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  • स्पेन ने जीता विश्व कप अब इनामी राशि से भी बनाया रिकॉर्ड चैंपियन को मिले 50 मिलियन डॉलर

    स्पेन ने जीता विश्व कप अब इनामी राशि से भी बनाया रिकॉर्ड चैंपियन को मिले 50 मिलियन डॉलर


    नई दिल्ली  । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद स्पेन सिर्फ ट्रॉफी का ही नहीं बल्कि रिकॉर्ड इनामी राशि का भी हकदार बन गया। फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने वाली स्पेनिश टीम पर करोड़ों रुपए की बारिश हुई। फीफा ने चैंपियन टीम को 50 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 480 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की। पिछले विश्व कप की तुलना में इस बार विजेता टीम की इनामी राशि में 8 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की गई थी जिससे इस जीत का महत्व और भी बढ़ गया।

    फाइनल में हारने के बावजूद अर्जेंटीना भी खाली हाथ नहीं लौटा। उपविजेता टीम को 33 मिलियन डॉलर यानी लगभग 318 करोड़ रुपए की इनामी राशि मिली। वहीं तीसरे स्थान पर रहने वाली इंग्लैंड को 29 मिलियन डॉलर यानी करीब 279 करोड़ रुपए और चौथे स्थान पर रही फ्रांस को 27 मिलियन डॉलर यानी लगभग 260 करोड़ रुपए दिए गए। क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली प्रत्येक टीम को 19 मिलियन डॉलर जबकि प्री क्वार्टर फाइनल यानी राउंड ऑफ 16 में बाहर होने वाली टीमों को 15 मिलियन डॉलर की पुरस्कार राशि दी गई।

    फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंच गया। मैच का फैसला 106वें मिनट में हुआ जब स्पेन के स्टार खिलाड़ी फेरान टोरेस ने शानदार गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। यही गोल निर्णायक साबित हुआ और स्पेन ने 16 वर्षों बाद एक बार फिर विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इससे पहले स्पेन ने वर्ष 2010 में पहली बार फुटबॉल विश्व कप का खिताब जीता था।

    पूरे टूर्नामेंट में स्पेन का प्रदर्शन संतुलित और अनुशासित रहा। टीम की मजबूत रक्षापंक्ति उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। स्पेन ने पूरे विश्व कप अभियान में केवल एक गोल खाया जो उसकी शानदार डिफेंसिव रणनीति का प्रमाण है। आक्रमण और रक्षा के बेहतरीन तालमेल ने टीम को लगातार जीत दिलाई और आखिरकार विश्व विजेता बना दिया।

    स्पेन की सफलता में मिडफील्डर रोड्री की भूमिका भी बेहद अहम रही। पूरे टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया और प्रतिष्ठित गोल्डन बॉल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रोड्री ने अपनी सूझबूझ शानदार पासिंग और खेल पर नियंत्रण की क्षमता से स्पेन के अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

    विश्व कप 2026 का समापन स्पेन की ऐतिहासिक जीत के साथ हुआ जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि मजबूत टीम वर्क अनुशासित खेल और प्रभावी रणनीति किसी भी बड़े टूर्नामेंट में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है।

  • सेमीफाइनल से पहले जो कोल की भविष्यवाणी इंग्लैंड रोकेगा मेसी का जादू और बनाएगा फाइनल का रास्ता

    सेमीफाइनल से पहले जो कोल की भविष्यवाणी इंग्लैंड रोकेगा मेसी का जादू और बनाएगा फाइनल का रास्ता


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल मुकाबले से पहले इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच होने वाली टक्कर को लेकर उत्साह चरम पर है। इसी बीच इंग्लैंड के पूर्व स्टार फुटबॉलर जो कोल ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इंग्लैंड की टीम अर्जेंटीना के कप्तान और दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शामिल लियोनेल मेसी को रोकने में सफल रहेगी। अटलांटा स्टेडियम में होने वाले इस हाईवोल्टेज मुकाबले से पहले उनके बयान ने फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है।

