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  • इल्हान उमर के घर संघीय एजेंसियों की छापेमारी, ट्रंप ने बताया ‘बेईमान’, इमिग्रेशन फ्रॉड की जांच का दावा

    इल्हान उमर के घर संघीय एजेंसियों की छापेमारी, ट्रंप ने बताया ‘बेईमान’, इमिग्रेशन फ्रॉड की जांच का दावा


    नई दिल्‍ली । अमेरिका में सांसद इल्हान उमर के वाशिंगटन स्थित घर पर संघीय एजेंसियों की कार्रवाई के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उमर को ‘बेईमान’ और ‘बुरा इंसान’ बताते हुए कहा कि न्याय विभाग उनके मामले को देख रहा है। वहीं, उमर ने इस कार्रवाई को राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों का दुरुपयोग करने की कोशिश बताया है।

    अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस (HSI) के एजेंटों ने अदालत से जारी वारंट के आधार पर यह कार्रवाई की। मामले से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, छापेमारी कथित इमिग्रेशन धोखाधड़ी की जांच का हिस्सा है। हालांकि, जांच के आरोपों को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    ट्रंप पहले भी लगा चुके हैं आरोप

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी इल्हान उमर को लेकर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं। वह आरोप लगाते रहे हैं कि उमर अमेरिका में अवैध तरीके से आई थीं और देश में प्रवेश पाने के लिए उन्होंने अपने भाई से शादी की थी। इन आरोपों को लेकर ट्रंप कई बार उन पर तंज कस चुके हैं।

    अब घर पर संघीय एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ट्रंप ने उमर को पूरी तरह बेईमान और बुरा इंसान बताया। उन्होंने कहा कि न्याय विभाग इस मामले को देख रहा है। हालांकि, ट्रंप की टिप्पणियां अपने आप में जांच के आरोपों को साबित नहीं करतीं।

    अदालत के वारंट पर हुई कार्रवाई

    अमेरिकी न्याय विभाग के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि वाशिंगटन डीसी में विभाग की ओर से सुरक्षित किए गए अदालत के वारंट के तहत कार्रवाई की गई। इसे जारी संघीय जांच का हिस्सा बताया गया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को इल्हान उमर के घर के बाहर होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस की जैकेट पहने कई एजेंट दिखाई दिए। जांच से जुड़े एक व्यक्ति ने इसे कथित इमिग्रेशन फ्रॉड से संबंधित बताया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में जांच के निष्कर्ष या आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।

    इल्हान उमर बोलीं- राजनीतिक विरोधियों को बनाया जा रहा निशाना

    इल्हान उमर ने कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह ठीक हैं। उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

    उमर ने कहा कि पिछले दस वर्षों से ट्रंप उन्हें कथित तौर पर बेबुनियाद आरोपों और बदनाम करने वाले अभियानों के जरिए निशाना बनाते रहे हैं। उनके मुताबिक, घर पर हुई कार्रवाई राजनीतिक डराने-धमकाने की उसी कोशिश का नया कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि वह चुप नहीं रहेंगी।

    इस घटनाक्रम ने अमेरिका में राजनीतिक टकराव को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर न्याय विभाग ने कार्रवाई को जारी संघीय जांच का हिस्सा बताया है, वहीं उमर इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही हैं। जांच के नतीजों से ही स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में लगाए जा रहे आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने आते हैं।

  • गोल्डी बराड़ FBI की टॉप-10 मोस्ट वांटेड सूची में शामिल, गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 10 लाख डॉलर का इनाम

    गोल्डी बराड़ FBI की टॉप-10 मोस्ट वांटेड सूची में शामिल, गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 10 लाख डॉलर का इनाम

    नई दिल्ली ।अमेरिका की जांच एजेंसी ने गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को अपनी 10 मोस्ट वांटेड भगोड़ों की सूची में शामिल किया है। उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वाले व्यक्ति को 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक का इनाम देने की घोषणा की गई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 9 करोड़ रुपये बताई गई है।

    गोल्डी बराड़ पर हत्या की साजिश, फिरौती के लिए कारोबार में दखल देने और नशीले पदार्थों की तस्करी समेत कई गंभीर आरोप हैं। अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है और उत्तरी अमेरिका में इस आपराधिक नेटवर्क की गतिविधियों को संभालने का आरोप उस पर है।

