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  • निर्जला एकादशी पर शनि और शुक्र रचेंगे दुर्लभ इतिहास: ज्योतिषीय गणना में 120 डिग्री पर नवपंचम राजयोग का महासंयोग

    निर्जला एकादशी पर शनि और शुक्र रचेंगे दुर्लभ इतिहास: ज्योतिषीय गणना में 120 डिग्री पर नवपंचम राजयोग का महासंयोग

    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण मानी जाने वाली निर्जला एकादशी इस बार न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय समीकरणों के लिहाज से भी अत्यंत विशेष होने जा रही है। आगामी पच्चीस जून को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर आकाशमंडल में एक बेहद दुर्लभ और शक्तिशाली नवपंचम राजयोग का निर्माण होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के विशेषज्ञों के अनुसार यह शुभ संयोग तब बनता है जब दो मित्र ग्रह एक-दूसरे से विशेष त्रिकोणीय दूरी पर स्थापित होते हैं। इस बार न्याय के देवता शनि और सुख-वैभव के प्रदाता शुक्र एक-दूसरे से ठीक एक सौ बीस डिग्री के कोण पर विराजमान होकर इस अद्भुत योग को पूर्ण करेंगे, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव मानव जीवन के आर्थिक और व्यावसायिक क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा।

    मध्य प्रदेश। ज्योतिष विज्ञान में शनि और शुक्र को नैसर्गिक रूप से परम मित्र माना गया है, इसलिए इन दोनों के बीच बनने वाला पांचवें और नौवें भाव का यह त्रिकोणीय संबंध बेहद फलदायी माना जाता है। इस बार निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त आराधना के साथ इस राजयोग का मिलना एक महान आध्यात्मिक संयोग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विशेष दिन पर व्रत रखने, जप करने और जरूरतमंदों को शीतल जल व अन्न का दान करने से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह शांत होते हैं। ज्योतिषीय गणनाओं से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि इस राजयोग के प्रभाव से देश के आर्थिक परिदृश्य और विशेषकर चार भाग्यशाली राशियों के जीवन में अप्रत्याशित और सकारात्मक बदलाव आने तय हैं।

    इस महासंयोग से मुख्य रूप से लाभान्वित होने वाली राशियों में वृषभ राशि के जातकों का नाम सबसे ऊपर आ रहा है। वृषभ राशि के लोगों के लिए यह समय करियर और आजीविका के क्षेत्र में एक बड़ी लंबी छलांग लगाने का साबित हो सकता है। कार्यस्थल पर लंबे समय से लंबित पड़ी योजनाएं अचानक गति पकड़ेंगी और व्यावसायिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को कोई बहुत बड़ी व्यापारिक डील हासिल हो सकती है। इसके अलावा पैतृक संपत्ति के मामलों में भी इन्हें बड़ी सफलता मिलने के योग बन रहे हैं, जिससे समाज और कार्यक्षेत्र में इनकी प्रतिष्ठा और प्रशासनिक धाक में भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी।

    ग्रहों का यह विशेष परिवर्तन मिथुन राशि के जातकों के लिए भी वरदान से कम नहीं सिद्ध होने वाला है। इस राशि के लोगों के लिए आय के एक से अधिक नए स्रोत विकसित होंगे, जिससे आर्थिक स्थिति को बहुत अधिक मजबूती मिलेगी। व्यापार और आजीविका के सिलसिले में की जाने वाली सुदूर यात्राएं इस अवधि में अत्यधिक आर्थिक लाभ प्रदान करेंगी। पारिवारिक जीवन के दृष्टिकोण से भी यह समय अनुकूल रहेगा, जहां पुराने समय से चले आ रहे आपसी मतभेद और तनाव पूरी तरह समाप्त होंगे और जीवनसाथी के साथ संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।

    इसके साथ ही कन्या राशि के जातकों को इस राजयोग के प्रभाव से आकस्मिक और अप्रत्याशित धन लाभ होने की प्रबल संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। शेयर बाजार, लॉटरी या अतीत में किए गए किसी पुराने निवेश से इस समय भारी मुनाफा हाथ लग सकता है। नौकरीपेशा वर्ग से जुड़े लोगों को उच्च अधिकारियों के पूर्ण सहयोग के साथ बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी या पदोन्नति मिलने के स्पष्ट संकेत हैं। विशेष रूप से जो लोग रचनात्मक कार्यों, लेखन, कला, मीडिया या डिजिटल मीडिया के क्षेत्र से जुड़े हैं, उनकी कल्पनाशीलता और कार्यक्षमता इस दौरान अपने सर्वोच्च स्तर पर होगी।

