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  • निफ्टी में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट, एफआईआई ने 1,602 करोड़ रुपये निकाले, डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को संभाला

    निफ्टी में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट, एफआईआई ने 1,602 करोड़ रुपये निकाले, डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को संभाला

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सप्ताह दबाव देखने को मिला। ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका ईरान तनाव के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने भारतीय बाजार से 1,602 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने मजबूत खरीदारी जारी रखते हुए बाजार को सहारा दिया।

    सप्ताह के दौरान एफआईआई का निवेश व्यवहार उतार चढ़ाव वाला रहा। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की। इसके बाद लगातार दो कारोबारी सत्रों में उन्होंने खरीदारी की, लेकिन सप्ताह के अंतिम दो सत्रों में फिर से बिकवाली का रुख अपनाया। इससे बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

    20 जुलाई से 21 अगस्त के बीच एफआईआई की गतिविधियों पर नजर डालें तो शुरुआती सप्ताह में वे शुद्ध विक्रेता रहे। इसके बाद लगातार तीन सप्ताह तक उन्होंने खरीदारी की। हालांकि मौजूदा सप्ताह में उनका रुख फिर बदल गया और उन्होंने शुद्ध निकासी की। इसके बावजूद पिछले एक महीने की कुल अवधि में एफआईआई अभी भी 1,282 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे हैं।

    दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में लगातार मजबूती दिखाई। पिछले एक महीने के दौरान डीआईआई ने प्रत्येक सप्ताह शुद्ध खरीदारी की। इस अवधि में उनका कुल निवेश 48,390 करोड़ रुपये रहा। केवल मौजूदा सप्ताह में ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 17,320 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे विदेशी बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संतुलित करने में मदद मिली।

    अगस्त महीने के अब तक के आंकड़ों से भी घरेलू निवेशकों की मजबूत भूमिका सामने आती है। इस अवधि में एफआईआई ने कुल 2,510 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि डीआईआई का निवेश 34,370 करोड़ रुपये रहा है। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू संस्थागत पूंजी बाजार की स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    प्रमुख सूचकांकों की बात करें तो निफ्टी ने सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ की। मध्य सप्ताह में सूचकांक 24,026 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि सप्ताह के अंतिम दो कारोबारी सत्रों में इसमें सुधार देखने को मिला और निफ्टी अपने निचले स्तर से ऊपर आया। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में यह 24,252 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले सप्ताह के मुकाबले करीब 0.5 प्रतिशत की गिरावट है।

    व्यापक बाजार में तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर रही। निफ्टी मिडकैप 100 लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने नया सर्वकालिक उच्च स्तर बनाया और सप्ताह के दौरान एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों में बनी हुई है।

    बाजार के लिए आगे कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका ईरान के बीच भू राजनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे। कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने से भारतीय बाजार पर दबाव की आशंका है। आने वाले दिनों में एफआईआई की दिशा भी बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगी। वहीं डीआईआई की मजबूत खरीदारी बाजार को समर्थन देती रह सकती है।

  • रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से अगले पांच साल में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न की उम्मीद, पोर्टफोलियो दोगुना होने का अनुमान

    रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से अगले पांच साल में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न की उम्मीद, पोर्टफोलियो दोगुना होने का अनुमान

    नई दिल्ली ।दिग्गज निवेशक और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने भारतीय शेयर बाजार के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख जताया है। उनका मानना है कि अगले पांच वर्षों में भारतीय शेयरों से सालाना करीब 15 प्रतिशत रिटर्न मिल सकता है। इस तरह के रिटर्न से लंबी अवधि में निवेशकों का पोर्टफोलियो लगभग दोगुना होने की संभावना बनती है।

    अग्रवाल के अनुमान का आधार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि और कंपनियों की कमाई में संभावित बढ़ोतरी है। उनके मुताबिक आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर करीब 7.5 से 8.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जबकि कॉर्पोरेट मुनाफे में लगभग 13 से 14 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में प्रमुख बाजार सूचकांकों के रिटर्न के लिए भी सकारात्मक संभावना बनती है।

    हालांकि उन्होंने निकट अवधि के बाजार को लेकर बहुत तेज बढ़त की उम्मीद नहीं जताई। उनके मुताबिक लगभग दो साल की सुस्ती के बाद भारतीय शेयर बाजार अगले विकास चरण में प्रवेश करने से पहले कुछ समय तक सीमित दायरे में रह सकता है। एक और साल तक बाजार में इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना से भी उन्होंने इनकार नहीं किया।

