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  • शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

    शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

    नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई कलाकार अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन राजेश खन्ना की पहली फिल्म ‘आखिरी खत’ के दौरान जो हुआ, वह आज भी फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय है। साल 1966 में रिलीज हुई इस फिल्म से राजेश खन्ना ने बड़े पर्दे पर कदम रखा था। फिल्म का निर्देशन चेतन आनंद ने किया था, जो अपने यथार्थवादी और संवेदनशील सिनेमा के लिए जाने जाते थे।

    किरदार में असली थकान दिखाने के लिए नहीं सोने दिया

    फिल्म में राजेश खन्ना का किरदार मानसिक तनाव और भावनात्मक संघर्ष से गुजरता है। निर्देशक चाहते थे कि उनके चेहरे पर थकान बनावटी न लगे, बल्कि वास्तविक दिखाई दे। बताया जाता है कि चेतन आनंद आधी रात को फोन कर-करके राजेश खन्ना को जगा देते थे, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती थी। यह सिलसिला कई दिनों तक चला और करीब तीन दिन बाद जब अभिनेता सेट पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर वास्तविक थकान और बेचैनी साफ नजर आ रही थी। निर्देशक की यह तकनीक फिल्म के उस दृश्य के लिए कारगर साबित हुई, जहां किरदार को बेहद परेशान और टूटे हुए मनोभाव में दिखाना था।

    ऑस्कर तक पहुंची थी ‘आखिरी खत’

    ‘आखिरी खत’ केवल राजेश खन्ना की पहली फिल्म ही नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई। यह फिल्म भारत की ओर से अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी के लिए भेजी गई थी। अग्रेजी में ‘द लास्ट लेटर’ नाम से पहचानी जाने वाली इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हासिल की थी।

    एक बच्चे की कहानी ने जीता दिल

    फिल्म में राजेश खन्ना के साथ मास्टर बंटी बहल भी नजर आए थे। कहानी गोविंद नाम के युवक और उसकी पत्नी लज्जो के इर्द-गिर्द घूमती है। परिस्थितियों के कारण दोनों अलग हो जाते हैं और एक छोटा बच्चा मुंबई की भीड़ में खो जाता है इसके बाद पिता अपने बेटे की तलाश में भटकता है और कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है। फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती एक छोटे बच्चे के साथ वास्तविक लोकेशंस पर शूटिंग करना था।

    15 महीने के बच्चे के साथ हुई थी मुश्किल शूटिंगनिर्देशक चेतन आनंद के बेटे Ketan Anand ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने 15 महीने के बच्चे के साथ फिल्म की शूटिंग की थी। बच्चे को मुंबई की सड़कों पर स्वाभाविक रूप से चलते हुए कैमरे में कैद करना उस दौर में बेहद कठिन काम था। यही वजह है कि ‘आखिरी खत’ को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है और यह राजेश खन्ना के शानदार फिल्मी सफर की शुरुआत भी बनी।

  • जब मेकअप ने बदल दी पहचान, ‘मदर इंडिया’ ने सेट पर नहीं पहचाना सुनील दत्त..

    जब मेकअप ने बदल दी पहचान, ‘मदर इंडिया’ ने सेट पर नहीं पहचाना सुनील दत्त..

    नई दिल्ली। फिल्मी दुनिया में कई बार ऐसे पल सामने आते हैं जो पर्दे के पीछे की असल कहानी को और भी दिलचस्प बना देते हैं। ऐसा ही एक यादगार किस्सा उस समय का है जब भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री नरगिस दत्त अपने ही पति सुनील दत्त को पहचान नहीं सकीं। यह घटना एक फिल्म के सेट पर हुई, जहां एक किरदार के लिए बेहद भारी और वास्तविक दिखने वाला मेकअप किया गया था।

    सुनील दत्त उस दृश्य में एक वृद्ध व्यक्ति का किरदार निभा रहे थे। उनके लुक को इतना बदल दिया गया था कि चेहरे की बनावट, उम्र और हावभाव पूरी तरह से एक अलग व्यक्ति जैसे लग रहे थे। मेकअप की बारीकी इतनी शानदार थी कि पहचान पाना लगभग असंभव हो गया था।

