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  • पाकिस्तान में 500 किलो मानव प्लेसेंटा बरामद, भेड़ की नाल बताकर विदेश भेजने की थी तैयारी

    पाकिस्तान में 500 किलो मानव प्लेसेंटा बरामद, भेड़ की नाल बताकर विदेश भेजने की थी तैयारी


    नई दिल्ली । पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से मानव अंगों की कथित तस्करी से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी एफआईए ने दावा किया है कि उसने छापेमारी के दौरान करीब 500 किलोग्राम मानव प्लेसेंटा यानी गर्भनाल बरामद की है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस प्लेसेंटा को भेड़ की गर्भनाल बताकर विदेश भेजने की तैयारी की जा रही थी। मामले में तीन चीनी नागरिकों और दो पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया गया है।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अस्पतालों से मानव प्लेसेंटा एकत्र कर उसे पशु उत्पाद के रूप में घोषित करते थे ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तस्करी की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए सभी नमूनों को वैज्ञानिक जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है ताकि यह पुष्टि की जा सके कि बरामद सामग्री वास्तव में मानव प्लेसेंटा ही है।

    जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पाकिस्तान में अपनी तरह का पहला बड़ा मामला माना जा रहा है। आरोप है कि इस नेटवर्क के सदस्य इस्लामाबाद और रावलपिंडी के अस्पतालों से प्रत्येक प्लेसेंटा बेहद कम कीमत पर खरीदते थे और बाद में उसे विदेश भेजकर भारी मुनाफा कमाने की योजना बनाते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर भेज दिया गया।

    क्या होता है प्लेसेंटा

    प्लेसेंटा गर्भावस्था के दौरान बनने वाला एक अस्थायी अंग होता है जो मां और गर्भ में पल रहे शिशु के बीच पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। यह गर्भनाल के माध्यम से भ्रूण से जुड़ा रहता है और बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रसव के बाद इसकी आवश्यकता समाप्त हो जाती है और यह शरीर से बाहर निकल जाता है।

    किस काम आता है प्लेसेंटा

    दुनिया के कई देशों में प्लेसेंटा का उपयोग चिकित्सा अनुसंधान और कुछ विशेष उपचारों में किया जाता है। इससे प्राप्त ऊतकों का इस्तेमाल गंभीर जलन, गहरे घाव, अल्सर और आंखों से जुड़ी कुछ सर्जरी में किया जाता है। कुछ शोधों में प्लेसेंटा से प्राप्त जैविक तत्वों के संभावित चिकित्सीय उपयोगों पर भी अध्ययन जारी हैं। हालांकि इसके संग्रह, संरक्षण और उपयोग के लिए अधिकांश देशों में सख्त कानूनी और नैतिक नियम लागू हैं।

    कुछ देशों में पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर प्लेसेंटा का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जाता है, लेकिन ऐसे उपयोग वैज्ञानिक रूप से सार्वभौमिक रूप से स्वीकार नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानव जैविक ऊतकों का किसी भी प्रकार का व्यापार या निर्यात केवल संबंधित कानूनों और चिकित्सा मानकों के तहत ही किया जाना चाहिए।

    फिलहाल पाकिस्तान की जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित तस्करी का अंतिम गंतव्य कौन सा देश था और इसमें किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका हो सकती है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला मानव जैविक सामग्री की अवैध तस्करी के सबसे बड़े मामलों में शामिल हो सकता है।

  • भीख और अवैध यात्रा से पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें, 50 हजार से ज्यादा नागरिकों को कई देशों ने किया बाहर

    भीख और अवैध यात्रा से पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें, 50 हजार से ज्यादा नागरिकों को कई देशों ने किया बाहर


    इस्लामाबाद/पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और गंभीर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। आतंकवाद के आरोपों के बाद अब पाकिस्तानी भिखारियों और अवैध प्रवासियों के कारण कई देश परेशान हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि अलग-अलग देशों ने 50 हजार से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को या तो अपने यहां से बाहर निकाल दिया या एयरपोर्ट पर ही प्रवेश देने से रोक दिया।यह चौंकाने वाली जानकारी पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की ओवरसीज पाकिस्तानियों और मानवाधिकारों पर स्थायी समिति की बैठक में सामने आई। बैठक में फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी FIA के महानिदेशक रिफ्फत मुख्तार राजा ने विस्तृत आंकड़े पेश किए।