    करीब 21 साल बाद इंग्लैंड और अर्जेंटीना की टीमें फिर विश्व कप के मंच पर आमने सामने होंगी। दोनों देशों के बीच फुटबॉल प्रतिद्वंद्विता दशकों पुरानी है और हर मुकाबला इतिहास और भावनाओं से जुड़ा रहा है। विश्व कप में अब तक दोनों टीमें पांच बार भिड़ चुकी हैं। 1962 1966 1986 1998 और 2002 के मुकाबले फुटबॉल इतिहास के सबसे चर्चित मैचों में गिने जाते हैं। पिछली बार जापान में खेले गए विश्व कप में इंग्लैंड ने डेविड बेकहम की पेनल्टी की बदौलत अर्जेंटीना को हराकर यादगार जीत दर्ज की थी।

    इस बार भी मुकाबला बेहद रोमांचक माना जा रहा है क्योंकि अर्जेंटीना मौजूदा विश्व चैंपियन है। टीम ने 2022 में कतर में विश्व कप जीतकर 36 साल बाद खिताब अपने नाम किया था और अब लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने की दौड़ में है। दूसरी ओर इंग्लैंड भी शानदार लय में नजर आ रहा है और लंबे इंतजार के बाद विश्व कप जीतने का सपना पूरा करना चाहता है।

    जो कोल ने एक फुटबॉल पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कहा कि इंग्लैंड की सबसे बड़ी चुनौती लियोनेल मेसी होंगे लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि टीम उनके प्रभाव को सीमित करने में सफल रहेगी। उनके अनुसार इंग्लैंड के खिलाड़ी दबाव वाले मुकाबलों में खेलने के आदी हैं और टीम की मजबूत आक्रामक रणनीति अर्जेंटीना के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेसी को रोकना जरूरी होगा और इंग्लैंड यह काम कर दिखाएगा।

    अर्जेंटीना ने इस विश्व कप में अब तक शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन उसे हर चरण में कड़ी चुनौती भी मिली है। क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड के खिलाफ मुकाबला निर्धारित समय तक बराबरी पर रहा जिसके बाद अतिरिक्त समय में जूलियन अल्वारेज और लौटारो मार्टिनेज के गोलों ने टीम को जीत दिलाई। इससे पहले राउंड ऑफ 16 में मिस्र के खिलाफ अर्जेंटीना ने दो गोल से पिछड़ने के बावजूद आखिरी मिनटों में शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम किया था। वहीं पहली बार विश्व कप खेल रही केप वर्डे ने भी अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय तक संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया था।

    हालांकि इन कठिन मुकाबलों के बावजूद अर्जेंटीना ने अब तक अपने सभी मैच जीते हैं और फ्रांस के साथ टूर्नामेंट की अपराजित टीम बनी हुई है। दूसरी ओर इंग्लैंड भी मजबूत संतुलित टीम के रूप में सामने आया है और उसके खिलाड़ी बड़े मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए जाने जाते हैं।

    अब पूरी दुनिया की नजर इस सेमीफाइनल पर टिकी है जहां एक ओर मेसी अपने करियर में एक और विश्व कप खिताब की ओर कदम बढ़ाना चाहेंगे तो दूसरी ओर इंग्लैंड उन्हें रोककर फाइनल का टिकट हासिल करने की कोशिश करेगा। फुटबॉल प्रेमियों को उम्मीद है कि यह मुकाबला विश्व कप इतिहास के सबसे यादगार सेमीफाइनल में शामिल हो सकता है।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस सबसे मजबूत दावेदार ओलिवर कान बोले संतुलित टीम ही बनाएगी चैंपियन

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस सबसे मजबूत दावेदार ओलिवर कान बोले संतुलित टीम ही बनाएगी चैंपियन


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है और सेमीफाइनल मुकाबलों से पहले फुटबॉल जगत की निगाहें चारों दावेदार टीमों पर टिकी हुई हैं। इसी बीच जर्मनी के महान गोलकीपर ओलिवर कान ने टूर्नामेंट को लेकर बड़ी भविष्यवाणी करते हुए फ्रांस को विश्व चैंपियन बनने का सबसे प्रबल दावेदार बताया है। कान का मानना है कि फ्रांस के पास संतुलित टीम गहराई से भरा स्क्वॉड और हर परिस्थिति में मुकाबला जीतने की क्षमता है जो उसे बाकी टीमों से थोड़ा आगे खड़ा करती है।

    फ्रांस का मुकाबला 15 जुलाई को डलास स्टेडियम में स्पेन से होने वाले पहले सेमीफाइनल में होगा। यह मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे बड़े और रोमांचक मुकाबलों में गिना जा रहा है। विश्व कप के नॉकआउट चरण में दोनों टीमें दूसरी बार आमने सामने होंगी। इससे पहले वर्ष 2006 के राउंड ऑफ 16 में फ्रांस ने स्पेन को 3 1 से हराकर बाहर का रास्ता दिखाया था। अब एक बार फिर दोनों यूरोपीय दिग्गज विश्व कप के फाइनल का टिकट हासिल करने के लिए आमने सामने होंगे।

