किया जा सकता है। इसलिए FASTag चोरी या गुम होने पर देरी करने के बजाय पहले उसे बंद कराना, फिर पुलिस शिकायत और नया FASTag जारी कराने की प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण है।

  • FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत, अब बिना स्टिकर बदले बदल सकेंगे बैंक; OneTag से आसान होगा पोर्टेबिलिटी का पूरा काम

    FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत, अब बिना स्टिकर बदले बदल सकेंगे बैंक; OneTag से आसान होगा पोर्टेबिलिटी का पूरा काम


    नई दिल्ली । नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने FASTag यूजर्स के लिए OneTag पोर्टेबिलिटी सुविधा शुरू की है। इसके तहत वाहन मालिक अपनी कार की विंडस्क्रीन पर लगे मौजूदा FASTag स्टिकर को हटाए बिना उससे जुड़े बैंक या इशूअर को बदल सकेंगे। इससे बैंक बदलने के लिए नया FASTag खरीदने और पुराने स्टिकर को हटाने की जरूरत नहीं रहेगी।

    अब तक अगर किसी वाहन मालिक को FASTag का बैंक बदलना होता था, तो उसे पुराने FASTag को वाहन से हटाकर नया टैग लेना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय और अतिरिक्त खर्च दोनों होते थे। OneTag सुविधा के जरिए इस परेशानी को दूर करने की कोशिश की गई है। यह प्रक्रिया मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह होगी, जिसमें नंबर वही रहता है और केवल सेवा प्रदाता बदला जाता है।

    इस सुविधा की शुरुआत मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान की गई। नई व्यवस्था में वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा मौजूदा FASTag स्टिकर ही इस्तेमाल होता रहेगा। FASTag ID में भी बदलाव नहीं होगा। इससे बार-बार नया टैग लेने की आवश्यकता कम होगी और वाहन मालिकों के लिए बैंक बदलना अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

    FASTag को नए बैंक में पोर्ट करने के लिए वाहन मालिक को सबसे पहले अपने मोबाइल में राजमार्गयात्रा ऐप पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करके यह जांचना होगा कि FASTag पोर्टेबिलिटी के लिए वाहन पात्र है या नहीं।

    पात्रता की पुष्टि होने के बाद मौजूदा FASTag बैंक की ओर से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर छह अंकों का वेरिफिकेशन कोड भेजा जाएगा। इस कोड को ऐप में दर्ज करने के बाद वाहन मालिक अपनी पसंद का नया FASTag इशूअर बैंक चुन सकेगा। इसके बाद नए बैंक के साथ ग्राहक सत्यापन और वॉलेट ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रक्रिया पूरी होते ही FASTag पोर्टेबिलिटी पूरी हो जाएगी।

    हालांकि, बैंक बदलने के बाद तुरंत दोबारा पोर्टेबिलिटी की सुविधा नहीं मिलेगी। अगर कोई यूजर भविष्य में फिर किसी दूसरे बैंक में FASTag पोर्ट करना चाहता है, तो उसे छह महीने तक इंतजार करना होगा। सफल पोर्टेबिलिटी के बाद पुराना बैंक मौजूदा FASTag वॉलेट बंद करेगा और उसमें बची राशि को रिफंड करेगा। इसके बाद छह महीने का कूलिंग पीरियड लागू रहेगा।

    फिलहाल OneTag पोर्टेबिलिटी कुछ चुनिंदा बैंकों और इशूअर्स के जरिए उपलब्ध कराई गई है। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एयरटेल पेमेंट बैंक, एक्सिस बैंक, सिटी यूनियन बैंक, फेडरल बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, करूर वैश्य बैंक और आईसीआईसीआई बैंक शामिल हैं।

    इस सुविधा से FASTag व्यवस्था में भी बदलाव की उम्मीद है। नया टैग बनाने, उसकी डिलीवरी और उससे जुड़े खर्च कम होने के साथ पुराने FASTag को ही जारी रखने की सुविधा मिलेगी। इससे वाहन मालिकों के लिए बैंक बदलने की प्रक्रिया सरल होगी और FASTag के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

  • 77 लाख लोगों ने अपनाया FASTag एनुअल पास, डिजिटल टोल सिस्टम की बढ़ी रफ्तार, जल्द आएगी AI आधारित नई तकनीक

    77 लाख लोगों ने अपनाया FASTag एनुअल पास, डिजिटल टोल सिस्टम की बढ़ी रफ्तार, जल्द आएगी AI आधारित नई तकनीक

