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  • दिनभर की मजबूत तेजी के बाद बाजार ने संभाली बढ़त, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद; ऑटो शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

    दिनभर की मजबूत तेजी के बाद बाजार ने संभाली बढ़त, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद; ऑटो शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती घंटों में बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ आगे बढ़े, हालांकि दिन के अंतिम चरण में मुनाफावसूली और कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के दबाव के कारण बढ़त सीमित हो गई। इसके बावजूद बाजार हरे निशान में बंद होने में सफल रहा, जिससे निवेशकों का भरोसा कायम रहने के संकेत मिले।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 109 अंक की बढ़त के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी 34 अंकों की मजबूती के साथ 24,056 के स्तर पर पहुंच गया। सुबह के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने तेज रफ्तार दिखाई थी और एक समय सेंसेक्स 77,800 के पार तथा निफ्टी 24,260 के ऊपर पहुंच गया था। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ा और शुरुआती बढ़त का बड़ा हिस्सा कम हो गया।

    बाजार की शुरुआत सकारात्मक वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच हुई थी। निवेशकों ने ऑटो, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी दिखाई, जिससे सूचकांकों को मजबूती मिली। हालांकि आईटी, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार को सीमित कर दिया। इन क्षेत्रों में कमजोरी के कारण दिन के अंतिम घंटों में बाजार पर दबाव बढ़ा।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑटो सेक्टर सबसे मजबूत रहा। वाहन कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। उद्योग जगत का मानना है कि कच्चे माल की लागत में कमी, सप्लाई चेन की स्थिति में सुधार और उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी से ऑटो कंपनियों के प्रदर्शन को समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा एफएमसीजी और रियल्टी क्षेत्र ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया।

    दूसरी ओर आईटी और धातु क्षेत्र के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर बनी अनिश्चितता और निर्यात आधारित कंपनियों पर संभावित असर के कारण निवेशकों ने इन क्षेत्रों में सतर्क रुख अपनाया। कुछ बड़े आईटी और मेटल शेयरों में कमजोरी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।

    वृहद बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जिससे दोनों सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा बड़े और मजबूत शेयरों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं, जबकि छोटे शेयरों में सतर्कता बरती जा रही है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम बनी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार विदेशी बिकवाली तेजी की गति को सीमित कर सकती है। हालांकि घरेलू निवेशकों की सक्रिय भागीदारी फिलहाल बाजार को समर्थन दे रही है।

    इस बीच भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले बढ़त के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को सहारा दिया है, जिससे आयात लागत और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर पहली तिमाही के कारोबारी नतीजों, मानसून की प्रगति और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। यदि ये कारक अनुकूल रहते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है, हालांकि उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से बाजार में लौटी तेजी, इस सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी में दर्ज की गई शानदार बढ़त

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से बाजार में लौटी तेजी, इस सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी में दर्ज की गई शानदार बढ़त


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच भारतीय शेयर बाजार ने इस सप्ताह उल्लेखनीय मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी देखने को मिला। लगातार दो सप्ताह की कमजोरी के बाद बाजार ने वापसी करते हुए प्रमुख सूचकांकों को ऊंचे स्तरों तक पहुंचाया।

    सप्ताह के दौरान निवेशकों की धारणा में सुधार का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद रही। भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी की संभावना के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सकारात्मक माहौल बना, जिसका लाभ भारतीय इक्विटी बाजार को मिला। साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी ने आयात-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत का संकेत दिया।

    कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी लगभग दो प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,600 अंक के ऊपर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज कर 75,500 अंक के स्तर को पार करने में सफल रहा। पूरे सप्ताह के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांकों ने मजबूत प्रदर्शन किया और निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

    विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति को लेकर बनी अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। लार्ज-कैप कंपनियों में निवेशकों का भरोसा कायम रहा, जबकि हाल के महीनों में तेज बढ़त हासिल कर चुके मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में सीमित मुनाफावसूली देखने को मिली।

    वित्तीय क्षेत्र इस सप्ताह बाजार का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। निजी बैंकों में निवेशकों की सक्रिय खरीदारी और सकारात्मक नियामकीय माहौल ने बैंकिंग शेयरों को समर्थन दिया। इसके अलावा उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की कंपनियों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर आय वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित हुए।

    दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में बना रहा। अमेरिका में आर्थिक अनिश्चितताओं और तकनीकी खर्च में संभावित कमी की आशंकाओं ने आईटी शेयरों की गति को सीमित किया। वहीं धातु क्षेत्र पर भी दबाव देखने को मिला, क्योंकि चीन में मांग कमजोर रहने की चिंताओं और कमोडिटी कीमतों में नरमी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए चुनौती बनी रही। सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री की, हालांकि सप्ताह के अंतिम चरण में यह दबाव कुछ कम होता दिखाई दिया। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार खरीदारी जारी रखी और बाजार को मजबूत समर्थन प्रदान किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। घरेलू महंगाई से जुड़े आंकड़े, चीन के औद्योगिक उत्पादन के संकेतक और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति निवेशकों की नजर में रहेंगे। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होती है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली घटती है, तो भारतीय शेयर बाजार में तेजी का रुख आगे भी जारी रह सकता है।