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  • 50 कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में EU…. युद्ध में रूस की आर्थिक मदद का आरोप

    50 कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में EU…. युद्ध में रूस की आर्थिक मदद का आरोप


    ब्रूसेल्स।
    यूरोपीय यूनियन (European Union- EU) ने यूक्रेन (Ukraine) पर हमले को लेकर रूस (Russia) के खिलाफ अपने प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ाने की तैयारी कर ली है। इसके तहत यूरोपीय संघ ने रूस की ‘वॉर इकोनॉमी’ को कमजोर करने के लिए अपना 21वां प्रतिबंध पैकेज प्रस्तावित किया है। इस नए पैकेज की जद में भारत (India) स्थित कुछ कंपनियां भी आ सकती हैं। रूसी अर्थव्यवस्था की कथित तौर पर मदद करने के आरोप में यूरोपीय यूनियन करीब 50 कंपनियों पर नए एक्सपोर्ट कंट्रोल यानी निर्यात प्रतिबंध लगाने जा रहा है।

    यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कलास (Vice President Kaja Kalas) ने इन नए प्रतिबंधों का ऐलान करते हुए कहा कि ब्रुसेल्स पिछले दो सालों में अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस कदम का मुख्य मकसद रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को ढहाना है। बता दें कि काजा कलास हाल ही में पाकिस्तान का दौरा कर यूरोप लौटी हैं।

    किन देशों की कंपनियों पर लटकी तलवार?
    नए प्रतिबंध पैकेज का मुख्य फोकस रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे को सीमित करना और युद्ध के लिए हो रही उसकी फाइनेंसिंग को रोकना है। एक्सपोर्ट प्रतिबंधों वाली 50 कंपनियों की सूची में भारत के अलावा चीन, तुर्किये, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा ड्रोन निर्माण से जुड़ी 30 से ज्यादा नई संस्थाओं/कंपनियों को भी इस सूची में जोड़ा गया है।

    बैंकों और क्रिप्टोकरेंसी पर बड़ा ऐक्शन
    नए प्रस्तावों में उन देशों के बैंकों, हथियार बनाने वाली कंपनियों, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टोकरेंसी ऑपरेटरों को भी सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है, जिन पर रूस को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है। करीब 90 बैंकों की संपत्ति फ्रीज की जा सकती है। इसके अलावा रूस और अन्य जगहों के 30 से अधिक बैंकों के ट्रांजैक्शन पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू किए जाएंगे। इस पैकेज के तहत 11 क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म्स के लेनदेन पर भी बैन लगाने की तैयारी है।

    रूस की कमाई और ट्रांसपोर्ट को भी टारगेट किया गया
    रूस को आर्थिक मोर्चे पर घेरने के लिए यूरोपीय संघ ने उसके एनर्जी रेवेन्यू (ऊर्जा राजस्व) पर भी चोट की है। तेल (Oil) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से जुड़ी गतिविधियों पर पहले से ज्यादा सख्त पाबंदियां लगाई जाएंगी। रूस के ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े 30 अतिरिक्त जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही 2 रूसी बंदरगाहों और 4 हवाई अड्डों पर भी ट्रांजैक्शन बैन का प्रस्ताव है।

    यूरोपीय आयोग की ओर से पेश किए गए इस 21वें प्रतिबंध पैकेज को अभी लागू नहीं किया गया है। इन सभी प्रस्तावों पर कोई भी अंतिम फैसला या मंजूरी देने से पहले इन्हें यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देशों के सामने विचार-विमर्श के लिए रखा जाएगा।

    पाकिस्तान का दौरा कर लौटीं काजा कलास
    यूरोपीय संघ (EU) की शीर्ष कूटनीतिज्ञ काजा कलास अपनी हालिया पाकिस्तान यात्रा पूरी कर वापस यूरोप लौट आई हैं। उनकी इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा के दौरान यूरोपीय संघ और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार (विशेषकर GSP+ व्यापार दर्जे), मानवाधिकारों की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब यूरोप, दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता- विशेष रूप से अफगानिस्तान के हालात और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों को लेकर अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के लिए भी यूरोपीय संघ एक प्रमुख निर्यात बाजार है, ऐसे में कलास की यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संवाद को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

