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  • UPI पेमेंट पर MDR चार्ज लगाने की समय सीमा बढ़ी, 1 जनवरी 2027 तक टली व्यवस्था से व्यापारियों को मिलेगी राहत

    UPI पेमेंट पर MDR चार्ज लगाने की समय सीमा बढ़ी, 1 जनवरी 2027 तक टली व्यवस्था से व्यापारियों को मिलेगी राहत

    नई दिल्ली । त्योहारी सीजन के दौरान डिजिटल भुगतान करने वाले व्यापारियों के लिए राहत की खबर है। यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने की समय सीमा आगे बढ़ा दी गई है। पहले इस व्यवस्था को 15 अक्टूबर से लागू किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अब इसकी समय सीमा बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 कर दी गई है। इस फैसले से देशभर के छोटे-बड़े दुकानदारों और कारोबारियों को अतिरिक्त समय मिल गया है। त्योहारी खरीदारी के बीच व्यापारियों की चिंताओं और नई व्यवस्था को लागू करने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

    एमडीआर का पूरा नाम मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। यह वह शुल्क होता है, जो किसी दुकानदार या कारोबारी से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले लिया जाता है। आमतौर पर यह रकम भुगतान सेवाएं उपलब्ध कराने वाले बैंकों, फिनटेक कंपनियों या भुगतान व्यवस्था से जुड़ी संस्थाओं को मिलती है। यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों के लिए इस तरह के शुल्क की समय सीमा और दरें कारोबार की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। इसी वजह से एमडीआर लागू करने की तारीख को लेकर व्यापारियों के बीच चिंता बनी हुई थी।

    हाल ही में 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क तय किए जाने की बात सामने आई थी। इस व्यवस्था से भुगतान गेटवे और पेटीएम तथा मोबिक्विक जैसी कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई गई थी। शुल्क लागू होने की संभावित व्यवस्था को लेकर भुगतान सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के राजस्व में बढ़ोतरी की संभावना भी चर्चा में रही। हालांकि, अब समय सीमा आगे बढ़ने के कारण व्यापारियों और संबंधित कंपनियों को नई व्यवस्था के लिए तैयारी करने का अधिक समय मिलेगा।

    समय सीमा बढ़ाने के पीछे व्यापारियों की ओर से उठाई गई चिंताओं को भी अहम माना गया है। कारोबारियों और मर्चेंट्स की मांग थी कि नई व्यवस्था को ठीक से समझने और लागू करने के लिए उन्हें कुछ और समय दिया जाए। त्योहारी सीजन को देखते हुए 15 अक्टूबर से इसे लागू करने के बजाय समय सीमा आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। इस दौरान दुकानदारों को अपने भुगतान से जुड़े कामकाज और व्यवस्था को समझने का अवसर मिलेगा। त्योहारी खरीदारी के समय डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ने के बीच यह फैसला कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    समय सीमा बढ़ने से देशभर के लाखों छोटे-बड़े व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। कई कारोबारी संभावित डिजिटल भुगतान शुल्क को लेकर चिंतित थे, क्योंकि इससे उनके कारोबार की लागत और मुनाफे पर असर पड़ सकता था। अब नई तारीख तक उन्हें इस व्यवस्था को समझने और उसके लिए तैयारी करने का अतिरिक्त समय मिलेगा। हालांकि, शुल्क लागू होने पर इसका वास्तविक असर कारोबार के आकार और भुगतान व्यवस्था के इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करेगा।

    इस फैसले का असर भुगतान सेवाएं देने वाली कंपनियों पर भी पड़ सकता है। जब पिछले महीने एमडीआर से जुड़ी व्यवस्था की घोषणा हुई थी, तब भुगतान गेटवे और फिनटेक कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई थी। उस समय इन कंपनियों के राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई थी। अब शुल्क लागू करने की समय सीमा बढ़ने से इस व्यवस्था के प्रभाव को लेकर बाजार की उम्मीदों और व्यापारियों की तैयारियों के बीच अधिक समय मिल गया है। फिलहाल, एमडीआर से जुड़ी नई समय सीमा 1 जनवरी 2027 तय की गई है।

