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  • कैशलेस भारत की नई उड़ान, यूपीआई बना दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम

    कैशलेस भारत की नई उड़ान, यूपीआई बना दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम

    नई दिल्ली। भारत में डिजिटल भुगतान का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण यूपीआई की लगातार बढ़ती रफ्तार है। अप्रैल महीने में यूपीआई ने एक बार फिर ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। इस दौरान कुल लेनदेन की संख्या लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 22 अरब से अधिक पहुंच गई, जबकि कुल लेनदेन मूल्य 29 लाख करोड़ रुपए से ऊपर दर्ज किया गया। यह आंकड़े देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और लोगों की बढ़ती डिजिटल निर्भरता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

    आज स्थिति यह है कि छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक, हर जगह यूपीआई भुगतान एक सामान्य प्रक्रिया बन चुका है। लोग नकद लेनदेन की बजाय मोबाइल के जरिए तुरंत भुगतान करना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मान रहे हैं। इस बदलाव ने न केवल भुगतान प्रणाली को सरल बनाया है, बल्कि लेनदेन की गति और पारदर्शिता को भी बढ़ाया है।

    अप्रैल के दौरान रोजाना होने वाले यूपीआई लेनदेन में भी लगातार वृद्धि देखी गई। हर दिन औसतन करोड़ों ट्रांजैक्शन इस माध्यम से पूरे किए गए, जो यह दिखाता है कि यह प्रणाली अब दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। चाहे किराने की दुकान हो, ऑनलाइन शॉपिंग हो या फिर सेवाओं का भुगतान, यूपीआई हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है।

    इस वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी सरल प्रक्रिया और तत्काल भुगतान सुविधा है। केवल मोबाइल नंबर या QR कोड के जरिए कुछ ही सेकंड में लेनदेन पूरा हो जाता है, जिससे समय की बचत होती है और कैश संभालने की परेशानी भी खत्म हो जाती है। इसके अलावा बैंकिंग सिस्टम से सीधा जुड़ाव इसे अधिक सुरक्षित बनाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई ने जिस तेजी से विकास किया है, वह देश की डिजिटल प्रगति का एक महत्वपूर्ण संकेत है। जहां पहले डिजिटल भुगतान सीमित स्तर पर उपयोग होता था, वहीं अब यह प्रणाली देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनती जा रही है। इससे न केवल वित्तीय समावेशन बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिला है।

    अप्रैल के ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत तेजी से कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और यूपीआई इस बदलाव का सबसे मजबूत आधार बन चुका है। आने वाले समय में इसके और विस्तार की संभावना है, जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाएगा।

  • बाजार अस्थिरता के कारण फोनपे ने फिलहाल रोकी आईपीओ लिस्टिंग की तैयारी

    बाजार अस्थिरता के कारण फोनपे ने फिलहाल रोकी आईपीओ लिस्टिंग की तैयारी

    नई दिल्ली:  PhonePe ने सोमवार को घोषणा की कि उसने मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्षों और बाजार की अस्थिरता के कारण अपनी सार्वजनिक बाजार में लिस्टिंग प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। कंपनी ने कहा कि वैश्विक पूंजी बाजारों में स्थिरता आने के बाद वह इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करेगी।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Sameer Nigam ने कहा कि वे प्रभावित क्षेत्रों में जल्द शांति बहाल होने की उम्मीद करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी भारत में सार्वजनिक लिस्टिंग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    कंपनी के अनुसार 30 सितंबर 2025 तक फोनपे के 65 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और इसका डिजिटल भुगतान नेटवर्क देशभर में 4.7 करोड़ से अधिक व्यापारियों तक पहुंच चुका है।

    इस बीच कंपनी डिजिटल भुगतान सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नए फीचर भी लॉन्च कर रही है। इसी साल जनवरी में फोनपे पेमेंट गेटवे ने वीजा और मास्टरकार्ड कार्ड लेनदेन के लिए फोनपे पीजी बोल्ट फीचर लॉन्च करने की घोषणा की थी।

    यह समाधान डिवाइस टोकनाइजेशन तकनीक का उपयोग करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं और व्यापारी भागीदारों को एक सुरक्षित और तेज इन-ऐप चेकआउट अनुभव मिलता है। इस सुविधा के तहत यूजर्स फोनपे ऐप पर अपने कार्ड को एक बार टोकनाइज कर सकते हैं और बाद में किसी भी जुड़े हुए मर्चेंट प्लेटफॉर्म पर उसी सेव किए गए कार्ड का उपयोग कर सकते हैं।

    इस सिस्टम में सुरक्षित टोकन संवेदनशील कार्ड विवरण की जगह ले लेता है, जिससे उसी डिवाइस पर किए जाने वाले बाद के लेनदेन में बार-बार सीवीवी दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सरल हो जाती है।

