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  • गांवों और महिलाओं की बैंकिंग में बड़ी छलांग जन-धन योजना के खाते 59 करोड़ पार औसत जमा में भी जबरदस्त बढ़ोतरी

    गांवों और महिलाओं की बैंकिंग में बड़ी छलांग जन-धन योजना के खाते 59 करोड़ पार औसत जमा में भी जबरदस्त बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जन-धन योजना यानी पीएमजेडीवाई ने देश में बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच को व्यापक बनाने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्त मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक योजना के तहत खुले बैंक खातों की संख्या अब 59 करोड़ से अधिक हो गई है। इन खातों में जमा कुल राशि भी बढ़कर 3.17 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा बताता है कि जन-धन योजना केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं रही बल्कि आम लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    पीएम जन-धन योजना की शुरुआत 28 अगस्त 2014 को हुई थी और अब इसे 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था जिनके पास पहले कोई बैंक खाता नहीं था। खास बात यह है कि योजना के तहत खुले खातों में 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। इससे पता चलता है कि बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार देश के छोटे शहरों और गांवों तक भी तेजी से हुआ है। वहीं कुल खातों में महिलाओं की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत है जो वित्तीय समावेशन के साथ महिला आर्थिक भागीदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    19 अगस्त 2026 तक जन-धन खातों में प्रति खाता औसत जमा राशि 5,356 रुपए दर्ज की गई। मंत्रालय के अनुसार पिछले 12 वर्षों में प्रति खाते औसत जमा राशि करीब 3.4 गुना बढ़ी है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि खाताधारक इन बैंक खातों का लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं और उनके भीतर नियमित बचत की आदत भी विकसित हो रही है। यानी जन-धन खाते अब केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का माध्यम नहीं बल्कि परिवारों की रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतों का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

    योजना की एक बड़ी खासियत इसमें मिलने वाली बैंकिंग और वित्तीय सुरक्षा सुविधाएं भी हैं। प्रत्येक पात्र खाते के साथ मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड उपलब्ध कराया जाता है जिसमें 2 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर शामिल है। इसके अलावा पात्र खाताधारकों को 10 हजार रुपए तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी मिल सकती है। यह सुविधा अचानक सामने आने वाली आर्थिक जरूरतों के समय परिवारों के लिए मददगार साबित हो सकती है।

    वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पीएमजेडीवाई का उद्देश्य प्रत्येक ऐसे वयस्क व्यक्ति को बेसिक बैंक अकाउंट उपलब्ध कराना है जिसका पहले बैंक खाता नहीं था। इस खाते के लिए न्यूनतम बैलेंस रखने की बाध्यता नहीं है और मेंटेनेंस चार्ज भी नहीं लिया जाता। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    जन-धन खातों के विस्तार का असर बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच पर भी पड़ा है। बैंक खाता होने से आम लोगों के लिए बीमा और पेंशन योजनाओं से जुड़ना आसान हुआ है। सरकार का कहना है कि देशभर में लगातार चलाए गए अभियानों के जरिए बैंकिंग पहुंच को लगभग हर वर्ग तक ले जाने और जरूरतमंद लोगों के बीच बीमा तथा पेंशन कवरेज का दायरा बढ़ाने की कोशिश जारी है। 59 करोड़ से ज्यादा खातों और 3.17 लाख करोड़ रुपए की जमा राशि का आंकड़ा इस अभियान की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।

  • AI से आसान होगा बैंकिंग का काम, बिना क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी मिलेगा कर्ज; RBI गवर्नर ने बताया नया प्लेबुक

    AI से आसान होगा बैंकिंग का काम, बिना क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी मिलेगा कर्ज; RBI गवर्नर ने बताया नया प्लेबुक