  • भारत के UPI ने रचा वैश्विक रिकॉर्ड, हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर बना डिजिटल भुगतान का बेंचमार्क

    भारत के UPI ने रचा वैश्विक रिकॉर्ड, हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर बना डिजिटल भुगतान का बेंचमार्क


    नई दिल्ली ।
    भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में लगातार बड़े स्तर पर विस्तार कर रहा है। वर्तमान में यह डिजिटल पेमेंट नेटवर्क हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर रहा है। इसके साथ ही भारत ने बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन को एक साथ आगे बढ़ाने का उदाहरण पेश किया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रियल-टाइम पेमेंट इकोसिस्टम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रमुख सफलताओं में शामिल है। UPI के विस्तार ने बड़ी संख्या में लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ने में भूमिका निभाई है। इसके बावजूद डिजिटल लेनदेन की वृद्धि मजबूत बनी हुई है।

    रिपोर्ट में वैश्विक भुगतान उद्योग को लेकर भी अनुमान सामने रखा गया है। इसके अनुसार, वर्ष 2030 तक वैश्विक भुगतान उद्योग का राजस्व 2.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि आने वाले वर्षों में इसकी वृद्धि दर पिछले पांच वर्षों की तुलना में कुछ धीमी रहने का अनुमान है। पिछले पांच वर्षों में यह वृद्धि करीब 7 प्रतिशत प्रतिवर्ष रही, जबकि आगे लगभग 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का अनुमान जताया गया है।

    भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को वित्तीय समावेशन और बड़े पैमाने पर उपयोग के बीच संतुलन बनाने वाले उदाहरण के तौर पर बताया गया है। UPI के जरिए करोड़ों लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़े जाने के साथ लेनदेन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    डिजिटल भुगतान के साथ क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। खास तौर पर ऑनलाइन भुगतान के क्षेत्र में क्रेडिट कार्ड उपयोग में तेजी देखी जा रही है। इससे बैंकों, फिनटेक कंपनियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए नई मूल्यवर्धित सेवाएं विकसित करने के अवसर बन रहे हैं।

    डिजिटल भुगतान क्षेत्र का अगला चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एजेंटिक कॉमर्स से जुड़ा हुआ बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में एआई आधारित सिस्टम भुगतान प्रक्रिया को अधिक सहज, सुरक्षित और स्वचालित बनाने में मदद कर सकते हैं।

    एआई के बढ़ते इस्तेमाल का असर भुगतान और ट्रांजैक्शन बैंकिंग क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। इससे कंपनियों को परिचालन लागत कम करने, उत्पादों में सुधार करने और पारंपरिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करने में मदद मिल सकती है। ट्रेड फाइनेंस और भुगतान संचालन जैसी कागजी प्रक्रियाओं में भी तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

    एजेंटिक कॉमर्स को लेकर बड़े व्यापारियों के रुख से भी इसकी बढ़ती अहमियत का संकेत मिलता है। सर्वेक्षण में शामिल 73 प्रतिशत बड़े व्यापारियों ने कहा कि बेहतर एजेंट-आधारित लेनदेन की सुविधा और समर्थन मिलने पर वे अपने भुगतान सेवा प्रदाता को बदलने पर विचार कर सकते हैं। इससे भुगतान कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में एजेंटिक कॉमर्स की भूमिका बढ़ने के संकेत मिलते हैं।

    रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर भुगतान संप्रभुता के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, दुनिया के 137 देशों में फिलहाल चौबीसों घंटे इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम उपलब्ध हैं। इससे वैश्विक भुगतान व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक विविध और व्यापक हो रही है।

    भारत का UPI इसी बदलते वैश्विक डिजिटल भुगतान परिदृश्य में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले रियल-टाइम भुगतान नेटवर्क के रूप में सामने आया है। हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन की प्रोसेसिंग इसके विस्तार और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है।

