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  • फिल्मों के नाम में ‘के’ था सफलता का फॉर्मूला, लेकिन एक कहानी ने तोड़ दिया करण जौहर का भ्रम

    फिल्मों के नाम में ‘के’ था सफलता का फॉर्मूला, लेकिन एक कहानी ने तोड़ दिया करण जौहर का भ्रम


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की दुनिया में जब सफल फिल्म निर्माताओं का जिक्र होता है तो निर्देशक और निर्माता Karan Johar का नाम प्रमुखता से सामने आता है। बीते कई वर्षों में उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई है। बड़े सेट, भावनात्मक कहानियां, रिश्तों की गहराई और पारिवारिक मूल्यों को पर्दे पर भव्य तरीके से दिखाने की उनकी शैली ने उन्हें फिल्म जगत का एक बड़ा नाम बना दिया। हालांकि फिल्मों के अलावा करण अपनी निजी सोच और मान्यताओं को लेकर भी कई बार चर्चा में रहे हैं।

    एक समय ऐसा था जब करण जौहर न्यूमरोलॉजी यानी अंकों और अक्षरों के प्रभाव पर काफी विश्वास करते थे। उनका मानना था कि अंग्रेजी का ‘K’ अक्षर उनके लिए बेहद शुभ है और इसी वजह से उनकी फिल्मों को सफलता मिलती है। यही कारण था कि उन्होंने लगातार अपनी फिल्मों के नाम ऐसे चुने जिनकी शुरुआत इसी अक्षर से होती थी। उनकी कई चर्चित और सफल फिल्मों के नाम इसी पैटर्न पर आधारित रहे। उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में भी न्यूमरोलॉजी को लेकर खास आकर्षण देखा जाता था और कई लोग नामों की स्पेलिंग तक बदलते नजर आते थे।

    करण जौहर की फिल्मी यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है। फिल्मी माहौल में बड़े होने के कारण उनका झुकाव बचपन से सिनेमा की ओर था। उन्होंने शुरुआत पर्दे के पीछे काम करते हुए की और बाद में निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। उनकी पहली निर्देशित फिल्म ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई और उसके बाद उन्होंने कई यादगार फिल्मों का निर्माण किया। उनकी फिल्मों ने केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल नहीं की बल्कि दर्शकों के दिलों में भी खास जगह बनाई।

    लेकिन समय के साथ करण की सोच में बदलाव आया। उन्होंने एक बातचीत के दौरान बताया था कि निर्देशक Rajkumar Hirani की फिल्म Lage Raho Munna Bhai देखने के बाद उनकी सोच बदल गई। फिल्म में अंधविश्वास और न्यूमरोलॉजी जैसे विषयों को हल्के अंदाज में दिखाया गया था, जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्हें महसूस हुआ कि किसी फिल्म की सफलता उसके नाम के पहले अक्षर से नहीं बल्कि उसकी कहानी, मेहनत और दर्शकों से जुड़ाव से तय होती है।

    इसके बाद उन्होंने फिल्मों के नाम को लेकर अपनी पुरानी मान्यता छोड़ दी और नए विचारों के साथ आगे बढ़ना शुरू किया। आने वाले वर्षों में उन्होंने कई अलग-अलग शीर्षकों वाली सफल फिल्में दीं और निर्माता के रूप में नए कलाकारों को भी मौका दिया। आज करण जौहर केवल एक सफल निर्देशक नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की बदलती सोच और आधुनिक फिल्म निर्माण शैली की एक बड़ी पहचान बन चुके हैं। उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि समय के साथ विचार बदलना और नई सोच अपनाना सफलता का अहम हिस्सा हो सकता है।

  • सदीभर का सिनेमाई सफर कैसे रामायण ने हर दौर में जीता दर्शकों का दिल

    सदीभर का सिनेमाई सफर कैसे रामायण ने हर दौर में जीता दर्शकों का दिल


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में रामायण केवल एक कहानी नहीं बल्कि भावनाओं आस्था और सांस्कृतिक पहचान का आधार रही है यही कारण है कि सिनेमा की शुरुआत से लेकर आज के आधुनिक दौर तक यह महाकाव्य लगातार नए रूपों में दर्शकों के सामने आता रहा है और हर बार उतनी ही गहराई से लोगों के दिलों को छूता है

    इस सफर की शुरुआत साल 1917 में हुई जब दादासाहेब फाल्के ने मूक फिल्म लंका दहन बनाई उस दौर में तकनीक सीमित थी लेकिन आस्था असीम थी इस फिल्म में अण्णा सालुंके ने राम और सीता दोनों की भूमिका निभाई जो अपने आप में अनोखा प्रयोग था यह फिल्म भारतीय सिनेमा की शुरुआती सफलताओं में शामिल हुई और इसने पौराणिक कथाओं को परदे पर लाने की परंपरा शुरू की

