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  • विवादों और सदमे के बीच थमीं रॉब डीपरिंक की सांसें: यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद फीफा कप से बाहर हुए रेफरी की मौत से खेल जगत स्तब्ध

    विवादों और सदमे के बीच थमीं रॉब डीपरिंक की सांसें: यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद फीफा कप से बाहर हुए रेफरी की मौत से खेल जगत स्तब्ध

    नई दिल्ली । फुटबॉल जगत अभी दक्षिण अफ्रीका के युवा मिडफील्डर जेडन एडम्स के आकस्मिक निधन के गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि फीफा विश्व कप 2026 के बीच एक और दुखद खबर ने खेल प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। विश्व कप के लिए वीडियो असिस्टेंट रेफरी की सूची से बाहर किए गए नीदरलैंड के विख्यात फुटबॉल रेफरी रॉब डीपरिंक का 38 वर्ष की आयु में असामयिक निधन हो गया है। डच रेफरी के इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है, हालांकि उनकी मृत्यु के वास्तविक कारणों का खुलासा अभी तक नहीं किया गया है।

    दिवंगत रेफरी रॉब डीपरिंक का करियर शानदार रहा था और वह वर्ष 2017 से नीदरलैंड की शीर्ष घरेलू फुटबॉल लीग ‘एरेडिविजी’ में रेफरी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हाल ही में संपन्न हुए यूरो कप 2024 में भी उन्होंने वीएआर अधिकारी के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी प्रतिभा को देखते हुए ही फीफा ने उन्हें 2026 के महाकुंभ के लिए वीएआर अधिकारियों की मुख्य सूची में शामिल किया था। लेकिन टूर्नामेंट के आगाज से करीब एक महीने पहले लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस द्वारा एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के संगीन मामले में की गई उनकी गिरफ्तारी के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं।

    इस गंभीर आपराधिक मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फीफा और डच फुटबॉल एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया और डीपरिंक को विश्व कप की रेफरी टीम से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया था। हालांकि, बाद में स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिसके चलते इस कानूनी मामले को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया था। मामले के बंद होने के बाद डीपरिंक ने अपनी बेगुनाही साबित होने पर राहत की सांस ली थी, लेकिन विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित मंच से बाहर किए जाने के फैसले से वह मानसिक रूप से काफी निराश और तनाव में चल रहे थे।

    नीदरलैंड फुटबॉल संघ ने इस दुखद घटनाक्रम पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए एक आधिकारिक शोक संदेश जारी किया है। संघ ने अपने बयान में कहा कि रॉब डीपरिंक के असामयिक निधन की खबर से पूरा खेल जगत स्तब्ध है और देश ने न केवल एक अत्यंत सम्मानित खेल अधिकारी खोया है, बल्कि एक बेहद सहृदय और समर्पित साथी को भी गंवा दिया है। विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च शासी निकाय फीफा ने भी डच फुटबॉल संघ और दिवंगत रेफरी के पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। खेल इतिहास में इस विश्व कप को खिलाड़ियों और अधिकारियों की अप्रत्याशित क्षति के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।

  • विश्व कप के बाद बड़ा बदलाव, मेक्सिको ने राफेल मार्केज को बनाया हेड कोच, 2030 तक रहेगा नया मिशन

    विश्व कप के बाद बड़ा बदलाव, मेक्सिको ने राफेल मार्केज को बनाया हेड कोच, 2030 तक रहेगा नया मिशन


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद मेक्सिको फुटबॉल टीम ने भविष्य की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। मैक्सिकन फुटबॉल फेडरेशन ने टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज डिफेंडर राफेल मार्केज को राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का नया हेड कोच नियुक्त किया है। 47 वर्षीय मार्केज अब वर्ष 2030 तक टीम की कमान संभालेंगे और आने वाले चार वर्षों में मेक्सिको को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