  • UPI यूजर्स पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, नए MDR ढांचे से डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद

    UPI यूजर्स पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, नए MDR ढांचे से डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद

    नई दिल्ली । UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए किसी तरह का नया शुल्क लागू नहीं होगा। नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR ढांचे को लेकर फोनपे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समीर निगम ने स्पष्ट किया है कि ग्राहक पहले की तरह बिना किसी शुल्क के UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि नए राजस्व मॉडल का उद्देश्य भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है।

    समीर निगम के मुताबिक, UPI ग्राहकों से इस्तेमाल के लिए पहले भी कोई शुल्क नहीं लिया गया है और आगे भी उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P और व्यक्ति-से-व्यापारी यानी P2M दोनों तरह के UPI भुगतान ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेंगे।

    नए MDR ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इस शुल्क का भुगतान ग्राहक नहीं, बल्कि संबंधित व्यापारी करेगा। इसके अलावा एक लाख रुपये से कम वार्षिक कारोबार वाले छोटे व्यापारी MDR व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे।

    समीर निगम ने बताया कि बड़े दुकानदारों के मामले में भी 2,000 रुपये से कम राशि वाले करीब 96 प्रतिशत लेनदेन किसी शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे। इसका मतलब है कि रोजमर्रा की बड़ी संख्या में होने वाली छोटी राशि की UPI खरीदारी पर ग्राहकों को किसी अतिरिक्त भुगतान का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि MDR का भुगतान करने वाले व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों पर नहीं डाल सकेंगे। उनके अनुसार, शुल्क का ढांचा व्यापारियों और डिजिटल भुगतान से जुड़े संस्थानों के बीच रहेगा, जबकि ग्राहक पहले की तरह UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे।

    समीर निगम ने डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने में होने वाले खर्च का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित रखने के लिए उद्योग हर साल करीब 10,000 करोड़ से 12,000 करोड़ रुपये खर्च करता है। यह खर्च केवल तकनीकी ढांचे तक सीमित नहीं है। KYC, साइबर सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन, धोखाधड़ी नियंत्रण, मर्चेंट चार्जबैक और पूंजीगत निवेश जैसी व्यवस्थाओं पर भी लगातार खर्च होता है।

    उनके अनुसार, नए MDR मॉडल से मिलने वाला राजस्व उन बैंकों और कंपनियों के निवेश को समर्थन देने में मदद करेगा, जो UPI इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। इससे डिजिटल भुगतान से जुड़ी सेवाओं के संचालन और आगे के विकास के लिए आर्थिक आधार मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

    समीर निगम ने भारत में UPI के बढ़ते इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, वर्ष 2020 में UPI के करीब 20 करोड़ उपयोगकर्ता थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 50 से 55 करोड़ तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लगातार विस्तार और निवेश की जरूरत है।

    उन्होंने नए राजस्व मॉडल को फिनटेक क्षेत्र की निजी कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, इससे कंपनियों को मार्केटिंग, नवाचार तथा अनुसंधान और विकास में अधिक निवेश करने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक आगे बढ़ाने के लिए व्यवसायों को उचित आय अर्जित करने का अवसर मिलना जरूरी है।

    इस तरह नए MDR ढांचे में ग्राहकों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रखने पर जोर दिया गया है, जबकि निर्धारित श्रेणी के मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क व्यापारियों से लिया जाएगा। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच पूरे इकोसिस्टम के संचालन और निवेश के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल तैयार करना बताया गया है।

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों से बैंकिंग, बीमा, फिनटेक और उभरते क्षेत्रों में भारत के अवसरों का लाभ उठाने को कहा

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों से बैंकिंग, बीमा, फिनटेक और उभरते क्षेत्रों में भारत के अवसरों का लाभ उठाने को कहा


