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  • Stock Market News, निफ्टी रिकॉर्ड हाई से 15% नीचे, 80% शेयर 50 दिन के औसत से फिसले

    Stock Market News, निफ्टी रिकॉर्ड हाई से 15% नीचे, 80% शेयर 50 दिन के औसत से फिसले


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है और अब इसका असर बाजार के बड़े हिस्से में दिखाई देने लगा है। गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी दिन बिकवाली के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे। सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71909.70 अंक पर बंद हुआ जबकि कारोबार के दौरान यह 1187 अंक तक टूट गया और एक साल के निचले स्तर 71292.88 तक पहुंच गया। निफ्टी भी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 22421.95 अंक पर बंद हुआ।

    निफ्टी में जारी कमजोरी की एक बड़ी तस्वीर लगातार आठवें हफ्ते की गिरावट से सामने आती है। पिछले नौ हफ्तों में निफ्टी करीब 2156 अंक यानी 8.7 प्रतिशत नीचे आ चुका है। सितंबर महीने में भी निफ्टी में करीब 6.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस साल जनवरी में बनाए गए 26373 अंक के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में मौजूदा स्तर करीब 15 प्रतिशत नीचे है। बाजार में लगातार गिरावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि किसी बाजार को मंदी या बियर मार्केट में प्रवेश करने के लिए सामान्य तौर पर रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 20 प्रतिशत गिरावट का तकनीकी पैमाना इस्तेमाल किया जाता है।

    इस गिरावट के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 9484.22 करोड़ रुपये की निकासी की। इससे पहले बुधवार को उन्होंने करीब 10148 करोड़ रुपये और मंगलवार को 10743 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। इस तरह सिर्फ तीन कारोबारी दिनों में एफआईआई की बिकवाली 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक रही। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से बाजार में खरीदारी का भरोसा प्रभावित हुआ है।

    बाजार की कमजोरी केवल कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के अनुसार निफ्टी 500 में करीब 80 प्रतिशत शेयर अपने 50 दिन के औसत भाव से नीचे कारोबार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि बाजार में दबाव व्यापक है और कई कंपनियों के शेयरों में निवेशकों को लगातार बिकवाली का सामना करना पड़ रहा है।

    तकनीकी स्तर पर भी अब निफ्टी के कुछ महत्वपूर्ण स्तरों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। सेबी रजिस्टर्ड शोध विश्लेषक विपिन डिक्सेना के मुताबिक निफ्टी फिलहाल 22400 के आसपास के समर्थन स्तर पर है। यदि यह स्तर टूटता है तो 22200 से 22000 तक दबाव बढ़ने की संभावना बताई गई है। वहीं ऊपर की तरफ 22600 से 22800 के बीच तत्काल प्रतिरोध का क्षेत्र बताया गया है। ये स्तर बाजार की आगे की दिशा समझने के लिए तकनीकी विश्लेषण का हिस्सा हैं और वास्तविक बाजार चाल इससे अलग भी हो सकती है।

    बाजार में जारी गिरावट के पीछे विदेशी निकासी के अलावा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कई कारक भी निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे माहौल में बाजार की दिशा केवल एक कारण से तय नहीं होती। आने वाले कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेश का रुख वैश्विक संकेतक और कंपनियों से जुड़े कारोबारी आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। निवेशकों के लिए मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच किसी भी फैसले से पहले अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 22,700 के नीचे, कच्चा तेल और FII बिकवाली से दबाव

    सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 22,700 के नीचे, कच्चा तेल और FII बिकवाली से दबाव


    नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत दबाव के साथ हुई। सोमवार के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 22,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 9:26 बजे सेंसेक्स 72,371.25 अंक पर कारोबार कर रहा था और इसमें 400.47 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी 22,658.75 अंक पर था और 121.50 अंक नीचे कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,800 के स्तर से भी नीचे चला गया। बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोर रही और कई बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे प्रमुख शेयरों की कमजोरी का भी बाजार पर असर पड़ा। तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, निफ्टी का 22,700 के नीचे टिकना बिकवाली के दबाव को बढ़ा सकता है।