    इस राजयोग की चौथी सबसे महत्वपूर्ण लाभार्थी राशि कुंभ है, जिसके स्वयं स्वामी ग्रह शनि देव हैं। शनि की विशेष कृपा के चलते कुंभ राशि के जातकों के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यदि इस राशि के जातक लंबे समय से किसी नए व्यापार, स्टार्टअप या स्वतंत्र कार्य की शुरुआत करने की योजना बना रहे थे, तो उनके लिए यह समय सबसे अधिक अनुकूल और सफलता की गारंटी देने वाला सिद्ध होगा। इसके प्रभाव से पिछले कई महीनों से चला आ रहा मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी विकार भी पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे।

  • इस साल 25 जुलाई से होगी चतुर्मास की शुरुआत…. चार महीने में पड़ेंगे कई बड़े व्रत-त्यौहार…..

    इस साल 25 जुलाई से होगी चतुर्मास की शुरुआत…. चार महीने में पड़ेंगे कई बड़े व्रत-त्यौहार…..


    नई दिल्ली।
    चातुर्मास (Chaturmas 2026) देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) से प्रारंभ होता है और देवउठनी एकादशी पर समाप्‍त होता है. इन 4 महीनों में रक्षाबंधन, जन्‍माष्‍टमी, गणेशोत्‍सव, शारदीय नवरात्रि, दशहरा, दिवाली जैसे बड़े त्‍योहार पड़ेंगे. साथ ही सावन महीना भी आएगा। इस साल चातुर्मास 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होगा और 20 नवंबर 2026 देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) पर समाप्‍त होगा. देखिए चातुर्मास के 4 महीनों के सभी व्रत-त्‍योहार की लिस्‍ट।

    चातुर्मास 2026 व्रत-त्‍योहार लिस्‍ट
    – चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026 – देवशयनी एकादशी
    – गुरु पूर्णिमा – 29 जुलाई 2026
    – सावन मास आरंभ – 30 जुलाई 2026
    – कामिका एकादशी – 9 अगस्‍त 2026
    – सावन शिवरात्रि – 12 अगस्‍त 2026
    – हरियाली तीज – 15 अगस्‍त 2026
    – नागपंचमी – 17 अगस्‍त 2026
    – पुत्रदा एकादशी – 23 अगस्‍त 2026
    – रक्षाबंधन, श्रावण पूर्णिमा – 28 अगस्त 2026 (सावन महीना समाप्‍त)
    – कजरी तीज – 31 अगस्‍त 2025
    – जन्‍माष्‍टमी – 4 सितंबर 2026
    – अजा एकादशी – 7 सितंबर 2026
    – गणेश चतुर्थी (गणेश स्‍थापना) – 14 सितंबर 2026
    – गणेश विसर्जन, अनंत चतुर्दशी – 25 सितंबर 2026
    – शारदीय नवरात्रि – 11 अक्‍टूबर 2026 से प्रारंभ
    – नवरात्रि नवमी – 19 अक्‍टूबर 2026
    – दशहरा – 20 अक्‍टूबर 2026
    – पापकुंशा एकादशी – 22 अक्‍टूबर 2026
    – करवा चौथ – 29 अक्‍टूबर 2026
    – रमा एकादशी – 5 नवंबर 2026
    – धन तेरस – 6 नवंबर 2026
    – नरक चतुर्दशी – 8 नवंबर 2026 (दिवाली की तारीख कुछ पंचांग में 8 नवंबर भी दी गई है)
    – दिवाली – 9 नवंबर 2026
    – गोवर्धन पूजा – 10 नवंबर 2026
    – भाई दूज – 11 नवंबर 2026
    – छठ पूजा – 15 नवंबर 2026
    – देवउठनी एकादशी – 20 नवंबर 2026

  • प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के पर्व ‘हेराथ पोश्ते’ पर दी शुभकामनाएं

    प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के पर्व ‘हेराथ पोश्ते’ पर दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाने वाले पवित्र त्योहार हेराथ पोश्ते के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी समुदाय के सदस्यों के जीवन में स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।प्रधानमंत्री मोदी ने संदेश में कहा, इस पवित्र अवसर पर, मैं सभी के जीवन में स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करता हूं। यह नए सफलता के मार्ग खोले और हर घर को खुशियों और संतोष से भर दे। उन्होंने इस त्योहार के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कश्मीरी पंडित समुदाय की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