    गोल्डी बराड़ को 28 सितंबर को 10 मोस्ट वांटेड भगोड़ों की सूची में शामिल किया गया। वह इस सूची में जगह पाने वाला 543वां भगोड़ा है। फिलहाल वह फरार है और अमेरिकी एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं।

    गोल्डी बराड़ के खिलाफ लॉस एंजिल्स की फेडरल कोर्ट में मामला दर्ज है। उस पर गैंग बनाकर साजिश रचने, फिरौती के लिए कारोबार में हस्तक्षेप करने और ड्रग्स की तस्करी जैसे आरोप लगाए गए हैं। मामले में अदालत ने पिछले साल 1 जुलाई को उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

    अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप है कि गोल्डी बराड़ लॉरेंस बिश्नोई गैंग के जरिए उत्तरी अमेरिका में आपराधिक नेटवर्क का संचालन करता है। इस नेटवर्क पर सुनियोजित तरीके से हत्याएं करने, गोलीबारी और लोगों को डराकर वसूली करने जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। हालांकि, इन आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

    जुलाई 2026 में अमेरिका में ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के तहत भारत से जुड़े तीन आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई में 37 लोगों के खिलाफ आरोप सार्वजनिक किए गए थे। इनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े आरोपी भी शामिल थे। कार्रवाई के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गोल्डी बराड़ समेत कुछ अन्य आरोपी अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं।

    अमेरिकी जांच एजेंसी के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर भारत के पंजाब से जुड़े एक प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेता की हत्या का आदेश देने का भी आरोप है। यह नेता हत्या के समय कनाडा में रह रहा था।

    अभियोग के अनुसार, 18 जून 2023 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक सिख मंदिर से बाहर निकलते समय दो हमलावरों ने उस नेता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले की जांच में अमेरिका, कनाडा और लॉस एंजिल्स की पुलिस एजेंसियों के बीच समन्वय की बात सामने आई है।

    गोल्डी बराड़ की तलाश के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसी ने आम लोगों से भी अपील की है कि अगर किसी व्यक्ति के पास उसके ठिकाने या गतिविधियों से जुड़ी कोई जानकारी है तो वह तुरंत अधिकारियों को उपलब्ध कराए। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखने की बात कही गई है।

    गोल्डी बराड़ की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक का इनाम घोषित किया गया है। इस कदम के बाद उसकी तलाश को लेकर अमेरिकी एजेंसियों की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।

  • FBI की मोस्ट वांटेड सूची में भारतीय मूल का मेजर सिंह, हथियार और ड्रग्स तस्करी से जुड़े गंभीर आरोपों ने बढ़ाई तलाश

    FBI की मोस्ट वांटेड सूची में भारतीय मूल का मेजर सिंह, हथियार और ड्रग्स तस्करी से जुड़े गंभीर आरोपों ने बढ़ाई तलाश


    नई दिल्ली ।
    भारतीय मूल के कथित गैंगस्टर मेजर सिंह को अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी FBI ने अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया है। एजेंसी के अनुसार मेजर सिंह पर हथियारों के अवैध कारोबार, ड्रग्स की आपूर्ति और तस्करी की साजिश तथा संगठित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। अमेरिका में उसकी तलाश के लिए जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है और उसके बारे में जानकारी रखने वाले लोगों से संपर्क करने की अपील की गई है।

    FBI के मुताबिक मेजर सिंह का संबंध पंजाब से जुड़े जग्गू भगवानपुरिया क्राइम ग्रुप से बताया जाता है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस आपराधिक नेटवर्क की गतिविधियां केवल भारत तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि इसके संपर्क और कथित आपराधिक संचालन अमेरिका के कुछ हिस्सों तक भी पहुंचे। इसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच के दौरान मेजर सिंह का नाम सामने आया है।

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार मेजर सिंह के खिलाफ कैलिफोर्निया की संघीय अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है। यह वारंट 25 जून 2026 को जारी किया गया था। उस पर Racketeer Influenced and Corrupt Organizations यानी RICO कानून के तहत साजिश से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा बिना लाइसेंस हथियारों के कारोबार और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े आरोप भी उसके खिलाफ दर्ज हैं।

