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  • स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अलर्ट: फैटी लिवर को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अलर्ट: फैटी लिवर को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी


    मध्य प्रदेश । Indore एक बार फिर चिकित्सा जगत के महत्वपूर्ण विमर्श का केंद्र बना, जहां मैरियट होटल में आयोजित ‘लिवर कैंसर अपडेट-2026’ ने देशभर के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर लिवर कैंसर के बढ़ते खतरे और उसके आधुनिक उपचार पर गहन चर्चा की।

    इस राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न हिस्सों—दिल्ली, मुंबई, भोपाल, अहमदाबाद, रायपुर, ग्वालियर और रीवा—से आए वरिष्ठ डॉक्टरों ने भाग लिया। पूरे दिन चले विभिन्न सत्रों में लिवर कैंसर की रोकथाम, शुरुआती पहचान और अत्याधुनिक उपचार तकनीकों पर विस्तार से विचार साझा किए गए।

    विशेषज्ञों ने सबसे बड़ी चिंता नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज को लेकर जताई, जिसे अब लिवर कैंसर के प्रमुख कारणों में तेजी से उभरता हुआ माना जा रहा है। पहले जहां हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और शराब सेवन को मुख्य कारण माना जाता था, वहीं अब बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

    डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यदि इस स्थिति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह धीरे-धीरे लिवर सिरोसिस में बदल सकती है, जिसमें लिवर सिकुड़ने लगता है और उसकी कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती है। यही स्थिति आगे चलकर लिवर कैंसर का रूप ले सकती है।

    विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय पर हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण को बेहद जरूरी बताया गया। नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद टीका लगाना इसी रोकथाम रणनीति का हिस्सा है।

    कॉन्फ्रेंस में शामिल विशेषज्ञों ने मल्टीडिसिप्लिनरी इलाज की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिसमें गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, सर्जन, रेडियो ऑनकोलॉजिस्ट और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट मिलकर मरीज के इलाज की रणनीति बनाते हैं। इससे रोग की विभिन्न अवस्थाओं में बेहतर और प्रभावी उपचार संभव हो पाता है।

    आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि अब कई मामलों में बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ती। ट्रांसआर्टेरियल थेरेपी जैसी तकनीकों में कैथेटर के जरिए सीधे ट्यूमर तक दवा पहुंचाई जाती है, जिससे ट्यूमर को नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज की रिकवरी बेहतर होती है।

    इसके अलावा एब्लेटिव थेरेपी जैसी तकनीकों के माध्यम से सुई के जरिए ट्यूमर को गर्म या ठंडा कर नष्ट किया जा रहा है, जो मरीजों के लिए कम आक्रामक और अधिक प्रभावी विकल्प साबित हो रहा है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ऐसे फोकस्ड कॉन्फ्रेंस चिकित्सा जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनमें अलग-अलग विशेषज्ञ एक साथ मिलकर बीमारी के हर पहलू पर चर्चा करते हैं और वैश्विक स्तर की नई गाइडलाइंस और उपचार विधियों को समझते हैं।

    कार्यक्रम के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि लिवर कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए जागरूकता, समय पर जांच और आधुनिक उपचार तकनीकों का व्यापक उपयोग बेहद जरूरी है।

  • बढ़ता स्वास्थ्य संकट: फैटी लिवर से कैसे बचें और क्या हैं शुरुआती संकेत?

    बढ़ता स्वास्थ्य संकट: फैटी लिवर से कैसे बचें और क्या हैं शुरुआती संकेत?


    नई दिल्ली। फैटी लिवर आज दुनिया भर में लिवर सिरोसिस की सबसे बड़ी वजह बनता जा रहा है। भारत भी इससे तेजी से प्रभावित हो रहा है। मेडिकल भाषा में इसे Metabolic Dysfunction Associated Steatotic Liver Disease कहा जाता है, जिसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देती, जिससे इसे “साइलेंट किलर” कहा जा रहा है।

    भारत में क्यों बढ़ रहे हैं मामले
    इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, भारत में मोटापा, डायबिटीज और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि फैटी लिवर के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गलत खानपान, फास्ट फूड, मीठे पेय पदार्थ और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इस बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं।

    शुरुआती लक्षण जिन्हें हल्के में न लें
    डॉक्टरों के मुताबिक शुरुआती चरण में मरीज को यह एहसास नहीं होता कि वह गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। कुछ सामान्य संकेत दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे-
    लगातार थकान महसूस होना
    खाने के बाद भारीपन या पेट फूलना
    शरीर में ऊर्जा की कमी
    पेट के आसपास फैट बढ़ना
    ये लक्षण सामान्य लग सकते हैं, लेकिन यह लिवर में फैट जमा होने का संकेत हो सकते हैं।

    बीमारी बढ़ने पर हो सकते हैं गंभीर परिणाम
    अगर फैटी लिवर समय पर कंट्रोल न किया जाए तो यह गंभीर स्थिति में बदल सकता है। डॉक्टरों के अनुसार एडवांस स्टेज में-
    पीलिया
    पेट में पानी भरना
    पैरों में सूजन
    खून की उल्टी
    यहां तक कि लिवर फेलियर और कोमा
    जैसी स्थिति भी बन सकती है।

    किन कारणों से बढ़ रहा खतरा?
    विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ लिवर की नहीं बल्कि पूरी मेटाबॉलिक हेल्थ की समस्या है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं-
    ज्यादा शुगर और प्रोसेस्ड फूड
    देर रात खाना खाने की आदत
    लंबे समय तक बैठकर काम करना
    फिजिकल एक्टिविटी की कमी
    मीठे ड्रिंक्स और ट्रांस फैट का अधिक सेवन
    हैरानी की बात यह है कि सामान्य वजन वाले लोग भी इसका शिकार हो सकते हैं।

    बचाव और इलाज कैसे संभव है?
    अच्छी बात यह है कि शुरुआती स्टेज में इस बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार जीवनशैली में सुधार सबसे अहम इलाज है-
    वजन नियंत्रित करना
    ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण
    हेल्दी डाइट अपनाना
    शुगर और जंक फूड से दूरी
    नियमित एक्सरसाइज और एक्टिव लाइफस्टाइल

    फैटी लिवर एक ऐसी बीमारी है जो बिना चेतावनी के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। लेकिन समय पर पहचान और सही जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक रोका और ठीक किया जा सकता है।