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  • कल्याणी इम्पेक्स पर ED की बड़ी कार्रवाई, कनाडा, अमेरिका और UAE में अघोषित संपत्तियों व बैंक खातों के मिले अहम सुराग

    कल्याणी इम्पेक्स पर ED की बड़ी कार्रवाई, कनाडा, अमेरिका और UAE में अघोषित संपत्तियों व बैंक खातों के मिले अहम सुराग

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत कल्याणी इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक धर्मेश नरेंद्र संगानी से जुड़े मामले में व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस कार्रवाई के दौरान विदेशों में अघोषित बैंक खातों, संपत्तियों और संदिग्ध सीमा-पार वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं। फिलहाल एजेंसी इन सभी दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है।

    जांच के दौरान ईडी को ऐसे संकेत मिले हैं कि कंपनी के निर्यात से प्राप्त होने वाली कुछ विदेशी रकम निर्धारित समय के भीतर भारत नहीं लाई गई। एजेंसी के अनुसार, लंबे समय तक भुगतान लंबित रहने के बावजूद बकाया राशि की वसूली के लिए आवश्यक दस्तावेजी प्रयास नहीं किए गए। इससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों के संभावित उल्लंघन की आशंका और मजबूत हुई है।

    प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ निर्यात भुगतान उन विदेशी कंपनियों से प्राप्त हुए, जिनका नाम निर्यात दस्तावेजों, इनवॉइस या शिपिंग बिल में खरीदार अथवा भुगतानकर्ता के रूप में दर्ज नहीं था। ईडी का मानना है कि इस प्रकार के लेनदेन की प्रकृति और उद्देश्य की गहन जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि भुगतान प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी या नहीं।

    जांच एजेंसी ने अब तक कनाडा, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कई अघोषित विदेशी बैंक खातों और संभावित निवेशों की पहचान किए जाने का दावा किया है। इन खातों और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इन खातों और संपत्तियों की जानकारी संबंधित भारतीय प्राधिकरणों के समक्ष विधिवत घोषित की गई थी या नहीं।

    तलाशी अभियान के दौरान बरामद दस्तावेजों से यह भी संकेत मिले हैं कि धर्मेश नरेंद्र संगानी की कनाडा में संचालित एक कंपनी में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हो सकती है। जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस विदेशी निवेश और उससे जुड़े बैंक खातों की जानकारी नियामकीय संस्थाओं को उपलब्ध कराई गई थी। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात में भी कुछ अघोषित संपत्तियों के संबंध में दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है।

    ईडी ने तलाशी के दौरान प्राप्त दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य सामग्री को अपने कब्जे में लेकर उनकी फोरेंसिक और वित्तीय जांच शुरू कर दी है। एजेंसी विभिन्न देशों से जुड़े वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और विदेशी संस्थाओं के साथ कारोबारी संबंधों का भी विश्लेषण कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी जानकारी साझा करने और सहयोग लेने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

    फिलहाल यह जांच प्रारंभिक चरण में है और एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय करेगी। मामले में संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष भी जांच प्रक्रिया के दौरान दर्ज किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है या नहीं तथा इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

  • ट्रंप का बड़ा यू-टर्न! जिस अधिकारी को हटाया था, उसी को फिर सौंपी अमेरिका की आपदा सुरक्षा की कमान

    ट्रंप का बड़ा यू-टर्न! जिस अधिकारी को हटाया था, उसी को फिर सौंपी अमेरिका की आपदा सुरक्षा की कमान



    नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प  ने एक बार फिर बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए पूर्व नेवी सील अधिकारी कैमरन हैमिल्टन को संघीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी यानी फ़ेमा की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यही कैमरन हैमिल्टन एक साल पहले एजेंसी के अस्थायी प्रमुख पद से हटा दिए गए थे। अब उनकी वापसी ने अमेरिकी राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

    व्हाइट हाउस की ओर से सोमवार को हैमिल्टन के नामांकन की घोषणा की गई। अगर अमेरिकी सीनेट उनकी नियुक्ति को मंजूरी देती है, तो वे आपातकालीन प्रबंधन और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया मामलों में ट्रंप प्रशासन के सबसे अहम सलाहकारों में शामिल होंगे। उन्हें होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के साथ मिलकर अमेरिका की आपदा प्रबंधन रणनीति को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

    कैमरन हैमिल्टन पूर्व नेवी सील अधिकारी रह चुके हैं और सुरक्षा मामलों में उनका लंबा अनुभव माना जाता है। हालांकि पिछले साल उन्हें फ़ेमा के कार्यवाहक प्रमुख पद से हटा दिया गया था। उस समय उन्होंने एजेंसी के अस्तित्व और उसकी जरूरत का खुलकर समर्थन किया था, जबकि ट्रंप प्रशासन लगातार फ़ेमा को कमजोर करने या खत्म करने जैसे संकेत दे रहा था। यही वजह थी कि उनके हटाए जाने को लेकर उस समय काफी विवाद भी हुआ था।

    अब उनकी वापसी ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिका में प्राकृतिक आपदाओं, तूफानों और आपात स्थितियों से निपटने को लेकर संघीय एजेंसियों की भूमिका पर बहस तेज है। ट्रंप पहले भी फ़ेमा की कार्यप्रणाली की आलोचना कर चुके हैं और कई मौकों पर यह संकेत दे चुके हैं कि राज्यों को आपदा प्रबंधन में ज्यादा जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हैमिल्टन की दोबारा नियुक्ति ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति का हिस्सा हो सकती है। एक तरफ ट्रंप फ़ेमा में बड़े बदलाव की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ऐसे व्यक्ति को चुना है जो एजेंसी की कार्यप्रणाली को अंदर से समझता है और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में मजबूत अनुभव रखता है।

    अमेरिका में अब सबकी नजर सीनेट की मंजूरी पर टिकी है। अगर नामांकन को हरी झंडी मिलती है तो कैमरन हैमिल्टन की वापसी अमेरिकी आपदा प्रबंधन व्यवस्था में बड़े बदलावों का संकेत मानी जा सकती है।