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  • ‘ओम शांति ओम’ के ये सीन थे पूरी तरह VFX-मेकिंग देखकर घूम जाएगा दिमाग

    ‘ओम शांति ओम’ के ये सीन थे पूरी तरह VFX-मेकिंग देखकर घूम जाएगा दिमाग

    नई दिल्ली। साल 2007 की ब्लॉकबस्टर फिल्म Om Shanti Om के कुछ बेहद खास सीन्स में ऐसा VFX इस्तेमाल किया गया था, जिसे दर्शक पकड़ ही नहीं पाए। पुराने बॉलीवुड क्लासिक फुटेज को मॉर्फ कर नए सीन में बदलने की यह तकनीक आज भी फिल्ममेकिंग का शानदार उदाहरण मानी जाती है।

    साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म Om Shanti Om न सिर्फ अपने गानों और कहानी के लिए याद की जाती है, बल्कि इसके शानदार VFX और तकनीकी प्रयोगों ने भी दर्शकों को खूब प्रभावित किया था। शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण स्टारर इस फिल्म ने उस समय बॉलीवुड में विजुअल इफेक्ट्स के इस्तेमाल को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया था।

    फिल्म में कई ऐसे सीन थे जो देखने में बेहद साधारण लगे, लेकिन असल में उन्हें तैयार करने में भारी VFX और एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। सबसे चर्चित सीन वह था जिसमें दीपिका पादुकोण पुराने जमाने के दिग्गज कलाकारों जैसे राजेश खन्ना, सुनील दत्त और जीतेंद्र के साथ स्क्रीन शेयर करती नजर आती हैं। दर्शकों को लगा कि यह सब साधारण एडिटिंग है, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा जटिल थी।

    दरअसल, मेकर्स ने पुराने फिल्मों की फिजिकल रील्स को डिजिटल फॉर्मेट में कन्वर्ट किया। इसके बाद उन क्लिप्स को बेहद बारीकी से एडिट कर नए सीन में फिट किया गया। इस प्रक्रिया में पुराने एक्टर्स को उनके ओरिजिनल फुटेज से अलग कर डिजिटल कंपोजिटिंग के जरिए नए सीन में जोड़ा गया, जिसमें दीपिका पादुकोण को पूरी तरह से नए तरीके से प्लेस किया गया था।

    सबसे बड़ी चुनौती थी कि पुराने फुटेज की लाइटिंग, कैमरा एंगल और मूवमेंट को नए सेट के साथ पूरी तरह मैच किया जाए। यदि जरा भी गड़बड़ी होती, तो सीन नकली लग सकता था। यही वजह थी कि टीम को पुराने क्लिप्स की हर डिटेल कॉस्ट्यूम से लेकर एक्सप्रेशन तक का गहराई से अध्ययन करना पड़ा।

    इसके अलावा एक नया सेट भी तैयार किया गया ताकि बैकग्राउंड और वातावरण पूरी तरह से पुराने दौर जैसा लगे। VFX टीम ने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि दर्शकों को यह महसूस ही न हो कि वे दो अलग-अलग समय की फुटेज को एक साथ देख रहे हैं।

    फिल्म की खासियत यह रही कि इतने जटिल तकनीकी काम के बावजूद यह सब इतना सहज दिखा कि दर्शकों ने इसे नोटिस भी नहीं किया। यही Om Shanti Om की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है कि उसने मनोरंजन के साथ-साथ तकनीकी नवाचार का भी शानदार मिश्रण पेश किया।

    आज के समय में जब VFX फिल्मों का अहम हिस्सा बन चुका है, तब भी इस फिल्म के ये सीन भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर माने जाते हैं।

    ‘ओम शांति ओम’ ने साबित किया कि अगर तकनीक और क्रिएटिविटी सही तरीके से मिल जाए, तो पुरानी और नई दुनिया को एक ही फ्रेम में जोड़ा जा सकता है।

  • चेतावनियों को दरकिनार कर रणदीप हुड्डा ने बनाई ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ फिल्म की अनसुनी कहानी

    चेतावनियों को दरकिनार कर रणदीप हुड्डा ने बनाई ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ फिल्म की अनसुनी कहानी

    नई दिल्ली:  अभिनेता रणदीप हुड्डा ने अपनी पहली डायरेक्टोरियल फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के जरिए न सिर्फ अपने अभिनय का बल्कि निर्देशन का भी एक नया आयाम प्रस्तुत किया यह फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी हो लेकिन इसके निर्माण की कहानी बेहद प्रेरणादायक और संघर्षों से भरी रही

    इस फिल्म को बनाने से पहले रणदीप हुड्डा को कई लोगों ने यह चेतावनी दी थी कि वे इस तरह की संवेदनशील और ऐतिहासिक फिल्म का हिस्सा न बनें क्योंकि इसका उनके करियर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है कई शुभचिंतकों ने उन्हें यह फिल्म छोड़ने की सलाह दी लेकिन रणदीप ने इन सभी चेतावनियों को दरकिनार करते हुए इसे बनाने का निर्णय लिया और खुद ही इस प्रोजेक्ट की कमान संभाल ली

    फिल्म की कहानी को पर्दे पर जीवंत बनाने के लिए रणदीप हुड्डा ने असाधारण मेहनत की उन्होंने वीर सावरकर के किरदार में ढलने के लिए 32 किलो तक वजन कम किया और खुद को मानसिक रूप से भी उस दौर की परिस्थितियों में ढालने का प्रयास किया काला पानी की सजा के दौरान सावरकर की स्थिति को समझने के लिए उन्होंने खुद को अंधेरे कमरे में बंद रखना शुरू कर दिया और दिन में केवल एक बार भोजन किया ताकि किरदार की गहराई को महसूस किया जा सके

    फिल्म के लिए रिसर्च के दौरान रणदीप ने पाया कि सावरकर के बारे में अंग्रेजी साहित्य में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है इस कारण उन्होंने विभिन्न किताबों और स्रोतों का अध्ययन किया और एक आधारभूत स्क्रिप्ट तैयार की हालांकि पूरी स्क्रिप्ट और संवाद तैयार करने के लिए उन्होंने अपने सह लेखक के साथ मिलकर मात्र तीन दिनों में पूरी पटकथा लिख डाली इस दौरान उन्होंने लगातार 12-12 घंटे काम किया

    इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए रणदीप हुड्डा ने न केवल अपनी मेहनत बल्कि अपनी निजी संपत्ति का भी एक हिस्सा लगाया यह उनके समर्पण और जुनून को दर्शाता है कई लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि फिल्म के निर्माण के दौरान उन्हें बॉलीवुड इंडस्ट्री से अपेक्षित समर्थन भी नहीं मिला

    फिल्म को लेकर कुछ रचनात्मक मतभेद भी सामने आए जिसके चलते निर्देशक महेश मांजरेकर ने इस प्रोजेक्ट को बीच में ही छोड़ दिया इसके बाद रणदीप ने खुद ही फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली और इसे पूरा किया

    फिल्म रिलीज के बाद यह विवादों में भी रही और इसका बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन भी अपेक्षा के अनुसार नहीं रहा लेकिन इसके बावजूद यह फिल्म रणदीप हुड्डा के साहस और समर्पण का प्रतीक बन गई जो यह दिखाती है कि एक कलाकार अपने जुनून के लिए किस हद तक जा सकता है