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  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पारिवारिक अदालत का फैसला बदला, बच्चे से मुलाकात पर शुल्क लगाना बताया पूरी तरह अनुचित

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पारिवारिक अदालत का फैसला बदला, बच्चे से मुलाकात पर शुल्क लगाना बताया पूरी तरह अनुचित


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक पारिवारिक विवाद से जुड़ी याचिका पर फैसला सुनाते हुए बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है कि पिता को अपने ही बच्चे से मिलने का अधिकार बिना किसी आर्थिक शर्त के मिलना चाहिए। अदालत ने निचली पारिवारिक अदालत के उस फैसले में संशोधन किया जिसमें अलग रह रहे पिता को बच्चे से हर बार मिलने के बदले पांच हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने साफ तौर पर कहा कि जब यह मुलाकात न्यायालय परिसर के अंदर स्थित विजिटेशन रूम में आयोजित की जानी है, तब किसी भी तरह का शुल्क वसूलना तर्कसंगत नहीं है।

    यह मामला एक ऐसे पति-पत्नी से संबंधित है जिनके बीच तलाक का मुकदमा अदालत में लंबित है। वर्तमान में चार साल के बच्चे की देखरेख और अंतरिम कस्टडी मां के पास है, जबकि पिता ने बच्चे की स्थायी अभिरक्षा पाने के लिए न्यायालय में अर्जी दाखिल की हुई है। इससे पहले पारिवारिक अदालत ने पिता को महीने के तय दिनों में बच्चे से मिलने की अनुमति तो दी थी, लेकिन साथ ही हर मुलाकात के लिए पांच हजार रुपये जमा करने की शर्त भी लागू कर दी थी।

    उच्च न्यायालय में जब पिता ने इस शर्त को चुनौती दी, तो अदालत ने स्थिति का निष्पक्षता से मूल्यांकन किया। अदालत ने पाया कि जब मां ने स्वयं विजिटेशन रूम को मुलाकात के लिए सुरक्षित और उपयुक्त स्थान माना है, तो पिता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने का कोई औचित्य नहीं बनता। उच्च न्यायालय ने माना कि इस तरह का आर्थिक दबाव न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है और इसलिए फीस से जुड़ी शर्त को तुरंत प्रभाव से हटा दिया गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि दोनों पक्षों के घर के बीच कोई बहुत अधिक दूरी नहीं है। इसके बावजूद दस्तावेजों और रिकॉर्ड से संकेत मिला कि मां कई अवसरों पर बच्चे को तय समय पर मुलाकात के लिए लेकर नहीं आती थी। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि भविष्य में भी मुलाकात के समय में इस प्रकार की अड़चनें पैदा की जाती हैं, तो इसका प्रभाव अंतिम कस्टडी के निर्णय पर पड़ सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे का सर्वांगीण विकास और उसका सर्वोत्तम हित ही न्याय का सबसे प्रमुख आधार है।

    पिता ने अदालत के सामने यह बात भी रखी थी कि उन्हें बच्चे के साथ अकेले और सहज माहौल में समय बिताने का मौका नहीं दिया जाता, जिससे बच्चे के साथ भावनात्मक जुड़ाव प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर मां का कहना था कि बच्चा पिता के पास जाने में हिचकिचाता है और पिता भरण पोषण की जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं संभाल रहे हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुनते हुए एक व्यावहारिक व्यवस्था बनाई ताकि बच्चे और पिता के बीच संवाद बेहतर हो सके।

    उच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था के तहत निर्देश दिया कि मुलाकात के दौरान बच्चे के दादा-दादी वहां उपस्थित नहीं रहेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पिता और पुत्र बिना किसी दबाव के आपस में गुणवत्तापूर्ण समय बिता सकें। अदालत ने अंत में दोहराया कि स्थायी कस्टडी का मुख्य फैसला अभी लंबित है और वह सभी साक्ष्यों एवं बच्चे के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

  • MP: 11 साल की बेटी से रेप करता रहा बाप… मां डालती रही पर्दा…. कोर्ट ने सुनाई 20-20 साल की सजा

    MP: 11 साल की बेटी से रेप करता रहा बाप… मां डालती रही पर्दा…. कोर्ट ने सुनाई 20-20 साल की सजा