    सऊदी अरब सबसे सख्त हजारों पाकिस्तानी लौटाए गए

    एफआईए डीजी के मुताबिक इस साल सबसे ज्यादा निर्वासन सऊदी अरब से हुआ है। वहां भीख मांगने के आरोप में करीब 24000 पाकिस्तानी नागरिकों को देश से बाहर कर दिया गया। सऊदी प्रशासन का कहना है कि इन लोगों ने धार्मिक यात्राओं और वीजा की शर्तों का गलत इस्तेमाल किया।
    इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरातUAE ने भी 6000 पाकिस्तानियों को निर्वासित किया जबकि अजरबैजान से करीब 2500 लोगों को भिखारी होने के आरोप में बाहर निकाला गया। इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा नुकसान पहुंचा है।

    एयरपोर्ट पर ही रोके गए हजारों लोग

    एफआईए डीजी ने समिति को बताया कि सिर्फ निर्वासन ही नहीं बल्कि हजारों पाकिस्तानियों को विदेश यात्रा से पहले ही रोक दिया गया। जांच में सामने आया कि कई लोग उमरा वीजा का बहाना बनाकर यूरोप जाने की कोशिश कर रहे थे।उन्होंने कहा कि जब इन यात्रियों के दस्तावेजों की गहन जांच की गई तो उनमें यूरोपीय देशों में अवैध प्रवेश की योजना साफ नजर आई।एफआईए प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहामजबूत सबूतों के आधार पर ऐसे यात्रियों को एयरपोर्ट पर ही यात्रा की अनुमति नहीं दी गई।

    एशियाई देशों में भी संदिग्ध गतिविधियां

    एफआईए ने समिति को यह भी बताया कि कंबोडिया और म्यांमार जैसे देशों में भी पाकिस्तानी नागरिकों की संदिग्ध आवाजाही सामने आई है।आंकड़ों के अनुसार:इस साल 24000 पाकिस्तानी कंबोडिया गए जिनमें से 12000 अब तक वापस नहीं लौटे।वहीं 4000 लोग म्यांमार पर्यटक वीजा पर गए लेकिन करीब 2500 अभी तक लापता हैं।इन मामलों को मानव तस्करी अवैध काम और संगठित गिरोहों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    कड़े कदमों से पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार

    हालांकि एफआईए डीजी ने यह भी दावा किया कि हाल के महीनों में कड़े नियंत्रण उपायों के चलते कुछ सुधार देखने को मिला है।उन्होंने बताया कि पाकिस्तान का पासपोर्ट रैंकिंग में 118वें स्थान से सुधरकर 92वें स्थान पर आ गया है।उनका कहना था कि पहले पाकिस्तान अवैध प्रवासन के मामलों में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल था लेकिन नीतियों में बदलाव और सख्ती के कारण स्थिति में आंशिक सुधार हुआ है।

    पहले भी हो चुके हैं सामूहिक निर्वासन

    इससे पहले जनवरी महीने में भी सऊदी अरब और अमेरिका समेत कई देशों ने एक ही हफ्ते में 200 से ज्यादा पाकिस्तानियों को निर्वासित किया था।पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन निर्वासनों की वजह वीजा उल्लंघन कानूनी अपराध अवैध काम और मानव तस्करी रही।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता
    इन घटनाओं ने पाकिस्तान की वैश्विक छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रहे निर्वासन और अवैध गतिविधियों के मामलों से साफ है कि कई देश अब पाकिस्तानी नागरिकों की आवाजाही को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान ने इस समस्या पर ठोस और दीर्घकालिक कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में उसके नागरिकों के लिए विदेश यात्रा और रोजगार के रास्ते और मुश्किल हो सकते हैं।