    जब नरगिस दत्त सेट पर पहुंचीं, तो उन्होंने सामान्य रूप से अपने पति को ढूंढना शुरू किया। उन्हें उम्मीद थी कि सुनील दत्त कहीं आस-पास होंगे, लेकिन जब उनकी नजर उस वृद्ध किरदार पर पड़ी, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं हुआ कि वह उनके पति ही हैं। वे कई बार आसपास के लोगों से पूछती रहीं कि सुनील दत्त कहां हैं।

    दिलचस्प बात यह थी कि सुनील दत्त उसी समय उनके सामने खड़े थे, लेकिन भारी मेकअप के कारण नरगिस उन्हें पहचान नहीं पा रही थीं। बातचीत के दौरान भी वह उन्हें एक सामान्य कलाकार समझती रहीं और लगातार अपने पति की तलाश करती रहीं।

    कुछ समय बाद जब सच्चाई सामने आई कि वही वृद्ध किरदार असल में सुनील दत्त हैं, तो नरगिस दत्त हैरान रह गईं। उन्हें यकीन नहीं हुआ कि मेकअप की मदद से कोई व्यक्ति इस तरह पूरी तरह बदल सकता है। इस अनोखे अनुभव से प्रभावित होकर उन्होंने मेकअप आर्टिस्ट की खूब सराहना की और अपनी ओर से एक कीमती उपहार भी दिया।

    यह घटना सिर्फ एक मजेदार किस्सा नहीं बल्कि फिल्मी तकनीक और कला की उस ताकत को भी दिखाती है, जो किसी कलाकार की पहचान तक बदल सकती है। नरगिस और सुनील दत्त का यह वाकया आज भी सिनेमा की दुनिया में एक दिलचस्प और यादगार कहानी के रूप में सुनाया जाता है।

  • अभिनय की नई उड़ान, अनुपम खेर ने शुरू की 551वीं फिल्म, भूमिका होगी चौंकाने वाली..

    अभिनय की नई उड़ान, अनुपम खेर ने शुरू की 551वीं फिल्म, भूमिका होगी चौंकाने वाली..

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के अनुभवी और चर्चित अभिनेता अनुपम खेर ने एक बार फिर अपने लंबे और सक्रिय करियर में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। उन्होंने अपनी 551वीं फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है, जिसकी जानकारी उन्होंने अपने प्रशंसकों के साथ साझा की है। इस नई शुरुआत के साथ ही एक बार फिर उनके अभिनय सफर को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।
    इस फिल्म की खास बात यह बताई जा रही है कि इसमें अनुपम खेर का किरदार उनके अब तक निभाए गए सभी किरदारों से बिल्कुल अलग होगा। अभिनेता ने खुद इस बात की ओर इशारा किया है कि वह इस बार खुद को एक नई चुनौती देने जा रहे हैं, ताकि अभिनय के स्तर पर कुछ नया और अलग किया जा सके। उनका मानना है कि लगातार एक जैसी भूमिकाएं करने से कलाकार की रचनात्मकता सीमित हो जाती है, इसलिए नए प्रयोग करना जरूरी है।
    फिल्म की शूटिंग शुरू होने के साथ ही उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह एक बार फिर अपने करियर की पहली फिल्म की शुरुआत कर रहे हों। यह भावना उनके लिए बेहद खास रही, क्योंकि इतने लंबे करियर के बाद भी नया काम शुरू करते समय वही उत्साह और ऊर्जा महसूस हो रही है।
    इस फिल्म की एक पहली झलक भी सामने आई है, जिसमें वह सफेद परिधान में नजर आ रहे हैं। यह लुक उनके किरदार को लेकर उत्सुकता को और बढ़ा रहा है। हालांकि कहानी के बारे में ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे रहस्य से भरा हुआ बताया जा रहा है, जो दर्शकों के लिए आगे चलकर एक नया अनुभव लेकर आएगा।
    अनुपम खेर ने यह भी कहा है कि वह लंबे समय से ऐसी कहानी की तलाश में थे, जिसमें वास्तविकता और गहराई हो। अब उन्हें ऐसा प्रोजेक्ट मिला है जो उनकी इस तलाश को पूरा करता है। उनका मानना है कि यह किरदार उनके अभिनय जीवन में एक नया मोड़ साबित हो सकता है।
    अपने करियर में चार दशकों से अधिक समय तक सक्रिय रहने वाले अनुपम खेर ने सैकड़ों फिल्मों में अलग-अलग प्रकार के किरदार निभाए हैं। उनकी अभिनय यात्रा भारतीय सिनेमा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है, जहां उन्होंने हास्य, गंभीर और भावनात्मक सभी प्रकार की भूमिकाओं को बखूबी निभाया है।
    उनकी पिछली फिल्म कुछ समय पहले रिलीज हुई थी, जिसके बाद अब वह इस नए प्रोजेक्ट के साथ फिर से दर्शकों के सामने आने की तैयारी कर रहे हैं। इस बार वह एक डिजिटल प्रोजेक्ट से भी जुड़े हैं, जिससे उनके काम का दायरा और भी व्यापक होता नजर आ रहा है।
    नई फिल्म की शुरुआत के साथ अनुपम खेर ने अपने प्रशंसकों से समर्थन और आशीर्वाद की उम्मीद जताई है। उनका यह नया प्रयास न केवल उनके करियर को एक नई दिशा देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अनुभव और जुनून के साथ कलाकार लगातार खुद को नया रूप दे सकता है।
  • अभय देओल ने ‘देव डी’ की शूटिंग का अनोखा अनुभव किया साझा..