    राफेल मार्केज की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब मेक्सिको को फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में इंग्लैंड के हाथों 3-2 से हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद तत्कालीन मुख्य कोच जेवियर एगुइरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि मार्केज की नियुक्ति कोई तात्कालिक फैसला नहीं बल्कि पहले से तैयार की गई दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य पिछले वर्षों में तैयार की गई टीम को आगे बढ़ाना और 2030 विश्व कप सहित अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।

    राफेल मार्केज मेक्सिको फुटबॉल इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 148 मुकाबले खेलते हुए कई वर्षों तक टीम का नेतृत्व किया और अपनी मजबूत रक्षात्मक शैली तथा नेतृत्व क्षमता से अलग पहचान बनाई। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने विश्व फुटबॉल में मेक्सिको का सम्मान बढ़ाया और अब वही अनुभव बतौर मुख्य कोच टीम के काम आएगा।

    कोचिंग की बात करें तो जुलाई 2024 से वह जेवियर एगुइरे के सहयोगी के रूप में राष्ट्रीय टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा थे। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के साथ नजदीक से काम किया और टीम की रणनीतियों को समझा। अब पहली बार उन्हें पूरी टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ी और सहायक कोच के रूप में उनके अनुभव का लाभ मेक्सिको को आने वाले वर्षों में मिल सकता है।

    पूर्व कोच जेवियर एगुइरे का तीसरा कार्यकाल लगभग दो वर्षों तक चला और इस दौरान उन्होंने टीम को कई महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाईं। उनके नेतृत्व में मेक्सिको ने 2025 में कॉनकाकाफ गोल्ड कप और नेशंस लीग का खिताब अपने नाम किया। उनके कार्यकाल में टीम ने कुल 50 मुकाबले खेले जिनमें 33 जीत दर्ज कीं जबकि 9 मैच ड्रॉ रहे और केवल 8 में हार मिली। इस प्रदर्शन को मेक्सिको फुटबॉल के हालिया वर्षों के सबसे सफल दौरों में माना जाता है।

    मैक्सिकन फुटबॉल फेडरेशन ने एगुइरे के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने टीम को नई दिशा दी और ऐसी मजबूत नींव तैयार की जिस पर भविष्य की सफल टीम बनाई जा सकती है। स्वयं एगुइरे ने भी पद छोड़ते समय संकेत दिया था कि राफेल मार्केज इस जिम्मेदारी के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प हैं। उन्होंने कहा था कि टीम का भविष्य सुरक्षित हाथों में है और आने वाले चार वर्षों में मार्केज मेक्सिको फुटबॉल को नई पहचान दिलाने की क्षमता रखते हैं।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि महान खिलाड़ी के रूप में अपनी छाप छोड़ने वाले राफेल मार्केज क्या कोच के रूप में भी वही सफलता दोहरा पाते हैं। मेक्सिको के प्रशंसकों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में टीम 2030 विश्व कप तक दुनिया की मजबूत फुटबॉल टीमों में अपनी जगह और मजबूत करेगी।

  • वर्ल्ड कप के बीच मेसी के पिता गंभीर रूप से बीमार, निधन की अफवाहों पर परिवार ने जारी किया कड़क बयान

    वर्ल्ड कप के बीच मेसी के पिता गंभीर रूप से बीमार, निधन की अफवाहों पर परिवार ने जारी किया कड़क बयान

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत के सबसे बड़े मंच फीफा वर्ल्ड कप के रोमांच के बीच अर्जेंटीना के महान कप्तान और दिग्गज स्ट्राइकर लियोनेल मेसी के परिवार पर दुखों का बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है। टूर्नामेंट के व्यस्त और उच्च दबाव वाले शेड्यूल के दौरान मेसी के परिवार ने उनके पिता जॉर्ज मेसी की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान जारी किया है। परिवार ने पुष्टि की है कि 68 वर्षीय जॉर्ज मेसी इस समय एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण बीमारी का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते उन्हें कड़े मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। इस संवेदनशील खबर के सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और मेसी के प्रशंसकों में गहरी चिंता की लहर दौड़ गई है।

