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  • US: ट्रंप फेमिली को 1.6 अरब डालर की डील में हुआ बंपर मुनाफा…. वित्त मंत्री का नाम भी शामिल

    US: ट्रंप फेमिली को 1.6 अरब डालर की डील में हुआ बंपर मुनाफा…. वित्त मंत्री का नाम भी शामिल


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को लेकर एक नया बवाल शुरू हो गया है। हाल ही में हुए एक बड़े खुलासे के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने हाल ही में एक ऐसी डील (Deel) की है जिससे ट्रंप के बेटे को अरबों का फायदा होने जा रहा है। वहीं इस प्रॉफिट वाली डील में ट्रंप के परिवार के साथ साथ अमेरिका के वित्त मंत्री हावर्ड लुटनिक (Finance Minister Howard Lutnick) का नाम भी है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन की अमेरिका फर्स्ट की नीति को लेकर सवाल उठने शुरू हो हुए हैं।

    दरअसल यह खुलासा द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में हुआ है। इसके मुताबिक कजाकिस्तान (Kazakhstan) के साथ दुनिया के सबसे बड़े दुर्लभ खनिज ‘टंगस्टन’ के भंडार को विकसित करने के लिए अमेरिका ने हाल ही में 1.6 अरब डॉलर यानी करीब 13,500 करोड़ रुपये की सरकारी डील की है। इस डील से सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के बेटों और उनके वाणिज्य मंत्री के परिवार को तगड़ा वित्तीय मुनाफा होने जा रहा है।

    बेहद अहम है ये डील
    कजाकिस्तान के साथ हुआ यह सौदा अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। फिलहाल वैश्विक टंगस्टन बाजार पर पूरी तरह चीन का कब्जा है। चीन लगातार इस दुर्लभ खनिज के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध बढ़ा रहा है। बता दें कि टंगस्टन का इस्तेमाल मिसाइल वॉरहेड्स, फाइटर जेट्स, सेमीकंडक्टर्स और कई एडवांस सैन्य तकनीकों में होता है। अमेरिका इस डील के जरिए चीन पर अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है। हालांकि अब टंगस्टन से ज्यादा अब चर्चा उन चेहरों की हो रही है, जिनकी तिजोरियां इस सरकारी सौदे से भरने वाली हैं।

    तय हुई डील, पीछे-पीछे बेटों ने लगा दिए पैसे
    दस्तावेजों के मुताबिक, जैसे-जैसे सरकारी स्तर पर इस डील की बातचीत आगे बढ़ रही थी, ठीक उसी समय ट्रंप और उनके करीबी मंत्रियों के परिवारों की कंपनियां इस सौदे में अपनी हिस्सेदारी खरीद रही थीं। सितंबर 2025 में न्यूयॉर्क के सेंट रेजिस होटल में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव के बीच बैठक हुई। इसी बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद फोन कॉल के जरिए कजाकिस्तान के राष्ट्रपति को इस प्रोजेक्ट के लिए राजी किया।

    इस बैठक के ठीक कुछ हफ्तों बाद, ‘डोमिनारी सिक्योरिटीज’ नाम की एक इन्वेस्टमेंट फर्म ने इस कजाकिस्तान माइनिंग प्रोजेक्ट से जुड़ी मुख्य कंपनी में शेयर खरीद लिए। यह कंपनी ट्रंप टावर से चलती है और इसमें डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप की 20% हिस्सेदारी है। दूसरी तरफ, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के बेटों ब्रैंडन और काइल की एक कंपनी इन्वेस्टमेंट बैंक ‘कैंटर फिट्जगेराल्ड’ ने इस प्रोजेक्ट में निवेश के लिए 210 मिलियन डॉलर का फंड जुटाया।

    सरकारी तिजोरी से $8.9 अरब पाने की होड़
    यह कोई इकलौता मामला नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और लुटनिक परिवारों से जुड़ी कंपनियां कम से कम 14 ऐसी माइनिंग प्रोजेक्ट्स में हित रखती हैं, जिन्हें अमेरिकी सरकार का समर्थन प्राप्त है। ये कंपनियां अमेरिकी सरकार से लगभग 8.9 अरब डॉलर की फेडरल फंडिंग, लोन या रेगुलेटरी मंजूरी पाने की रेस में सबसे आगे हैं।