    नई दिल्ली। देश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर डिजिटल टोल भुगतान व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और FASTag एनुअल पास की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। सरकार के अनुसार पिछले 11 महीनों में 77 लाख से अधिक FASTag एनुअल पास जारी किए जा चुके हैं। इन पासों के माध्यम से 63 करोड़ से अधिक टोल लेनदेन दर्ज किए गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि निजी वाहन चालकों के बीच यह सुविधा तेजी से स्वीकार की जा रही है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और टोल प्लाजा पर भीड़ कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह व्यवस्था अब राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

    सरकार के मुताबिक कार, जीप और वैन श्रेणी के वाहनों द्वारा किए जाने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा केवल FASTag एनुअल पास के माध्यम से हो रहा है। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली के तहत वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 98 प्रतिशत टोल शुल्क FASTag के जरिए ही वसूला जा रहा है। इससे टोल भुगतान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनी है।

    FASTag एनुअल पास विशेष रूप से निजी कार, जीप और वैन मालिकों के लिए उपलब्ध कराया गया है। इसकी कीमत 3,075 रुपये निर्धारित की गई है। यह पास एक वर्ष तक या अधिकतम 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध रहता है। जो भी सीमा पहले पूरी होती है, उसी के अनुसार इसकी वैधता समाप्त हो जाती है। नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए यह सुविधा समय और प्रक्रिया दोनों के लिहाज से उपयोगी मानी जा रही है।

    सरकार का कहना है कि FASTag नेटवर्क को बहु-स्तरीय डिजिटल सुरक्षा प्रणाली के साथ संचालित किया जा रहा है। इसमें टोल प्रबंधन प्रणाली, अधिग्रहण बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) तथा FASTag जारी करने वाले बैंक आपस में समन्वित रूप से कार्य करते हैं। प्रत्येक टोल लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है और भुगतान होते ही वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर तुरंत सूचना भेजी जाती है। किसी भी प्रकार की शिकायत के समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था भी विकसित की गई है।

    सरकार भविष्य में टोल संग्रह प्रणाली को और आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक लागू करने की तैयारी चल रही है। इस प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण और RFID तकनीक का उपयोग किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने या गति कम करने की आवश्यकता नहीं होगी। कैमरा और सेंसर वाहन की पहचान कर संबंधित खाते से स्वतः टोल शुल्क काट देंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक लागू होने से टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आएगी, यात्रा का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और सड़क परिवहन व्यवस्था अधिक सुचारु बनेगी। साथ ही डिजिटल भुगतान और टोल संग्रह प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने के साथ राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लाखों लोगों को अधिक सुविधाजनक और निर्बाध सफर का अनुभव मिलेगा।

  • डिजिटल भारत की नई रफ्तार: अब टोल कटेगा ऑटोमैटिक, न रुकना पड़ेगा न कतार में लगना होगा

    डिजिटल भारत की नई रफ्तार: अब टोल कटेगा ऑटोमैटिक, न रुकना पड़ेगा न कतार में लगना होगा

    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाला समय एक बड़े तकनीकी बदलाव का संकेत लेकर आ रहा है। देश में टोल प्लाजा व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और बाधारहित बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और न ही लंबी कतारों का सामना करना पड़ेगा। पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक तकनीक पर आधारित होगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी।
    नई व्यवस्था में FASTag और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका होगी। अभी तक टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के पास रुककर स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, लेकिन भविष्य की प्रणाली में इन भौतिक बाधाओं को हटाया जा रहा है। हाईवे पर लगाए जाने वाले हाई-टेक कैमरे और सेंसर तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को तुरंत पहचान लेंगे। जैसे ही वाहन निर्धारित क्षेत्र से गुजरेंगे, टोल शुल्क अपने आप जुड़े बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगा। यह प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि ड्राइवर को इसका अनुभव भी लगभग नहीं होगा।
    इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी के रूप में सामने आएगा। बार-बार रुकने और चलने की प्रक्रिया खत्म होने से ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, राजमार्गों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और मैनुअल हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।
    नई प्रणाली के साथ नियमों को भी और सख्त बनाया गया है। अब टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित होगा। नकद भुगतान का विकल्प धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। यदि किसी वाहन में वैध फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो चालक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में टोल प्लाजा पर प्रवेश भी रोका जा सकता है। इसके अलावा UPI आधारित QR कोड स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान संभव हो सके।
    हालांकि, इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पूरे हाईवे नेटवर्क को कैशलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इससे न केवल लेनदेन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रा प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनेगी। लेकिन यह भी सच है कि जिन लोगों के पास डिजिटल साधनों की सुविधा नहीं है, उन्हें शुरुआती दौर में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
    यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को सक्रिय और अपडेट रखें। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंकिंग और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI एप्लिकेशन तैयार रखना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान में बाधा न आए।
    इस पूरी पहल का उद्देश्य केवल टोल संग्रह को सरल बनाना नहीं है, बल्कि देश के राजमार्गों को एक स्मार्ट और फ्यूचर-रेडी सिस्टम में बदलना है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय परिवहन प्रणाली को एक नई दिशा देगी, जहां यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह डिजिटल और व्यवस्थित भी होगी।
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    MP क्रूज हादसा: 29 यात्रियों की नाव पलटी, 9 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी..