    ओलिवर कान ने कहा कि यदि अब तक के प्रदर्शन के आधार पर किसी एक टीम को चुनना हो तो उनकी पहली पसंद फ्रांस होगी। उनके अनुसार फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत उसका संतुलन है। टीम के पास मजबूत डिफेंस रचनात्मक मिडफील्ड और तेज आक्रमण करने वाले खिलाड़ी मौजूद हैं। इसके साथ ही बेंच स्ट्रेंथ भी बेहद मजबूत है जिससे किसी भी समय मैच का रुख बदला जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सेमीफाइनल में पहुंची चारों टीमें खिताब जीतने की पूरी क्षमता रखती हैं और उनके बीच बहुत कम अंतर है।

    कान के अनुसार स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाला मुकाबला रणनीति और धैर्य की सबसे बड़ी परीक्षा होगा। स्पेन अपनी तेज पासिंग और गेंद पर नियंत्रण रखने वाली शैली के लिए जाना जाता है जबकि फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज पलटवार है। ऐसे में जो टीम मिडफील्ड पर नियंत्रण बनाए रखेगी और विपक्षी टीम की रणनीति को सफल नहीं होने देगी वही फाइनल का टिकट हासिल कर सकती है।

    उन्होंने कहा कि स्पेन के लिए फ्रांस की मजबूत रक्षापंक्ति को तोड़ना आसान नहीं होगा। स्पेन को लगातार धैर्य के साथ आक्रमण करना होगा तेज पासिंग करनी होगी और मैदान के अहम हिस्सों में अतिरिक्त खिलाड़ियों की मौजूदगी बनाए रखनी होगी। साथ ही उसे अपने डिफेंस को भी मजबूत रखना होगा क्योंकि फ्रांस दुनिया की सबसे खतरनाक काउंटर अटैक करने वाली टीमों में शामिल है और छोटी सी गलती भी मैच का परिणाम बदल सकती है।

    कान ने यह भी कहा कि बड़े मुकाबलों का फैसला अक्सर छोटे छोटे पलों से होता है। केवल लगातार दबाव बनाना ही काफी नहीं होता बल्कि सही समय पर समझदारी से प्रेसिंग करना और मिडफील्ड में नियंत्रण बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। जो टीम विपक्षी को खुलकर खेलने का मौका नहीं देगी उसके जीतने की संभावना अधिक होगी।

    अपने लंबे गोलकीपिंग अनुभव को साझा करते हुए ओलिवर कान ने आधुनिक फुटबॉल में गोलकीपर की बदलती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का गोलकीपर केवल गोल बचाने वाला खिलाड़ी नहीं रह गया है बल्कि वह टीम के आक्रमण की शुरुआत करने वाला पहला खिलाड़ी और अंतिम रक्षक दोनों की भूमिका निभाता है। गोलकीपर का एक सही फैसला मैच जितवा सकता है जबकि एक छोटी सी गलती पूरी टीम की मेहनत पर पानी फेर सकती है।

    उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में वही टीमें सफल होती हैं जो दबाव के बीच भी शांत रहती हैं अपने गेम प्लान पर कायम रहती हैं और भावनाओं के बजाय सही समय पर सही फैसले लेती हैं। यही विशेषताएं फ्रांस की टीम में साफ दिखाई देती हैं और यही वजह है कि वह इस बार विश्व कप ट्रॉफी जीतने की सबसे मजबूत दावेदार नजर आती है।

  • स्पेन ने 16 साल बाद रचा इतिहास, बेल्जियम को 2-1 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में एंट्री

    स्पेन ने 16 साल बाद रचा इतिहास, बेल्जियम को 2-1 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में एंट्री


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बेल्जियम को 2-1 से हराकर 16 साल बाद विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बना ली। रोमांच से भरपूर इस मुकाबले का फैसला अंतिम मिनटों में हुआ, जब सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी मिकेल मेरिनो ने निर्णायक गोल कर स्पेन को ऐतिहासिक जीत दिलाई। अब सेमीफाइनल में स्पेन की भिड़ंत पिछले विश्व कप की फाइनलिस्ट फ्रांस से होगी।