    संसद में उठे सवाल, वाइट हाउस ने खारिज किए आरोप
    अमेरिकी सांसद मैक्सिन डेक्सटर ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, “संसद को यह सुनिश्चित करना होगा कि टैक्सपेयर्स के पैसों का इस्तेमाल देश के हित में हो, न कि ट्रंप प्रशासन के करीबी लोगों और उनके परिवार के सदस्यों की जेबें भरने के लिए।” वहीं हितों के टकराव के आरोपों पर अब वाइट हाउस ने अपनी सफाई जारी की है। वाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “ट्रंप प्रशासन के फैसलों के पीछे सिर्फ और सिर्फ अमेरिकी जनता का हित है। अमेरिका की क्रिटिकल सप्लाई चेन को सुरक्षित करना राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकता है।” इधर वाणिज्य विभाग ने कहा है कि मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने अपनी पुरानी कंपनी ‘कैंटर फिट्जगेराल्ड’ में अपनी हिस्सेदारी पहले ही बेच दी है और उनका इस लोन या फंडिंग फैसलों से कोई लेना-देना नहीं है।

  • गलत जानकारी के साथ बेची जा रही बीमा पॉलिसी… बैंकों को वित्त मंत्री की कड़ी चेतावनी

    गलत जानकारी के साथ बेची जा रही बीमा पॉलिसी… बैंकों को वित्त मंत्री की कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बैंकों (Banks) द्वारा गलत जानकारी के साथ बेची जा रही बीमा पॉलिसी (Insurance Policy) व अन्य उत्पादों पर कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि बैंकों का मूल कार्य जमा (धनराशि) जुटाने और ऋण देने है और बैंक उसी पर ध्यान केंद्रित करें। सोमवार को बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक जरूरत न होने के बावजूद भी ग्राहकों को बीमा बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं जबकि उनका मुख्य कार्य बैंकिंग सेवाएं देना है। उन्होंने कहा कि मिस-सेलिंग लंबे समय से चिंता का विषय रही है और अब इस पर सख्ती जरूरी है।

    कई मामलों में ग्राहकों के पास पहले से बीमा पॉलिसी होती है, लेकिन उसके बावजूद बैंक उन पर नई बीमा पॉलिसी लेने का दबाव बनाते हैं। खासकर होम लोन लेते समय ग्राहकों से अतिरिक्त बीमा लेने को कहा जाता है, जबकि संपत्ति पहले से ही गिरवी होती है। ऐसे में नियामक की जिम्मेदारी स्पष्ट न होने के कारण ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि बैंकों को ग्राहकों की जरूरत समझने, जमा बढ़ाने और जिम्मेदारी के साथ ऋण देने पर ध्यान देना चाहिए।


    बैंकों को अधिक मानवीय होने की जरूरत

    वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली को अधिक मानवीय और ग्राहक-केंद्रित बनाने की आवश्यकता है। मौजूदा समय में बैंकों ने ग्राहकों के साथ संबंध मजबूत करने और उनकी वित्तीय जरूरतों को समझने की मूल कार्य दूरी बना ली है, जिससे ग्राहकों में असंतोष बढ़ा है। बैंक अपने कम लागत वाले जमा यानी (करंट अकाउंट–सेविंग अकाउंट) को मजबूत करने पर जोर दें और ग्राहक केंद्रित सेवाएं विकसित करें।


    कहां और कैसे करें शिकायत

    गलत जानकारी देकर उत्पाद बेचने पर आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा, बीमा के लिए इरडा, बैंकिंग के लिए आरबीआई (सीएमएस पोर्टल), या ऑनलाइन माध्यम से शिकायत कर सकते हैं। समस्या का समाधान न होने पर उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।


    शिकायत करने के प्रमुख मंच

    – राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन : टोल-फ्री नंबर 1915 या 1800-11-4000 पर कॉल करें।
    – ई-दाखिल पोर्टल: ऑनलाइन उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए।
    – बीमा मिस-सेलिंग: बीमा कंपनी की शिकायत निवारण सेल में, फिर बीमा लोकपाल या इरडा की वेबसाइट (155255 पर कॉल)।
    – बैंकिंग मिस-सेलिंग: आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल के पास।
    – फ्री-लुक पीरियड (आमतौर पर 15-30 दिन) के भीतर शिकायत करने पर पॉलिसी रद्द कर रिफंड पाना आसान होता है।

  • बीमा की गलत बिक्री अब अपराध: बैंकों को वित्त मंत्री की दो टूक चेतावनी, 1 जुलाई से सख्त नियम

    बीमा की गलत बिक्री अब अपराध: बैंकों को वित्त मंत्री की दो टूक चेतावनी, 1 जुलाई से सख्त नियम