    मेसी परिवार की ओर से जारी किए गए इस आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि जॉर्ज मेसी इस समय एक बड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौती से पूरी बहादुरी से लड़ रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक विशेष दल की सीधी निगरानी में उनका सघन उपचार किया जा रहा है। राहत की बात यह है कि चिकित्सीय प्रक्रिया के बीच उनकी सेहत में धीरे-धीरे सकारात्मक सुधार भी दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से परिवार ने वर्तमान में इस गंभीर बीमारी के सटीक स्वरूप या उसके नाम को लेकर किसी भी प्रकार की विस्तृत तकनीकी जानकारी को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करने का फैसला किया है।

    यह आधिकारिक वक्तव्य अर्जेंटीना और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जॉर्ज मेसी के अचानक निधन की भ्रामक और अनियंत्रित अफवाहें तेजी से फैलने के तुरंत बाद सामने आया है। सोशल मीडिया और कुछ अनधिकृत पोर्टल्स पर प्रसारित की जा रही इन झूठी खबरों ने विश्व कप में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे कप्तान और उनके परिजनों को गहरी मानसिक पीड़ा पहुंचाई। स्थिति को बिगड़ते देख मेसी परिवार को स्वयं आगे आकर इन भ्रामक अटकलों का खंडन करना पड़ा। परिवार ने वैश्विक मीडिया और आम जनता से पुरजोर अपील करते हुए कहा है कि इस बेहद संवेदनशील समय में सभी को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी, परम संयम और बुनियादी इंसानियत का परिचय देना चाहिए।

    जारी बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि किसी भी व्यक्ति के नाजुक स्वास्थ्य और उसके परिवार की आंतरिक मानसिक शांति को गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग या सस्पेंस का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। परिवार ने स्पष्ट चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि जॉर्ज मेसी के स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी वास्तविक और प्रामाणिक प्रगति केवल और केवल परिवार द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक बुलेटिन के माध्यम से ही साझा की जाएगी। इसलिए बाहरी स्रोतों या अपुष्ट दावों पर किसी को भी विश्वास नहीं करना चाहिए।

    इससे पहले चालू वर्ल्ड कप के अपने शुरुआती मुकाबले में अर्जेंटीना की टीम ने अल्जीरिया पर 3-0 की एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की थी। उस ऐतिहासिक मैच की समाप्ति के बाद स्वयं कप्तान लियोनेल मेसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को स्वीकार किया था कि वह अपनी निजी जिंदगी में एक बेहद कठिन और दर्दनाक दौर से गुजर रहे हैं। उस समय उन्होंने अपनी इस गहरी व्यक्तिगत परेशानी के मुख्य कारण का खुलासा तो नहीं किया था, लेकिन अब इस आधिकारिक बयान के आने के बाद यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि मेसी मैदान पर अपनी राष्ट्रीय टीम की कप्तानी करने के साथ-साथ बैकग्राउंड में अपने पिता की नाजुक सेहत को लेकर कितने गहरे मानसिक तनाव और चिंता से घिरे हुए हैं।

  • वैश्विक खेल इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन आज से, 104 कड़े मुकाबलों के बीच खिताब बचाने उतरेगी अर्जेंटीना और लियोनेल मेसी की सेना

    वैश्विक खेल इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन आज से, 104 कड़े मुकाबलों के बीच खिताब बचाने उतरेगी अर्जेंटीना और लियोनेल मेसी की सेना


    नई दिल्ली । खेल जगत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मंच फीफा विश्व कप 2026 का ऐतिहासिक शंखनाद हो गया है। उत्तरी अमेरिका के तीन देशों, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाला यह टूर्नामेंट फुटबॉल के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और भव्य आयोजन बनने जा रहा है। खेल के स्वरूप में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए इस बार प्रतिस्पर्धा करने वाली टीमों की संख्या को बढ़ाकर 48 कर दिया गया है। टीमों की संख्या बढ़ने के कारण इस महाकुंभ में कुल 104 हाई-वोल्टेज मुकाबले खेले जाएंगे, जो दुनिया भर के खेल प्रशंसकों को एक नया रोमांच प्रदान करेंगे।

