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  • खरीफ सीजन से पहले खाद की किल्लत, किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी

    खरीफ सीजन से पहले खाद की किल्लत, किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी


    खरगोन। जिले के कसरावद और झिरन्या क्षेत्र के वनग्रामों में किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। फार्मर आईडी जनरेट न होने के कारण बड़ी संख्या में वन अधिकार पट्टाधारी किसान रासायनिक खाद से वंचित रह गए हैं। खरीफ सीजन की बुवाई से ठीक पहले खाद वितरण व्यवस्था बाधित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

    किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों द्वारा अब खाद का वितरण फार्मर आईडी आधारित टोकन सिस्टम से किया जा रहा है, लेकिन वनग्रामों के अधिकांश किसानों की फार्मर आईडी अब तक नहीं बन पाई है। ऐसे में वे सिस्टम से बाहर हो गए हैं और जरूरी खाद प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।

    वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की बढ़ी मुश्किलें
    झिरन्या क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि यह क्षेत्र पूरी तरह आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत है, जहां अधिकांश किसानों को वन अधिकार पट्टे प्राप्त हैं। वर्षों से ये किसान इन्हीं भूमि पर खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं, लेकिन अब डिजिटल व्यवस्था के कारण वे खाद जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले उनके दस्तावेज और फार्मर आईडी अपडेट नहीं की गई, जिससे पूरा वनग्राम सिस्टम से बाहर हो गया है।

    तहसीलदार को सौंपा गया ज्ञापन, समाधान की मांग
    इस समस्या को लेकर समाजसेवी गजेंद्र पटेल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने तहसीलदार नरेंद्र मुवेल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की फार्मर आईडी तत्काल बनाई जाए और उन्हें खाद वितरण के लिए टोकन जारी किए जाएं।किसानों ने साफ कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

    खरीफ सीजन की बुवाई पर संकट
    किसानों ने बताया कि खरीफ सीजन की बुवाई का समय बेहद नजदीक है और इस समय खाद का उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। बारिश शुरू होने के साथ ही खेती का कार्य तेज हो जाता है, लेकिन खाद न मिलने से पूरी कृषि तैयारी प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि अगर समय पर खाद नहीं मिला तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

    प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद
    ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तकनीकी और दस्तावेजी समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान निकाला जाए। साथ ही वनग्राम के सभी पात्र किसानों को सिस्टम में शामिल कर उन्हें खाद वितरण की सुविधा सुनिश्चित की जाए। फिलहाल क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है और किसान प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

  • खाद के लिए किसानों की लंबी कतार, रातभर ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर डटे

    खाद के लिए किसानों की लंबी कतार, रातभर ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर डटे


    मध्य प्रदेश । अशोकनगर जिले में खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों का आंदोलन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में किसान डबल लॉक गोदाम के सामने से लेकर त्रिदेव मंदिर तक सड़क किनारे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ डटे रहे।

    स्थिति यह रही कि सोमवार रात तेज आंधी और बारिश के बावजूद किसान वहीं रुके रहे और पूरी रात सड़क किनारे ही गुजार दी। किसानों ने अपने साथ खाने-पीने की व्यवस्था कर रखी थी और वहीं भोजन भी तैयार किया।

    टोकन व्यवस्था के आधार पर हो रहा वितरण
    जिले में खाद का वितरण ऑनलाइन टोकन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से फिलहाल उन्हीं किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जिनके टोकन पहले से बुक थे। मंगलवार सुबह से टोकन धारकों को खाद वितरण शुरू किया गया, जबकि कई किसान नए टोकन बुक कराने की मांग पर भी अड़े हुए हैं।

    पहले चक्काजाम, फिर गोदाम पर डेरा
    खाद संकट को लेकर सोमवार को भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने राजमाता चौराहे पर चक्काजाम किया था। इसके बाद प्रशासन ने आश्वासन देते हुए किसानों को विदिशा रोड स्थित खाद गोदाम भेजा। इसके बाद से ही किसान लगातार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ गोदाम परिसर में मौजूद हैं।

    कुछ किसानों को मिली खाद, कई इंतजार में
    सोमवार को कुछ किसानों को खाद का वितरण किया गया, जबकि कई के दस्तावेज लेकर टोकन प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जिन किसानों के टोकन लंबित हैं, उनके लिए अगले एक-दो दिनों में व्यवस्था की जाएगी।

    किसानों की मांग: तुरंत खाद उपलब्ध कराई जाए
    किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन की बुवाई का समय नजदीक है, ऐसे में खाद की कमी से खेती प्रभावित हो रही है। किसान लगातार मांग कर रहे हैं कि सभी को जल्द से जल्द खाद उपलब्ध कराई जाए।

  • बमोरी में हंगामा: खाद न मिलने पर किसानों का प्रदर्शन, तहसीलदार के आश्वासन के बाद खुला रास्ता

    बमोरी में हंगामा: खाद न मिलने पर किसानों का प्रदर्शन, तहसीलदार के आश्वासन के बाद खुला रास्ता

    नई दिल्ली। गुना जिले के बमोरी क्षेत्र स्थित बागेरी डबल लॉक केंद्र पर सोमवार को उस समय हंगामा मच गया जब बड़ी संख्या में किसान खाद लेने पहुंचे। किसानों के पास निर्धारित तारीख के ऑनलाइन टोकन थे, लेकिन केंद्र पर सर्वर डाउन होने के कारण खाद का वितरण शुरू नहीं हो सका। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत किसानों को पहले स्वयं टोकन जनरेट करना होता है और उसी दिन केंद्र पर पहुंचकर खाद प्राप्त करनी होती है। लेकिन तकनीकी खराबी ने पूरी व्यवस्था को ठप कर दिया।

    नाराज किसानों ने किया चक्काजाम
    खाद न मिलने और बार-बार हो रही परेशानियों से आक्रोशित किसानों ने सड़क पर ट्रैक्टर खड़े कर चक्काजाम कर दिया। किसानों का कहना था कि यदि आज का टोकन एक्सपायर हो जाता है तो उन्हें फिर से पूरी प्रक्रिया दोहरानी पड़ेगी, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होगी। जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    प्रशासन मौके पर पहुंचा, समझाइश से शांत हुआ मामला
    स्थिति बिगड़ती देख बमोरी पुलिस और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और समाधान का आश्वासन दिया। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि किसानों के आज के टोकन मान्य रहेंगे और इन्हीं के आधार पर उन्हें अगले दिन खाद उपलब्ध कराई जाएगी। इस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और सड़क यातायात बहाल हो गया।

    ऑनलाइन सिस्टम पर उठे सवाल
    इस घटना ने खाद वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि सर्वर डाउन और तकनीकी खराबी के कारण उन्हें बार-बार परेशानी झेलनी पड़ रही है, जबकि समय पर खाद न मिलने से खेती प्रभावित हो रही है।

    बमोरी की यह घटना साफ दर्शाती है कि डिजिटल व्यवस्था के बावजूद जमीनी स्तर पर तकनीकी खामियां किसानों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई हैं। प्रशासनिक आश्वासन के बाद भले ही मामला शांत हो गया हो, लेकिन सिस्टम की खामियों को सुधारने की जरूरत अब और ज्यादा महसूस की जा रही है।