    नई दिल्ली । में बैंकिंग क्षेत्र को स्पष्ट संदेश देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा सहित अन्य वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री मिस-सेलिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि भ्रामक तरीके से बीमा बेचने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल को संबोधित करने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकों को अपने मूल कार्य जमा जुटाने और ऋण देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए न कि ग्राहकों पर अनावश्यक बीमा उत्पाद थोपने पर।

    मिस-सेलिंग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं
    वित्त मंत्री ने कहा कि कई मामलों में ग्राहकों को ऐसे बीमा उत्पाद बेचे जा रहे हैं जिनकी उन्हें जरूरत ही नहीं होती। खासकर गृह ऋण के मामलों में संपत्ति पहले से गिरवी होने के बावजूद अतिरिक्त बीमा लेने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि अब स्पष्ट संदेश जाना चाहिए गलत बिक्री कानूनन अपराध है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

    1 जुलाई से लागू होंगे कड़े प्रावधान

    आरबीआई ने 11 फरवरी को मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया था। प्रस्तावित नियमों के अनुसार यदि किसी ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद बेचा जाता है तो संबंधित बैंक को पूरी राशि लौटानी होगी और नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इन नियमों पर 4 मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई थीं और अब 1 जुलाई से कड़े प्रावधान लागू किए जाएंगे। इससे ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    नियामकीय खामियों पर भी उठे सवाल

    सीतारमण ने माना कि अब तक आरबीआई और बीमा नियामक के बीच समन्वय की कमी के कारण कुछ मामलों में ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि नियामकीय अंतर रेगुलेटरी गैप का फायदा उठाकर गलत बिक्री की घटनाएं हुईं जिसे अब सख्ती से रोका जाएगा।

    जमा और कासा मजबूत करें बैंक

    वित्त मंत्री ने बैंकों को सलाह दी कि वे गैर-बैंकिंग उत्पादों की आक्रामक बिक्री से बचें और कम लागत वाली जमा व कासा चालू खाता-बचत खाता आधार को मजबूत करें। ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और उनकी वित्तीय क्षमता को समझना प्राथमिकता होनी चाहिए।

    इस बीच आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि बैंकिंग प्रणाली में जमा वृद्धि दर लगभग 12.5% है जबकि ऋण वृद्धि करीब 14.5% बनी हुई है। फरवरी 2025 से अब तक रेपो दर में 1.25% की कटौती कर इसे 5.25% किया जा चुका है। हालांकि हालिया समीक्षा में वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

    आरबीआई ने भरोसा दिलाया है कि बाजार में पर्याप्त नकदी बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाते रहेंगे। स्पष्ट है कि 1 जुलाई के बाद बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई परीक्षा शुरू होने जा रही है।

  • डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच लाइव टीवी पर रोने लगीं ग्रीनलैंड की वित्त मंत्री

    डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच लाइव टीवी पर रोने लगीं ग्रीनलैंड की वित्त मंत्री

    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे को धमकियों के बीच हाल ही में ग्रीनलैंड की वित्त मंत्री बेहद भावुक हो गईं। बीते कुछ दिनों में तीव्र दबाव का जिक्र करते हुए लाइव टेलीकास्ट के दौरान एक कार्यक्रम में उनकी आंखों में आंसू आ गए। इस दौरान उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिन उनके देश के लिए बेहद मुश्किल रहे हैं। वहीं ट्रंप लगातार अपनी बात पर अड़े हुए हैं और वाइट हाउस ने गुरुवार को भी एक बयान में कहा है कि ग्रीनलैंड को हासिल करना अमेरिका के लिए बेहद जरूरी है।
    ग्रीनलैंड की वित्त मंत्री विवियन मोट्जफेल्ड्ट एक चैनल के साथ इंटरव्यू में इस पर बात कर रही थी।मोट्जफेल्ड्ट ने बातचीत के बाद KNR को बताया, “हम अपने स्तर पर बहुत कड़ी मेहनत कर रहे हैं। मैं आमतौर पर ये शब्द कहना पसंद नहीं करती, लेकिन मैं कहूंगी कि हम बहुत मजबूत हैं। हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ दिन, स्वाभाविक रूप से…”
    क्या बोलीं मोट्जफेल्ड्ट?