    इसके बाद दशकों तक इस महागाथा पर फिल्में बनती रहीं राम राज्य जैसी फिल्में अपने समय की बड़ी हिट साबित हुईं जबकि संपूर्ण रामायण ने पूरी कथा को विस्तार से दिखाने की कोशिश की आगे चलकर रामायण द लीजेंड ऑफ प्रिंस रामा जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की एनीमेशन फिल्म ने इस कहानी को वैश्विक पहचान दिलाई वहीं हनुमान बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई

    अगर कुल आंकड़ों की बात करें तो मुख्य कथा पर लगभग पचास फिल्में बन चुकी हैं जबकि अलग अलग पात्रों और घटनाओं को जोड़कर यह संख्या साठ से ज्यादा हो जाती है एनीमेशन और लघु फिल्मों को मिलाकर यह आंकड़ा करीब दो सौ तक पहुंचता है जो इस बात का प्रमाण है कि हर दौर इस कथा को अपने तरीके से जीना चाहता है

    टीवी की दुनिया में रामानंद सागर की रामायण ने इतिहास रच दिया अरुण गोविल दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी द्वारा निभाए गए किरदार इतने लोकप्रिय हुए कि दर्शकों ने उन्हें पूजनीय मान लिया 1987 से 1988 के बीच प्रसारित इस शो के दौरान सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था और 2020 में दोबारा प्रसारण के समय भी इसने रिकॉर्ड तोड़ दिए

    इसके बाद भी कई टीवी शोज आए जैसे सीता के राम और श्रीमद रामायण कुल मिलाकर हिंदी में कई बड़े और छोटे संस्करण बनाए जा चुके हैं जो इस कथा की निरंतर लोकप्रियता को दर्शाते हैं

    अब एक बार फिर यह महाकाव्य बड़े स्तर पर लौट रहा है निर्देशक नितेश तिवारी की नई फिल्म रामायण में रणबीर कपूर साई पल्लवी यश सनी देओल जैसे बड़े कलाकार नजर आएंगे इसे वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी है और इसका पहला भाग दिवाली 2026 में रिलीज होगा

    असल में रामायण की शक्ति इसकी कालातीतता में है इसमें त्याग कर्तव्य प्रेम और धर्म जैसे जीवन के मूल मूल्य समाहित हैं यही वजह है कि तकनीक बदलती है माध्यम बदलते हैं लेकिन यह कथा हर पीढ़ी के लिए नई बनी रहती है और आगे भी यूं ही प्रेरणा देती रहेगी

  • सबसे ज्यादा व्यूज देकर ऑडियंस ने इस फिल्म को बनाया नंबर 1

    सबसे ज्यादा व्यूज देकर ऑडियंस ने इस फिल्म को बनाया नंबर 1

    मुंबई। OTT फिल्मों का व्यूवरशिप रिपोर्ट कार्ड सामने आया है। इस फिल्म के रिपोर्ट कार्ड में टॉप 5 फिल्मों ने अपनी जगह बनाई है। खास बात ये है कि इस लिस्ट में ये एक फिल्म छाई हुई है। इस फिल्म ने आते ही OTT ऑडियंस की लिस्ट में टॉप पर अपनी जगह बना ली है।

    OTT पर आई फिल्मों की लिस्ट आ गई है। व्यूवरशिप के मामले में इन 5 फिल्मों ने सभी को पीछे छोड़ दिया है। रश्मिका मंदाना की फिल्म लगातार ऑडियंस की फेवरिट लिस्ट में बनी हुई है और टॉप कर ही है। वहीं इस बार नवाज़ुद्दीन की रात अकेली है भी छा गई है।ल कुछ ही दिनों में फिल्म को ऑडियंस से जबरदस्त रिएक्शन मिला है। रश्मिका मंदाना की फिल्म पिछले तीन हफ्तों से टॉप पर बनी हुई है।
    थामा

    आयुष्मान खुराना और रश्मिका मंदाना स्टारर फिल्म थामा को थिएटर पर जबरदस्त रिएक्शन मिला था। अब ये फिल्म OTT पर भी धमाका कर रही है। हाल में अमेजन प्राइम वीडियो पर आई थामा आते ही छा गई है। OTT ऑडियंस ने एक हफ्ते में इस फिल्म को 31 लाख से ज्यादा बार देखा है। आने वाले दिनों में ये फिल्म व्यूज में कमाल कर सकती है। ये फिल्म OTT व्यूवरशिप के मामले में नुम्बर 1 पर बनी हुई है।
    द गर्लफ्रेंड