    मौजूदा वैल्यूएशन को लेकर भी अग्रवाल ने कमाई की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। निफ्टी की कमाई के मुकाबले ऊंचे मूल्यांकन के बीच यदि कंपनियों की कमाई में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो बाजार की वैल्यूएशन अपेक्षाकृत कम हो सकती है। उनका अनुमान है कि इस स्थिति में बाजार में आगे बढ़ने की गुंजाइश बनी रह सकती है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई के भारत में सीमित रुझान को लेकर अग्रवाल ने वैश्विक बाजारों की स्थिति का उल्लेख किया। उनके मुताबिक अमेरिका के अलावा कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में मजबूत तेजी और कमाई की संभावनाओं के कारण विदेशी निवेशकों का ध्यान वहां अधिक गया है। वैश्विक पूंजी के लिए अमेरिकी बाजार से मुकाबला करना भी भारतीय बाजारों के लिए चुनौती बना हुआ है।

    अग्रवाल ने कहा कि भारत कुछ ऐसे उभरते बाजारों के लिए पूंजी का स्रोत भी बन रहा है, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश रुझान से फायदा मिल रहा है। हालांकि उन्हें एफआईआई की लगातार बिकवाली में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता है तो भारतीय बाजार के लिए यह महत्वपूर्ण सकारात्मक कारक साबित हो सकता है।

    विदेशी निवेशकों के लिए भारत की कर व्यवस्था पर भी अग्रवाल ने अपनी राय रखी। उन्होंने कैपिटल गेन्स टैक्स व्यवस्था को विदेशी निवेशकों के लिए कुछ हद तक चुनौतीपूर्ण बताया, लेकिन इसे भारत से निवेश कम होने का सबसे बड़ा कारण नहीं माना। उनके अनुसार मुद्रा विनिमय में होने वाला बदलाव विदेशी निवेशकों के लिए अधिक महत्वपूर्ण चिंता हो सकता है।

    विदेशी निवेशक भारत में डॉलर के माध्यम से पूंजी लगाते हैं, जबकि कैपिटल गेन्स की गणना रुपये में होती है। ऐसे में रुपये की कमजोरी के कारण डॉलर में वास्तविक रिटर्न कम होने के बावजूद निवेशक को रुपये में बने लाभ पर कर देना पड़ सकता है। अग्रवाल के अनुसार विदेशी निवेशकों के लिए लंबे समय तक आकर्षक माहौल बनाए रखने के लिए कर व्यवस्था को दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रखना जरूरी है।

    नई पीढ़ी की कंपनियों और स्टार्टअप को लेकर भी अग्रवाल ने सावधानी बरतने की सलाह दी। उनका कहना है कि किसी कंपनी को सार्वजनिक बाजार में आने से पहले या तो मुनाफे में होना चाहिए या उसके पास मुनाफे तक पहुंचने का स्पष्ट रास्ता होना चाहिए। सार्वजनिक बाजार निवेशक कंपनियों की कमाई और तिमाही प्रदर्शन को काफी महत्व देते हैं।

    जेप्टो में अपने निवेश का उल्लेख करते हुए अग्रवाल ने कहा कि किसी निवेश की सफलता या विफलता का फैसला तुरंत नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक उनके निवेश का अंतिम आकलन 10 साल बाद ही किया जा सकेगा। इससे उनका जोर स्पष्ट होता है कि शेयर बाजार में लंबी अवधि का नजरिया तत्काल उतार-चढ़ाव से अधिक महत्वपूर्ण है।

  • Meesho पर संस्थागत निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लगातार दो तिमाहियों से FII-DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, मजबूत संकेतों पर बाजार की नजर

    Meesho पर संस्थागत निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लगातार दो तिमाहियों से FII-DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, मजबूत संकेतों पर बाजार की नजर

    नई दिल्ली । ई-कॉमर्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Meesho लिमिटेड में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। कंपनी के ताजा शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार पिछले दो तिमाहियों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) दोनों ने अपनी हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की है। बाजार विशेषज्ञ इसे कंपनी के बेहतर परिचालन प्रदर्शन, मजबूत वित्तीय संकेतकों और भविष्य की विकास संभावनाओं के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत मान रहे हैं।

    जून 2026 तिमाही के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई है। इससे पहले मार्च 2026 में यह 4.2 प्रतिशत थी। लगातार दूसरी तिमाही में विदेशी निवेशकों द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। शेयर बाजार में FII की लगातार खरीदारी को अक्सर सकारात्मक निवेश संकेत माना जाता है।

    घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी कंपनी में अपना निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। दिसंबर 2025 में DII की हिस्सेदारी 5.3 प्रतिशत थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 5.6 प्रतिशत हुई और जून 2026 में तेज उछाल के साथ 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और अन्य घरेलू संस्थानों ने Meesho में निवेश बढ़ाने का फैसला किया है। इससे कंपनी के प्रति घरेलू निवेशकों का बढ़ता विश्वास भी स्पष्ट होता है।

    संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ कंपनी की प्रमोटर और सार्वजनिक हिस्सेदारी में मामूली कमी दर्ज की गई है। प्रमोटर हिस्सेदारी 16.6 प्रतिशत से घटकर 16.4 प्रतिशत रह गई, जबकि सार्वजनिक हिस्सेदारी 73.7 प्रतिशत से घटकर 69.3 प्रतिशत पर आ गई। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के शेयरों का बड़ा हिस्सा अब संस्थागत निवेशकों के पास जा रहा है, जिसे बाजार स्थिर निवेश का सकारात्मक संकेत मानता है।

    कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में योगदान मार्जिन 170 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4 प्रतिशत तक पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी लागत में कमी, प्रीपेड ऑर्डर बढ़ने तथा डिलीवरी विफल होने की घटनाओं में कमी आने से परिचालन खर्च नियंत्रित हुआ है। इससे कंपनी की लाभप्रदता में सुधार हुआ है और भविष्य में बेहतर नकदी प्रवाह की संभावना भी मजबूत हुई है।

    Meesho का विज्ञापन कारोबार भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कंपनी के विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय विक्रेताओं की संख्या में पिछले एक वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही विज्ञापन पर खर्च करने वाले कारोबारियों की संख्या और बजट दोनों में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कंपनी द्वारा AI आधारित वॉयस शॉपिंग असिस्टेंट का उपयोग ग्रामीण और नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने में किया जा रहा है, जिससे ग्राहक अधिग्रहण लागत कम होने और कारोबार के विस्तार में मदद मिल रही है।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन, लागत नियंत्रण, विज्ञापन कारोबार का विस्तार और तकनीक आधारित रणनीति Meesho की दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। यही कारण है कि संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के वित्तीय नतीजों और कारोबार की प्रगति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

  • विदेशी निवेशकों की वापसी से भारतीय शेयर बाजार को नई रफ्तार, जून 2027 तक निफ्टी 26,500 पहुंचने की उम्मीद

    विदेशी निवेशकों की वापसी से भारतीय शेयर बाजार को नई रफ्तार, जून 2027 तक निफ्टी 26,500 पहुंचने की उम्मीद


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार को लेकर वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने उत्साहजनक अनुमान जारी किया है। संस्थान का मानना है कि भारत में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का दौर अब लगभग समाप्त हो चुका है और आने वाले महीनों में विदेशी पूंजी का प्रवाह फिर से तेज हो सकता है। मजबूत घरेलू मांग, स्थिर आर्थिक आधार और निवेशकों की बदलती रणनीति के चलते भारतीय इक्विटी बाजार में तेजी की संभावना जताई गई है।

    गोल्डमैन सैक्स के एशिया मैक्रो रिसर्च के सह-प्रमुख और एशिया-पैसिफिक इक्विटी रणनीतिकार टिमोथी मो, अमोरिता गोयल और सुनील कौल द्वारा जारी इंडिया स्ट्रैटेजी नोट के अनुसार जून 2027 तक निफ्टी 26,500 अंक के स्तर तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा स्तर से करीब 10 प्रतिशत की संभावित बढ़त दर्शाता है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2026 की तुलना में अब बाजार को लेकर दृष्टिकोण पूरी तरह बदल चुका है। उस समय उत्तर एशियाई बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार कम आकर्षक माना जा रहा था और विदेशी निवेशकों की जल्द वापसी की उम्मीद भी नहीं थी। हालांकि अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।

    विश्लेषकों के मुताबिक वर्ष 2026 की पहली छमाही में वैश्विक निवेशकों ने भारत को फंडिंग मार्केट की तरह इस्तेमाल किया। इस दौरान महज साढ़े तीन महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 30 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली की। लेकिन जून के दूसरे पखवाड़े से तस्वीर बदलने लगी और विदेशी निवेशक फिर से शुद्ध खरीदार बन गए। इस दौरान उन्होंने करीब दो अरब डॉलर का निवेश किया।

    गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि वैश्विक फंडों की भारतीय बाजार में हिस्सेदारी अभी भी सामान्य स्तर से कम है। ऐसे में उनके पास दोबारा निवेश बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। हालांकि कंपनियों की आय में संशोधन और अन्य वैश्विक बाजारों की तुलना में मूल्यांकन निवेशकों के लिए चुनौती बने रह सकते हैं, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार और मांग में मजबूती बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखेगी।

    एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 1.28 लाख करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। जून महीने में एफआईआई ने 49,340 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी, जबकि जुलाई में अब तक 15,157 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे भारतीय बाजार की ओर लौट रहा है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहती हैं और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब विदेशी निवेश के रुझान और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी।

  • तिमाही नतीजों से लेकर कच्चे तेल तक कई फैक्टर रहेंगे अहम, अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर रहेगी निवेशकों की नजर

    तिमाही नतीजों से लेकर कच्चे तेल तक कई फैक्टर रहेंगे अहम, अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर रहेगी निवेशकों की नजर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए आगामी कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों की शुरुआत, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के हालात बाजार की दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। निवेशकों की निगाहें घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों पर बने घटनाक्रमों पर बनी रहेंगी।

    आने वाले सप्ताह में पहली तिमाही के नतीजों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। इसकी शुरुआत देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस के वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजों से होगी। बाजार को उम्मीद है कि इस तिमाही के नतीजे आईटी सेक्टर के साथ-साथ अन्य कॉर्पोरेट कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर शुरुआती संकेत देंगे। यही कारण है कि निवेशकों के लिए यह परिणाम विशेष महत्व रखते हैं।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे घटनाक्रम भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। यदि दोनों देशों के बीच तनाव नियंत्रित रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ऊर्जा कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय बाजार, महंगाई और आयात लागत पर भी देखने को मिल सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत देगी। बीते सप्ताह शुरुआती दिनों में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में उन्होंने फिर से खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। यदि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का निवेश बढ़ता है तो इससे बाजार की धारणा मजबूत हो सकती है, जबकि लगातार बिकवाली दबाव बढ़ा सकती है।

    पिछला कारोबारी सप्ताह घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा। प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूती के साथ सप्ताह का समापन किया। निवेशकों की खरीदारी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इससे व्यापक बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखाई दिया।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी और फार्मा कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक मजबूती दर्ज की गई। हेल्थकेयर, डिफेंस, एफएमसीजी, मेटल और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर पीएसयू बैंक, एनर्जी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में कुछ दबाव देखने को मिला, जिससे इन सूचकांकों ने सप्ताह का समापन गिरावट के साथ किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तिमाही नतीजों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद के अनुरूप रहते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता, तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। वहीं वैश्विक तनाव या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल जैसी परिस्थितियां निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं।

    ऐसे में आगामी सप्ताह निवेशकों के लिए सतर्कता और अवसर दोनों लेकर आ सकता है। बाजार की चाल काफी हद तक कॉर्पोरेट प्रदर्शन, वैश्विक संकेतों और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी, इसलिए कारोबारियों की नजर हर प्रमुख आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

  • इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स और निफ्टी फिसले 3 प्रतिशत

    इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स और निफ्टी फिसले 3 प्रतिशत


    नई दिल्ली। इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 3 प्रतिशत तक गिर गए। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 81,287.19 से फिसलकर 78,918.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 25,178.65 से गिरकर 24,450.45 पर बंद हुआ।

    एफआईआई की लगातार बिकवाली इस सप्ताह बाजार पर दबाव डालती रही। निवेशकों ने भारतीय बाजार से 23,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की। वैश्विक जोखिम और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण विदेशी निवेशक सतर्क नजर आए। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) और लगातार आ रहे एसआईपी फंड ने बाजार में गिरावट को कुछ हद तक रोकने में मदद की।

    मध्य पूर्व में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे ऊर्जा संबंधित सेक्टर और समग्र बाजार पर दबाव बढ़ा। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग 3 प्रतिशत नीचे बंद हुए।

    सेक्टरवार नजर डालें तो बीएसई रियल्टी इंडेक्स में 4.9 प्रतिशत, बीएसई ऑयल एंड गैस 4.8 प्रतिशत, बीएसई बैंकएक्स 4.6 प्रतिशत, बीएसई ऑटो 3.9 प्रतिशत और बीएसई कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बीएसई कैपिटल गुड्स में 0.2 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत की तेजी देखी गई, क्योंकि वैश्विक तनाव के बीच निवेशकों ने रक्षा कंपनियों में रुचि दिखाई।

