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  • US : FBI चीफ ने भर्ती नीति में बदलाव का किया बचाव…. बोले- पीड़ितो को भी मिलेगा मौका

    US : FBI चीफ ने भर्ती नीति में बदलाव का किया बचाव…. बोले- पीड़ितो को भी मिलेगा मौका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) के FBI चीफ काश पटेल (FBI Chief Kash Patel) ने भर्ती नीति में बदलाव (Recruitment Policy Changes) का बचाव किया है. उन्होंने मंगलवार को सीनेट की सुनवाई में इस मुद्दे पर सफाई दी. पटेल ने कहा कि FBI के मानक कमजोर नहीं किए गए हैं. बदलाव का मकसद पीड़ितों को मौका देना है।

    दरअसल, FBI ने हाल में भर्ती नियमों में बदलाव किया है. इसके तहत कुछ आवेदकों को प्रॉस्टिट्यूशन के पुराने मामलों के बावजूद नौकरी के लिए विचार किया जा सकता है. बचपन में बेस्टियलिटी का शिकार रहे लोगों को भी मौका दिया जा सकता है।


    ‘पीड़ितों को सजा नहीं देना चाहते’

    सुनवाई के दौरान FBI की भर्ती नीति को लेकर सवाल हुए. रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कैनेडी ने बेस्टियलिटी से जुड़े नियम पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि इस नियम को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? कैनेडी ने कहा कि इस नियम की सिफारिश करने वाले व्यक्ति से पूछा जाना चाहिए कि वह आखिर ऐसा सुझाव कहां से लेकर आया है।

    इसका जवाब देते हुए पटेल ने कहा कि शुरुआत में उनका भी यही रिएक्शन था. लेकिन बाद में अधिकारियों ने उन्हें कुछ मामले दिखाए. इनमें कुछ लोग ऐसी घटनाओं के लिए मजबूर किए गए थे. इसके बाद पटेल को लगा कि ऐसे लोगों को नौकरी के लिए विचार करने का मौका मिलना चाहिए।

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 साल में वेश्यावृत्ति में शामिल रहे कुछ लोगों को FBI में नौकरी नहीं मिल सकेगी। गौरतलब है, सीनेट की सुनवाई के दौरान माहौल काफी गर्म रहा. डेमोक्रेट सांसदों ने पटेल से कई सवाल किए. उन्होंने ट्रंप से जुड़े मामलों की जांच करने वाले FBI अधिकारियों की बर्खास्तगी का भी मुद्दा उठाया. सीनेटर कोरी बुकर ने पटेल पर तीखा हमला किया. उन्होंने पटेल को FBI के लिए अयोग्य तक बताया. पटेल ने भी पलटकर जवाब दिया. दोनों के बीच तीखी बहस हुई।


    चुनाव के दिन FBI की भूमिका पर भी सवाल

    नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं. ऐसे में FBI की भूमिका पर भी सवाल उठे. चुनाव को लेकर भी पटेल से सवाल किया गया. डेमोक्रेट सीनेटर पीटर वेल्च ने पूछा कि क्या वह नवंबर में होने वाले चुनाव में लोगों के वोट के अधिकार में किसी तरह का दखल नहीं देंगे। इसका जवाब देते हुए FBI चीफ काश पटेल ने कहा कि वह किसी भी तरह के हस्तक्षेप में शामिल नहीं होंगे. हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनाव के दिन FBI एजेंटों को मतदान केंद्रों पर भेजा जा सकता है, तो उन्होंने इससे साफ इनकार नहीं किया।

    पटेल ने कहा कि चुनाव की निगरानी की जिम्मेदारी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की है. FBI के 56 फील्ड ऑफिस में चुनाव से जुड़े अपराधों के लिए अधिकारी मौजूद रहेंगे. जरूरत पड़ने पर एजेंसी कार्रवाई कर सकती है।


    ट्रंप से जुड़े मामलों पर भी घिरे FBI चीफ

    डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने FBI अधिकारियों की बर्खास्तगी पर सवाल किया. उन्होंने ईरान मामलों के विशेषज्ञ रहे अधिकारियों को हटाए जाने का मुद्दा उठाया. ब्लूमेंथल ने पूछा कि क्या ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों को हटाना ज्यादा जरूरी था. या ईरान से जुड़े खतरों पर नजर रखने वाले अनुभवी अधिकारियों को बनाए रखना?