    हेराथ पोश्ते का पर्व कश्मीरी पंडित समुदाय में धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक प्रथाओं और ऐतिहासिक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है। इस अवसर पर परिवार और समुदाय के लोग मिलकर पूजा-अर्चना और उत्सव आयोजित करते हैं, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक बंधन मजबूत होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने इस पर्व के अवसर पर समुदाय में उत्साह और आनंद की भावना बढ़ा दी है। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि यह पर्व सभी के लिए खुशियों और सफलता का संदेश लेकर आए। उनके संदेश ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय समाज में सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं का सम्मान सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    हेराथ पोश्ते के अवसर पर कश्मीरी पंडित समुदाय देशभर में अपने घरों और मंदिरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजन करता है। इस पर्व के माध्यम से युवा पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुभकामना संदेश के माध्यम से समाज में भाईचारे और सामूहिक कल्याण की भावना को भी उजागर किया। उनके संदेश ने न केवल कश्मीरी पंडित समुदाय, बल्कि पूरे देश में सांस्कृतिक और धार्मिक सौहार्द्र की भावना को बल दिया।

  • त्योहारों पर हवाई किराए में भारी वृद्धि को SC ने बताया 'शोषण', DGCA से मांगा जवाब

    त्योहारों पर हवाई किराए में भारी वृद्धि को SC ने बताया 'शोषण', DGCA से मांगा जवाब


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने त्योहारों के दौरान हवाई किराए (Airfares) में होने वाली अत्यधिक वृद्धि पर चिंता जताते हुए सोमवार को कहा कि वह इस संबंध में ‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’ को लेकर हस्तक्षेप करेगा। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए विमानन कंपनियों (Aviation companies) द्वारा हवाई किराए (Airfares) में अत्यधिक वृद्धि को ‘शोषण’ करार दिया और केंद्र सरकार तथा नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से अपना जवाब दाखिल करने को कहा। याचिका में निजी विमानन कंपनियों के हवाई किराए और अन्य शुल्कों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाध्यकारी नियामक दिशानिर्देशों का अनुरोध किया गया है।

    पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक से कहा, ‘हम निश्चित रूप से हस्तक्षेप करेंगे। कुंभ और अन्य त्योहारों के दौरान यात्रियों के शोषण को ही देख लीजिए। दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर के किराए पर नजर डालिए।’ न्यायमूर्ति मेहता ने अदालत में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि हो सकता है अहमदाबाद के हवाई किराए में वृद्धि न हुई हो, लेकिन जोधपुर जैसे अन्य गंतव्यों के लिए किराए में भारी वृद्धि हुई है।

    केंद्र की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए कौशिक द्वारा समय मांगे जाने के अनुरोध के बाद, शीर्ष अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 23 फरवरी की तारीख तय की।

    पिछले साल 17 नवंबर को, शीर्ष अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा था, जिन्होंने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक की स्थापना का अनुरोध किया। न्यायालय ने केंद्र सरकार, डीजीसीए और भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है।

    याचिका में दावा किया गया कि सभी निजी विमानन कंपनियों ने बिना किसी ठोस वजह के ‘इकोनॉमी क्लास’ के यात्रियों के लिए मुफ्त ‘चेक-इन बैगेज’ 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दिया है, ‘जिससे पहले जो टिकट सेवा का हिस्सा था, उसे राजस्व के एक नए स्रोत में बदल दिया गया है।’ इसमें कहा गया है कि ‘चेक-इन के लिए केवल एक ही सामान की अनुमति देने की नई नीति और चेक-इन बैगेज का लाभ न उठाने वाले यात्रियों को किसी भी प्रकार की छूट, मुआवजा या लाभ न देना इस उपाय की मनमानी और भेदभावपूर्ण प्रकृति को दर्शाता है।’

    याचिका में दावा किया गया कि वर्तमान में, किसी भी प्राधिकरण के पास हवाई किराए या अन्य सहायक शुल्कों की समीक्षा करने या उन पर अंकुश लगाने की शक्ति नहीं है, जिससे विमानन कंपनियों को छिपे हुए शुल्कों और अप्रत्याशित मूल्य निर्धारण के माध्यम से उपभोक्ताओं का शोषण करने की अनुमति मिलती है। इसमें कहा गया है कि नियामकीय नियंत्रण के अभाव के कारण मनमाने ढंग से किराए में बढ़ोतरी होती है, खासकर त्योहारों या विशेष स्थिति में, जिससे गरीब और अंतिम समय में यात्रा का कार्यक्रम बनाने वाले यात्रियों को नुकसान होता है।

    याचिका में कहा गया है कि अमीर लोग पहले से योजना बना सकते हैं और टिकट बुक कर सकते हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को अत्यधिक कीमत पर टिकट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।