    बाजार में गिरावट के बीच निफ्टी के 22,400 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना पर भी नजर रखी जा रही है, यदि कमजोरी आगे जारी रहती है। यह स्तर तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और पिछले दो वर्षों की प्रमुख निचली ट्रेंडलाइन तथा 200 सप्ताह के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से जुड़ा हुआ है। निफ्टी के लिए 22,650 से 22,700 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट जोन के तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया है। इस क्षेत्र के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर शॉर्ट टर्म करेक्शन और गहरा हो सकता है। ऐसे में आने वाले कारोबार में इस स्तर के आसपास बाजार की चाल महत्वपूर्ण रहेगी।

    भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली प्रमुख वजहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी शामिल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद के बीच कच्चे तेल की कीमत करीब 106 से 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों यानी FII की भारतीय शेयर बाजार से लगातार निकासी ने भी घरेलू बाजार में बिकवाली के दबाव को बढ़ाया है।

    भारतीय बाजार की कमजोरी के बीच एशियाई और अन्य वैश्विक बाजारों में भी कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। टोक्यो समय के अनुसार सुबह 11:51 बजे S&P 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी नीचे था, जबकि निक्केई 225 फ्यूचर्स में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जापान का टॉपिक्स 1.5 फीसदी नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग 0.6 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.1 फीसदी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.1 फीसदी और Euro Stoxx 50 फ्यूचर्स 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। इस तरह वैश्विक बाजारों में एक समान रुख नहीं रहा।

    बाजार की तकनीकी स्थिति को लेकर एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,650 से 22,700 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट जोन है। उनके अनुसार, यदि इस क्षेत्र के नीचे निर्णायक गिरावट आती है तो शॉर्ट टर्म करेक्शन और गहरा हो सकता है। फिलहाल सेंसेक्स की 400 अंक से अधिक की गिरावट, निफ्टी का 22,700 से नीचे जाना, कच्चे तेल की ऊंची कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और FII की लगातार बिकवाली बाजार के लिए प्रमुख दबाव वाले कारक बने हुए हैं।

  • शेयर बाजार में लौटी रौनक, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के सहारे सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद

    शेयर बाजार में लौटी रौनक, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के सहारे सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद

    नई दिल्ली । लगातार दो सत्रों तक दबाव में रहने के बाद भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को शानदार वापसी की। कारोबार के अंत में BSE Sensex 394.50 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,918.76 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 119.10 अंक यानी 0.52 प्रतिशत मजबूत होकर 23,424.10 के स्तर पर पहुंच गया।

    बाजार में तेजी की अगुवाई बैंकिंग सेक्टर ने की। Nifty Bank 2.09 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। इसके अलावा डिफेंस, रियल्टी, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, मैन्युफैक्चरिंग, एफएमसीजी और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं आईटी और मीडिया इंडेक्स दबाव में रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60,715.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.69 प्रतिशत उछलकर 18,063.60 के स्तर पर पहुंच गया।

    सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में State Bank of India, ICICI Bank, Axis Bank, Bajaj Finance, Maruti Suzuki, Asian Paints और Adani Ports and Special Economic Zone शामिल रहे।

    दूसरी ओर Infosys, Tech Mahindra, HCL Technologies, NTPC और Power Grid Corporation of India के शेयरों में कमजोरी रही।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी की। साथ ही ईरान-इजरायल तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

    हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और ऊंची बॉन्ड यील्ड अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों, Federal Reserve System की मौद्रिक नीति और वैश्विक लिक्विडिटी संकेतों पर रहेगी।

    मंगलवार को बाजार की शुरुआत भी सकारात्मक रही थी और शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स तथा निफ्टी में करीब आधा प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी, जो पूरे सत्र के दौरान कायम रही।

  • बाजार पर मंडरा रहा वैश्विक तनाव का साया, ईरान-अमेरिका टकराव और कच्चे तेल से तय होगी अगली चाल

    बाजार पर मंडरा रहा वैश्विक तनाव का साया, ईरान-अमेरिका टकराव और कच्चे तेल से तय होगी अगली चाल

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां घरेलू मजबूती से अधिक वैश्विक घटनाक्रम उसकी दिशा तय करते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले सप्ताह में बाजार की चाल कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर रहने वाली है, जिनमें ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां और देश के प्रमुख आर्थिक आंकड़े शामिल हैं। इन सभी कारकों के कारण निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और बाजार में सतर्कता बढ़ती जा रही है।