    जांच एजेंसी ने मेजर सिंह पर ड्रग्स की आपूर्ति और तस्करी से जुड़ी साजिश में शामिल होने का भी आरोप लगाया है। अमेरिका में RICO कानून का इस्तेमाल संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े मामलों में किया जाता है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां किसी व्यक्ति की कथित भूमिका को व्यापक आपराधिक गतिविधियों और नेटवर्क के संदर्भ में देखती हैं। मेजर सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत में होना अभी बाकी है और कानूनी प्रक्रिया के दौरान उसके पक्ष को भी सुना जाएगा।

    FBI के अनुसार जिस जग्गू भगवानपुरिया क्राइम ग्रुप से मेजर सिंह का कथित संबंध बताया जा रहा है, उसकी जड़ें पंजाब में हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क की आपराधिक गतिविधियों का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हुआ। हथियारों और मादक पदार्थों की कथित तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर अमेरिकी एजेंसियों की निगरानी ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब अंतरराष्ट्रीय अपराध संगठनों के बीच सीमा पार संपर्क जांच का बड़ा विषय बने हुए हैं।

    मेजर सिंह की तलाश में FBI का लॉस एंजिलिस कार्यालय भी सक्रिय है। एजेंसी ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास मेजर सिंह के ठिकाने, गतिविधियों या उससे संबंधित कोई विश्वसनीय जानकारी है तो वह जांच एजेंसी तक पहुंचाए। मोस्ट वांटेड सूची में नाम शामिल होने के बाद उसकी तलाश को लेकर अमेरिकी एजेंसियों की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।

    मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मेजर सिंह पर लगाए गए आरोप केवल व्यक्तिगत आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कथित संगठित अपराध, हथियार और ड्रग्स तस्करी तथा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। अब अमेरिकी जांच एजेंसियां उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी हैं। अदालत में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई साबित होती है।

  • लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर FBI का बड़ा शिकंजा, ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत 50 से ज्यादा जगह पर की छापेमारी

    लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर FBI का बड़ा शिकंजा, ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत 50 से ज्यादा जगह पर की छापेमारी


    नई दिल्ली। लॉरेंस बिश्नोई गैंग और उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ अमेरिका की जांच एजेंसी FBI ने बड़ा अभियान शुरू किया है। FBI और उसकी सहयोगी एजेंसियों ने 7 जुलाई को अमेरिका के कैलिफोर्निया समेत कई स्थानों पर कार्रवाई करते हुए कम से कम 20 लोगों को हिरासत में लिया। इस दौरान प्रतिबंधित सामान, हथियार और ड्रग्स बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के नाम से चलाया गया अभियान
    FBI ने अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट के खिलाफ की गई इस कार्रवाई को ‘Operation Hard Ball’ नाम दिया है। एजेंसी के अधिकारियों और सहयोगी टीमों ने अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 50 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित सामान और ड्रग्स जब्त किए गए।

    गोल्डी बरार और जग्गू भगवानपुरिया नेटवर्क पर भी फोकस
    FBI की इस कार्रवाई का निशाना लॉरेंस बिश्नोई गैंग के साथ-साथ उसके सहयोगियों गोल्डी बरार और जग्गू भगवानपुरिया से जुड़े नेटवर्क भी रहे। जांच एजेंसियों के अनुसार, गैंग से जुड़े कई वांटेड सदस्य अमेरिका, कनाडा और यूरोप में रहकर भारत में अपनी आपराधिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। आरोप है कि ये लोग विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों को भी निशाना बनाकर रंगदारी वसूलने जैसे अपराधों में शामिल रहे हैं।

    कनाडा ने घोषित किया था आतंकी संगठन
    लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर कनाडा सरकार ने पिछले साल इसे आतंकी संगठन घोषित किया था। वहीं, लॉरेंस बिश्नोई का भाई अनमोल बिश्नोई भी लंबे समय तक अमेरिका में रहने की बात सामने आई थी। आरोप है कि अमेरिका में रहते हुए उसने मुंबई में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या और अभिनेता सलमान खान के घर पर फायरिंग से जुड़े मामलों में भूमिका निभाई थी। बाद में अनमोल बिश्नोई को भारत डिपोर्ट किया गया।