    टूर्नामेंट का आधिकारिक उद्घाटन मैक्सिको सिटी के ऐतिहासिक स्टेडियम में एक बेहद भव्य और रंगारंग समारोह के साथ हुआ। इस उद्घाटन समारोह में दुनिया भर के शीर्ष संगीतकारों और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया, जिसमें वैश्विक पॉप स्टार्स ने फीफा के आधिकारिक एंथम पर लाइव परफॉर्म किया। इस सांस्कृतिक और खेल महोत्सव को दुनिया के कोने-कोने में प्रसारित किया जा रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप में भी खेल प्रेमियों के लिए व्यापक प्रसारण व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि वे अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में इस वैश्विक उत्सव का सीधा आनंद उठा सकें। इसके अतिरिक्त खेल के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए कुछ विशेष और महत्वपूर्ण नॉकआउट मुकाबलों के मुफ्त प्रसारण की भी व्यवस्था की गई है।

    इस बार का विश्व कप न केवल टीमों और मैचों की संख्या के लिहाज से बड़ा है, बल्कि इसकी वित्तीय संरचना भी ऐतिहासिक है। शासी निकाय ने इस टूर्नामेंट के लिए कुल प्रदर्शन-आधारित पुरस्कार राशि को बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। टूर्नामेंट की विजेता टीम को मिलने वाली इनामी राशि अन्य वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं की तुलना में कई गुना अधिक है। इस वित्तीय प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतियोगिता में अंतिम पायदान पर रहने वाली टीम को भी एक बड़ी धनराशि सहायता और भागीदारी शुल्क के रूप में मिलेगी, जो कई अन्य खेलों के कुल बजट से भी अधिक है। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि वैश्विक खेल बाजार में फुटबॉल का आर्थिक साम्राज्य कितना मजबूत है।

    अगर इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो पिछले 96 वर्षों के सफर में इस चमचमाती सुनहरी ट्रॉफी पर केवल आठ देशों का ही कब्जा रहा है। ब्राजील, जर्मनी, इटली और अर्जेंटीना जैसे दिग्गजों ने इस खेल पर हमेशा अपना वर्चस्व बनाए रखा है। इस बार भी मुख्य मुकाबला इन्हीं पारंपरिक महाशक्तियों के बीच माना जा रहा है, लेकिन टूर्नामेंट के बढ़े हुए प्रारूप ने छोटे और उभरते हुए देशों के लिए भी बड़े उलटफेर करने के रास्ते खोल दिए हैं। मध्य प्रदेश सहित भारत के तमाम राज्यों के फुटबॉल जानकारों का मानना है कि इस बार ग्रुप स्टेज में कड़े मुकाबले देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि हर टीम इस ऐतिहासिक मंच पर खुद को साबित करने के लिए पूरी जान लगा देगी।

    इस पूरे टूर्नामेंट में दुनिया भर की खेल प्रेमी जनता की नजरें विशेष रूप से डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना और उनके करिश्माई कप्तान लियोनेल मेसी पर टिकी हुई हैं। आधुनिक फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार मेसी के करियर का यह आखिरी विश्व कप माना जा रहा है, जिससे इस अभियान की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। अर्जेंटीना के सामने अपनी बादशाहत को बरकरार रखने की बहुत बड़ी चुनौती होगी क्योंकि फ्रांस, ब्राजील और पुर्तगाल जैसी मजबूत टीमें उन्हें कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अगले कुछ हफ्तों तक चलने वाला यह खेल उत्सव यह तय करेगा कि दुनिया को कोई नया चैंपियन मिलता है या फिर पुराने दिग्गजों का ही दबदबा कायम रहता है।
  • टॉप-10 की रेस में शामिल होने वाले एकमात्र अंग्रेज खिलाड़ी बने हैरी केन..

    टॉप-10 की रेस में शामिल होने वाले एकमात्र अंग्रेज खिलाड़ी बने हैरी केन..

