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  • फिल्ममेकर संजय गुप्ता के निधन से सदमे में मिलाप जावेरी, दोस्त को अंतिम विदाई देते समय छलके आंसू.

    फिल्ममेकर संजय गुप्ता के निधन से सदमे में मिलाप जावेरी, दोस्त को अंतिम विदाई देते समय छलके आंसू.

    नई दिल्ली । फिल्ममेकर संजय गुप्ता के अचानक निधन की खबर से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। 31 अक्टूबर को उनके निधन की जानकारी सामने आने के बाद फिल्म जगत से जुड़े लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इस बीच उनके करीबी दोस्त और निर्देशक मिलाप जावेरी भी उन्हें अंतिम विदाई देने उनके घर पहुंचे। दोस्त को खोने के गम में मिलाप काफी भावुक नजर आए। घर के बाहर पहुंचने के दौरान उनके आंसू छलक पड़े और वह खुद को संभाल नहीं सके।

    संजय गुप्ता के निधन की खबर ने मिलाप जावेरी को गहरा सदमा पहुंचाया है। दोनों के बीच करीबी दोस्ती थी। संजय के घर पहुंचने पर मिलाप के चेहरे पर दुख साफ दिखाई दिया। अपने दोस्त को अंतिम विदाई देने पहुंचे निर्देशक इस दौरान काफी भावुक नजर आए। उनका यह भावुक पल दोनों के बीच के गहरे रिश्ते को दर्शाता है।

    जानकारी के मुताबिक, 57 वर्षीय संजय गुप्ता का निधन 31 अक्टूबर को हुआ। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि मुंबई स्थित उनके घर में गिरने के कारण उनके सिर पर गंभीर चोट लगी थी। इस घटना के बाद उनके निधन की खबर सामने आई, जिससे फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को गहरा झटका लगा।

    ‘कांटे’ और ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ से मिली पहचान

    संजय गुप्ता हिंदी सिनेमा में अपनी एक्शन और क्राइम आधारित फिल्मों के लिए पहचाने जाते थे। उन्होंने अपने निर्देशन के जरिए बॉलीवुड में अलग पहचान बनाई थी। उनकी फिल्मों में अपराध की दुनिया, दमदार एक्शन और घटनाओं पर आधारित कहानियों को प्रमुखता से दिखाया जाता था।

    निर्देशक के रूप में उन्होंने ‘आतिश’, ‘कांटे’, ‘जिंदा’, ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’, ‘शूटआउट एट वडाला’, ‘जज्बा’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इन फिल्मों के जरिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग शैली विकसित की। उनकी फिल्मों में एक्शन और क्राइम की कहानियों को पेश करने का अंदाज दर्शकों के बीच चर्चा में रहा।

    फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर
    संजय गुप्ता के निधन के बाद फिल्म जगत से जुड़े लोगों में शोक का माहौल है। उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और फिल्मी दुनिया के अन्य लोगों की ओर से भी उन्हें याद किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनके निधन पर दुख जताते हुए श्रद्धांजलि दी है।

    मिलाप जावेरी का भावुक होकर उनके घर पहुंचना भी इस दुखद घटना के बीच चर्चा में है। संजय गुप्ता और मिलाप जावेरी के बीच दोस्ती का रिश्ता था। ऐसे में उनके निधन की खबर मिलाप के लिए व्यक्तिगत क्षति बन गई। हिंदी सिनेमा में संजय गुप्ता ने एक्शन और क्राइम फिल्मों के जरिए अपनी पहचान बनाई थी। उनके निर्देशन में बनी कई फिल्में उनके फिल्मी सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। उनके अचानक निधन से फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसे निर्देशक को खो दिया है, जिन्होंने अपनी अलग शैली से दर्शकों के बीच जगह बनाई थी।

  • जब गोविंदा को देखकर आश्वस्त नहीं थे पहलाज निहलानी, लेकिन डांस टैलेंट ने दिलाया बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका

    जब गोविंदा को देखकर आश्वस्त नहीं थे पहलाज निहलानी, लेकिन डांस टैलेंट ने दिलाया बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका


    नई दिल्ली/ मुंबई । हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्म निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी के निधन के बाद फिल्म जगत उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने कई सफल फिल्मों का निर्माण किया और अनेक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया। उनके जीवन से जुड़े कई यादगार प्रसंग इन दिनों चर्चा में हैं, जिनमें अभिनेता Govinda के करियर की शुरुआत से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी शामिल है।

    पहलाज निहलानी उन निर्माताओं में गिने जाते थे, जो नए कलाकारों की क्षमता को पहचानने में विश्वास रखते थे। फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उन्होंने 1980 के दशक में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी फिल्मों में मनोरंजन, पारिवारिक भावनाएं और व्यावसायिक सफलता का संतुलित मेल देखने को मिलता था। इसी दौर में उन्होंने एक ऐसे युवा कलाकार को मौका दिया, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा का बड़ा सितारा बना।

    यह कहानी उस समय की है जब गोविंदा अपने करियर की शुरुआत करने की कोशिश कर रहे थे। पहलाज निहलानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब गोविंदा पहली बार उनसे मिलने पहुंचे तो उनका व्यक्तित्व और लुक उन्हें बहुत प्रभावशाली नहीं लगा। निर्माता के मन में यह संदेह था कि क्या यह युवा अभिनेता बड़े पर्दे पर दर्शकों को प्रभावित कर पाएगा। पहली मुलाकात के बाद वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे और किसी निर्णय पर पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था।

    हालांकि अगले ही दिन परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। गोविंदा अपने डांस का एक वीडियो लेकर निहलानी के पास पहुंचे। जैसे ही निर्माता ने वह वीडियो देखा, उनकी राय बदल गई। गोविंदा की ऊर्जा, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और शानदार नृत्य कौशल ने उन्हें प्रभावित कर दिया। निहलानी को महसूस हुआ कि इस युवा कलाकार में वह क्षमता मौजूद है जो उसे भीड़ से अलग बनाती है। इसके बाद उन्होंने गोविंदा को अपनी फिल्म में मुख्य भूमिका देने का फैसला कर लिया।

    यह फैसला आगे चलकर हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे सफल निर्णयों में शामिल माना गया। वर्ष 1986 में रिलीज हुई Ilzaam से गोविंदा ने बतौर हीरो बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और अभिनेता को दर्शकों के बीच पहचान मिलने लगी। इसके बाद गोविंदा और पहलाज निहलानी की जोड़ी ने कई सफल फिल्मों में साथ काम किया।

    उनकी साझेदारी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। Shola Aur Shabnam और Aankhen जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। इन फिल्मों की सफलता ने गोविंदा को उस दौर के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल कर दिया। उनकी कॉमिक टाइमिंग, डांस और मनोरंजक अभिनय शैली दर्शकों की पहली पसंद बन गई।

    पहलाज निहलानी का योगदान केवल सफल फिल्में बनाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने कई कलाकारों को अवसर देकर उनके करियर को नई दिशा दी। निर्माता के रूप में उनकी पहचान ऐसे फिल्मकार की रही, जो दर्शकों की पसंद को अच्छी तरह समझते थे। बाद में उन्होंने फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई और फिल्म उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।

    उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे निर्माता को खो दिया है, जिसने न केवल कई सफल फिल्मों का निर्माण किया बल्कि नए कलाकारों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। गोविंदा से जुड़ा यह किस्सा उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और प्रतिभा पहचानने की क्षमता का एक यादगार उदाहरण माना जाता है।