    विदेशों में फैले नेटवर्क पर एजेंसियों की नजर
    भारतीय जांच एजेंसियां भी समय-समय पर यह जानकारी देती रही हैं कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नेटवर्क अमेरिका, कनाडा और यूरोप तक फैला हुआ है। एजेंसियों के मुताबिक, भारत से फरार होकर कई गैंग सदस्य इन देशों में ठिकाने बनाकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। FBI का ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ अभी जारी है और लॉरेंस बिश्नोई गैंग तथा उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।

  • अमेरिका को निशाना बनाने वाले ठगी गिरोह का पर्दाफाश, भारतीय कॉल सेंटर पर बड़ी जांच और गिरफ्तारियां

    अमेरिका को निशाना बनाने वाले ठगी गिरोह का पर्दाफाश, भारतीय कॉल सेंटर पर बड़ी जांच और गिरफ्तारियां

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें भारत में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर पर अमेरिकी नागरिकों से लाखों डॉलर की ठगी करने के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में अमेरिका की आंतरिक खुफिया एजेंसी ने जांच के बाद बड़ा कदम उठाते हुए पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के बाद साइबर अपराध की दुनिया में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय गिरोहों पर एक बार फिर कड़ी निगरानी और सख्ती की चर्चा तेज हो गई है।

    जांच में सामने आया है कि यह कॉल सेंटर तकनीकी सहायता और अन्य सेवाओं के नाम पर अमेरिकी नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों को निशाना बनाता था। पीड़ितों को भ्रमित कर उनसे संवेदनशील जानकारी और धन की अवैध वसूली की जाती थी। इस पूरे नेटवर्क को एक संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसमें कॉल रूटिंग से जुड़े कुछ तकनीकी ढांचे और टेलीमार्केटिंग से जुड़े लोग भी शामिल थे।

    इस मामले में दो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों की नहीं बल्कि एक संगठित प्रणालीगत धोखाधड़ी थी। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया है और आगे की कार्रवाई जारी है। यह कार्रवाई एक विस्तृत जांच का परिणाम है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए गए।

    अमेरिकी एजेंसी ने अपने बयान में यह भी कहा है कि इस तरह की धोखाधड़ी का सबसे बड़ा निशाना अक्सर वरिष्ठ नागरिक होते हैं, जिन्हें तकनीकी जानकारी कम होने के कारण आसानी से भ्रमित किया जा सकता है। एजेंसी के अनुसार ऐसे अपराध न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि पीड़ितों को मानसिक रूप से भी प्रभावित करते हैं, जिससे वे भय और असुरक्षा की स्थिति में आ जाते हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार पिछले वर्ष इस प्रकार के तकनीकी सहायता आधारित घोटालों के कारण अमेरिका में अरबों डॉलर का नुकसान दर्ज किया गया था। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि साइबर अपराध अब केवल छोटे स्तर का अपराध नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैश्विक स्तर की गंभीर चुनौती बन चुका है। अकेले कुछ क्षेत्रों में ही लाखों डॉलर के नुकसान की शिकायतें दर्ज की गई हैं, जो इस समस्या की व्यापकता को दर्शाती हैं।

    इस पूरे मामले में भारतीय टेलीमार्केटिंग और कॉल सेंटर नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि कुछ व्यवसायिक इकाइयों और उनसे जुड़े लोगों ने इस धोखाधड़ी को सुचारू रूप से चलाने में मदद की। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क कई स्तरों पर काम करते हैं और तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को निशाना बनाते हैं।

    फिलहाल इस मामले में जांच जारी है और कई अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ वैश्विक सहयोग और सख्ती का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है, जो आने वाले समय में ऐसे अपराधों पर रोक लगाने में मददगार साबित हो सकती है।

  • अमेरिका–कनाडा हथियार तस्करी रैकेट का भंडाफोड़: 89 हथियारों के साथ 3 गिरफ्तार, पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल

    अमेरिका–कनाडा हथियार तस्करी रैकेट का भंडाफोड़: 89 हथियारों के साथ 3 गिरफ्तार, पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल



    नई दिल्ली। अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियों ने हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस ने 89 हथियारों की अवैध खेप के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जो इन्हें अमेरिका से कनाडा भेजने की फिराक में थे। पकड़े गए आरोपियों में एक पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल है।

    जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई स्टेट रूट-90 पर उस समय हुई जब पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन को रोका। शुरुआती पूछताछ में जवाब असंगत पाए जाने पर जब तलाशी ली गई तो कार के भीतर भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। कुछ हथियार पीछे की सीट पर खुले तौर पर रखे हुए थे।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय मलिक ब्रॉमफील्ड (कनाडा नागरिक), 25 वर्षीय फैजान अली (पाकिस्तानी नागरिक) और 22 वर्षीय कमाल सलमान (कनाडा-अमेरिका-जॉर्डन की नागरिकता) के रूप में हुई है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, फैजान अली के पास एक एक्सपायर्ड पाकिस्तानी नेशनल ड्राइविंग परमिट भी मिला है, जो किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी था। बरामद हथियारों में कम से कम 17 चोरी की बंदूकें भी शामिल हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि आरोपी 80 से अधिक हथियार कनाडा पहुंचाने की योजना में थे। इस पूरे ऑपरेशन में न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस, एफबीआई और एटीएफ की संयुक्त टीम शामिल रही।

    यूएस अटॉर्नी ऑफिस ने बताया कि सभी आरोपियों पर अवैध हथियार तस्करी, बिना लाइसेंस हथियार कारोबार और चोरी के हथियार रखने सहित गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को 5 से 15 साल तक की सजा हो सकती है, जबकि अंतिम निर्णय अदालत करेगी।

    अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क को कनाडा और अमेरिका दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। 

  • ईरानी हैकर्स ने FBI डायरेक्टर काश पटेल का निजी ईमेल अकाउंट हैक

    ईरानी हैकर्स ने FBI डायरेक्टर काश पटेल का निजी ईमेल अकाउंट हैक

    वॉशिंगटन। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के निदेशक काश पटेल का निजी ईमेल अकाउंट कथित तौर पर हैक कर लिया गया है। ईरान से जुड़े एक हैकर समूह ने इस साइबर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उसने पटेल के अकाउंट से जुड़ी तस्वीरें और दस्तावेज ऑनलाइन सार्वजनिक कर दिए हैं।

    खुद को फिलिस्तीन समर्थक बताने वाले हैकर समूह हंडाला हैक टीम ने अपनी वेबसाइट पर पोस्ट कर कहा कि काश पटेल अब उन व्यक्तियों की सूची में शामिल हो गए हैं जिनके अकाउंट सफलतापूर्वक हैक किए गए हैं।

    अमेरिकी न्याय विभाग के एक अधिकारी ने भी प्रारंभिक तौर पर इस घटना की पुष्टि की है। अधिकारी के अनुसार, ऑनलाइन साझा की गई सामग्री पहली नजर में वास्तविक प्रतीत होती है।

    निजी तस्वीरें भी हुईं सार्वजनिक

    हैकर्स ने पटेल की कई निजी तस्वीरें जारी करने का दावा किया है। इन तस्वीरों में वह सिगार के साथ, एक पुरानी कन्वर्टिबल कार में बैठे हुए और रम की बोतल के साथ आईने के सामने फोटो लेते हुए दिखाई दे रहे हैं।

    FBI ने दी प्रतिक्रिया

    एफबीआई के प्रवक्ता Ben Williamson ने बयान जारी कर कहा कि एजेंसी ने संभावित जोखिम कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि साझा किया गया डाटा पुराना है और इसमें कोई संवेदनशील सरकारी जानकारी शामिल नहीं है।

    कौन है हंडाला हैक टीम?

    साइबर विशेषज्ञों के अनुसार हंडाला हैक टीम का संबंध Iran की सरकारी साइबर खुफिया इकाइयों से हो सकता है। यह समूह फर्जी पहचान के जरिए साइबर हमलों को अंजाम देने के लिए जाना जाता है।

    इससे पहले 11 मार्च को इस समूह ने मिशिगन स्थित मेडिकल उपकरण कंपनी Stryker Corporation पर साइबर हमला करने का दावा किया था और कहा था कि उसने कंपनी का बड़ा डाटा नष्ट कर दिया है।