    नई दिल्ली । फुटबॉल जगत के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े महाकुंभ, फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत से पहले मैदान पर उतरने वाले दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की वित्तीय संपत्तियों का एक बड़ा खुलासा हुआ है। खेल के मैदान पर विश्व कप की चमचमाती ट्रॉफी जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने वाले ये अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मैदान से बाहर आर्थिक मोर्चे पर भी बड़े कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। हाल ही में जारी की गई एक वैश्विक सूची के अनुसार, क्लब फुटबॉल, भारी-भरकम विज्ञापन अनुबंधों और दूरदर्शी निजी व्यावसायिक निवेशों के दम पर इन खेल सितारों ने अरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया है।

    इस सूची के वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पुर्तगाल के दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। रोनाल्डो की कुल अनुमानित संपत्ति अब एक अरब पाउंड यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 12,773 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े के करीब पहुंच चुकी है। सऊदी अरब के प्रतिष्ठित क्लब अल-नस्र के साथ हुआ उनका सालाना 173 मिलियन पाउंड का करार उनकी कमाई का मुख्य जरिया है। इसके अतिरिक्त, रोनाल्डो ने खेल से इतर होटल श्रृंखला, अत्याधुनिक जिम, खुद के फैशन ब्रांड और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश कर अपनी वित्तीय स्थिति को बेहद मजबूत किया है।

    इस धनकुबेर सूची में दूसरे स्थान पर अर्जेंटीना को विश्व चैंपियन बनाने वाले कप्तान लियोनल मेसी का नाम शामिल है। मेसी की कुल अनुमानित नेटवर्थ 742 मिलियन पाउंड यानी करीब 9,476 करोड़ रुपये आंकी गई है। अमेरिकी क्लब इंटर मियामी से मिलने वाले वेतन के अलावा वैश्विक खेल ब्रांड एडिडास सहित कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ उनकी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी उनकी इस विशाल कमाई का एक बड़ा आधार है। वहीं, ब्राजील के स्टार फारवर्ड नेमार इस फेहरिस्त में 334 मिलियन पाउंड (लगभग 4,266 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर मजबूती से बने हुए हैं। बार्सिलोना और पीएसजी के बाद अब अल-हिलाल क्लब से मिलने वाले पैसों और दुनिया के सबसे महंगे जूता ब्रांड के साथ उनके विज्ञापन सौदे ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है।

    फ्रांस के युवा सनसनी किलियन एमबाप्पे इस सूची में चौथे स्थान पर काबिज हैं। स्पेनिश जाइंट रियल मैड्रिड के साथ हुए उनके नए अनुबंध और नाइकी व हबलोट जैसे लग्जरी ब्रांडों के साथ एंडोर्समेंट के चलते उनकी नेटवर्थ 186 मिलियन पाउंड (करीब 2,376 करोड़ रुपये) तक पहुंच चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी सूची में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र खिलाड़ी उनके कप्तान हैरी केन हैं। जर्मन क्लब बायर्न म्यूनिख के लिए खेलने वाले हैरी केन 110 मिलियन पाउंड (लगभग 1,405 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ पांचवें स्थान पर हैं।

    सूची के निचले आधे हिस्से की बात करें तो मिस्र के स्टार मोहम्मद सलाह 104 मिलियन पाउंड के साथ छठे स्थान पर हैं, जिन्हें लिवरपूल क्लब से प्रति सप्ताह करीब चार लाख पाउंड का भारी-भरकम वेतन मिलता है। उनके बाद दक्षिण कोरिया के सोन ह्युंग-मिन (74 मिलियन पाउंड) सातवें और अल्जीरिया के रियाद महरेज (63 मिलियन पाउंड) आठवें स्थान पर हैं। नॉर्वे के युवा गोल मशीन एरलिंग हालैंड और कोलंबिया के जेम्स रोड्रिगेज दोनों ही 59-59 मिलियन पाउंड (लगभग 754 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ क्रमशः नौवें और दसवें स्थान पर मौजूद हैं। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि आधुनिक युग में फुटबॉल केवल एक खेल मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह खिलाड़ियों के लिए एक बहुत बड़ा वैश्विक बिजनेस मॉडल बन चुका है।