    नई दिल्ली।
    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाला समय एक बड़े तकनीकी बदलाव का संकेत लेकर आ रहा है। देश में टोल प्लाजा व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और बाधारहित बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और न ही लंबी कतारों का सामना करना पड़ेगा। पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक तकनीक पर आधारित होगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी।

    नई व्यवस्था में FASTag और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका होगी। अभी तक टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के पास रुककर स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, लेकिन भविष्य की प्रणाली में इन भौतिक बाधाओं को हटाया जा रहा है।

    हाईवे पर लगाए जाने वाले हाई-टेक कैमरे और सेंसर तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को तुरंत पहचान लेंगे। जैसे ही वाहन निर्धारित क्षेत्र से गुजरेंगे, टोल शुल्क अपने आप जुड़े बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगा। यह प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि ड्राइवर को इसका अनुभव भी लगभग नहीं होगा।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी के रूप में सामने आएगा। बार-बार रुकने और चलने की प्रक्रिया खत्म होने से ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, राजमार्गों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और मैनुअल हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।

    नई प्रणाली के साथ नियमों को भी और सख्त बनाया गया है। अब टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित होगा। नकद भुगतान का विकल्प धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। यदि किसी वाहन में वैध फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो चालक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में टोल प्लाजा पर प्रवेश भी रोका जा सकता है।

    इसके अलावा UPI आधारित QR कोड स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान संभव हो सके।

    हालांकि, इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पूरे हाईवे नेटवर्क को कैशलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इससे न केवल लेनदेन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रा प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनेगी। लेकिन यह भी सच है कि जिन लोगों के पास डिजिटल साधनों की सुविधा नहीं है, उन्हें शुरुआती दौर में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

    यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को सक्रिय और अपडेट रखें। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंकिंग और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI एप्लिकेशन तैयार रखना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान में बाधा न आए।

    इस पूरी पहल का उद्देश्य केवल टोल संग्रह को सरल बनाना नहीं है, बल्कि देश के राजमार्गों को एक स्मार्ट और फ्यूचर-रेडी सिस्टम में बदलना है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय परिवहन प्रणाली को एक नई दिशा देगी, जहां यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह डिजिटल और व्यवस्थित भी होगी।

  • FASTag: सरकार ने लागू किए सख्त नियम….टोल नहीं कटा तो अब भरना होगा डबल जुर्माना

    FASTag: सरकार ने लागू किए सख्त नियम….टोल नहीं कटा तो अब भरना होगा डबल जुर्माना


    नई दिल्ली।
    हाईवे (Highway) पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार (Government) ने FASTag Rules में बदलाव करते हुए नया सख्त नियम (New Strict Rule) लागू किया है। अब अगर टोल प्लाजा पर किसी कारण से FASTag से भुगतान नहीं हो पाता है, तो वाहन मालिक को तय समय में भुगतान करना जरूरी होगा, वरना दोगुना जुर्माना देना पड़ेगा।


    72 घंटे में भुगतान नहीं किया तो देना होगा डबल चार्ज

    नए नियम के अनुसार, अगर कोई वाहन बिना टोल भुगतान किए बैरियर-फ्री टोल प्लाजा से गुजर जाता है और 72 घंटे के भीतर बकाया राशि नहीं चुकाता, तो उस पर दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। यानी अगर आपने समय पर भुगतान नहीं किया, तो आपको मूल टोल से दो गुना रकम चुकानी पड़ेगी।

    क्यों लाए गए ये नए नियम?
    सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि बिना भुगतान के टोल पार करने वालों पर रोक लगे और डिजिटल टोल सिस्टम को और मजबूत किया जा सके। नियमों का पालन सुनिश्चित हो। यह बदलाव नेशनल हाईवे फीस नियमों में संशोधन के तहत लागू किया गया है।


    टोल एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय

    सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि टोल एजेंसियों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर किसी उपभोक्ता की शिकायत पर टोल एजेंसी 5 दिनों के अंदर कार्रवाई नहीं करती है तो उस मामले में बकाया टोल की मांग अपने आप खत्म हो जाएगी। यानी अगर गलती एजेंसी की है और समय पर समाधान नहीं हुआ, तो आपको राहत मिल सकती है।


    क्या है ‘अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क’?