    अशोक नगर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की जिला अदालत (District Court) ने एक मां-बाप को 20-20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। पिता नाबालिग बेटी (Minor Daughter) से लगातार रेप कर रहा था और इस घिनौने काम में उसकी पत्नी यानी नाबालिग की मां उसका साथ दे रही थी। मां लगातार दबाव बना रही है कि वह केस वापस ले-ले। न्यायालय में कह दे कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है।

    मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले (Ashok Nagar district) में एक बाप अपनी 11 साल की नाबालिग बेटी से लगातार रेप करता है और उसकी मां बेटी की हिफाजत करने के बताए पति के गुनाहों पर लगातार पर्दा डालने का काम करती है। बेटी हिम्मत वाली निकली और एक दिन थाने पहुंच गई। वह पूछने लगी कि टीआई साहब कौन हैं। मुझे उनसे ही बात करना है। महिला सब इंस्पेक्टर ने उसकी बात सुनी तो वह दंग रह गई। बेटी ने बताया कि उसका सौतेला पिता उसके साथ रेप करता है। जब उसने मां को यह बात बताई तो वह पिता का ही साथ दे रही थी। उल्टा उसे डांट फटकार कर मुंह बंदा करा रही थी।


    डीएनए टेस्ट से स्पष्ट हुआ मामला

    जिले के शाढ़ौरा थाना क्षेत्र में 2024 में की गई नाबालिग की शिकायत को पुलिस ने बहुत गंभीरता से लिया। पुलिस ने तत्काल आरोपी पिता को गिरफ्तार किया और घर से सबूत एकत्रित किए। पुलिस ने नाबालिग का मेडिकल कराया और पिता के उपयोग किए कपड़े तौलिया आदि की फॉरेंसिक जांच कराई तो लड़की का मेडिकल और पिता के कपड़ों व तौलिया से मिले डीएनए से स्पष्ट हो गया कि बाप ही बेटी के साथ रेप कर रहा था।


    नाबालिग से मां के बारे में भी बताया

    पुलिस ने पिता के खिलाफ न्यायालय में प्रकरण पेश किया। इसके बाद उसकी पत्नी यानी पीड़िता की मां उसकी जमानत के लिए प्रयास करने लगी। वह बार-बार पुलिस को आवेदन देकर बता रही थी कि ऐसा कुछ भी नहीं है, उसका पति बेगुनाह है। महिला की इस तरह की हरकतों से पुलिस को उस पर भी शक हुआ। नाबालिग से मां के बारे में पूछा तो उसने बताया कि मां लगातार दबाव बना रही है कि वह केस वापस ले-ले। न्यायालय में कह दे कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है।


    पिता को रोकने के बजाए उसे ही डांटती थी

    नाबालिग ने पुलिस को बताया कि मां से जब भी बोलती कि पापा ऐसा करते हैं तो वह उन्हें रोकने के बजाए उसे ही डांटती थी। शाढ़ौरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी नरेंद्र ने बताया कि जब पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो वह दूसरी कहानी बनाने लगा। उसने बेटी की उम्र 17 साल बताई। साथ ही कहा कि उसका किसी लड़के से अफेयर है, जिसके साथ वह फिजिकल रिलेशन बनाती है। इसके बाद उस लड़के को बुलाकर पूछा गया तो लड़के ने बताया कि उसका लड़की के साथ इस तरह का कोई संबंध नहीं है। उसकी उम्र भी 11 साल है। इस पर पिता पर शक गहरा गया। पुख्ता सबूत मिले तो पिता को आरोपी बना लिया गया।


    दोनों को 20-20 साल का कठोर कारावास

    पुलिस मुख्यालय का निर्देश है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में किसी को सजा हो तो उसका अच्छे से प्रचार प्रसार किया जाए, ताकि अन्य अपराधों में भी लोग सामने आएं और आरोपियों को पकड़ने में पुलिस की मदद करें। इस घटनाक्रम में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और मजबूत केस बनाया, जिससे आरोपी पिता और उसका साथ देने वाली आरोपी मां दोनों को 20-20 साल की कठोर कारावास की सजा मिली है।

  • ओडिशा में रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला… पिता ने ढाई साल के बेटे को 1 लाख रुपये में बेचा

    ओडिशा में रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला… पिता ने ढाई साल के बेटे को 1 लाख रुपये में बेचा


