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  • चारधाम यात्रा: अंतिम चरण में भी उमड़ रही भीड़.. रिकॉर्ड 60 लाख के पार पहुंची दर्शनार्थियों की संख्या

    चारधाम यात्रा: अंतिम चरण में भी उमड़ रही भीड़.. रिकॉर्ड 60 लाख के पार पहुंची दर्शनार्थियों की संख्या


    देहरादून।
    चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra 2026) अंतिम चरण में है। केदारनाथ व बदरीनाथ धाम (Kedarnath and Badrinath Dhams) में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ है। अब तक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 60 लाख पार हो गया है। 16 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद यात्रा शीतकाल के लिए स्थगित होगी। चारधामों के शीतकालीन प्रवास स्थल से शीतकालीन यात्रा का संचालन किया जाएगा।

    19 अप्रैल को चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। बीते वर्ष की तुलना में इस बार मानसून सीजन में चारधाम यात्रा का संचालन निर्बाध रूप से जारी रही। पहली बार केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के अलावा हेमकुंड साहिब में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है।

    बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया, केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी के दिशानिर्देश पर यात्रा सुचारू रूप से संचालित है। पहली बार श्रद्धालुओं के दर्शन करने का नया रिकॉर्ड बना है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने कहा कि इस वर्ष चारधाम यात्रा में 60 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या उत्तराखंड के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास को दर्शाती है। राज्य सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यात्रा मार्गों पर सड़क, स्वास्थ्य, यातायात और सुरक्षा संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है।


    धाम – दर्शनार्थियों की संख्या

    केदारनाथ – 17,65,520
    बदरीनाथ – 20,70,500
    गंगोत्री – 8,38,422
    यमुनोत्री – 9,45,572
    हेमकुंड साहिब – 3,90,696

  • कुंभ राशि वालों के लिए अहम समय, 3 जून 2027 तक शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण, इन गलतियों से रहें दूर

    कुंभ राशि वालों के लिए अहम समय, 3 जून 2027 तक शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण, इन गलतियों से रहें दूर


    नई दिल्ली। कुंभ राशि के जातक इस समय शनि की साढ़ेसाती के तीसरे और अंतिम चरण से गुजर रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान शनि देव व्यक्ति के कर्मों के आधार पर अंतिम परिणाम देते हैं। 3 जून 2027 को शनि मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके साथ ही कुंभ राशि के लोगों को साढ़ेसाती से पूरी तरह राहत मिलेगी।

    ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जून 2027 तक कुंभ राशि के जातकों को अपने व्यवहार, निर्णय और जीवनशैली में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। इस अवधि में छोटी-सी लापरवाही भी नुकसान का कारण बन सकती है।

    साढ़ेसाती का अंतिम चरण क्यों माना जाता है खास?
    मान्यता है कि साढ़ेसाती का अंतिम चरण केवल चुनौतियां ही नहीं देता, बल्कि व्यक्ति को अनुभवों के माध्यम से परिपक्व भी बनाता है। यह समय अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेकर अनुशासित जीवन अपनाने का अवसर होता है। यदि इस दौरान संयम और जिम्मेदारी के साथ जीवन जिया जाए, तो 3 जून 2027 के बाद स्थिरता, मानसिक शांति और प्रगति के नए अवसर मिल सकते हैं।

    इन गलतियों से बचने की सलाह

    अनैतिक तरीकों से कमाई से रहें दूर
    शनि देव को न्याय का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस अवधि में जुआ, सट्टा, गलत तरीके से धन कमाने या किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि से दूरी बनाए रखें। ऐसे कार्य आर्थिक और सामाजिक नुकसान का कारण बन सकते हैं।

    कमजोर और जरूरतमंद लोगों का सम्मान करें
    कर्मचारियों, मजदूरों या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के साथ दुर्व्यवहार या उनका अधिकार छीनने से बचें। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ऐसा व्यवहार शनि के प्रतिकूल प्रभाव को बढ़ा सकता है।

    अहंकार और कठोर वाणी से बचें
    इस दौरान स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। इसलिए बोलचाल में संयम रखें और किसी का अपमान करने या अहंकार दिखाने से बचें। ऐसा करने से रिश्तों और सामाजिक प्रतिष्ठा पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

    कर्ज और बड़े निवेश में सोच-समझकर फैसला लें
    बिना पर्याप्त विचार किए न तो किसी को बड़ी रकम उधार दें और न ही खुद भारी कर्ज लें। प्रॉपर्टी, शेयर बाजार या अन्य बड़े निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

    स्वास्थ्य की अनदेखी न करें
    साढ़ेसाती के अंतिम चरण में मानसिक तनाव और शारीरिक थकान महसूस हो सकती है। पैरों, घुटनों और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज न करें। वाहन चलाते समय भी पूरी सावधानी बरतें।

    शुभ फल के लिए बताए गए उपाय
    – प्रत्येक शनिवार पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    – नियमित रूप से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। मान्यता है कि हनुमान जी की आराधना करने वालों पर शनि देव की विशेष कृपा रहती है।
    – शनिवार के दिन काली उड़द, काले तिल या छाते का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को करें।