    अभय देओल ने ‘देव डी’ की शूटिंग का अनोखा अनुभव किया साझा..

    नई दिल्ली।  दिल्ली में फिल्मी दुनिया के चर्चित अभिनेता अभय देओल ने अपनी लोकप्रिय फिल्म ‘देव डी’ से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया है, जिसने दर्शकों और प्रशंसकों के बीच फिर से इस फिल्म को चर्चा में ला दिया है। यह फिल्म हाल ही में दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज हुई है और एक बार फिर दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी बीच अभिनेता ने शूटिंग के दौरान का एक ऐसा किस्सा बताया, जिसमें उन्होंने बिना एक भी डायलॉग बोले अपने किरदार को बेहद प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा था।

    अभय देओल ने एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए उस सीन को याद किया, जिसमें उनका किरदार पूरी तरह चुप रहता है। इस दृश्य में कहानी आगे बढ़ती है और दूसरे किरदार बातचीत करते हैं, जबकि उनका किरदार केवल मौजूद रहता है। उन्होंने बताया कि स्क्रिप्ट के अनुसार उस सीन में उनके लिए कोई संवाद लिखा ही नहीं गया था, लेकिन यही सादगी उस पल को खास बना गई।

    अभय देओल ने बताया कि उन्होंने उस सीन में अपने किरदार की भावनाओं को शब्दों के बिना व्यक्त करने की कोशिश की। उनका मानना था कि कभी-कभी चुप्पी भी कहानी को आगे बढ़ाने में उतनी ही प्रभावशाली होती है जितनी बातचीत। शूटिंग के दौरान उन्होंने केवल अपने किरदार की उपस्थिति और भाव को ही केंद्र में रखा, जिससे पूरा दृश्य अधिक स्वाभाविक और वास्तविक लगने लगा।

    अभिनेता ने यह भी साझा किया कि जब निर्देशक ने शूटिंग पूरी होने पर कट कहा, तो उन्होंने इस दृश्य को लेकर उनकी सराहना की। निर्देशक ने यह सवाल भी किया कि उन्होंने बिना किसी अतिरिक्त संवाद के पूरे कमरे के माहौल को इतने सहज तरीके से कैसे व्यक्त किया। इस प्रतिक्रिया ने अभय देओल के लिए इस अनुभव को और भी खास बना दिया।

    अभय देओल के अनुसार, यह सीन सिर्फ एक टेक में पूरा हो गया था, जो अपने आप में एक अनोखा अनुभव था। उन्होंने कहा कि उस क्षण उन्हें लगा जैसे उनका किरदार पूरी तरह जीवंत हो गया हो और वह खुद उस दुनिया का हिस्सा बन गए हों। यह अनुभव उनके लिए आज भी यादगार है।