    लॉस एंजिल्स में खेले गए मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने आक्रामक रवैया अपनाया और बेल्जियम के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखा। गेंद पर बेहतर नियंत्रण और तेज पासिंग के दम पर स्पेन ने कई मौके बनाए। आखिरकार 30वें मिनट में उसकी मेहनत रंग लाई। लैमिन यामल के शानदार मूव के बाद पेड्रो पोरो ने बॉक्स में सटीक लो क्रॉस दिया। गोलकीपर थिबॉट कोर्टुआ ने डैनी ओल्मो का पहला प्रयास रोक लिया, लेकिन रिबाउंड पर फैबियन रुइज ने गेंद को गोल में पहुंचाकर स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी।

    हालांकि बेल्जियम ने भी शानदार वापसी की। 41वें मिनट में टिमोथी कास्टेग्ने के बेहतरीन क्रॉस पर चार्ल्स डी केटेलेयर ने दमदार हेडर लगाकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल के साथ स्पेन के गोलकीपर उनाई साइमन की लगातार छह क्लीन शीट का सिलसिला भी समाप्त हो गया। साथ ही विश्व कप में बिना गोल खाए उनके लगातार 650 मिनट खेलने का रिकॉर्ड भी टूट गया।

    दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने कई हमले किए, लेकिन गोल नहीं हो सका। मैच के 71वें मिनट में बेल्जियम को बड़ा झटका तब लगा, जब अनुभवी गोलकीपर थिबॉट कोर्टुआ चोट के कारण मैदान छोड़ने को मजबूर हो गए। उनकी जगह युवा गोलकीपर सेने लैमेंस को उतारा गया। कोर्टुआ का यह विश्व कप में 21वां मुकाबला था और वह टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले गोलकीपरों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गए।

    जब मुकाबला अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था, तभी स्पेन के कोच ने 86वें मिनट में मिकेल मेरिनो को मैदान पर उतारा। महज दो मिनट बाद ही मेरिनो ने अपनी मौजूदगी का असर दिखा दिया। पाउ क्यूबार्सी के दूर से लगाए गए शॉट को बेल्जियम के नए गोलकीपर ठीक से नियंत्रित नहीं कर सके। गेंद उनके हाथों से छिटक गई और मेरिनो ने मौके का पूरा फायदा उठाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। यही गोल स्पेन की जीत का कारण बना।

    यह लगातार दूसरा मुकाबला रहा, जिसमें मिकेल मेरिनो ने सब्स्टीट्यूट के तौर पर उतरकर स्पेन के लिए निर्णायक गोल किया। इससे पहले उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में पुर्तगाल के खिलाफ भी अंतिम समय में विजयी गोल दागकर टीम को जीत दिलाई थी।

    इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। टीम का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है और अब उसकी नजर फ्रांस को हराकर फाइनल का टिकट हासिल करने पर होगी।

  • फ्रांस सेमीफाइनल में, मोरक्को को 2-0 से हराकर वर्ल्ड कप में लगातार तीसरी बार अंतिम चार में पहुंचा

    फ्रांस सेमीफाइनल में, मोरक्को को 2-0 से हराकर वर्ल्ड कप में लगातार तीसरी बार अंतिम चार में पहुंचा


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मोरक्को को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली। इस जीत के साथ फ्रांस लगातार तीसरी बार विश्व कप के अंतिम चार में पहुंच गया, जबकि मोरक्को का अभियान क्वार्टर फाइनल में ही समाप्त हो गया।

    मैच की शुरुआत से ही फ्रांस ने आक्रामक खेल दिखाया और मोरक्को के गोल पर लगातार दबाव बनाया। पांचवें मिनट में दायोट उपामेकानो के हेडर को गोलकीपर यासीन बुनू ने शानदार बचाव करते हुए गोल में जाने से रोक दिया। इसके बाद फ्रांस को पेनल्टी भी मिली, लेकिन कप्तान किलियन एम्बाप्पे उसे गोल में नहीं बदल सके। बुनू ने बेहतरीन सेव कर अपनी टीम को शुरुआती झटका लगने से बचाया।

    पहले हाफ में फ्रांस ने कई मौके बनाए, लेकिन मोरक्को का मजबूत डिफेंस और गोलकीपर लगातार दीवार बने रहे। नतीजतन शुरुआती 45 मिनट तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं।

    दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपनी रफ्तार और तेज कर दी। मैच के 60वें मिनट में कप्तान एम्बाप्पे ने शानदार कर्लिंग शॉट के जरिए गोल दागकर फ्रांस को 1-0 की बढ़त दिलाई। यह इस विश्व कप में उनका आठवां गोल रहा। इसके सिर्फ छह मिनट बाद उस्मान डेम्बेले ने एम्बाप्पे के सटीक पास पर गोल करते हुए बढ़त को 2-0 कर दिया।

    दो गोल की बढ़त मिलने के बाद फ्रांस ने पूरे मैच पर नियंत्रण बनाए रखा और मोरक्को को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। मजबूत डिफेंस और बेहतरीन मिडफील्ड खेल के दम पर फ्रांस ने आसानी से जीत दर्ज करते हुए सेमीफाइनल का टिकट कटाया।

    फ्रांस अब 15 जुलाई को सेमीफाइनल मुकाबले में मैदान पर उतरेगा। टीम की नजर लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने और एक बार फिर खिताब जीतने पर होगी। वहीं मोरक्को का अभियान समाप्त होने के बावजूद टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अपने जुझारू प्रदर्शन से फुटबॉल प्रशंसकों का दिल जीता।

  • फीफा विश्व कप 2026: सैबारी की चोट ने मोरक्को को दिया झटका, फ्रांस के खिलाफ नहीं उतरेंगे मैदान में

    फीफा विश्व कप 2026: सैबारी की चोट ने मोरक्को को दिया झटका, फ्रांस के खिलाफ नहीं उतरेंगे मैदान में


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल मुकाबले से पहले मोरक्को की टीम को बड़ा झटका लगा है। टीम के प्रमुख फॉरवर्ड इस्माइल सैबारी हैमस्ट्रिंग चोट के कारण फ्रांस के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले में नहीं खेल पाएंगे। उनकी गैरमौजूदगी मोरक्को के लिए बड़ा नुकसान मानी जा रही है, क्योंकि मौजूदा टूर्नामेंट में उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई है।

    मोरक्को के मुख्य कोच मोहम्मद ओआबी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैबारी के बाहर होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कनाडा के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले के दौरान सैबारी की हैमस्ट्रिंग में चोट लगी थी। मेडिकल टीम की कोशिशों के बावजूद वह समय पर पूरी तरह फिट नहीं हो सके। हालांकि कोच ने उम्मीद जताई कि यदि मोरक्को सेमीफाइनल में जगह बनाता है तो 25 वर्षीय खिलाड़ी वापसी कर सकते हैं।

    ओआबी ने कहा कि सैबारी फिलहाल खेलने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन उन्हें विश्वास है कि उनका विश्व कप अभियान यहीं खत्म नहीं होगा और वह आगे टीम के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।

    सैबारी इस विश्व कप में मोरक्को के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने ग्रुप चरण के तीनों मुकाबलों में गोल दागे, जबकि नॉकआउट दौर में नीदरलैंड के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में निर्णायक गोल कर टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया। ऐसे में उनके बाहर होने से फ्रांस के खिलाफ मोरक्को के आक्रमण की धार कमजोर पड़ सकती है और टीम को अधिक रक्षात्मक रणनीति अपनानी पड़ सकती है।

    इस मुकाबले से पहले रेफरी नियुक्ति को लेकर भी चर्चा तेज है। फीफा ने फ्रांस और मोरक्को के क्वार्टर फाइनल के लिए पूरी तरह अर्जेंटीना के अधिकारियों की टीम नियुक्त की है। मौजूदा विश्व कप में यह पहला मौका है जब किसी मैच का संचालन एक ही देश के रेफरी पैनल द्वारा किया जाएगा। हालांकि मोरक्को के कोच ने इस पर किसी तरह की चिंता जताने से इनकार किया।

    उन्होंने कहा कि अनुभवी रेफरी बड़े मुकाबलों को संभालना जानते हैं और उनकी टीम पूरी तरह अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे रही है। ओआबी ने कहा कि रेफरी का काम निष्पक्ष फैसले लेना है और उन्हें भरोसा है कि मैच का संचालन भी उसी स्तर पर होगा।