    फोनपे के मर्चेंट बिजनेस के चीफ बिजनेस ऑफिसर Yuvraj Singh Shekhawat ने कहा कि वीजा और मास्टरकार्ड के लिए फोनपे पीजी बोल्ट फीचर का लॉन्च लाखों भारतीयों के लिए डिजिटल भुगतान को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने कहा कि डिवाइस टोकनाइजेशन के जरिए उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और वन-क्लिक भुगतान का अनुभव मिलेगा, जबकि व्यापारियों को बेहतर सफलता दर और कम ट्रांजैक्शन ड्रॉप-ऑफ के साथ अपने कारोबार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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  • फोनपे की आय में 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी, घाटा घटा; पेमेंट से लेंडिंग और इंश्योरेंस तक विस्तार

    फोनपे की आय में 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी, घाटा घटा; पेमेंट से लेंडिंग और इंश्योरेंस तक विस्तार


    नई दिल्ली । फिनटेक क्षेत्र में अग्रणी कंपनी फोनपे ने अपने हालिया वित्तीय खुलासों में पिछले तीन वर्षों में आय, मुनाफे और नकदी प्रवाह में उल्लेखनीय सुधार का संकेत दिया है। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस डीआरएचपी के अनुसार, फोनपे की परिचालन से आय वित्त वर्ष 2023 में 2,914.28 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 7,114.85 करोड़ रुपए हो गई। यह 56.25 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) को दर्शाता है।

    आय में वृद्धि के प्रमुख कारण मर्चेंट पेमेंट, लेंडिंग और इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन जैसे कारोबार रहे। कुल आय में मर्चेंट पेमेंट की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023 में 14.75 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 27.99 प्रतिशत और 30 सितंबर 2025 को समाप्त छह महीने की अवधि में 30.78 प्रतिशत हो गई। लेंडिंग और इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023 में 0.96 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 7.84 प्रतिशत और हाल की छह महीने की अवधि में 11.55 प्रतिशत हो गई। इससे स्पष्ट होता है कि कंपनी अब केवल पेमेंट बिजनेस तक सीमित नहीं रही, बल्कि अपने कारोबार में विविधता ला रही है।

    फोनपे के घाटे में भी महत्वपूर्ण कमी आई है। वित्त वर्ष 2025 में संशोधित घाटा घटकर 1,727.41 करोड़ रुपए रह गया, जो वित्त वर्ष 2023 की तुलना में 1,068.65 करोड़ रुपए कम है। इसी अवधि में घाटा मार्जिन 90.68 प्रतिशत से घटकर 22.64 प्रतिशत हो गया। डीआरएचपी में परिचालन लाभ में सुधार भी दर्शाया गया है। वित्त वर्ष 2024 और 2025 में कंपनी ने सकारात्मक एडजस्टेड ईबीआईटीडीए और एडजस्टेड प्रॉफिट दर्ज किया। वित्त वर्ष 2025 में एडजस्टेड ईबीआईटी स्तर पर भी मुनाफा हासिल हुआ, जो लागत नियंत्रण और बढ़ते राजस्व का परिणाम है।

    इस अवधि में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि फ्री कैश फ्लो का सृजन रही। फोनपे ने वित्त वर्ष 2025 में 190.47 करोड़ रुपए और 30 सितंबर 2024 को समाप्त छह महीने की अवधि में 250.16 करोड़ रुपए का फ्री कैश फ्लो दर्ज किया। कंपनी का कहना है कि उसका बिजनेस मॉडल फ्री कैश जनरेशन पर केंद्रित है, जिससे दोबारा निवेश, नए प्लेटफॉर्म में विस्तार और बैलेंस शीट को मजबूत किया जा सके।

    डीआरएचपी में वित्तीय सुधार में तकनीकी अवसंरचना में किए गए निवेश की भी बड़ी भूमिका बताई गई है। इसमें मालिकाना डेटा सेंटर, ऑटोमेशन पहल और डेटा आधारित ग्राहक अधिग्रहण रणनीतियां शामिल हैं। इन पहलों से लेनदेन की बढ़ती संख्या के बावजूद लागत नियंत्रण संभव हुआ, जिससे मार्जिन और नकदी प्रवाह में सुधार हुआ।

    फोनपे ने पूंजी आवंटन कैपिटल एलोकेशन में अनुशासित दृष्टिकोण अपनाने का भी संकेत दिया। कंपनी तरलता बनाए रखने, सोच-समझकर विकास पूंजी लगाने और निवेश को प्रदर्शन से जोड़ने पर ध्यान दे रही है।

    इस खुलासे से यह स्पष्ट होता है कि पिछले तीन वित्त वर्षों में फोनपे ने परिचालन दक्षता बढ़ाने, आय के स्रोतों में विविधता लाने और नकदी प्रवाह मजबूत करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। कंपनी ने अपने व्यवसाय मॉडल को केवल पेमेंट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लेंडिंग और इंश्योरेंस जैसे नए व्यवसाय क्षेत्रों में भी विस्तार किया है, जिससे फिनटेक क्षेत्र में उसकी स्थिति और मजबूत हुई है।