    फिल्म ‘देव डी’ अपने अनोखे कथानक और आधुनिक प्रस्तुति के लिए जानी जाती है। यह पारंपरिक कहानी को एक नए दृष्टिकोण से पेश करती है, जिसमें रिश्तों, भावनाओं और जीवन की जटिलताओं को अलग अंदाज में दिखाया गया है। फिल्म में अभय देओल के साथ माही गिल और कल्कि कोचलीन जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं।

    यह फिल्म अपने समय से आगे की सोच और प्रयोगात्मक शैली के कारण युवाओं के बीच खास जगह बनाने में सफल रही थी। आज भी इसकी कहानी और अभिनय को दर्शक सराहते हैं। अभय देओल द्वारा साझा किया गया यह अनुभव एक बार फिर साबित करता है कि कभी-कभी बिना शब्दों के भी कहानी को बेहद प्रभावशाली तरीके से कहा जा सकता है।

  • रोहित शेट्टी के शूटिंग सेट पर सुरक्षा कड़ी, डायरेक्टर के नजदीक जाने की अनुमति केवल चुनिंदा लोगों को

    रोहित शेट्टी के शूटिंग सेट पर सुरक्षा कड़ी, डायरेक्टर के नजदीक जाने की अनुमति केवल चुनिंदा लोगों को


    नई दिल्ली। रोहित शेट्टी इन दिनों अपनी फिल्म गोलमाल 5 की शूटिंग में व्यस्त हैं। इसी बीच उनके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने चार राउंड फायरिंग की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी। इस घटना के बाद रोहित शेट्टी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अब उनके फिल्म सेट पर भी कड़े सुरक्षा इंतजाम लागू कर दिए गए हैं। मामले की जांच के लिए एक स्पेशल टीम गठित की गई है जो पूरी तरह से मामले की तह तक पहुंचने में जुटी है।

    सूत्रों के अनुसार गोलमाल 5 की शूटिंग 15 फरवरी के बाद शुरू होने वाली थी। हालांकि अब शूटिंग उसी तय दिन से शुरू होगी या नहीं, इसका फैसला केवल रोहित शेट्टी ही करेंगे। लेकिन एक अन्य सूत्र का कहना है कि शूटिंग तय समय पर ही शुरू होगी और इसके लिए पहले से सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे। शूटिंग शुरू होने पर सेट पर 60 से अधिक सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया जाएगा जिसमें पुलिस कर्मी और रोहित के पर्सनल बॉडीगार्ड शामिल होंगे।

    सुरक्षा बढ़ाने के तहत सेट पर आने वाले हर व्यक्ति को रजिस्टर करवाना होगा और अपनी आईडी वेरीफाई करनी होगी। डायरेक्टर रोहित शेट्टी के नजदीक जाने की अनुमति केवल कुछ चुनिंदा लोगों को ही मिलेगी। जूनियर आर्टिस्ट से लेकर क्रू मेंबर तक, सभी को पहले से सुरक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा। हर आने-जाने वाली गाड़ी पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और वैनिटी वैन को भी एंट्री से पहले जांच से गुजरना जरूरी होगा। कॉल शीट को मैनेज किया जाएगा और शूटिंग लोकेशन की जानकारी केवल लिमिटेड लोगों को ही दी जाएगी।

    फायरिंग की घटना और सुरक्षा बढ़ाने के कारण रोहित शेट्टी की एक अन्य फिल्म भी फिलहाल होल्ड पर रखी गई है। इस फिल्म में जॉन अब्राहम लीड रोल में हैं और इसकी शूटिंग पिछले साल शुरू हुई थी। अब लगभग दो हफ्तों की शूटिंग बाकी है जिसे आगे पूरा किया जाएगा।सुरक्षा उपायों और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के चलते शूटिंग सेट पर काफी सावधानी बरती जा रही है। इसके बावजूद फिल्म की टीम शूटिंग के लिए पूरी तरह तैयार है और उम्मीद है कि सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच गोलमाल 5 की शूटिंग बिना किसी रुकावट के पूरी हो जाएगी।