    वैश्विक स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने ऊर्जा बाजारों को सबसे अधिक प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग को लेकर उठ रहे विवादों ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर चिंता बढ़ा दी है। इसी अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका भी गहरा रही है। ऊर्जा कीमतों में यह अस्थिरता सीधे तौर पर भारतीय बाजारों पर भी असर डाल रही है, क्योंकि भारत अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।

    इसी बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है। लगातार हो रही निकासी ने घरेलू बाजार में तरलता और विश्वास दोनों पर दबाव बनाया है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इक्विटी बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशकों की रणनीति में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

    घरेलू स्तर पर आने वाले आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों से जुड़े संकेतक निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके अलावा बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े आंकड़े, क्रेडिट ग्रोथ और विदेशी मुद्रा भंडार जैसी जानकारियां भी बाजार की धारणा को प्रभावित करेंगी। इन आंकड़ों के आधार पर यह तय होगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक दबावों के बीच कितनी मजबूती से खड़ी है।

    बीते सप्ताह बाजार में गिरावट का रुख देखने को मिला, जहां प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे। कई सेक्टर्स में बिकवाली हावी रही, विशेषकर रियल्टी, आईटी और ऑटो जैसे क्षेत्रों में कमजोरी देखने को मिली। हालांकि कुछ क्षेत्रों जैसे फार्मा और मेटल में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रही, लेकिन समग्र रूप से बाजार नकारात्मक रुझान में बंद हुआ।

  • शेयर बाजार में तबाही का तूफान, दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ साफ, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा

    शेयर बाजार में तबाही का तूफान, दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ साफ, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि दो कारोबारी सत्रों में निवेशकों की करीब ₹15 लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। सेंसेक्स में 1500 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों के नीचे फिसल गया।

    बाजार में यह गिरावट केवल घरेलू कारणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।

    विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई, आयात बिल और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है।

    इसके साथ ही भारतीय रुपये में भी बड़ी कमजोरी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। रुपये की कमजोरी का असर विदेशी फंड्स के रिटर्न पर पड़ता है, जिसके कारण वे बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। बड़े वैश्विक फंड जोखिम कम करने के लिए लगातार भारतीय इक्विटी से दूरी बना रहे हैं। इसका असर खासतौर पर बड़े शेयरों और बैंकिंग सेक्टर में देखने को मिला, जहां भारी बिकवाली दर्ज की गई।

    बाजार में गिरावट को और तेज करने में डेरिवेटिव एक्सपायरी का भी बड़ा योगदान रहा। कमजोर सेंटीमेंट के बीच ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन घटानी शुरू कर दी, जिससे अचानक वॉलेटिलिटी बढ़ गई और बाजार में गिरावट और गहरी हो गई।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी, रियल एस्टेट और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। निवेशकों को डर है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती का असर टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है। हालांकि कमोडिटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में कुछ मजबूती जरूर देखने को मिली, क्योंकि ऊंचे कच्चे तेल की कीमतों का इन कंपनियों को लाभ मिल सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार दबाव वाले दौर में है और निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की जरूरत है। उनका कहना है कि ऐसे समय में घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत कंपनियों पर लंबी अवधि के नजरिए से ध्यान देना चाहिए।

    फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में यही तय करेगा कि बाजार में स्थिरता लौटेगी या गिरावट का दबाव और बढ़ेगा।

  • लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा, निवेशकों में सतर्कता

    लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा, निवेशकों में सतर्कता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी का सिलसिला लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी जारी रहा। मंगलवार को बाजार की शुरुआत से ही दबाव का माहौल देखने को मिला और कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक टूट गया। वहीं एनएसई निफ्टी 50 फिसलकर 26,200 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। हैवीवेट शेयरों में मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने बाजार की धारणा को कमजोर बनाए रखा।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 376 अंक की गिरावट के साथ 85,063 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 75 अंक टूटकर 26,175 पर आ गया। केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों का मनोबल और प्रभावित हुआ। व्यापक बाजार में गिरावट से साफ संकेत मिला कि फिलहाल निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव हैवीवेट शेयरों में बिकवाली के कारण देखने को मिला। बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में कमजोरी रही। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा मोटर्स जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि हाल के दिनों में आई तेज़ी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बड़े शेयरों पर दबाव बढ़ा।

