Tag: Festival Update

  • अप्रैल 2026 के व्रत त्योहारों की पूरी लिस्ट हनुमान जयंती से अक्षय तृतीया तक जानें सभी तिथियां

    अप्रैल 2026 के व्रत त्योहारों की पूरी लिस्ट हनुमान जयंती से अक्षय तृतीया तक जानें सभी तिथियां


    नई दिल्ली । मार्च माह के समापन के साथ ही अब अप्रैल 2026 की शुरुआत होने जा रही है जो धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस माह में जहां एक ओर चैत्र मास का समापन होगा वहीं दूसरी ओर पवित्र वैशाख माह का आरंभ भी होगा। इस पूरे महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं जिनका विशेष धार्मिक महत्व है और जिनका पालन करने से श्रद्धालुओं को पुण्य की प्राप्ति होती है।

    अप्रैल माह की शुरुआत के साथ ही 2 अप्रैल को हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा का व्रत मनाया जाएगा। यह दिन भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसके अगले दिन 3 अप्रैल से वैशाख माह का आरंभ हो जाएगा जो हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है।

    महीने के प्रारंभिक दिनों में 5 अप्रैल को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा जबकि 9 अप्रैल को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी और 10 अप्रैल को कालाष्टमी का व्रत मनाया जाएगा। इसके बाद 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का विशेष महत्व है जो भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इसी दिन वल्लभाचार्य जयंती भी मनाई जाएगी।

    14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ सूर्य के राशि परिवर्तन का पर्व मनाया जाएगा जबकि 15 अप्रैल को मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का संयोग रहेगा। 17 अप्रैल को वैशाख अमावस्या का दिन होगा जो पितरों के तर्पण और दान पुण्य के लिए विशेष माना जाता है।

    अप्रैल माह के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान का फल अक्षय माना जाता है यानी कभी समाप्त नहीं होता। इसी दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है।

    इसके अलावा 21 अप्रैल को आदि शंकराचार्य जयंती और सूरदास जयंती मनाई जाएगी जबकि 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। 24 अप्रैल को बगलामुखी जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी का संयोग रहेगा।

    महीने के अंतिम दिनों में 25 अप्रैल को सीता नवमी व्रत रखा जाएगा और 27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी का महत्व रहेगा। इसके बाद 28 अप्रैल को प्रदोष व्रत और 30 अप्रैल को नृसिंह जयंती मनाई जाएगी जो भगवान विष्णु के अवतार से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।

    वैशाख माह का विशेष महत्व भी इस पूरे महीने को और अधिक पावन बनाता है। इस दौरान गंगा स्नान दान पुण्य और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस माह में किए गए धार्मिक कार्यों का फल अक्षय होता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है।

    इस प्रकार अप्रैल 2026 का महीना आस्था भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है जिसमें अनेक महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करेंगे।

  • कल है दुर्गा अष्टमी 2026 इस शुभ मुहूर्त में करें कन्या पूजन मिलेगा मां महागौरी का आशीर्वाद

    कल है दुर्गा अष्टमी 2026 इस शुभ मुहूर्त में करें कन्या पूजन मिलेगा मां महागौरी का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और अब भक्तों को महाअष्टमी का बेसब्री से इंतजार है। दुर्गा अष्टमी का दिन नवरात्र के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर जीवन में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है।

    पंचांग के अनुसार इस वर्ष अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। ऐसे में महाअष्टमी का पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

    कन्या पूजन के लिए इस बार तीन प्रमुख शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से लेकर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इन सभी समयों में श्रद्धालु कन्या पूजन कर सकते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

    इस वर्ष दुर्गा अष्टमी पर विशेष योग का भी संयोग बन रहा है जो इसे और अधिक शुभ बना रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। यह योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह तक रहेगा। ऐसे योग में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र में अष्टमी और नवमी दोनों दिन कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां कन्याओं का सम्मान होता है वहां देवी का वास होता है। इसलिए इस दिन नौ कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। उन्हें भोजन के रूप में हलवा पूरी और चने का प्रसाद दिया जाता है और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

    कन्या पूजन केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक भी है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि समाज में महिलाओं का सम्मान और आदर करना कितना महत्वपूर्ण है। इस प्रकार दुर्गा अष्टमी का दिन श्रद्धा भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस शुभ अवसर पर सही मुहूर्त में कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख शांति और समृद्धि का आगमन होता है।