    संशोधित नियमों में ‘अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क’ को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। यह वह टोल है जो इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली द्वारा वाहन के गुजरने की पुष्टि के बावजूद प्राप्त नहीं होता है। ऐसे मामलों में, पंजीकृत वाहन मालिकों को एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें वाहन का विवरण, टोल पार करने की तारीख और स्थान, और देय राशि की जानकारी होगी।

    ये नोटिस एसएमएस, ईमेल, मोबाइल ऐप और एक विशेष पोर्टल के माध्यम से भेजे जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वाहन डेटाबेस ‘वाहन’ से जोड़ा जाएगा, ताकि बकाया राशि वाले वाहनों की आसानी से पहचान की जा सके।


    FASTag यूजर्स के लिए जरूरी सलाह

    FASTag में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें। ट्रांजैक्शन अलर्ट चेक करते रहें। कोई समस्या हो तो तुरंत शिकायत दर्ज करें। 72 घंटे के अंदर भुगतान जरूर करें। कुल मिलाकर, सरकार ने टोल वसूली को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इससे जहां नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी, वहीं सही यूजर्स को भी सुरक्षा और राहत मिलेगी।

  • FASTag: वार्षिक पास की कीमत बढ़ी….एक अप्रैल से चुकाने होंगे ज्यादा पैसे…

    FASTag: वार्षिक पास की कीमत बढ़ी….एक अप्रैल से चुकाने होंगे ज्यादा पैसे…


    नई दिल्ली।
    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highway Authority of India- NHAI) (एनएचएआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए FASTag Annual Pass (फास्टैग वार्षिक पास) की कीमत में बदलाव किया है। नए आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से गैर-व्यावसायिक वाहनों (कार, जीप और वैन) के लिए वार्षिक पास की कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। फास्टैग वार्षिक पास पिछले साल 15 अगस्त को शुरू किया गया था। ताकि टोल शुल्क के बोझ को कम किया जा सके और हाईवे पर यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सके।


    FASTag वार्षिक पास क्या है और कौन ले सकता है?

    फास्टैग वार्षिक पास उन वाहन मालिकों के लिए है जिनके पास गैर-व्यावसायिक वाहन और सक्रिय फास्टैग है।

    इस पास के तहत:
    – यह 1 साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक मान्य रहता है
    – किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा पर लागू होता है
    – 200 बार टोल पार करने या 1 साल पूरा होने के बाद पास स्वतः समाप्त हो जाता है
    – इस पास को Rajmargyatra (राजमार्गयात्रा) मोबाइल एप या एनएचएआई की वेबसाइट के जरिए खरीदा जा सकता है।


    पास की कीमत हर साल क्यों बढ़ती है?

    सरकार ने नेशनल हाईवे फीस (डिटरमिनेशन ऑफ रेट्स एंड कलेक्शन) संशोधन नियम 2025 के तहत यह प्रावधान किया है कि फास्टैग वार्षिक पास की कीमत हर साल संशोधित की जाएगी। इसी नियम के अनुसार 2026-27 के लिए पास की कीमत में यह मामूली बढ़ोतरी की गई है।


    अभी कितने लोग FASTag वार्षिक पास का इस्तेमाल कर रहे हैं?

    सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अनुसार: देश में 50 लाख से अधिक लोग फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग कर रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले कुल कार टोल लेन-देन का लगभग 28 प्रतिशत अब इसी पास के जरिए होता है। इसके अलावा 2016 से अब तक 11.86 करोड़ फास्टैग जारी किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 5.9 करोड़ फास्टैग सक्रिय हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 98 प्रतिशत से अधिक टोल वसूली फास्टैग के माध्यम से होती है।


    किन टोल प्लाजा पर वार्षिक पास का उपयोग सबसे ज्यादा है?

    कुछ टोल प्लाजा पर फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग काफी अधिक है। दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर बिजवासन टोल प्लाजा – लगभग 57 प्रतिशत कारें फास्टैग वार्षिक पास से गुजरती हैं। दिल्ली के मुंडका टोल प्लाजा (UER-II) – लगभग 53 प्रतिशत उपयोग। झिंझोली टोल प्लाजा (NH-334P) – करीब 53 प्रतिशत गैर-व्यावसायिक वाहन फास्टैग वार्षिक पास का इस्तेमाल करते हैं।


    क्षेत्रीय स्तर पर:

    – चंडीगढ़ – 14 प्रतिशत
    – तमिलनाडु – 12.3 प्रतिशत
    – दिल्ली – 11.5 प्रतिशत
    – 15 अगस्त 2025 से जनवरी 2026 तक फास्टैग वार्षिक पास से 26.55 करोड़ से अधिक टोल लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं।


    क्या यह पास सभी टोल प्लाजा पर मान्य है?