    भुवनेश्वर।
    ओडिशा पुलिस (Odisha Police) ने शनिवार को ढाई साल के एक बच्चे को बचाया, जिसे उसके पिता ने एक व्यक्ति को 1 लाख रुपये में बेच दिया था। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि आरोपी पिता और खरीदने वाले व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। नीलगिरी अधिसूचित क्षेत्र परिषद (Nilgiri Notified Area Council) के अंतर्गत बारिसाही गांव की यह घटना तब सामने आई, जब एक वायरल वीडियो (Viral Video) में पिता को संभावित खरीदार के साथ सौदेबाजी करते हुए दिखाया गया है। इसके बाद एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने नीलगिरी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

    वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। नीलगिरी के उपमंडल पुलिस अधिकारी प्रमोद कुमार मलिक ने कहा, ‘बच्चे को चिमिनीभाटी क्षेत्र से बचाया गया और उसे बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया। आगे की जांच जारी है।’ उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने पिता की पहचान पेशे से राजमिस्त्री राकेश कुमार बेहेरा उर्फ ​​कुआ के रूप में की है जिसने कथित तौर पर पहली किस्त के रूप में 50,000 रुपये प्राप्त किए थे।


    आरोपी ने क्या कहा

    राकेश कुमार बेहेरा ने आर्थिक तंगी को इस कदम का कारण बताया। उसने पत्रकारों को बताया, ‘हमारे चार बच्चे हैं और हमें उनका पालन-पोषण करने में कठिनाई हो रही है। एक परिचित व्यक्ति ने खरीदार का इंतजाम किया और मैंने बच्चे को उसे सौंप दिया।’ पुलिस सूत्रों के अनुसार, बेहेरा ने दो बार शादी की थी और जिस बच्चे को कथित तौर पर बेचा गया था वह उससे अलग रह रही उसकी दूसरी पत्नी का है।

    ओडिशा के गंजाम जिले में शनिवार को चोरी के संदेह में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि यह घटना जिले के भंजनगर पुलिस थाना क्षेत्र के सरदुला गांव में हुई। मृतक की पहचान 37 वर्षीय बनधर प्रधान के रूप में हुई है, जो कंधमाल जिले के जी. उदयगिरि पुलिस थाना क्षेत्र के कुरुमिंगिया गांव का निवासी था। अपर पुलिस अधीक्षक रंजन कुमार डे ने बताया, ‘प्रधान को शनिवार तड़के बचाया गया और भंजनगर के उप-मंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।’ प्रधान और दो अन्य लोग सरदुला निवासी सुशांत गौड़ा के बंद घर में लूटपाट में शामिल थे। उसने बताया कि भागते समय प्रधान गिर गया और उसका पैर टूट गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने उसकी बिजली के खंभे से बांधकर पिटाई की।

  • कोहरे के कारण सड़क हादसा बाइक से पिकअप में टकरा कर युवक की मौत, पिता घायल

    कोहरे के कारण सड़क हादसा बाइक से पिकअप में टकरा कर युवक की मौत, पिता घायल


    मंडला । मंडला जिले के चौकी पिंडरई क्षेत्र में शुक्रवार सुबह घने कोहरे के कारण एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें 21 वर्षीय युवक करण यादव की मौत हो गई। हादसा सुबह करीब 6 बजे हुआ जब वह परीक्षा देने जबलपुर जाने के लिए बाइक से पिंडरई जा रहा था।

    घटना के अनुसार करण यादव बाइक पर अपने पिता बसंत यादव के साथ जा रहा था। जैसे ही वह तुमेगांव मंदिर के पास पहुंचे घने कोहरे के कारण उन्हें सड़क किनारे खड़ी पिकअप वाहन दिखाई नहीं दी। नतीजा यह हुआ कि बाइक सीधे पिकअप वाहन से टकरा गई। हादसे के समय पिकअप वाहन पूरी तरह से खड़ा था और कोहरे के कारण करण को उसे देखने का मौका नहीं मिला।

    इस गंभीर हादसे में करण को बहुत गंभीर चोटें आईं जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसके पिता बसंत यादव को मामूली चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए सिविल अस्पताल नैनपुर में भर्ती कराया गया।
    घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है।

    प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है लेकिन घना कोहरा और सड़क पर खड़ी गाड़ी को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
    अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हादसों से बचने के लिए सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है खासकर कोहरे जैसे मौसम में।