    फ्रांस और मोरक्को के बीच अब तक छह अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले गए हैं। इनमें फ्रांस ने चार मैच जीते हैं, एक मुकाबला ड्रॉ रहा है, जबकि मोरक्को को सिर्फ एक जीत मिली है। दोनों टीमें 2022 फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में भी आमने-सामने थीं, जहां फ्रांस ने 2-0 से जीत दर्ज कर फाइनल में प्रवेश किया था। ऐसे में इस बार मोरक्को के पास पुरानी हार का हिसाब चुकता करने का मौका होगा, हालांकि सैबारी की अनुपस्थिति उसके लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

  • नॉर्वे से महामुकाबले से पहले इंग्लैंड मुश्किल में, रीस जेम्स की चोट बनी चिंता, टीम चयन पर बड़ा सवाल

    नॉर्वे से महामुकाबले से पहले इंग्लैंड मुश्किल में, रीस जेम्स की चोट बनी चिंता, टीम चयन पर बड़ा सवाल


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के नॉकआउट चरण में पहुंच चुकी इंग्लैंड फुटबॉल टीम को क्वार्टर फाइनल मुकाबले से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार डिफेंडर रीस जेम्स की फिटनेस अब भी चिंता का विषय बनी हुई है और नॉर्वे के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले में उनके खेलने पर संशय बरकरार है। हैमस्ट्रिंग चोट से जूझ रहे जेम्स बुधवार को भी टीम के साथ अभ्यास नहीं कर सके जिससे इंग्लैंड के कोचिंग स्टाफ की चिंता और बढ़ गई है।

    रीस जेम्स को घाना के खिलाफ ग्रुप चरण के दूसरे मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। वह मुकाबला गोलरहित ड्रॉ पर समाप्त हुआ था और उसी के बाद से जेम्स टीम से बाहर चल रहे हैं। चोट के कारण वह मेक्सिको के खिलाफ खेले गए प्री क्वार्टर फाइनल मुकाबले में भी मैदान पर नहीं उतर सके थे। इंग्लैंड ने उस रोमांचक मुकाबले में मेक्सिको को 3-2 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई थी लेकिन अब टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रमुख डिफेंडर की उपलब्धता को लेकर है।

    इंग्लैंड के लिए मुश्किलें केवल रीस जेम्स तक सीमित नहीं हैं। मेक्सिको के खिलाफ मुकाबले में युवा डिफेंडर जेरेल क्वांसाह को रेड कार्ड मिला था जिसके कारण वह नॉर्वे के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में नहीं खेल पाएंगे। ऐसे में राइट बैक और डिफेंस की अन्य पोजीशन पर टीम के विकल्प काफी सीमित हो गए हैं। यही वजह है कि कोच थॉमस ट्यूशेल के लिए अंतिम एकादश का चयन आसान नहीं रहने वाला।

    मेक्सिको पर शानदार जीत के बाद खिलाड़ियों को रिकवरी का समय दिया गया था। इसके बाद अधिकांश खिलाड़ी स्वोप सॉकर विलेज में अभ्यास के लिए लौटे लेकिन रीस जेम्स के अलावा मार्क गुएही और डेक्लान राइस ने भी टीम के साथ नियमित ट्रेनिंग में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि टीम प्रबंधन का कहना है कि इन खिलाड़ियों के लिए अलग फिटनेस कार्यक्रम तैयार किया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    मिडफील्डर डेक्लान राइस ने संकेत दिया है कि मामूली परेशानी के बावजूद वह क्वार्टर फाइनल मुकाबले के लिए उपलब्ध रहेंगे। वहीं मार्क गुएही की अनुपस्थिति को केवल मांसपेशियों की थकान से जोड़ा गया है और उनके समय पर फिट होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इसी बीच अनुभवी मिडफील्डर जॉर्डन हेंडरसन को लेकर राहत की खबर सामने आई है। मेक्सिको के खिलाफ जीत का जश्न मनाने के दौरान उनकी कलाई में गंभीर चोट लग गई थी जिसके बाद उनकी सर्जरी करानी पड़ी। सफल ऑपरेशन के बाद वह फिर से टीम के साथ जुड़ गए हैं और फिलहाल होटल में आराम कर रहे हैं। टीम प्रबंधन के अनुसार उनकी हालत स्थिर है और वह खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए कैंप में मौजूद हैं।