    नई दिल्ली। भारतीय बैंकिंग सेक्टर आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की वजह से बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को कहा कि AI क्रेडिट डिलीवरी को बदलने ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बैंकों से इस तकनीक को जिम्मेदारी और सोच समझकर अपनाने की अपील की। RBI गवर्नर के मुताबिक बैंकों को AI को केवल एक नई तकनीक या सीमित अवधि वाले प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे बैंकिंग के कामकाज और निर्णय लेने के नए तरीके के तौर पर अपनाना चाहिए।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित FIBAC 2026 कॉन्फ्रेंस में उद्घाटन भाषण देते हुए मल्होत्रा ने AI को भारतीय बैंकिंग के लिए निर्णायक ताकत बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग व्यवस्था की दिशा बदली थी और 2010 के दशक में डिजिटलाइजेशन ने वित्तीय सेवाओं का चेहरा बदल दिया था उसी तरह AI मौजूदा दशक में भारतीय बैंकिंग को नई दिशा दे सकता है। उनके मुताबिक AI का प्रभाव बैंकिंग के लगभग हर महत्वपूर्ण हिस्से पर पड़ने वाला है।

    RBI गवर्नर ने कहा कि AI को ऐसी तकनीक नहीं माना जाना चाहिए जिसे खरीदकर किसी एक परियोजना की तरह लागू कर दिया जाए और फिर काम खत्म समझ लिया जाए। इसके बजाय बैंकों को AI के इस्तेमाल की स्पष्ट रणनीति तैयार करनी होगी। जोखिम का आकलन करने से लेकर ग्राहकों को सेवाएं देने तक पूंजी की कीमत तय करने से लेकर संस्थानों के संचालन तक AI बैंकिंग के पारंपरिक तरीकों में बदलाव ला सकता है। यही वजह है कि बैंकों को इस तकनीक को अपनाने से पहले उसकी क्षमता और जोखिम दोनों को समझना होगा।

    AI का सबसे बड़ा असर क्रेडिट डिलीवरी के क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। मौजूदा व्यवस्था में जिन ग्राहकों की औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती उनके लिए बैंक से कर्ज हासिल करना कई बार मुश्किल हो जाता है। AI विभिन्न प्रकार के उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करके ऐसे संभावित उधारकर्ताओं की वित्तीय स्थिति और कर्ज चुकाने की क्षमता का बेहतर आकलन करने में बैंकों की मदद कर सकता है। इससे उन लोगों तक भी औपचारिक बैंकिंग और ऋण सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिल सकती है जो अब तक वित्तीय व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।

    ग्राहक अनुभव के स्तर पर भी AI बैंकिंग सेवाओं को तेज और अधिक व्यक्तिगत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ग्राहकों की जरूरतों को समझकर सेवाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने और बैंकिंग प्रक्रियाओं को आसान बनाने में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इससे बैंकिंग संस्थानों के लिए कामकाज की दक्षता बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के नए रास्ते खुलेंगे।

    हालांकि RBI गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि AI को अपनाने की प्रक्रिया जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ानी होगी। बैंकों को यह तय करना होगा कि वे AI की दिशा खुद तय करते हैं या तकनीक को अपने हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था को बदलने देते हैं। उन्होंने कहा कि कई बैंक पहले से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि अन्य संस्थान इसकी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में AI को लेकर बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

    कुल मिलाकर RBI की ओर से दिया गया संदेश साफ है कि AI भारतीय बैंकिंग के भविष्य का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। यदि इसे पारदर्शिता सुरक्षा और जिम्मेदारी के साथ लागू किया जाता है तो यह कर्ज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने ग्राहक सेवाओं को बेहतर करने और देश में वित्तीय समावेशन को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • कारोबारों को मजबूत बनाने पर जोर, वैश्विक व्यापार में बढ़ेगा भारत का असर..

    कारोबारों को मजबूत बनाने पर जोर, वैश्विक व्यापार में बढ़ेगा भारत का असर..