    – नहीं। यह पास केवल राष्ट्रीय राजमार्ग और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे के लगभग 1150 टोल प्लाजा पर ही मान्य है। राज्य सरकार या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित एक्सप्रेसवे या स्टेट हाईवे के टोल प्लाजा पर फास्टैग वार्षिक पास सामान्य फास्टैग की तरह काम करेगा और सामान्य टोल शुल्क लागू होगा।


    क्या FASTag Annual Pass लेना अनिवार्य है?

    – नहीं। फास्टैग वार्षिक पास पूरी तरह वैकल्पिक है।
    – जो उपयोगकर्ता फास्टैग वार्षिक पास नहीं लेते हैं, उनके लिए मौजूदा फास्टैग सिस्टम पहले की तरह ही चलता रहेगा और वे प्रति टोल क्रॉसिंग के हिसाब से शुल्क देते रहेंगे।


    पास खत्म होने पर क्या होगा?

    यदि: 200 ट्रिप पूरी हो जाती हैं, या 1 साल की वैधता समाप्त हो जाती है तो फास्टैग वार्षिक पास अपने आप सामान्य फास्टैग में बदल जाएगा।हालांकि, अगर 200 ट्रिप पहले ही पूरी हो जाएं तो उपयोगकर्ता चाहें तो उसी साल के भीतर फिर से नया फास्टैग वार्षिक पास खरीद सकते हैं।


    खर्च और समय दोनों की बचत

    फास्टैग वार्षिक पास की कीमत में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद यह योजना हाईवे उपयोगकर्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह व्यवस्था टोल भुगतान को आसान बनाने के साथ-साथ नियमित यात्रियों के लिए खर्च और समय दोनों की बचत में मदद कर रही है।

  • Toll Tax: इस तारीख से नेशनल हाईवे पर नकद टोल बंद करने की तैयारी, फास्टैग-यूपीआई होंगे अनिवार्य

    Toll Tax: इस तारीख से नेशनल हाईवे पर नकद टोल बंद करने की तैयारी, फास्टैग-यूपीआई होंगे अनिवार्य

    नई दिल्ली । देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) 1 अप्रैल 2026 से सभी टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद करने पर विचार कर रहा है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो टोल शुल्क केवल डिजिटल माध्यमों जैसे FASTag और UPI के जरिए ही लिया जाएगा।

    फास्टैग का बढ़ता प्रयोग
    एनएचएआई के आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में फास्टैग का उपयोग 98 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।

    इससे टोल वसूली के तरीके में व्यापक बदलाव आया है और अधिकांश टोल लेनदेन अब RFID-सक्षम फास्टैग के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से हो रहे हैं। इससे संपर्क रहित और तेज आवागमन संभव हो गया है। इसके अलावा, देशभर के टोल प्लाजा पर UPI भुगतान सुविधा भी शुरू हो चुकी है, जो त्वरित और सुलभ विकल्प प्रदान करती है।

    नकद भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क
    राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों के मुताबिक, वैध और सक्रिय फास्टैग के बिना टोल प्लाजा में प्रवेश करने वाले वाहनों से नकद भुगतान करने पर दोगुना शुल्क लिया जाता है। वहीं UPI के माध्यम से भुगतान करने पर निर्धारित उपयोगकर्ता शुल्क का 1.25 गुना शुल्क देना होता है।

    एनएचएआई ने बताया कि नकद भुगतान के कारण व्यस्त समय में लंबी कतारें लगती हैं, प्रतीक्षा अवधि बढ़ती है और लेनदेन विवाद भी उत्पन्न होते हैं।

    डिजिटल टोलिंग से बेहतर संचालन
    देशभर के 1150 से अधिक टोल केंद्रों पर पूर्ण डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू होने से परिचालन दक्षता, यातायात प्रबंधन और समय की बचत में सुधार की उम्मीद है। यह पहल एनएचएआई के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत प्रौद्योगिकी आधारित, उच्च दक्षता वाला और उपयोगकर्ता-अनुकूल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, ताकि देशभर में आवागमन और अधिक सुगम और निर्बाध बनाया जा सके।