    इंग्लैंड के पास क्वार्टर फाइनल मुकाबले से पहले केवल दो दिन का अभ्यास समय बचा है। इस दौरान टीम प्रबंधन की सबसे बड़ी कोशिश रीस जेम्स को पूरी तरह फिट करने की होगी। यदि वह उपलब्ध नहीं होते हैं तो इंग्लैंड को अपनी रक्षात्मक रणनीति में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। नॉर्वे के खिलाफ मुकाबला जीतने वाली टीम सेमीफाइनल में अर्जेंटीना और स्विट्जरलैंड के बीच होने वाले विजेता से भिड़ेगी। ऐसे में इंग्लैंड किसी भी कीमत पर अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता।

  • फीफा विश्व कप से बाहर होते ही इक्वाडोर में बड़ा फैसला, मेक्सिको से हार के बाद हेड कोच सेबेस्टियन बेकासे ने दिया इस्तीफा

    फीफा विश्व कप से बाहर होते ही इक्वाडोर में बड़ा फैसला, मेक्सिको से हार के बाद हेड कोच सेबेस्टियन बेकासे ने दिया इस्तीफा

    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में मेक्सिको के हाथों राउंड ऑफ 32 में मिली हार के बाद इक्वाडोर फुटबॉल टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के मुख्य कोच सेबेस्टियन बेकासे ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि विश्व कप में तय लक्ष्य हासिल नहीं हो सके, इसलिए पद छोड़ना उचित निर्णय है। उनके अनुसार विश्व कप अभियान की समाप्ति के साथ ही उनका अनुबंध भी समाप्त होना था और इसी कारण उन्होंने अपने कार्यकाल का समापन करने का फैसला लिया।

    मेक्सिको के खिलाफ खेले गए नॉकआउट मुकाबले में इक्वाडोर को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ टीम का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया। मैच के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में बेकासे ने कहा कि वह इक्वाडोर फुटबॉल महासंघ और उसके नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया। उन्होंने खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और पूरे देश का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह उनके लिए यादगार अनुभव रहा और टीम के साथ बिताया गया समय हमेशा विशेष रहेगा।

    कोच ने स्वीकार किया कि नॉकआउट मुकाबले में मेक्सिको ने हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनकी टीम अपने स्वाभाविक खेल का स्तर नहीं दिखा सकी और प्रतिद्वंद्वी जीत का हकदार था। उनके अनुसार विश्व कप जैसे बड़े मंच पर छोटी-छोटी गलतियां भी भारी पड़ती हैं और इस मुकाबले में टीम अपेक्षित प्रदर्शन करने में सफल नहीं रही।

    सेबेस्टियन बेकासे ने अगस्त 2024 में इक्वाडोर की जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय टीम दक्षिण अमेरिकी क्वालीफाइंग अभियान में कठिन दौर से गुजर रही थी। उनके नेतृत्व में इक्वाडोर ने शानदार वापसी करते हुए क्वालीफाइंग तालिका में अर्जेंटीना के बाद दूसरा स्थान हासिल किया। टीम ने पूरे अभियान में मजबूत रक्षात्मक प्रदर्शन किया और 18 क्वालीफाइंग मुकाबलों में केवल पांच गोल खाए। इस दौरान उसने कोलंबिया, उरुग्वे और ब्राजील जैसी मजबूत टीमों से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी क्षमता का परिचय दिया।

    बेकासे के कार्यकाल का रिकॉर्ड भी संतुलित और प्रभावशाली रहा। उनके नेतृत्व में इक्वाडोर ने 24 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में नौ जीत दर्ज की, 12 मैच ड्रॉ रहे और केवल तीन मुकाबलों में हार मिली। विश्व कप से पहले टीम लगातार 19 मैचों तक अपराजित रही थी, जिससे उससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं।

    विश्व कप अभियान की शुरुआत हालांकि उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। शुरुआती मुकाबले में आइवरी कोस्ट से हार और कुराकाओ के खिलाफ ड्रॉ के बाद टीम की आलोचना हुई। इसके बावजूद इक्वाडोर ने अंतिम ग्रुप मैच में जर्मनी को 2-1 से हराकर शानदार वापसी की और सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में शामिल होकर राउंड ऑफ 32 में जगह बनाई। टीम की इस उपलब्धि पर इक्वाडोर सरकार ने राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा भी की थी।

    हालांकि नॉकआउट चरण में मेक्सिको के खिलाफ हार के साथ अभियान समाप्त हो गया और इसके तुरंत बाद मुख्य कोच ने पद छोड़ने का फैसला लिया। अब इक्वाडोर फुटबॉल महासंघ के सामने नए मुख्य कोच की नियुक्ति और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए टीम की नई रणनीति तैयार करने की चुनौती होगी।