    भारत-ईयू का ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
    बता दें कि भारत की कंपनियों पर यह ऐक्शन ऐसे समय में लेने की तैयारी है जब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच जनवरी 2026 में हुआ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है, जिसे यूरोपीय आयोग द्वारा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का नाम दिया गया है। इस समझौते के तहत भारत से कपड़ा, समुद्री उत्पाद, फार्मा और ज्वेलरी जैसे 90% से अधिक उत्पादों को यूरोपीय बाजार में टैक्स-फ्री (जीरो-ड्यूटी) एंट्री मिलेगी। वहीं दूसरी ओर, यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों पर भी टैरिफ 110% से घटाकर मात्र 10% (एक तय कोटे के तहत) कर दिया गया है। इसके साथ ही, एक बड़ा ताजा अपडेट यह भी है कि ईयू ने अपने नए और सख्त क्वालिटी नियमों के बावजूद सितंबर 2026 के बाद भी भारत से मछली (एक्वाकल्चर), अंडे और शहद के आयात को जारी रखने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस हालिया फैसले से भारत के करीब 1.59 अरब डॉलर के समुद्री निर्यात सेक्टर को बड़ी राहत मिली है। बदलती वैश्विक सियासत और अमेरिका-चीन पर सप्लाई चैन की निर्भरता कम करने के लिहाज से यह ऐतिहासिक डील भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक मास्टरस्ट्रोक मानी जा रही है।

  • तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग

    तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग


    नई दिल्ली।
    तेलंगाना सरकार ने केंद्र से विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि राज्य में पूंजीगत निवेश और विकास परियोजनाओं को गति दी जा सके। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से नई दिल्ली में मुलाकात की और राज्य की आर्थिक, शैक्षणिक और मानव संसाधन विकास संबंधी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में वित्तीय सहायता की आवश्यकता, विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में किए जा रहे बड़े निवेशों की व्याख्या की गई।

    उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि तेलंगाना में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे निवेश, विशेषकर यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स (वाईआईआईआरएस) परियोजना, राज्य की सामाजिक और शैक्षणिक संरचना में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। इस परियोजना का कुल बजट 30,000 करोड़ रुपए है और यह लाखों बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। उन्होंने आर्थिक मामलों के विभाग से इस परियोजना को एफआरबीएम सीमा से छूट देने की अपील भी की, ताकि दीर्घकालिक मानव पूंजी निवेश पर वित्तीय प्रतिबंध न आए।

    विक्रमार्क ने कहा कि इस पहल से राज्य के वंचित और पिछड़े वर्गों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और पौष्टिक भोजन मिलेगा, जो उन्हें सशक्त बनाएगा और राज्य की जनसांख्यिकीय क्षमता को मजबूत करेगा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन सौंपकर एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता और इसके महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि तेलंगाना की आबादी में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग बहुसंख्यक हैं, और उनके सशक्तिकरण के लिए यह योजना निर्णायक साबित होगी।

    केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई इस बैठक में राज्य के कृषि और मानव संसाधन विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव और अन्य प्रतिनिधियों ने राज्य में कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा से जुड़े बड़े निवेशों के महत्व को रेखांकित करते हुए वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत छूट की मांग की। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त वित्तीय सहायता के बिना राज्य की दीर्घकालिक विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं और मानव पूंजी में निवेश की गति धीमी पड़ सकती है।

    पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की बैठक में मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने यंग इंडिया प्रोजेक्ट के लिए विशेष वित्तीय सहायता और एफआरबीएम छूट की मांग की थी, और अब इस मांग को दोबारा केंद्र के समक्ष रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस योजना के कार्यान्वयन से तेलंगाना के पिछड़े और वंचित वर्गों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में स्थायी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही राज्य की आर्थिक क्षमता बढ़ेगी और दीर्घकालिक मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

    इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री को यह स्पष्ट किया गया कि तेलंगाना की अधिकांश आबादी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से आती है। इस आंकड़े के अनुसार, राज्य की आबादी का 56.33 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग, 17.43 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 10.45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से संबंधित है। इस सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि शैक्षणिक और सामाजिक सुधारों को समय पर लागू किया जा सके और राज्य में समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सके।