  • शक्ति कपूर का खुलासा: ऑनस्क्रीन सीन देखकर थिएटर से उठकर चले गए थे माता-पिता

    शक्ति कपूर का खुलासा: ऑनस्क्रीन सीन देखकर थिएटर से उठकर चले गए थे माता-पिता


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के लीजेंडरी एक्टर शक्ति कपूर ने हाल ही में अपने करियर और परिवार के साथ जुड़ी एक दिलचस्प याद साझा की। शक्ति कपूर ने बताया कि उनके माता-पिता को उनके नेगेटिव किरदार और फिल्मों में महिलाओं के साथ निभाए गए सीन देखकर अक्सर शर्मिंदगी महसूस होती थी। एक बार तो ऐसा हुआ कि जब शक्ति कपूर के पहले ही सीन में उन्होंने एक लड़की का दुपट्टा खींचा, तो उनके माता-पिता थिएटर से उठकर बाहर चले गए।

    थिएटर में माता-पिता का रिएक्शन
    शक्ति कपूर ने अल्फा नियॉन स्टूडियोज के साथ बातचीत में बताया, मेरी दो बड़ी फिल्में रिलीज़ हो चुकी थीं और एक और फिल्म ‘इंसानियत के दुश्मन’ रिलीज़ हुई। मैंने अपने माता-पिता को फिल्म देखने के लिए बुलाया। लेकिन पहले ही सीन में मुझे एक लड़की का दुपट्टा खींचते देखा तो मेरे पापा ने तुरंत मेरी मां से कहा कि बाहर चले जाएं। उन्होंने कहा, ‘यह पहले बाहर ऐसा करता था और अब बड़े पर्दे पर भी कर रहा है। मैं यह फिल्म नहीं देखना चाहता।’”

    माता-पिता का सवाल: गुंडों के रोल क्यों?
    शक्ति कपूर ने आगे बताया कि उनके माता-पिता ने उनसे पूछा, “तुम गुंडों के रोल क्यों कर रहे हो? तुम्हें अच्छे इंसान के किरदार निभाने चाहिए। हेमा मालिनी और जीनत अमान जैसी एक्ट्रेस के साथ क्यों ऐसा काम कर रहे हो? लेकिन शक्ति कपूर ने अपनी राह चुनी। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि आपने मुझे जन्म दिया है और सिर्फ यही चेहरा दिया है। इस चेहरे को देखकर कोई मुझे अच्छे इंसान या हीरो का रोल नहीं देगा।

    मैं अपनी पहचान के अनुसार ही रोल चुनता हूँ।”

    बेटी श्रद्धा कपूर को भी होती थी शर्मिंदगी
    शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा कपूर, जो आज बॉलीवुड की सफल एक्ट्रेस हैं, भी बचपन में अपने पिता के निगेटिव रोल्स से शर्मिंदा हुआ करती थीं। श्रद्धा ने एक इंटरव्यू में कहा, “जब मैं छोटी थी, तो उनके विलेन रोल्स देखकर मैं नाराज हो जाती थी। मुझे यह पसंद नहीं आता था, लेकिन मेरी मां ने समझाया कि यह सिर्फ एक्टिंग है। अब मैं समझ गई हूँ कि पिता अपनी कला के प्रति कितने समर्पित हैं।”

    शक्ति कपूर के यादगार निगेटिव रोल
    1990 के दशक में शक्ति कपूर ने कई यादगार निगेटिव किरदार निभाए, जिन्होंने उन्हें बॉलीवुड में अलग पहचान दिलाई।

    भले ही उनके माता-पिता को शुरुआती दौर में ये रोल स्वीकार्य नहीं लगे, लेकिन शक्ति कपूर ने अपनी कला और अभिनय के दम पर नेगेटिव किरदारों में भी दर्शकों का दिल जीत लिया।

    शक्ति कपूर का यह खुलासा दर्शाता है कि बॉलीवुड में संघर्ष और परिवार की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। माता-पिता का विरोध, बेटी की नाराजगी और आलोचना के बावजूद शक्ति कपूर ने अपनी कला और पहचान बनाए रखी। यह कहानी दर्शकों को यह भी याद दिलाती है कि सच्ची प्रतिभा और आत्मविश्वास के सामने किसी भी आलोचना का असर कम होता है।