    रश्मिका मंदाना की फिल्म द गर्लफ्रेंड पिछले तीन हफ्तों से ज्यादा समय से नेटफ्लिक्स पर ट्रेंड कर रही है। OTT व्यूवरशिप के मामले में फिल्म नंबर 2 पर ट्रेंड कर रही है। फिल्म एक भूमा नाम की लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है। वो एक ऐसे रिश्ते में बंधी है जिससे वो बाहर निकलना चाहती है।
    कांथा

    नेटफ्लिक्स पर दुलकर सलमान की एक फिल्म कांथा पसंद की जा रही है। फिल्म एक अनोखी कहानी पर बेस्ड है। फिल्म में एक एक्टर महादेवन और डायरेक्टर अप्पा के बीच के बुरे रिश्ते को दिखाया जाता है। दोनों की दुश्मनी की वजह से फिल्म की हीरोइन का मर्डर हो जाता है।इस फिल्म को पिछले एक हफ्ते में 15 लाख से ज्यादा बार देखी गई है। ये नेटफ्लिक्स पर नंबर 3 पर ट्रेंड कर रही है।
    मिशन इम्पॉसिबल

    टॉप क्रुज स्टारर स्पाई थ्रिलर फिल्म मिशन इम्पॉसिबल के लिए क्रेज रहा है। पिछले हर पार्ट को ऑडियंस ने जबरदस्त रिएक्शन दिया है। हाल में OTT आई फिल्म सिर्फ एक हफ्ते में 13 लाख से ज्यादा बार देखा गया है। ये फिल्म OTT व्यूवरशिप के मामले में चौथे नंबर पर बनी हुई है।
    रात अकेली है

    नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी स्टारर फिल्म रात अकेली है हाल में नेटफ्लिक्स पर आई है। फिल्म मर्डर मिस्ट्री पर बेस्ड है और ट्रेंड कर रही है।
    रात अकेली है

    कुछ ही दिनों में ये फिल्म 12 लाख से ज्यादा व्यू के साथ नंबर 5 पर बनी हुई है। फिल्म की कहानी ऑडियंस को पसंद आ रही है।

  • उर्मिला मातोंडकर ने फिल्मों से दूरी पर की बात कहा समय आ गया है कि वापस सेट पर लौटूं

    उर्मिला मातोंडकर ने फिल्मों से दूरी पर की बात कहा समय आ गया है कि वापस सेट पर लौटूं


    नई दिल्ली । उर्मिला मातोंडकर जो बॉलीवुड की शानदार एक्ट्रेसेस में शुमार हैं काफी समय से बड़े पर्दे से गायब हैं। उनकी फिल्मों से दूर रहने की वजह से कई लोग यह सोचने लगे थे कि क्या उर्मिला ने बॉलीवुड को अलविदा ले लिया है। अब इन अफवाहों पर उर्मिला ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है और बताया कि वह अब सिल्वर स्क्रीन पर वापस लौटने के लिए तैयार हैं।

    उर्मिला ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए कहा “जब बात मेरे काम की आती है तो मैं हमेशा से ही सेलेक्टिव रही हूं। मैं किसी को इल्जाम नहीं लगा सकती जब लोग सोचते हैं कि मैं फिल्में या कुछ नहीं कर रही। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। फिलहाल मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि मैं वापस सिल्वर स्क्रीन पर आकर काम शुरू करूं।”
    उर्मिला ने इस बात का भी खुलासा किया कि वह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपना डेब्यू करने वाली हैं।

    यह एक नया कदम होगा उनके लिए और वह खासतौर पर इस प्लेटफॉर्म पर ऐसे रोल करना चाहती हैं जो उन्होंने पहले कभी नहीं किए। उर्मिला ने कहा “ओटीटी पर बहुत कुछ चल रहा है और मैं ऐसे रोल करना चाहती हूं जो मेरे करियर के दौरान पहले कभी नहीं किए।उर्मिला के करियर की बात करें तो वह 1991 में फिल्म नमसिम्हा से बतौर लीड एक्ट्रेस अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने के बाद कई हिट फिल्मों का हिस्सा बनीं। रंगीला जुदाई सत्या कौन भूत और पिंजर जैसी फिल्मों में उनकी शानदार एक्टिंग को दर्शकों और क्रिटिक्स ने सराहा था।

    हालांकि वह पिछले कुछ समय से बड़े पर्दे से दूर थीं लेकिन उन्होंने 2022 में टीवी शो डीआईडी सुपर मॉम्स में भी हिस्सा लिया था। इसके अलावा वह 2018 में फिल्म ब्लैकमेल के गाने बेवफा ब्यूटी में नजर आईं थीं।
    उनकी आखिरी फिल्म बतौर लीड एक्ट्रेस ईएमआई थी जिसमें उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब उर्मिला के फैंस उनके ओटीटी डेब्यू का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि वह नया अनुभव हासिल करने के लिए तैयार हैं। उर्मिला की वापसी निश्चित रूप से बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक नई हलचल मचाएगी।

