दिल्ली सर्राफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव सभी करों सहित घटकर 1,42,000 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। शुक्रवार को यही कीमत 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। एक ही कारोबारी सत्र में आई इस बड़ी गिरावट ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले 26 दिसंबर 2025 को सोना 1,42,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था। इसके बाद अब कीमतें एक बार फिर इसी स्तर के आसपास पहुंची हैं।
चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। शनिवार को इसका भाव 4,200 रुपये टूटकर 1,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। इससे पिछले कारोबारी दिन शुक्रवार को चांदी 1,90,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी। मौजूदा भाव करीब 11 महीने के निचले स्तर के आसपास है। इससे पहले 8 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत लगभग 1,85,000 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई थी।
घरेलू बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी कमजोरी रही। शुक्रवार को वैश्विक बाजार में हाजिर सोना 145.84 डॉलर यानी करीब चार प्रतिशत गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। यह एक साल से अधिक समय का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले 3 अक्टूबर 2025 को सोना 3,887.09 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था।
चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट इससे भी अधिक रही। हाजिर चांदी 3.04 डॉलर यानी करीब छह प्रतिशत फिसलकर 49.12 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे पहले 6 नवंबर 2025 को इसका भाव 48.02 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया था। शंघाई के वायदा बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों में तेज कमजोरी देखने को मिली।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे महंगाई और अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़ी चिंताएं प्रमुख कारण हैं। ऊर्जा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ाया है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने के संकेतों ने निवेशकों की उम्मीदों को प्रभावित किया है। पहले बाजार में ब्याज दरों में कटौती की संभावना देखी जा रही थी, लेकिन अब यह आशंका बढ़ रही है कि दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
कच्चे तेल की महंगाई के कारण दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। यदि ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट ने भी बाजार की स्थिति प्रभावित की है। तकनीकी कंपनियों में नुकसान के कारण कुछ निवेशकों पर नकदी जुटाने का दबाव बना, जिसके चलते सोने और चांदी में बिकवाली बढ़ने की बात कही जा रही है। चीन में भी निवेशकों की ओर से नकदी की जरूरत के लिए सोना बेचे जाने की चर्चाएं हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव को लेकर भी बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। चुनावी नतीजों और राजनीतिक परिस्थितियों का असर आगे चलकर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। फिलहाल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई, ब्याज दरों और निवेशकों की नकदी जरूरतों के बीच सोने-चांदी के बाजार में दबाव बना हुआ है।









