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  • क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना क्यों है महंगा सौदा? जानिए पूरी डिटेल

    क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना क्यों है महंगा सौदा? जानिए पूरी डिटेल


    नई दिल्ली । आज के समय में क्रेडिट कार्ड लोगों की वित्तीय जरूरतों का एक अहम हिस्सा बन चुका है। यह “अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें” की सुविधा देकर उपभोक्ताओं को राहत देता है, लेकिन इसी सुविधा के बीच एक ऐसा विकल्प भी मौजूद है जो कई बार आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता है क्रेडिट कार्ड से कैश निकासी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड से एटीएम के जरिए नकद निकालना सबसे महंगा वित्तीय निर्णयों में से एक हो सकता है। जहां कार्ड से सामान्य खरीदारी पर 45 से 50 दिनों का ब्याज-मुक्त समय मिलता है, वहीं कैश विड्रॉल पर यह सुविधा लागू नहीं होती। जैसे ही ग्राहक एटीएम से पैसे निकालता है, उसी दिन से ब्याज लगना शुरू हो जाता है, जो सालाना 36% से 48% तक पहुंच सकता है।

    इसके अलावा, हर बार नकद निकासी पर कैश एडवांस फीस भी देनी होती है, जो आमतौर पर निकाली गई राशि का 2.5% से 3% तक होती है। कई बैंकों में यह न्यूनतम 300 से 500 रुपये तक भी हो सकती है। ऐसे में छोटी रकम निकालना भी महंगा साबित हो जाता है।

    हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, लोग आपात स्थिति में क्रेडिट कार्ड से कैश निकालने की प्रवृत्ति दिखा रहे हैं, लेकिन यह आदत लंबे समय में आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। फरवरी 2026 में भी करोड़ों रुपये की नकद निकासी दर्ज की गई, जो इस सुविधा के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना बैंक की नजर में वित्तीय संकट का संकेत माना जाता है। इससे व्यक्ति का क्रेडिट व्यवहार नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है और आगे चलकर CIBIL Score गिर सकता है, जिससे होम लोन, कार लोन या अन्य ऋण लेना कठिन हो सकता है।

    इसका सीधा असर व्यक्ति की आर्थिक विश्वसनीयता पर पड़ता है। जब बैंक यह देखते हैं कि कोई ग्राहक बार-बार क्रेडिट कार्ड से नकद निकाल रहा है, तो वे उसे उच्च जोखिम वाला उधारकर्ता मान सकते हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आपात स्थिति में क्रेडिट कार्ड कैश विड्रॉल की बजाय अन्य विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे कि Emergency Fund का उपयोग, जो 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर होना चाहिए। इसके अलावा Personal Loan भी एक बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि इसकी ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होती है। छोटे खर्चों के लिए “बाय नाउ पे लेटर” जैसी सुविधाएं भी उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन इनका भी जिम्मेदारी से उपयोग जरूरी है।

    कुल मिलाकर, क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना सुविधा जरूर देता है, लेकिन इसके पीछे छिपी लागत और जोखिम इसे एक महंगा सौदा बना देते हैं। समझदारी इसी में है कि इस विकल्प का उपयोग केवल अत्यंत आपात स्थिति में ही किया जाए, ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे और बजट पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

  • NBFC या बैंक: पर्सनल लोन लेने से पहले जानें सही विकल्प

    NBFC या बैंक: पर्सनल लोन लेने से पहले जानें सही विकल्प


    नई दिल्ली । पैसे की जरूरत पड़ने पर सबसे पहले दिमाग में बैंक आता है। लेकिन बैंक के अलावा भारत में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी NBFC भी लाखों लोगों को लोन देती हैं। दोनों ही पर्सनल लोन की सुविधा देती हैं, लेकिन इनके बीच का फर्क समझना जरूरी है। लाइसेंसिंग, नियामक ढांचा और जमा स्वीकारने की क्षमता में अंतर होने के कारण सही विकल्प चुनना आपके भविष्य की आर्थिक परेशानियों से बचा सकता है।

    NBFC क्या है?
    NBFC वे कंपनियां हैं जो कंपनी अधिनियम 1956/2013 के तहत पंजीकृत होती हैं और RBI अधिनियम 1934 के अध्याय III-B के तहत विनियमित होती हैं। इनके पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता, बल्कि उन्हें विशेष वित्तीय गतिविधियों के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलता है। NBFC विभिन्न प्रकार के लोन देती हैं, फिक्स्ड डिपॉजिट सुविधा, बीमा और अन्य वित्तीय उत्पाद भी प्रदान करती हैं।

    बैंक क्या है?

    बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के तहत नियंत्रित होते हैं। ये बचत और चालू खाते के रूप में डिमांड डिपॉजिट स्वीकारते हैं और ऋण प्रदान करते हैं। NBFC और बैंक का सबसे बड़ा अंतर यह है कि बैंक भुगतान और निपटान प्रणाली का हिस्सा होते हैं और चेक/क्लीयरिंग सुविधा देते हैं, जबकि NBFC ऐसा नहीं कर सकती।

    NBFC से पर्सनल लोन क्यों लें?

    तेज प्रोसेसिंग: अधिकांश NBFC 24–48 घंटे में लोन राशि डिस्बर्स कर देती हैं। लचीले क्रेडिट मानदंड: मध्यम CIBIL स्कोर वाले या नए उधारकर्ता भी पात्र हो सकते हैं। कम दस्तावेज़ और डिजिटल प्रक्रिया: KYC और बैंक स्टेटमेंट ऑनलाइन अपलोड कर लोन प्रक्रिया पूरी होती है। कस्टमाइज्ड लोन: ट्रैवल, वेडिंग या छोटे ब्रिज लोन जैसी विशेष जरूरतों के लिए प्रोडक्ट डिजाइन किए जाते हैं। प्रतिस्पर्धी दरें: स्थिर आय और अच्छे रिकॉर्ड वाले ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दर मिल सकती है।

    बैंक से पर्सनल लोन क्यों लें?

    कम ब्याज दर: बैंक की ब्याज दर NBFC से 2–5% कम हो सकती है।पारदर्शी शुल्क: RBI दिशा-निर्देशों से छिपे चार्ज कम होते हैं।बड़ी लोन राशि: ₹20–40 लाख तक बड़े लोन के लिए बैंक उपयुक्त हैं। मौजूदा संबंध का लाभ: सैलरी अकाउंट या FD से प्री-अप्रूव्ड लोन और विशेष ब्याज दर मिल सकती है। शाखा नेटवर्क और ग्राहक सहायता: समस्या का समाधान सीधे शाखा में मिल सकता है।

    NBFC vs बैंक: कौन बेहतर?

    यदि आपको तेजी और सुविधा चाहिए तो NBFC बेहतर हैं। वहीं, यदि आपकी प्राथमिकता कम ब्याज दर, बड़ी राशि और दीर्घकालिक विश्वसनीयता है तो बैंक अधिक उपयुक्त हैं। दोनों RBI द्वारा विनियमित हैं, लेकिन बैंक में बचत खाते पर DICGC बीमा का अतिरिक्त सुरक्षा लाभ मिलता है।