    वैश्विक मोर्चे पर भी कुछ ऐसे संकेत मिले, जिन्होंने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। अमेरिका की ओर से भारत पर संभावित टैरिफ बढ़ाने को लेकर चल रही चर्चाओं ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा किया। इसका असर खासतौर पर निर्यात आधारित कंपनियों और सेक्टर्स पर देखने को मिला। निवेशकों को आशंका है कि अगर व्यापारिक तनाव बढ़ता है, तो इसका असर कंपनियों की आय और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है।इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की चाल को प्रभावित किया। जनवरी के शुरुआती कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। इससे बाजार में तरलता पर दबाव बढ़ा है और घरेलू निवेशक भी सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों का असर भी घरेलू शेयर बाजार पर पड़ा। कुछ देशों में राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकने के लिए मजबूर किया है। इसका नतीजा यह रहा कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया।इस बीच इंडिया VIX, जिसे बाजार की अस्थिरता का पैमाना माना जाता है, में भी लगातार तेजी देखी गई। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी को 26,100 से 26,150 के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल सकता है, जबकि ऊपर की ओर 26,400 के आसपास कड़ी रुकावट है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रहें और किसी भी फैसले में लंबी अवधि के नजरिए को प्राथमिकता दें।

  • घरेलू निवेशकों की सक्रियता से बाजार में मजबूती, मीडिया और मेटल शेयर चमके

    घरेलू निवेशकों की सक्रियता से बाजार में मजबूती, मीडिया और मेटल शेयर चमके


    नई दिल्ली। 31 दिसंबर, बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में मजबूती का माहौल देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज BSE का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 200 अंकों की तेजी के साथ 84,870 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज NSE का निफ्टी 70 अंक चढ़कर 26,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। इस तेजी में वैश्विक संकेत मिले-जुले रहने के बावजूद घरेलू निवेशकों की सक्रिय खरीदारी का बड़ा योगदान रहा।सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि निफ्टी-50 के 40 शेयरों ने तेजी दिखाई। सेक्टोरल स्तर पर एनएसई के प्रमुख इंडेक्स में भी मजबूती देखने को मिली। विशेष रूप से मीडिया, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। निवेशकों का रुझान चुनिंदा सेक्टरों पर केंद्रित रहा, जिससे बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी।

    वैश्विक बाजारों में कारोबार मिला-जुला रहा। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई अवकाश के कारण बंद रहे। पिछले कारोबारी सत्र में कोस्पी 0.15 फीसदी और निक्केई 0.37 फीसदी गिरावट के साथ बंद हुए थे। वहीं, हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स लगभग 1.01 फीसदी की गिरावट के साथ 25,592 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.07 फीसदी की कमजोरी के साथ 3,962 पर कारोबार करता दिखा। अमेरिकी बाजारों में भी दबाव देखा गया, जहां 30 दिसंबर को डाउ जोंस 0.20 फीसदी, नैस्डेक 0.24 फीसदी और एसएंडपी 500 लगभग 0.14 फीसदी गिरकर बंद हुए।

    घरेलू स्तर पर बाजार को सबसे बड़ा सहारा घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs से मिला। 29 दिसंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों FIIs ने 3,844 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि DIIs ने 6,159 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। दिसंबर महीने में अब तक FIIs लगभग 30,752 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं, जबकि DIIs ने 72,860 करोड़ रुपये का निवेश किया है। नवंबर में भी यही रुझान देखने को मिला था जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों की खरीदारी ज्यादा रही।इससे पहले, 30 दिसंबर को बाजार लगभग सपाट कारोबार में रहा। सेंसेक्स 20 अंक गिरकर 84,675 पर और निफ्टी मामूली कमजोरी के साथ 25,938 पर बंद हुआ। उस दिन ऑटो, मेटल और बैंकिंग शेयरों में मजबूती रही, जबकि मीडिया और रियल्टी सेक्टर में बिकवाली देखने को मिली।

    विश्लेषकों का कहना है कि साल के आखिरी कारोबारी सत्रों में घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत रहना आने वाले समय के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।कुल मिलाकर, 2025 के आखिरी कारोबारी हफ्ते में घरेलू निवेशकों की सक्रिय खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों प्रमुख स्तरों पर मजबूती के साथ बंद हुए। मीडिया, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने निवेशकों को सबसे ज्यादा लाभ दिया, जिससे साल के अंत में बाजार में उत्साह बना रहा।