    नई दिल्ली । 
    केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों को भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। टोरंटो में भारतीय प्रवासी कारोबारी समुदाय के लिए आयोजित एक स्वागत समारोह में उन्होंने भारत में निवेश के बढ़ते अवसरों और विभिन्न उभरते क्षेत्रों की संभावनाओं पर विस्तार से बात की।

    वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक मजबूत स्थिति में हैं और बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश हो रहा है।

    उन्होंने कनाडाई निवेशकों से भारत के साथ व्यापक आर्थिक और कारोबारी जुड़ाव स्थापित करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती क्रय शक्ति, मजबूत घरेलू खपत और लगातार विकसित होती मांग देश को दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक बाजार बनाती है।

    सीतारमण ने इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर यानी आईएफएससी गिफ्ट सिटी को भी अंतरराष्ट्रीय पूंजी के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि गिफ्ट सिटी पहले ही कई विदेशी बैंकों को आकर्षित कर चुकी है और आने वाले समय में अधिक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के लिए यहां कारोबार स्थापित करने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।

    वित्त मंत्री के मुताबिक, गिफ्ट सिटी का नियामकीय और कर ढांचा सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को भारत के साथ जुड़ने और व्यापक क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए देश को आधार बनाने का अवसर मिल सकता है।

    बीमा क्षेत्र को लेकर भी उन्होंने निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया। अब भारत में बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है। सरकार की इस व्यवस्था से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बीमा बाजार में भागीदारी का दायरा बढ़ा है।

    फिनटेक क्षेत्र को सीतारमण ने भारत की प्रमुख ताकतों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर विकसित हो रहा भारतीय फिनटेक क्षेत्र वैश्विक पूंजी के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहा है। डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार और तकनीक आधारित वित्तीय समाधानों ने इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाया है।

    इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, मैग्नेट और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों जैसे उभरते क्षेत्रों को भी कनाडाई निवेशकों के लिए संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया गया। इन क्षेत्रों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और रणनीतिक विनिर्माण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सीतारमण ने कहा कि भारत वैश्विक बाजारों के लिए भरोसेमंद और लागत प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला के विकल्प उपलब्ध करा सकता है। इससे भारत में निवेश करने वाली कंपनियों को घरेलू बाजार के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक कारोबारी गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।

    उन्होंने कनाडाई संस्थागत निवेशकों के लिए भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक वित्तीय गतिविधियों के संभावित मंच के रूप में देखने पर जोर दिया। वित्त मंत्री का यह आह्वान भारत और कनाडा के कारोबारी समुदायों के बीच निवेश संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत सरकार की ओर से बैंकिंग, बीमा, फिनटेक, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में निवेश अवसरों को सामने रखना इस बात को दर्शाता है कि देश वैश्विक पूंजी को अपनी विकास प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दे रहा है। कनाडाई निवेशकों के लिए इन क्षेत्रों में मौजूद अवसर भारत की आर्थिक क्षमता और बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के बीच नए कारोबारी विकल्प उपलब्ध करा सकते हैं।

  • नतालियो व्हीटली ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

    नतालियो व्हीटली ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के प्रीमियर और वित्त मंत्री नतालियो डी. व्हीटली से मुलाकात की। बैठक के दौरान भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय एवं आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के विभिन्न अवसरों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने वित्तीय सेवाओं, डिजिटल परिवर्तन, निवेश प्रोत्साहन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया।

    नतालियो व्हीटली भारत की यात्रा पर वित्तीय सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच मौजूदा संबंधों को मजबूत करने के साथ आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है। प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में नई दिल्ली के अलावा गिफ्ट सिटी, मुंबई और बेंगलुरु का दौरा भी शामिल है।

    बैठक के दौरान व्हीटली ने भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच साझेदारी को व्यापक बनाने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने वित्तीय सेवाओं के साथ फिनटेक, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, व्यापार, निवेश संवर्धन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।

    वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता और डिजिटल माध्यमों के व्यापक इस्तेमाल को देखते हुए फिनटेक सहयोग को दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। डिजिटल परिवर्तन के साथ वित्तीय सेवाओं में नवाचार और निवेश के नए रास्ते विकसित हो सकते हैं। क्षमता निर्माण के जरिए विशेषज्ञता और अनुभव साझा करने की संभावनाएं भी इस साझेदारी को मजबूत कर सकती हैं।

    निर्मला सीतारमण ने भारत को वित्तीय सेवाओं और निवेश के लिए दुनिया के सबसे बड़े तथा तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बताया। उन्होंने साझा हित वाले क्षेत्रों में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का स्वागत किया। बैठक में दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए संभावित क्षेत्रों पर विचार-विमर्श हुआ।

    गिफ्ट सिटी और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर से जुड़े अवसर भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल का गिफ्ट सिटी दौरा वित्तीय सेवाओं और निवेश से जुड़े संभावित सहयोग को समझने का अवसर प्रदान कर सकता है। मुंबई और बेंगलुरु में होने वाली बातचीत से वित्तीय क्षेत्र और तकनीकी क्षमताओं से जुड़े अन्य अवसरों पर भी चर्चा आगे बढ़ सकती है।

    इस बीच, निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। इस यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ दोनों देशों की आर्थिक और वित्तीय साझेदारी को मजबूत करना, निवेश संबंधों को गहरा करना तथा वैश्विक आर्थिक प्राथमिकताओं पर सहयोग बढ़ाना है।

    कनाडा के टोरंटो में सीतारमण कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन के साथ पहले आर्थिक एवं वित्तीय संवाद में हिस्सा लेंगी। इस दौरान व्यापक आर्थिक विकास, वित्तीय क्षेत्र में सहयोग, द्विपक्षीय निवेश अवसरों और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होगी।

    कनाडा यात्रा के दौरान वित्त मंत्री एक विशेष निवेश राउंडटेबल में भी शामिल होंगी। इसमें ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्रों से जुड़े उद्योगपति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। बातचीत का उद्देश्य नए निवेश अवसरों की पहचान करना और दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

    भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ गिफ्ट सिटी-आईएफएससी में निवेश की संभावनाएं भी चर्चा का हिस्सा रहेंगी। इस तरह ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के साथ हुई बैठक और आगामी विदेश यात्रा, दोनों ही वित्तीय सेवाओं, निवेश और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को विस्तार देने की व्यापक दिशा से जुड़ी हैं।

  • PhonePe का बड़ा ऐलान, एक ही ऐप पर खुलेगी एफडी और 100 रुपये रोजाना से शुरू होगी डिजिटल आरडी

    PhonePe का बड़ा ऐलान, एक ही ऐप पर खुलेगी एफडी और 100 रुपये रोजाना से शुरू होगी डिजिटल आरडी


    नई दिल्ली ।
    डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करते हुए फोनपे ने अपने प्लेटफॉर्म पर फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) डिस्ट्रीब्यूशन सेवा शुरू कर दी है। इस नई सुविधा के जरिए अब ग्राहक सीधे फोनपे ऐप पर विभिन्न बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों की एफडी योजनाओं की तुलना कर निवेश कर सकेंगे। इसके साथ ही कंपनी ने शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक के सहयोग से एक नया डिजिटल माइक्रो-सेविंग्स प्रोडक्ट ‘डेली रिकरिंग डिपॉजिट (डेली आरडी)’ भी लॉन्च किया है, जिसमें केवल 100 रुपये प्रतिदिन से बचत शुरू की जा सकती है।

    नई सुविधा का उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और आसान बनाना है। अब ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की वेबसाइट या शाखाओं में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे एक ही ऐप पर उपलब्ध विभिन्न एफडी विकल्पों की तुलना कर अपनी जरूरत और निवेश अवधि के अनुसार उपयुक्त योजना चुन सकेंगे। इससे निवेश की प्रक्रिया तेज, सुविधाजनक और अधिक पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

