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  • एलआईसी निवेश फ्रॉड केस में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

    एलआईसी निवेश फ्रॉड केस में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

    नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एलआईसी निवेश फ्रॉड मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी ने मुंबई स्थित विशेष सीबीआई अदालत के सामने रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस एडीए ग्रुप के ग्रुप एमडी अमिताभ झुनझुनवाला, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विश्वास जोशी और एलआईसी के तत्कालीन चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर पी. वेणुगोपाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। एजेंसी के अनुसार चारों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े प्रावधानों के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

    मामला एलआईसी की ओर से वर्ष 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा जारी किए गए 1,500 करोड़ रुपये के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर की खरीद से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार ये डिबेंचर गंभीर रूप से गलत जानकारी के आधार पर जारी किए गए थे। एलआईसी की ओर से की गई शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 1 अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान एजेंसी ने आरोप लगाया कि डिबेंचर की सदस्यता से प्राप्त धनराशि बाद में एडीए ग्रुप की कंपनियों में भेजी गई। जांच एजेंसी के मुताबिक इससे एलआईसी को कथित तौर पर गलत तरीके से नुकसान हुआ और संबंधित आरोपियों तथा संस्थाओं को अनुचित लाभ मिला।

    जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में एलआईसी को हुआ कुल कथित नुकसान 3,750 करोड़ रुपये है। सीबीआई ने कहा है कि मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने और दूसरे आरोपों की जांच के लिए आगे की कार्रवाई जारी है। चार्जशीट में शामिल आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और दर्ज मामले के आधार पर हैं। मामले में आगे की जांच के साथ अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी देखी जा रही है।

    इसके अलावा सीबीआई की बीएसएफबी, दिल्ली शाखा ने कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, एलआईसी और ईपीएफओ से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और रिलायंस एडीए ग्रुप की अन्य संस्थाओं के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज की हैं। ये मामले अलग-अलग शिकायतों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े हैं। एजेंसी इन मामलों में भी जांच आगे बढ़ा रही है।

    सीबीआई के अनुसार रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े मामलों में इससे पहले सात चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। मौजूदा चार्जशीट इन मामलों में आठवीं चार्जशीट है। एजेंसी ने बताया कि अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एलआईसी निवेश मामले में दाखिल मौजूदा चार्जशीट के बाद जांच का दायरा आगे भी जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका तथा अतिरिक्त आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

  • नागरिकों को ऑनलाइन कंटेंट की पुष्टि के बाद ही उस पर भरोसा करने की सलाह..

    नागरिकों को ऑनलाइन कंटेंट की पुष्टि के बाद ही उस पर भरोसा करने की सलाह..


    नई दिल्ली:
    डिजिटल माध्यमों पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं के बीच एक वायरल वीडियो को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्पष्टता दी गई है, जिसमें वित्त मंत्री को एक उच्च रिटर्न निवेश योजना का समर्थन करते हुए दिखाने का दावा किया गया था। जांच के बाद इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी और एआई तकनीक से निर्मित बताया गया है। इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली गलत सूचनाओं की चुनौती को उजागर किया है।

    जांच में यह स्पष्ट किया गया है कि वीडियो में किए गए दावे पूरी तरह असत्य और भ्रामक हैं। इसमें दिखाए गए निवेश प्रस्ताव के तहत कम समय में असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का वादा किया गया था, जो वास्तविक वित्तीय ढांचे और सरकारी नीतियों से मेल नहीं खाता। किसी भी सरकारी संस्था या जिम्मेदार पदाधिकारी द्वारा ऐसी किसी निवेश योजना का समर्थन नहीं किया गया है।

    नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने वाले ऐसे आकर्षक निवेश दावों पर बिना पुष्टि के भरोसा न करें। किसी भी वित्तीय योजना की वास्तविकता की जांच केवल अधिकृत और विश्वसनीय स्रोतों के माध्यम से ही की जानी चाहिए। गलत जानकारी पर आधारित निर्णय आर्थिक नुकसान का कारण बन सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की सामग्री अक्सर लोगों को धोखा देने और उनकी व्यक्तिगत तथा बैंकिंग जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से तैयार की जाती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के कारण अब फर्जी वीडियो और भी अधिक वास्तविक प्रतीत होने लगे हैं, जिससे आम उपयोगकर्ताओं के लिए उनकी पहचान करना कठिन हो गया है।

    डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मामलों में यह भी देखा गया है कि पहले भी कई बार फर्जी संदेशों के माध्यम से लोगों को बैंकिंग अपडेट या अन्य सेवाओं के नाम पर भ्रमित करने की कोशिश की गई है। ऐसे मामलों में उपयोगकर्ताओं को संदिग्ध लिंक या फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जो साइबर धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकता है।

    सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें और यदि कोई असामान्य या संदिग्ध सूचना मिले तो उसे संबंधित माध्यमों पर रिपोर्ट करें ताकि गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सके।

    डिजिटल युग में सूचनाओं की तेजी से बढ़ती उपलब्धता के बीच सतर्कता और जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय माने जा रहे हैं, जिससे नागरिक स्वयं को और अपने वित्तीय हितों को सुरक्षित रख सकते हैं।

  • बैतूल छात्रवृत्ति घोटाला: पुलिस के हत्थे चढ़ा तीसरा आरोपी, 'गांव की बेटी योजना' में हुआ था बड़ा गबन

    बैतूल छात्रवृत्ति घोटाला: पुलिस के हत्थे चढ़ा तीसरा आरोपी, 'गांव की बेटी योजना' में हुआ था बड़ा गबन


    बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाले करीब डेढ़ करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में पुलिस ने आज एक और बड़ी सफलता हासिल की है। ‘गांव की बेटी योजना’ के तहत छात्राओं के हक की राशि डकारने वाले इस जालसाजी मामले में पुलिस ने तीसरे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान प्रकाश बंजारे के रूप में हुई है, जो जिले के प्रतिष्ठित जेएच कॉलेज जयवंती हक्सर कॉलेज में सहायक ग्रेड-2 के पद पर पदस्थ था।

    यह पूरा मामला सरकारी खजाने में सेंधमारी और उन बेटियों के भविष्य से खिलवाड़ का है, जिनके लिए सरकार प्रोत्साहन राशि भेजती है। जांच के दौरान सामने आया कि यह घोटाला करीब 1 करोड़ 44 लाख 65 हजार रुपये का है। आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से दस्तावेजों में हेरफेर कर ‘गांव की बेटी योजना’ के लिए आवंटित राशि का गबन किया। प्रकाश बंजारे पर आरोप है कि उसने पद का दुरुपयोग करते हुए इस वित्तीय अनियमितता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सरकारी धन को अवैध रूप से ठिकाने लगाने में मदद की।

    बैतूल पुलिस इस मामले में पहले ही दो आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। विभाग के भीतर चल रहे इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ होने के बाद से ही पुलिस की टीमें कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई थीं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी प्रकाश से पूछताछ में इस घोटाले के कुछ और बड़े नामों और बैंक खातों की जानकारी सामने आ सकती है, जहाँ गबन की गई राशि ट्रांसफर की गई थी। इस गिरफ्तारी के बाद जेएच कॉलेज और शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। छात्राओं के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं में इतने बड़े स्तर पर सेंधमारी ने प्रशासनिक सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब यह पड़ताल कर रही है कि क्या इस घोटाले की जड़ें कॉलेज प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों तक भी फैली हुई हैं। फिलहाल, प्रकाश बंजारे की गिरफ्तारी को इस करोड़ों के घोटाले के खुलासे में एक अहम कड़ी माना जा रहा है।