Tag: FDI

  • बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा समय बेहतर अवसर: रमेश दमानी

    बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा समय बेहतर अवसर: रमेश दमानी

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज निवेशक रमेश दमानी ने लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखने और बाजार की अल्पकालिक अस्थिरता से प्रभावित न होने की सलाह दी है। उनका मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार की दैनिक हलचल पर ध्यान देने के बजाय मजबूत कंपनियों में लंबे समय तक निवेश बनाए रखना बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हैं और यही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत है।

    एक कार्यक्रम के दौरान अपने विचार रखते हुए रमेश दमानी ने कहा कि शेयर बाजार स्वभाव से अस्थिर होता है और समय-समय पर इसमें तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। ऐसे दौर में कई निवेशक घबराकर जल्दबाजी में फैसले लेते हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जो निवेशक अनुशासन बनाए रखते हैं और बाजार की अल्पकालिक चाल के बजाय लंबी अवधि के लक्ष्य पर ध्यान देते हैं, उनके लिए संपत्ति निर्माण की संभावनाएं अधिक मजबूत होती हैं।

    उन्होंने कहा कि निवेश के क्षेत्र में धैर्य सबसे महत्वपूर्ण गुणों में से एक है। यदि किसी निवेशक ने मजबूत आधार वाली कंपनियों का चयन किया है, तो उसे बाजार में आने वाली अस्थायी गिरावट से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, समय के साथ गुणवत्तापूर्ण कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करती हैं और निवेशकों को अच्छे प्रतिफल का अवसर देती हैं।

    रमेश दमानी ने भारत की आर्थिक स्थिति पर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी, बढ़ती खपत, तेज़ी से विकसित होता औद्योगिक ढांचा और सुधारों पर आधारित आर्थिक नीतियां भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत को लगभग आठ प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखने के लिए लगातार विदेशी निवेश की आवश्यकता होगी। विदेशी पूंजी से उद्योगों का विस्तार, रोजगार के नए अवसर और आधुनिक तकनीकों का विकास संभव होता है। उनके अनुसार, यदि भारत अपनी विकास गति को बनाए रखना चाहता है, तो विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की निरंतर उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    आधुनिक तकनीकों पर चर्चा करते हुए रमेश दमानी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ऐसे कई उद्योग और व्यवसाय हैं, जिन पर एआई का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा और भविष्य में वही क्षेत्र निवेशकों के लिए नए अवसर लेकर आ सकते हैं। उनका कहना था कि निवेशकों को केवल चर्चित क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण अपनाकर संभावनाओं का आकलन करना चाहिए।

    उन्होंने विदेशी निवेश के रुझानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इससे देश के तकनीकी और औद्योगिक विकास को गति मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा भारत की आर्थिक क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं को दर्शाता है।

    वैश्विक बाजारों पर टिप्पणी करते हुए रमेश दमानी ने कहा कि अमेरिकी शेयर बाजार अपने उच्च स्तर के करीब दिखाई देता है, जबकि कुछ औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में चीन अब भी मजबूत स्थिति में है। इसके बावजूद उनका मानना है कि भारत के पास विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने निवेशकों से अपील की कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं, क्योंकि अनुशासित निवेश और धैर्य ही समय के साथ बेहतर संपत्ति निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम साबित होता है।

  • बीमा सेक्टर में ऑटोमेटिक रूट से 100 फीसदी FDI को मंजूरी… अधिसूचना जारी

    बीमा सेक्टर में ऑटोमेटिक रूट से 100 फीसदी FDI को मंजूरी… अधिसूचना जारी


    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने बीमा क्षेत्र (Insurance sector) में ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) (100% Foreign Direct Investment – FDI) को मंजूरी देने वाले नियम को शनिवार को अधिसूचित कर दिया। अधिसूचना के अनुसार विदेशी मुद्रा प्रबंधन (फेमा) नियम, 2026 के अनुसार, ऑटोमेटिक रूट (Automatic Route) से बीमा कंपनियों और उससे जुड़े मध्यस्थों, जिनमें ब्रोकर भी शामिल हैं, में अब 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति होगी। हालांकि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) (Life Insurance Corporation of India – LIC) के लिए यह सीमा 20 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

    संसद ने दिसंबर, 2025 में ‘सबका बीमा सबकी रक्षा’ विधेयक, 2025 पारित किया था, जिसके जरिये बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा को स्वचालित मार्ग के तहत पहले के 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की मंजूरी दी गई। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन गया। इसके बाद फरवरी, 2026 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को अधिसूचित किया था। अब इस फैसले को अधिसूचित कर दिए जाने के बाद विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बीमा कंपनियों में पैसा लगाना आसान हो जाएगा।

    भारत का बीमा क्षेत्र विश्व के सबसे तेजी से बढ़ते बीमा क्षेत्रों में एक है। यह वैश्विक स्तर पर 10वें स्थान पर है और इसकी सालाना विकास दर लगभग 15-20 फीसदी है। जागरूकता में वृद्धि, डिजिटल तकनीक को अपनाने और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा पहले 74 फीसदी तक किए जाने के बाद इस क्षेत्र में तेज वृद्धि देखने को मिली थी। अब विदेशी निवेश सीमा को 100 फीसदी कर दिए जाने से इसकी वृद्धि की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है। बीमा नियामक आईआरडीएआई द्वारा शासित इस क्षेत्र में अभी 57 से अधिक कंपनियां शामिल हैं, जिनमें सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी का बड़ा हिस्सा है। हालांकि अब निजी क्षेत्र की बाजार हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है।