    वेंचुरा सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर के अनुसार, इस सप्ताह भारतीय बाजार में वैश्विक जोखिम और घरेलू मजबूती के बीच खींचतान देखने को मिली। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण एफआईआई लगातार बिकवाली कर रहे हैं। हालांकि, घरेलू निवेशकों की भागीदारी और एसआईपी के जरिए लगातार फंड आना बाजार को सहारा दे रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी50 इंडेक्स 24,450 के आसपास अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज के करीब पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि फिलहाल बाजार अस्थिर है लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। इस दौरान इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स में 11 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जो निवेशकों की जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।

    इस तरह इस सप्ताह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और एफआईआई की बिकवाली ने बाजार पर दबाव डाला, जबकि घरेलू निवेशकों और एसआईपी फंड की भागीदारी ने स्थिति को संतुलित रखा।

  • एजुकेशन सेक्टर का चमकता सितारा: SEIL ने 3 साल में पैसा किया लगभग 3 गुना, संस्थागत निवेश में बढ़ोत्तरी से उत्साह

    एजुकेशन सेक्टर का चमकता सितारा: SEIL ने 3 साल में पैसा किया लगभग 3 गुना, संस्थागत निवेश में बढ़ोत्तरी से उत्साह


    नई दिल्ली। शांति एजुकेशनल इनिशिएटिव्स लिमिटेड यानी SEIL तेजी से बढ़ती शिक्षा प्रबंधन कंपनी के रूप में आज चर्चा में है। 2009 में चिरिपाल ग्रुप की ओर से स्थापित यह कंपनी प्ले स्कूल से लेकर हायर एजुकेशन संस्थानों तक स्कूल मैनेजमेंट और लर्निंग सॉल्यूशंस प्रदान करती है। टेक्नोलॉजी आधारित इंग्लिश मीडियम करिकुलम, टीचर ट्रेनिंग और बेहतर लर्निंग आउटकम के जरिए SEIL देशभर में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर फोकस कर रही है।

    हाल ही में कंपनी ने Q3FY26 के तिमाही नतीजे जारी किए हैं। इस दौरान SEIL ने 5.83 करोड़ रुपये की नेट सेल्स दर्ज की, हालांकि 0.61 करोड़ रुपये का घाटा रहा। वहीं, 9 महीनों में कुल 32.41 करोड़ रुपये की बिक्री और 4.91 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया गया। पिछले वर्ष FY25 में कंपनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 220 प्रतिशत की उछाल के साथ 58.99 करोड़ रुपये की नेट सेल्स और मुनाफे में 93 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 7.06 करोड़ रुपये हासिल किए थे।

    भले ही तिमाही में घाटा दिखा हो, लेकिन विदेशी और घरेलू निवेशकों का भरोसा SEIL पर कायम है। दिसंबर 2025 में FII और DII ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। सितंबर 2025 में FII की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत थी, जो दिसंबर में बढ़कर 22.5 प्रतिशत हो गई। वहीं DII ने भी अपनी हिस्सेदारी को 0.2 प्रतिशत बढ़ाया। निवेशकों का यह भरोसा कंपनी की दीर्घकालीन संभावनाओं को दर्शाता है।

    SEIL का मार्केट कैप 2,842 करोड़ रुपये है और वर्तमान शेयर कीमत 172.70 रुपये है। हाल के प्रदर्शन को देखें तो पिछले एक हफ्ते में इसका शेयर 17 प्रतिशत उछला है और सालभर में 53 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। तीन साल में 185 प्रतिशत और पांच साल में यह कंपनी निवेशकों को 1187 प्रतिशत का मल्टीबैगर रिटर्न दे चुकी है। इसने शिक्षा क्षेत्र में अपनी मजबूती और निवेशकों का भरोसा साबित किया है।

    कंपनी की ताकत इसकी व्यापक शिक्षा सेवा और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान में निहित है। प्ले स्कूल से लेकर बिजनेस मैनेजमेंट स्कूल तक स्कूल मैनेजमेंट सॉल्यूशंस देने वाली SEIL ने शिक्षा के हर स्तर पर गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता दी है। शिक्षकों के प्रशिक्षण और बेहतर लर्निंग आउटपुट पर ध्यान देने से यह कंपनी न केवल छात्रों के लिए बल्कि निवेशकों के लिए भी आकर्षक बनी हुई है।

    कुल मिलाकर, SEIL शिक्षा क्षेत्र का एक उभरता सितारा बन चुकी है। तिमाही में घाटा होने के बावजूद निवेशकों का भरोसा, लगातार बढ़ती एफआईआई और डीआईआई हिस्सेदारी और पिछले वर्षों में निवेशकों को दिए गए शानदार रिटर्न ने इसे सेक्टर में छुपे हुए मल्टीबैगर के रूप में साबित कर दिया है।