    नई दिल्ली । 2026 में ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता संभालने की तैयारी के साथ भारत एक ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसका सीधा असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर देखने को मिलेगा। इस पूरी पहल का केंद्र MSME sector है, जिसे देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। भारत का लक्ष्य है कि इस सेक्टर को सिर्फ घरेलू स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी मजबूत पहचान दिलाई जाए।

    इस योजना के तहत भारत ब्रिक्स के ढांचे में एमएसएमई सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसमें खासतौर पर वित्तीय पहुंच को आसान बनाना, तकनीकी सहयोग बढ़ाना और छोटे कारोबारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने जैसे कदम शामिल हैं। माना जा रहा है कि इससे छोटे उद्योगों को नई संभावनाएं मिलेंगी और वे वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकेंगे।

    भारत की अध्यक्षता के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकों और एक बड़े एमएसएमई फोरम का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों का मुख्य फोकस छोटे उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या यानी वित्तीय संसाधनों की कमी को दूर करना होगा। इसमें यह समझने की कोशिश की गई है कि कैसे आसान ऋण व्यवस्था, डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक समाधान के जरिए छोटे व्यवसायों को मजबूती दी जा सकती है।

    चर्चाओं में यह बात भी सामने आई है कि छोटे और मध्यम उद्योग न केवल रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि नवाचार और आर्थिक विकास को भी गति देते हैं। इसके बावजूद इन उद्योगों को अक्सर पर्याप्त वित्त और तकनीकी सहायता नहीं मिल पाती, जिससे उनकी ग्रोथ प्रभावित होती है। इसी अंतर को कम करने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति तैयार की जा रही है।

    भारत इस दिशा में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य है कि सभी सदस्य देश अपने अनुभव और नीतिगत मॉडल साझा करें, जिससे एक ऐसा इकोसिस्टम बन सके जो छोटे व्यवसायों के लिए अनुकूल हो और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिले।

    इसके अलावा, डिजिटल भुगतान प्रणाली, वित्तीय साक्षरता और क्रेडिट क्षमता बढ़ाने जैसे पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इन प्रयासों से छोटे कारोबारों को न केवल घरेलू बाजार में मजबूती मिलेगी, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

    भारत पहले ही कुछ देशों के साथ साझेदारी कर चुका है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में निवेश और व्यापार को बढ़ावा देना है। यह रणनीति भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    कुल मिलाकर यह पूरी योजना छोटे उद्योगों को नई पहचान देने और उन्हें वैश्विक विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जिससे आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में किया महत्वपूर्ण योगदान।

    प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में किया महत्वपूर्ण योगदान।


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 11 साल पूरे होने के अवसर पर इस योजना को देश की युवा और नारी शक्ति के लिए क्रांतिकारी बताया है। 8 अप्रैल 2015 को शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य देश के बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना ने न केवल नए उद्यमियों को सशक्त किया है, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन और आर्थिक समावेशन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि मुद्रा योजना की सफलता का रहस्य इसकी सुलभता और वित्तीय समावेशन में निहित है। बिना गिरवी के ऋण उपलब्ध कराकर इसने अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम की है और जमीनी स्तर पर ऋण अनुशासन को मजबूत किया है। योजना के माध्यम से पहली बार उद्यमिता की ओर बढ़ने वाले लोग, विशेषकर महिलाएं और वंचित समुदाय, अब अपने छोटे व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। इससे सूक्ष्म व्यवसायों का विकास हुआ है और धीरे-धीरे ये अनौपचारिक उद्यम भारत की औपचारिक आर्थिक संरचना का हिस्सा बन रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मुद्रा योजना ने युवा शक्ति और नारी शक्ति पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यह योजना अवसर सुलभ करने, नई पहलों को प्रोत्साहित करने और हर सपने को साकार करने के लिए समर्थन देने वाली आर्थिक सोच की मिसाल है। बीते 11 वर्षों में इस योजना ने करोड़ों युवाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाया है और देश में रोजगार सृजन की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    मुद्रा योजना के अंतर्गत अब तक कुल 52.37 करोड़ खाते खोले गए हैं और लगभग 33.65 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी का लोन प्रदान किया गया है। लाभार्थियों में करीब 70 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि कुल लाभार्थियों में 50 प्रतिशत एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग शामिल हैं। यह आंकड़े इस योजना की व्यापक पहुंच और समाज के हर वर्ग में आर्थिक सशक्तिकरण की सफलता को दर्शाते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना ने बेरोजगार युवाओं को जॉब सीकर्स की भूमिका से जॉब क्रिएटर्स की दिशा में आगे बढ़ाया है। छोटे ऋण और स्थानीय विचारों के जरिए युवा उद्यमियों ने अपने व्यवसाय शुरू किए हैं और आर्थिक परिवर्तन की नींव मजबूत की है। इससे छोटे उद्यमों का विकास हुआ है, स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं और देश की अर्थव्यवस्था की जमीनी संरचना मजबूत हुई है।

