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  • क्रेडिट कार्ड लंबे समय तक इस्तेमाल न करने पर हो सकता है बंद, बैंक नियमों को लेकर जानें अहम अपडेट

    क्रेडिट कार्ड लंबे समय तक इस्तेमाल न करने पर हो सकता है बंद, बैंक नियमों को लेकर जानें अहम अपडेट

    नई दिल्ली । आज के समय में क्रेडिट कार्ड वित्तीय लेन-देन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका सही तरीके से उपयोग न करना ग्राहकों के लिए नुकसान का कारण बन सकता है। कई लोग सुविधा के तौर पर क्रेडिट कार्ड लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक उसका उपयोग नहीं करते। ऐसी स्थिति में बैंक और वित्तीय संस्थान इसे निष्क्रिय मानकर बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार यदि किसी क्रेडिट कार्ड का उपयोग लगातार कई महीनों तक नहीं किया जाता है तो उसे “डेड कार्ड” की श्रेणी में रखा जा सकता है और बैंक उसे बंद भी कर सकते हैं।

    बैंकिंग नियमों के अनुसार आमतौर पर तीन से बारह महीने तक यदि किसी कार्ड पर कोई लेन-देन नहीं होता है तो उसे निष्क्रिय माना जाता है। इस दौरान यदि कार्ड से कोई खरीदारी, भुगतान, स्टेटमेंट जनरेशन या अन्य गतिविधि नहीं होती है तो बैंक उसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। कई मामलों में ग्राहक को सूचना दिए बिना भी कार्ड को निष्क्रिय किया जा सकता है, हालांकि अधिकांश बैंक पहले नोटिस जारी करते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्रेडिट कार्ड को सक्रिय बनाए रखना आवश्यक है क्योंकि यह सीधे व्यक्ति के क्रेडिट इतिहास और क्रेडिट स्कोर से जुड़ा होता है। यदि कार्ड लंबे समय तक उपयोग में नहीं रहता है तो इसका असर क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ सकता है। इससे भविष्य में लोन या अन्य वित्तीय सेवाएं लेने में कठिनाई आ सकती है। क्रेडिट स्कोर को मजबूत बनाए रखने के लिए समय-समय पर कार्ड का उपयोग करना और उसका भुगतान समय पर करना जरूरी माना जाता है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई ग्राहक बारह महीने तक अपने क्रेडिट कार्ड का उपयोग नहीं करता है तो बैंक उसे निष्क्रिय मान सकता है। इसके अलावा कुछ बैंक छोटी गतिविधियों जैसे पिन परिवर्तन या स्टेटमेंट चेक करने को भी सक्रियता में शामिल करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से लेन-देन ही आधार माना जाता है। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर छोटे लेन-देन कर अपने कार्ड को सक्रिय रखें।

    क्रेडिट कार्ड बंद होने का एक और बड़ा प्रभाव यह होता है कि इससे व्यक्ति की कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट भी कम हो जाती है। इसका सीधा असर क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो पर पड़ता है, जो क्रेडिट स्कोर निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि यह अनुपात बिगड़ता है तो स्कोर में गिरावट आ सकती है।

    इसके अलावा बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन के लिए भी निष्क्रिय खातों और कार्डों की निगरानी की जाती है। बैंक यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके सिस्टम में केवल सक्रिय और उपयोग में आने वाले खाते ही बने रहें, जिससे धोखाधड़ी और अनावश्यक जोखिम को कम किया जा सके।

    अंततः यह स्पष्ट है कि क्रेडिट कार्ड केवल एक सुविधा नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। इसका समझदारी से उपयोग न केवल वित्तीय सुविधा देता है बल्कि आपके क्रेडिट इतिहास को भी मजबूत बनाता है। लंबे समय तक इसे निष्क्रिय छोड़ना भविष्य में वित्तीय समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए समय-समय पर इसका उपयोग आवश्यक माना जाता है।

  • वित्तीय साक्षरता शिविर में पहुंचकर आरबीआई गवर्नर ने दिया आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश

    वित्तीय साक्षरता शिविर में पहुंचकर आरबीआई गवर्नर ने दिया आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश

    नई दिल्ली। देहरादून जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम के दौरान आर्थिक जागरूकता और वित्तीय सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े लोगों को वित्तीय प्रणाली की बुनियादी समझ देना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना था।

    कार्यक्रम के दौरान यह बात विशेष रूप से सामने रखी गई कि आज के समय में आर्थिक स्थिरता केवल बचत पर निर्भर नहीं है, बल्कि सही जानकारी और योजनाओं के उपयोग पर भी आधारित है। लोगों को बताया गया कि पेंशन और बीमा जैसी योजनाएं भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हर नागरिक को इनके बारे में जागरूक होना चाहिए।

    इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। यह भी कहा गया कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक बैंकिंग और वित्तीय सुविधाएं सरल तरीके से पहुंचनी चाहिए, ताकि वे मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जुड़ सकें।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने अपने स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन भी किया। उनके प्रयासों की सराहना करते हुए यह संदेश दिया गया कि ऐसे समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और इन्हें और अधिक प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है।

    लोगों को यह भी समझाया गया कि वित्तीय जानकारी को केवल व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों के साथ भी साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें।

    इस दौरान बैंकिंग सेवाओं को आसान बनाने के लिए मौके पर ही कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे लोगों को सीधे लाभ मिला। छोटे स्तर पर नकद और सिक्कों के आदान-प्रदान जैसी सेवाओं ने भी ग्रामीण लोगों के लिए सुविधा का काम किया।

    इसके अलावा, वित्तीय सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए मोबाइल बैंकिंग जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया, जिससे लोगों को अपने क्षेत्र में ही बैंकिंग सेवाएं प्राप्त हो सकें।

    कार्यक्रम में विभिन्न वित्तीय संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि वित्तीय शिक्षा ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर समाज की नींव है।