  • गोविंदा का जन्मदिन स्पेशल बॉलीवुड से राजनीति तक गोविंदा का रंगीन सफर

    गोविंदा का जन्मदिन स्पेशल बॉलीवुड से राजनीति तक गोविंदा का रंगीन सफर

    नई दिल्ली ।मुंबई बॉलीवुड के सुपरस्टार गोविंदा आज भी फिल्मों और डांस के मामले में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।उनका नाम आते ही दिमाग में एक ही बात आती है कॉमेडी डांस और शानदार अभिनय। गोविंदा का असली नाम गोविंदा आहूजा है और उनका जन्म 21 दिसंबर 1963 को मुंबई महाराष्ट्र में हुआ।वह बॉलीवुड के सबसे सफल और चर्चित अभिनेताओं में से एक हैं जिनका करियर अब तक कई दशकों तक चला है। 
    गोविंदा ने अपने करियर की शुरुआत 1986 में फिल्म इल्जाम से की थी जिसमें उनके साथ नीलम शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे सितारे थे। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान कॉमेडी हीरो के रूप में बनाई और उनकी फिल्में दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बसी रही। उनके फनी अंदाज बेहतरीन टाइमिंग और कॉमिक सीन ने उन्हें हर वर्ग के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया।

    सुपरहिट फिल्में और डांस आइकन
    गोविंदा की फिल्मों का जादू आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उनकी फिल्मों जैसे राजा बाबू आंखें कुली नंबर वन आंदोलन बड़े मियां छोटे मियां दीवाना मस्ताना दुल्हे राजा अनाड़ी नंबर 1 शोला और शबनम राजा भैया जोरू का गुलाम हीरो नंबर 1 बेटी नंबर 1 और घर घर की कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया।इन फिल्मों में उनका अभिनय हास्य और शानदार डांस स्टाइल ने उन्हें दर्शकों का सबसे पसंदीदा स्टार बना दिया।

    गोविंदा का डांस भी कमाल का था।उनके डांस नंबर जैसे किसी डिस्को में जाएं सोना कितना सोना है तुझको ही दुल्हन बनाऊंगा और जोरू का गुलाम आज भी पार्टी और डांस के इवेंट्स में गाए जाते हैं।उनकी एनर्जी और स्टाइल ने उन्हें 90 और 2000 के दशक में डांस आइकन बना दिया। उनके डांस स्टेप्स और चुलबुले अंदाज को आज भी हर डांसर फॉलो करता है।

    राजनीतिक सफर

    गोविंदा का फिल्मी करियर ही नहीं उनकी राजनीतिक यात्रा भी उतनी ही दिलचस्प रही है। 2004 में गोविंदा ने राजनीति में कदम रखा और मुंबई उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय संसद के सदस्य के रूप में सेवा दी। वह कांग्रेस पार्टी से जुड़े और इस पार्टी के तहत उन्होंने 2004 से 2009 तक लोकसभा में अपनी भूमिका निभाई। फिल्मों और राजनीति के बीच अपने करियर को संतुलित करते हुए गोविंदा ने यह साबित किया कि वह सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि एक नेता भी हैं जो जनता की सेवा करना चाहते हैं। बाद में उन्होंने शिवसेना से जुड़ने का फैसला किया और पार्टी के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। गोविंदा को उनके समर्थक उनकी ईमानदारी और मेहनत के लिए सराहते हैं।

    गोविंदा का व्यक्तित्व और विरासत

    गोविंदा का करियर आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। उनका व्यक्तित्व और फिल्मों में किया गया काम उन्हें हमेशा याद दिलाता रहेगा। चाहे वह उनकी अनोखी कॉमिक टाइमिंग हो या फिर उनका अद्भुत डांस स्टाइल गोविंदा ने बॉलीवुड को ऐसी विरासत दी है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। आज भी वह एक प्रेरणा बने हुए हैं खासकर युवा पीढ़ी के लिए। उनकी कड़ी मेहनत ईमानदारी और कड़ी मेहनत ने उन्हें केवल एक अभिनेता ही नहीं बल्कि एक आदर्श भी बना दिया है।

    गोविंदा का बॉलीवुड से राजनीति तक का सफर रंगीन शानदार और प्रेरणादायक रहा है। उनका करियर हर किसी के लिए एक मिसाल है कि अगर आप मेहनत करें और दिल से अपने काम को प्यार करें तो सफलता मिलनी तय है। गोविंदा को उनके जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं और आगे आने वाले दिनों में और अधिक सफलता की कामना।