    पटेल ने जवाब दिया कि उनके लिए सबसे जरूरी FBI को राजनीतिक हथियार बनने से रोकना है. उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों को एजेंसी में नहीं रखना चाहते जो FBI का गलत इस्तेमाल कर रहे हों. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ट्रंप से जुड़े मामले की जांच में शामिल होना किस तरह FBI को ‘राजनीतिक हथियार’ बनाता है.

  • US में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम…. FBI चीफ बोले- ISIS के निशाने पर था न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल

    US में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम…. FBI चीफ बोले- ISIS के निशाने पर था न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल


    वाशिंगटन।
    एफबीआई निदेशक काश पटेल (FBI Director Kash Patel) ने शनिवार को कहा कि संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Federal Law Enforcement Agencies) ने एक आतंकी साजिश (Terrorist plot) नाकाम की है। उन्होंने कहा कि यह न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल को निशाना बनाने की साजिश थी। पटेल के मुताबिक, यह साजिश आईएसआईएस (ISIS) से प्रेरित थी।

    काश पटेल के मुताबिक, इस साजिश में अल्बानी की 35 साल की एक महिला शामिल थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। पटेल ने संघीय आतंकवाद रोधी अभियानों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में 640 आतंकी हमलों की साजिशें नाकाम की गईं।


    काश पटेल ने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?

    उन्होंने एक्स पर लिखा, अमेरिकी जमीन पर एक और संभावित आतंकी हमला नाकाम किया गया। 35 साल की अल्बानी की एक महिला पर न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल को निशाना बनाने का आरोप है। उसने आईएसआईएस से प्रेरित हमले की साजिश रची थी। यह उन खतरों में से सिर्फ एक है, जिनका संघीय कानून प्रवर्तन सामना कर रहा है। पिछले साल 640 आतंकी हमलों की योजनाएं नाकाम की गईं।

    पटेल ने मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि खतरे कई तरह के हैं। अधिकारी अमेरिका में लोगों को निशाना बनाने वाले खतरों से निपट रहे हैं। इसके साथ ही विदेश में तैनात अमेरिकी सैनिक भी निशाने पर हैं। उन्होंने कहा कि इन खतरों से भी अधिकारी निपट रहे हैं। अल्बानी की साजिश नाकाम होने पर पटेल ने कहा कि निर्दोष लोगों की जान जाने से पहले एक और कथित आतंकी साजिश रोक दी गई। उन्होंने कहा कि कुछ अभियानों के बारे में लोगों को जानकारी मिलती है। कई अभियानों के बारे में कभी पता नहीं चलता। उन्होंने कहा, यही हमारा मिशन है।


    साजिश को नाकाम करने में शामिल टीमों की सराहना की

    पटेल ने हमले को नाकाम करने में शामिल टीमों की तारीफ की। उन्होंने संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) की कार्रवाई को भी सराहा। उन्होंने कहा, हमारी एफबीआई अल्बानी टीम ने शानदार काम किया। न्याय विभाग में हमारे सहयोगियों ने भी अच्छा काम किया। अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांशे ने भी सहयोग किया। यह एफबीआई खतरों का पता लगाती रहेगी। उन्हें नाकाम करती रहेगी। अमेरिकियों को सुरक्षित रखेगी।


    आईएसआईएस के खिलाफ पहले भी चला था अभियान

    इससे पहले मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि अमेरिकी सेना ने नाइजीरिया के सशस्त्र बलों के साथ मिलकर अभियान चलाया। इस अभियान में आईएसआईएस के दूसरे नंबर के कमांडर को मार गिराया गया था। ट्रंप ने इसे ‘जटिल और सटीक’ सैन्य अभियान बताया था। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि अबू-बिलाल अल-मिनुकी को संयुक्त अभियान में मार गिराया गया।