    मुद्रा योजना ने महिलाओं और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। इससे न केवल आर्थिक रूप से उनका सशक्तिकरण हुआ है, बल्कि समाज में उनके महत्व और नेतृत्व की भावना भी बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना ने चुपचाप भारत की अर्थव्यवस्था की नींव को नया आकार दिया है और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।

  • सिबिल स्कोर के बिना भी मिल सकेगा लोन, जानिए क्या है सरकार की नई प्लानिंग?

    सिबिल स्कोर के बिना भी मिल सकेगा लोन, जानिए क्या है सरकार की नई प्लानिंग?


    नई दिल्ली । देश में लाखों ऐसे लोग हैं जिन्होंने कभी बैंक से कर्ज नहीं लिया, इसलिए उनका कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है। नतीजा यह होता है कि जब वे पहली बार लोन के लिए आवेदन करते हैं तो सिबिल स्कोर न होने के कारण उन्हें आसानी से मंजूरी नहीं मिलती। अब केंद्र सरकार इस स्थिति को बदलने की तैयारी में है।
    बिना सिबिल स्कोर के लोन
    क्या अब लोन लेने के लिए सिबिल स्कोर जरूरी नहीं रहेगा? केंद्र सरकार एक ऐसी नए सिस्टम पर काम कर रही है, जो देश के लाखों लोगों के लिए बैंकिंग के दरवाजे खोल सकती है। खासकर महिलाएं, ग्रामीण आबादी और वे लोग जिन्होंने कभी बैंक से लोन नहीं लिया, उन्हें इस पहल से बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित क्रेडिट स्कोरिंग फ्रेमवर्क विकसित करने पर विचार कर रही है, जिससे बिना पारंपरिक क्रेडिट इतिहास के भी ऋण मिल सके।

    फिलहाल बैंक किसी भी व्यक्ति को लोन देने से पहले उसका सिबिल स्कोर और क्रेडिट हिस्ट्री जांचते हैं। सिबिल जैसी क्रेडिट एजेंसियां पुराने लोन, समय पर भुगतान और डिफॉल्ट का रिकॉर्ड रखती हैं। जिन लोगों ने पहले कभी लोन नहीं लिया या जिनका कोई क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें अक्सर न्यू टू क्रेडिट मानकर लोन से वंचित कर दिया जाता है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था पहली बार लोन लेने वालों के लिए एक बड़ी बाधा है।

    AI आधारित क्रेडिट स्कोरिंग क्या करेगी?

    नई योजना के तहत एआई और डेटा एनालिटिक्स की मदद से वैकल्पिक आंकड़ों के आधार पर व्यक्ति की क्रेडिट योग्यता आंकी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर नियमित बिजली-पानी के बिल का भुगतान, मोबाइल रिचार्ज या डिजिटल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड, बैंक खाते में लेनदेन का व्यवहार और सरकारी योजनाओं का लाभ। इन सभी डेटा को मिलाकर एक वैकल्पिक क्रेडिट प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है। इससे उन लोगों को भी ऋण मिल सकेगा जिनका पारंपरिक सिबिल स्कोर नहीं है।

    महिलाओं और ग्रामीण आबादी को मिलेगा फायदा

    यह पहल खासकर महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों छोटे कारोबारियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है। इन वर्गों के पास आय का सोर्स तो होता है, लेकिन औपचारिक क्रेडिट इतिहास नहीं होता। नई प्रणाली उन्हें औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में मदद करेगी।

    बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या मतलब?
    यदि यह ढांचा लागू होता है, तो बैंक और वित्तीय संस्थान अपने ग्राहक आधार का विस्तार कर सकेंगे। साथ ही, वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी होंगे।

  • मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला: अटल पेंशन योजना 2030-31 तक जारी

    मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला: अटल पेंशन योजना 2030-31 तक जारी


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में नियमित आमदनी और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को मजबूत बनाना है।
    सरकार ने कहा है कि योजना का प्रचार-प्रसार, विकास और जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता जारी रहेगी। इसका मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा गरीब और कम आय वाले लोग इस योजना से जुड़ सकें।

    यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
    इससे असंगठित क्षेत्र के लाखों कामगारों को बुढ़ापे में स्थायी आमदनी मिलेगी।

    यह कदम विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा।
    सरकार जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण, और वित्तीय सहायता जारी रखेगी।
    यदि किसी बैंक/संस्था को योजना चलाने में आर्थिक कमी होती है, तो गैप फंडिंग के जरिए उसे पूरा किया जाएगा, ताकि योजना टिकाऊ बनी रहे।

    अटल पेंशन योजना कब शुरू हुई?
    9 मई 2015 को अटल पेंशन योजना की शुरुआत हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य था असंगठित क्षेत्र के लोगों को 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन का लाभ देना, ताकि वे अपने बुढ़ापे में किसी पर निर्भर न रहें।

    पेंशन कितनी मिलती है?

    योजना के अनुसार 60 साल की उम्र के बाद लाभार्थी को ₹1,000 से ₹5,000 तक मासिक पेंशन मिल सकती है।

    पेंशन राशि इस पर निर्भर करती है:
    आपकी उम्र
    आपने कितनी पेंशन चुनी
    आपकी कुल जमा राशि

    अब तक कितने लोग जुड़े?
    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 जनवरी 2026 तक 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़े हुए हैं। यह आंकड़ा योजना की विश्वसनीयता और लोकप्रियता को दर्शाता है।

    अटल पेंशन योजना की पात्रता (Eligibility)
    भारतीय नागरिक होना चाहिए
    उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए
    आपके पास बैंक/पोस्ट ऑफिस में सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए
    1 अक्टूबर 2022 से यदि आप इनकम टैक्सपेयर हैं या रहे हैं, तो आप शामिल नहीं हो सकते
    जो व्यक्ति NPS या अन्य पेंशन स्कीम में नहीं है, वह जुड़ सकता है

    कितना निवेश करना पड़ता है?
    आप अपनी पेंशन राशि चुन सकते हैं:
    ₹1,000 / ₹2,000 / ₹3,000 / ₹4,000 / ₹5,000
    मासिक योगदान आपकी उम्र और चुनी गई पेंशन पर निर्भर करता है।
    जितनी कम उम्र में शुरू करेंगे, उतना कम मासिक योगदान देना पड़ेगा।

    उम्र के अनुसार मासिक योगदान
    एंट्री की उम्र ₹1,000 ₹2,000 ₹3,000 ₹4,000 ₹5,000
    18 ₹42 ₹84 ₹126 ₹168 ₹210
    20 ₹50 ₹100 ₹150 ₹198 ₹248
    25 ₹76 ₹151 ₹226 ₹301 ₹376
    30 ₹126 (approx) ₹252 ₹378 ₹504 ₹630 (approx)
    35 ₹231 (approx) ₹462 ₹693 ₹924 ₹1,154
    40 ₹471 (approx) ₹942 ₹1,413 ₹1,884 ₹2,354
    नोट: यह राशि इंडिकेटिव है।

    सटीक राशि के लिए बैंक या आधिकारिक APY कैलकुलेटर (npstrust.org.in या PFRDA वेबसाइट) देखें।

    अटल पेंशन योजना में निवेश कैसे करें?
    नजदीकी बैंक/पोस्ट ऑफिस जाएं
    APY आवेदन फॉर्म भरें
    आधार, मोबाइल नंबर, नामिनेशन, बैंक डिटेल्स भरें
    पेंशन राशि चुनें
    बैंक ऑटो-डेबिट सेट करेगा और PRAN जारी करेगा
    कुछ बैंक ऐप्स/पोर्टल से भी आवेदन हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में बैंक शाखा से ही शुरू होता है।

    अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी राहत है। यह कदम उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देगा और देश में वित्तीय समावेशन को और मजबूत करेगा।