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  • फैटी लिवर सिर्फ मोटे लोगों की बीमारी नहीं, दुबले-पतले लोगों में भी बढ़ सकता है खतरा; जानें किन कारणों से लिवर में जमा होती है चर्बी

    फैटी लिवर सिर्फ मोटे लोगों की बीमारी नहीं, दुबले-पतले लोगों में भी बढ़ सकता है खतरा; जानें किन कारणों से लिवर में जमा होती है चर्बी

    नई दिल्ली । फैटी लिवर की समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। शराब का सेवन न करने वाले लोगों में होने वाली नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का नाम बदलकर अब मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज किया गया है। यह लिवर की सबसे आम क्रोनिक बीमारियों में शामिल है और बड़ी संख्या में वयस्कों को प्रभावित करती है।

    भारत में भी फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आमतौर पर इसे अधिक वजन और मोटापे से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है, उनमें लिवर में चर्बी जमा होने का खतरा अधिक रहता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दुबले-पतले या सामान्य वजन वाले लोग इससे पूरी तरह सुरक्षित हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर का वजन सामान्य होने के बावजूद लिवर में अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। मेडिकल क्षेत्र में ऐसे मामलों को लंबे समय से लीन फैटी लिवर के रूप में जाना जाता रहा है। फैटी लिवर वाले कुछ लोगों का शरीर दुबला हो सकता है, इसलिए केवल शरीर का आकार देखकर लिवर को स्वस्थ मान लेना सही नहीं है।

    दुबले-पतले लोगों में फैटी लिवर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस, पेट के अंदर जमा आंतरिक चर्बी, डायबिटीज, बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल जैसी मेटाबोलिक समस्याएं इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं।

    इसके अलावा शराब का सेवन, कुछ दवाएं और लिवर से जुड़ी अन्य बीमारियां भी लिवर में चर्बी जमा होने का कारण बन सकती हैं। इसलिए यह मानना सही नहीं है कि दुबला शरीर होने की वजह से फैटी लिवर का खतरा नहीं हो सकता।

    सामान्य बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि शरीर में चर्बी का वितरण भी स्वस्थ है। कुछ लोगों का शरीर बाहर से दुबला दिखाई दे सकता है, लेकिन पेट के आसपास या शरीर के अंदर अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। ऐसी स्थिति में मेटाबोलिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है और फैटी लिवर का खतरा बढ़ सकता है।

    डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड जैसी समस्याओं को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दुबले-पतले लोगों में यदि इनमें से कोई जोखिम मौजूद है तो डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।

    फैटी लिवर की शुरुआत अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के होती है। कई लोगों को बीमारी के शुरुआती चरण में कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। यदि जांच के दौरान लिवर एंजाइम बार-बार बढ़े हुए मिल रहे हैं या डायबिटीज जैसी मेटाबोलिक समस्या मौजूद है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर लिवर के स्वास्थ्य और फैटी लिवर के जोखिम का मूल्यांकन कराया जा सकता है।

    फैटी लिवर से बचाव के लिए सिर्फ वजन कम करना ही पर्याप्त नहीं है। दुबले-पतले लोगों के लिए भी नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान और अत्यधिक चीनी तथा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। डायबिटीज, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी लिवर के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

    अगर जांच में फैटी लिवर की पुष्टि हो चुकी है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिवर की स्थिति और फाइब्रोसिस के जोखिम का मूल्यांकन कराया जाना चाहिए। समय रहते खानपान और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करने तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय उपचार लेने से बीमारी के बढ़ने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

  • बिना शराब पिए भी खराब हो सकता है आपका लिवर; जंक फूड और पेनकिलर्स के इस घातक गठजोड़ को पहचानें।

    बिना शराब पिए भी खराब हो सकता है आपका लिवर; जंक फूड और पेनकिलर्स के इस घातक गठजोड़ को पहचानें।

    नई दिल्ली। मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण इंजन कहा जाने वाला ‘लिवर’ आज एक अनचाहे खतरे के साये में है। अक्सर माना जाता है कि लिवर की खराबी का एकमात्र कारण अत्यधिक शराब का सेवन है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि हमारी आधुनिक जीवनशैली की कुछ सामान्य चीजें शराब से भी अधिक तेजी से इस अंग को नष्ट कर रही हैं।

    लिवर न केवल शरीर से जहरीले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालता है, बल्कि यह पाचन के लिए पित्त बनाने और महत्वपूर्ण विटामिन्स को स्टोर करने का कार्य भी करता है। यदि इसमें सूजन या खराबी आती है, तो यह पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को ठप कर सकता है। दुर्भाग्यवश, आजकल हर दूसरा व्यक्ति ‘फैटी लिवर’ की समस्या से जूझ रहा है, जिसका मुख्य कारण वह भोजन है जिसे हम सुरक्षित और सामान्य समझकर खा रहे हैं।

    लिवर को चुपचाप नुकसान पहुँचाने वाली चीजों में सबसे ऊपर प्रोसेस्ड और पैकेट बंद खाद्य पदार्थ आते हैं। इन डिब्बाबंद स्नैक्स में नमक, चीनी और कृत्रिम प्रिजर्वेटिव्स की भारी मात्रा होती है, जो लिवर की कोशिकाओं में सूजन पैदा करती है। इसी श्रेणी में अत्यधिक चीनी वाले आहार भी शामिल हैं। जब हम सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स या बहुत अधिक मीठा खाते हैं, तो लिवर उस अतिरिक्त शुगर को फैट में बदलने लगता है।

    समय के साथ यह फैट लिवर में जमा होकर सिरोसिस और फाइब्रोसिस जैसी जानलेवा बीमारियों का मार्ग प्रशस्त करता है, जहाँ लिवर पूरी तरह काम करना बंद कर सकता है।

    एक और गंभीर खतरा बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट्स और प्रोटीन पाउडर के सेवन से जुड़ा है। फिटनेस के प्रति बढ़ते जुनून के कारण कई लोग बिना उचित जानकारी के भारी मात्रा में सप्लीमेंट्स लेते हैं, जो लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इसके साथ ही, मामूली शारीरिक दर्द के लिए बार-बार पेनकिलर्स (दर्द निवारक दवाएं) लेना भी एक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।

    ये दवाएं रक्त के माध्यम से सीधे लिवर तक पहुँचती हैं और उसे अंदर से डैमेज करना शुरू कर देती हैं। वहीं, जंक फूड और डीप फ्राइड आइटम्स जैसे मोमोज, चाऊमीन और फ्रेंच फ्राइज में इस्तेमाल होने वाला तेल लिवर की पाचन शक्ति को नष्ट कर देता है।

    लिवर की सेहत को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है क्योंकि यह विटामिन A, D, E और B12 का मुख्य भंडार है। शराब जहाँ इन पोषक तत्वों को सोख लेती है, वहीं ये पांचों ‘साइलेंट किलर’ लिवर की फिल्टर करने की क्षमता को खत्म कर देते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लिवर की रक्षा के लिए प्राकृतिक और संतुलित आहार ही सबसे उत्तम मार्ग है। यदि आप भी नियमित रूप से बाजार के तले-भुने खाने या बिना जरूरत दवाओं का सेवन कर रहे हैं, तो आज ही संभलने की जरूरत है। स्वस्थ जीवन जीने के लिए लिवर का ‘हैप्पी और हेल्दी’ होना अनिवार्य है।