    इसके बाद मोट्जफेल्ड्ट भावुक हो गईं। उन्होंने किसी तरह अपने आंसू रोके और कहा, “ओह, मैं बहुत भावुक हो रही हूं। मैं दुखी हूं। पिछले कुछ दिन कठिन रहे हैं। हम पर बहुत दबाव है।”

    उन्होंने आगे कहा कि ग्रीनलैंड की सरकार मजबूत है और देश खुद को को सुरक्षित रखने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहा है।
    ट्रंप अड़े

    इससे पहले वाइट ने गुरुवार को कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए अतिआवश्यक मानते हैं और इसे हासिल करने के लिए बेहद उत्सुक हैं। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने एक बयान में कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी प्राथमिकता बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। वह चाहते हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करे। उनका मानना है कि ऐसा करना हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोत्तम हित में है।”
    बैठक रही बेनतीजा

    उनकी इस टिप्पणी से पहले ही अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के बीच हुई सीधी बातचीत हुई थी।

    डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि बुधवार को वॉशिंगटन में ग्रीनलैंड के उनके समकक्ष, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई चर्चा मुख्य मतभेदों को सुलझाए बिना समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ‘एक मौलिक असहमति’ बनी हुई है। रासमुसेन ने कहा कि हम अमेरिका की स्थिति को बदलने में कामयाब नहीं हुए।
  • कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की

    कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की


    नई दिल्ली । अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खुदरा व्यापारियों के हितों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। कैट का कहना है कि बजट में खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए और साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए ताकि व्यापारियों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े।
    कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक सीट से लोकसभा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने मंगलवार को बताया कि संगठन ने वित्त मंत्री के समक्ष कुछ प्रमुख सुझाव रखे हैं। इन सुझावों में व्यापार के लिए सम्मान सरलता सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करने की बात की गई है। खंडेलवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की है जिनमें “आत्मनिर्भर भारत” “मेक इन इंडिया” “डिजिटल इंडिया” और “लोकल के लिए वोकल” जैसे अभियानों ने देश के व्यापारिक वातावरण को एक नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि अब आगामी बजट में इन पहलों को और भी मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि व्यापारियों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।

    सस्ते ऋण की आवश्यकता
    कैट ने यह स्पष्ट किया है कि खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की उपलब्धता व्यापार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वर्तमान में व्यापारियों को उच्च ब्याज दरों पर ऋण मिलता है जिससे उनके लिए व्यापार में वृद्धि करना और नई चुनौतियों का सामना करना मुश्किल हो जाता है। अगर सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है तो छोटे और मंझले व्यापारी अपनी व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से चला सकते हैं जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसके अलावा व्यापारियों को ऋण के लिए कागजी प्रक्रिया में भी सरलता की आवश्यकता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि ऋण लेने की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि व्यापारी समय और श्रम की बचत कर सकें और अपने व्यापार को गति दे सकें।
    ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की आवश्यकता
    कैट ने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर बेईमानी से प्रतिस्पर्धा की वजह से खुदरा व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। कई बार ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े पैमाने पर डिस्काउंट और भारी प्रमोशन करती हैं जिनका छोटे व्यापारियों से मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह अनुरोध किया कि ई-कॉमर्स के नियमों को सख्त किया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि यह प्लेटफॉर्म्स खुदरा व्यापारियों के लिए एक समान अवसर प्रदान करें न कि उन्हें नुकसान पहुँचाए। कैट का कहना है कि इन अनुचित प्रतिस्पर्धाओं के कारण खुदरा व्यापारियों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि उनका सम्मान भी प्रभावित हो रहा है। यदि ई-कॉमर्स कंपनियों को नियंत्रित किया जाता है तो पारदर्शिता और समता को बढ़ावा मिलेगा जिससे सभी व्यापारी एक समान तरीके से व्यापार कर सकेंगे।

    सरकारी पहलों का महत्व
    प्रवीन खंडेलवाल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत छोटे और मंझले व्यापारियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए कई अवसर दिए गए हैं। वहीं मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों ने भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि इन पहलों को और भी मजबूत किया जाना चाहिए ताकि व्यापारियों को अधिक प्रोत्साहन मिले और वे वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
    कैट का यह सुझाव है कि आगामी बजट में छोटे और मंझले खुदरा व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण भी सुनिश्चित किया जाए। यह कदम न केवल व्यापारियों के लिए अवसर पैदा करेगा बल्कि भारत के समग्र व्यापारिक वातावरण को भी एक नई दिशा दे सकता है। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को और भी सशक्त किया जाए ताकि देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार क्षेत्र में संतुलन बना रहे और छोटे व्यापारियों को भी समान अवसर प्राप्त हो सकें।