Tag: film history

  • फिल्म ‘गाइड’ की शूटिंग के दौरान सांप वाले सीन की मांग पर उठे सवाल और अभिनेत्री का स्पष्ट इनकार

    फिल्म ‘गाइड’ की शूटिंग के दौरान सांप वाले सीन की मांग पर उठे सवाल और अभिनेत्री का स्पष्ट इनकार

    नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान ने अपने लंबे और सफल करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है, लेकिन फिल्म ‘गाइड’ से जुड़ा एक पुराना किस्सा आज भी सबसे ज्यादा चर्चित घटनाओं में शामिल माना जाता है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है, जिसमें उनके अभिनय और डांस परफॉर्मेंस ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा था। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान सामने आया एक प्रसंग आज भी फिल्म जगत में दिलचस्प उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

    बताया जाता है कि फिल्म के अंग्रेजी संस्करण की शूटिंग के दौरान एक दृश्य को लेकर निर्देशक की ओर से एक असामान्य मांग सामने रखी गई थी। इस दृश्य में अभिनेत्री से अपेक्षा की गई थी कि डांस करते समय वह एक सांप के साथ ऐसा सीन करें जिसमें उसे चूमने जैसा भाव दिखाया जाए। यह सुझाव उस समय के हिसाब से काफी अप्रत्याशित और असहज करने वाला माना गया, जिससे सेट पर एक अलग तरह की स्थिति बन गई थी।

    वहीदा रहमान ने इस प्रस्ताव पर तुरंत अपनी असहमति व्यक्त की थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि यह उनके लिए सहज नहीं है और वह इस तरह का दृश्य करने में असमर्थ हैं। उनका मानना था कि केवल प्रभाव पैदा करने के लिए इस तरह की मांग उचित नहीं है और कलाकार की अपनी सीमाएं और सम्मान भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस सीन को करने से साफ इनकार कर दिया था।

    इस घटना के बावजूद फिल्म की शूटिंग जारी रही और ‘गाइड’ को बाद में भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में स्थान मिला। फिल्म में वहीदा रहमान के अभिनय और नृत्य को बेहद सराहा गया और यह फिल्म उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। दर्शकों ने उनके प्रदर्शन को काफी पसंद किया और यह फिल्म आज भी एक क्लासिक मानी जाती है।

    यह पूरा प्रसंग इस बात को दर्शाता है कि सिनेमा में रचनात्मकता के साथ कलाकार की सहमति और सहजता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। वहीदा रहमान का यह निर्णय यह साबित करता है कि एक कलाकार अपने सिद्धांतों पर कायम रहते हुए भी महान प्रदर्शन कर सकता है और अपने करियर में ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

  • ल्प लॉ के फाइनल ईयर में पहली फिल्म 700 रुपए फीस से शुरू हुई फारूख शेख की प्रेरक कहानी

    ल्प लॉ के फाइनल ईयर में पहली फिल्म 700 रुपए फीस से शुरू हुई फारूख शेख की प्रेरक कहानी


    नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं जिन्होंने अपने अभिनय और सादगी से एक अलग पहचान बनाई उन्हीं में से एक थे फारूख शेख जिनका जन्म 25 मार्च 1948 को गुजरात के सूरत जिले के अमरोली में हुआ था अपने करियर की शुरुआत उन्होंने एक ऐसे समय में की जब सिनेमा में समानांतर सिनेमा की एक नई धारा आकार ले रही थी और फारूख शेख इस धारा के प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरे

    फारूख शेख की शिक्षा मुंबई में हुई उन्होंने सेंट मैरी स्कूल से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सेंट जेवियर कॉलेज में दाखिला लिया और फिर सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की डिग्री प्राप्त की यह दिलचस्प है कि वे लॉ के फाइनल ईयर में पढ़ रहे थे जब उन्हें अपनी पहली फिल्म में काम करने का मौका मिला

    उनकी पहली फिल्म गर्म हवाथी जिसे निर्देशक एमएस सथ्यू ने बनाया था इस फिल्म को भारतीय न्यू वेव सिनेमा की एक महत्वपूर्ण फिल्म माना जाता है इस्मत चुगताई की कहानी पर आधारित यह फिल्म विभाजन के बाद के दौर में एक मुस्लिम परिवार के संघर्ष और पहचान के संकट को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है इस फिल्म में उनके साथ बलराज साहनी जैसे दिग्गज कलाकार थे और इस फिल्म के लिए उन्हें मात्र सात सौ पचास रुपये की फीस मिली थी

    गर्म हवाके बाद फारूख शेख ने पीछे मुड़कर नहीं देखा उन्होंने शतरंज के खिलाड़ीजैसी फिल्म में सत्यजीत रे के निर्देशन में काम किया जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई इसके बाद गमनमें उनका अभिनय बेहद प्रभावशाली रहा जिसमें उन्होंने एक ऐसे टैक्सी ड्राइवर की भूमिका निभाई जो मुंबई में संघर्ष करता है और अंततः अपने घर वापस नहीं लौट पाता यह किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है

    फारूख शेख केवल एक अभिनेता ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन एंकर भी थे उन्होंने रेडियो पर क्विज शो होस्ट किए और दूरदर्शन के कार्यक्रम युवा दर्शनऔर यंग वर्ल्डके माध्यम से घर घर में लोकप्रियता हासिल की उनकी मधुर आवाज और सादगी भरा अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आता था

    उनकी फिल्मों में नूरीचश्मे बुद्दूरकथासाथ साथकिसी से न कहनारंग बिरंगीएक पलअंजुमनफासलेऔर बाजारजैसी कई यादगार फिल्में शामिल हैं इनमें चश्मे बुद्दूरको खासतौर पर दर्शकों ने बहुत पसंद किया और यह उनकी सबसे लोकप्रिय फिल्मों में से एक बन गई

    फारूख शेख का फिल्मी करियर 1977 से 1989 तक सक्रिय रहा इसके बाद उन्होंने टेलीविजन में काम करना शुरू किया और 1988 से 2000 तक टीवी पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई बाद में 2008 में उन्होंने एक बार फिर फिल्मों में वापसी की और लाहौरये जवानी है दीवानीशंघाईऔर क्लब 60जैसी फिल्मों में काम करके अपनी प्रतिभा का परिचय दिया

    अपने पूरे करियर में फारूख शेख ने जिस तरह के किरदार निभाए वे यथार्थ के बेहद करीब थे और उन्होंने अपने अभिनय से सिनेमा को एक नई दिशा दी 28 दिसंबर 2013 को दुबई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया लेकिन उनके अभिनय और सादगी की छाप आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जिंदा है