    फोनपे के अनुसार, ऐप के माध्यम से खोली गई एफडी पर भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के तहत डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) की व्यवस्था के अनुसार पात्र जमा राशि पर 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर भी मिलेगा। इसके अलावा उपयोगकर्ता एक ही प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग बैंकों की एफडी को आसानी से ट्रैक और प्रबंधित कर सकेंगे।

    कंपनी ने छोटे निवेशकों, युवाओं, मिलेनियल्स, जेन-जी और नियमित बचत की आदत विकसित करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए डेली आरडी की शुरुआत की है। इस योजना में प्रतिदिन 100 रुपये से लेकर 1,000 रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। यह सुविधा यूपीआई ऑटोपे आधारित है, जिससे तय राशि स्वतः निवेश होती रहेगी और ग्राहकों को बार-बार भुगतान करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

    डेली आरडी की एक विशेषता यह भी है कि निवेशक जरूरत पड़ने पर केवल सात दिन बाद ही अपनी जमा राशि निकाल सकते हैं। यदि कोई ग्राहक लगातार 15 दिनों तक निवेश नहीं कर पाता है, तब भी उस पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। साथ ही, वह किसी भी समय अपना यूपीआई ऑटोपे मैंडेट बंद करने का विकल्प भी चुन सकता है। इससे यह योजना लचीली और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनती है।

    फोनपे का कहना है कि उसका उद्देश्य देश के अधिक से अधिक लोगों तक सुरक्षित और सरल डिजिटल निवेश सुविधाएं पहुंचाना है। कंपनी का मानना है कि फिक्स्ड डिपॉजिट लंबे समय से भारतीय परिवारों की पसंदीदा बचत योजना रही है और अब इसे पूरी तरह डिजिटल बनाकर निवेशकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराया जाएगा।

    एफडी या डेली आरडी शुरू करने के लिए ग्राहक फोनपे ऐप के होम स्क्रीन पर उपलब्ध “म्यूचुअल फंड्स एंड डिपॉजिट” सेक्शन में जाकर अपनी पसंद का विकल्प चुन सकते हैं। यहां सात दिन से लेकर दस वर्ष तक की अवधि वाली एफडी उपलब्ध होगी। निवेश प्रक्रिया के दौरान पैन और आधार के माध्यम से डिजिटल सत्यापन, नॉमिनी जोड़ने तथा यूपीआई या नेट बैंकिंग के जरिए भुगतान की सुविधा भी मिलेगी। कंपनी का कहना है कि जरूरत पड़ने पर निवेश की गई राशि को निर्धारित नियमों के अनुसार समय से पहले भी निकाला जा सकेगा।

  • UPI पेमेंट सिस्टम में हो सकता है बड़ा बदलाव, सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की तैयारी में

    UPI पेमेंट सिस्टम में हो सकता है बड़ा बदलाव, सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की तैयारी में

    नई दिल्ली । देश में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। सरकार डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक टिकाऊ और मजबूत बनाने के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नियमों में बदलाव की संभावनाओं पर विचार कर रही है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह जारी है।

    चर्चा के अनुसार बड़े कारोबारियों द्वारा किए जाने वाले उच्च मूल्य के UPI लेनदेन पर सीमित MDR लागू किया जा सकता है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन, तकनीकी विकास और सुरक्षा से जुड़ी लागत के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।

    वर्तमान में बैंक-टू-बैंक UPI भुगतान पर किसी प्रकार का MDR लागू नहीं है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में UPI का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लाखों व्यापारी और करोड़ों उपभोक्ता रोजाना बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के डिजिटल भुगतान का उपयोग कर रहे हैं। इस व्यवस्था ने नकदरहित लेनदेन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    डिजिटल भुगतान से जुड़े संस्थानों का मानना है कि भुगतान नेटवर्क का विस्तार, साइबर सुरक्षा, सर्वर क्षमता और नई तकनीकों के विकास पर लगातार निवेश करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक इस व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए एक संतुलित राजस्व मॉडल की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी कारण MDR व्यवस्था में सीमित बदलाव की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

    यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह मुख्य रूप से बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों और अधिक मूल्य वाले लेनदेन तक सीमित रह सकता है। आम उपभोक्ताओं से सीधे अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने का कोई अंतिम निर्णय फिलहाल नहीं हुआ है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और साथ ही भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना बताया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MDR केवल बड़े व्यापारियों तक सीमित रहता है तो सामान्य ग्राहकों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि कुछ मामलों में व्यापारियों की लागत बढ़ने पर उसका प्रभाव वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा।

    डिजिटल भुगतान ने देश में वित्तीय लेनदेन की तस्वीर बदल दी है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक UPI का व्यापक उपयोग हो रहा है। इसी वजह से सरकार और संबंधित संस्थाएं ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती हैं, जिससे डिजिटल भुगतान की गति भी बनी रहे और इसका संचालन भी लंबे समय तक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    फिलहाल UPI उपयोगकर्ताओं के लिए कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है और न ही नए नियम प्रभावी हुए हैं। यदि भविष्य में इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाता है तो उसके बाद ही नई व्यवस्था लागू होगी। तब तक आम लोग पहले की तरह बिना किसी बदलाव के UPI के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे।

  • UPI का दबदबा कायम, जुलाई में रिकॉर्ड 23.66 अरब ट्रांजैक्शन से डिजिटल पेमेंट ने पकड़ी नई रफ्तार

    UPI का दबदबा कायम, जुलाई में रिकॉर्ड 23.66 अरब ट्रांजैक्शन से डिजिटल पेमेंट ने पकड़ी नई रफ्तार


    नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में यूपीआई के माध्यम से किए गए लेनदेन की संख्या में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान कुल 23.66 अरब यानी 2366 करोड़ से ज्यादा यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। वहीं, इन डिजिटल लेनदेन का कुल मूल्य 19 प्रतिशत बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

    आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने में हर दिन औसतन 76.3 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन किए गए। वहीं, प्रतिदिन औसतन 96,383 करोड़ रुपए का डिजिटल भुगतान यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए हुआ। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में लोग तेजी से नकदी आधारित भुगतान से डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ रहे हैं।

    इससे पहले जून 2026 में भी यूपीआई ने शानदार प्रदर्शन किया था। जून में यूपीआई के जरिए 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे, जो पिछले साल की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक थे। इस दौरान कुल लेनदेन राशि 28.92 लाख करोड़ रुपए रही थी। जून में रोजाना औसतन 75.7 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे।

    सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2021-22 में यूपीआई के जरिए 4,595.61 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनका कुल मूल्य 84.16 लाख करोड़ रुपए था। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 में लेनदेन की संख्या बढ़कर 8,371.44 करोड़ और कुल मूल्य 139.15 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया।

    वित्त वर्ष 2023-24 में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 13,112.95 करोड़ रही, जबकि कुल लेनदेन मूल्य 199.95 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यूपीआई के जरिए 18,586.60 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और इनका कुल मूल्य बढ़कर 260.56 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

    डिजिटल भुगतान के इस विस्तार को भारत की वित्तीय समावेशन नीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यूपीआई ने छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े कारोबारियों तक भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाया है। मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकंड में होने वाले भुगतान ने देश में डिजिटल लेनदेन की संस्कृति को तेजी से बढ़ावा दिया है।

    वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने हाल ही में लोकसभा में बताया था कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) भारत की डिजिटल भुगतान तकनीक को दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। एनआईपीएल कई देशों के साथ साझेदारी कर भारतीय भुगतान प्रणाली के वैश्विक विस्तार को बढ़ावा दे रही है।

    इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के चलते भारतीय नागरिक विदेशों में भी यूपीआई आधारित भुगतान कर पा रहे हैं। साथ ही, अन्य देशों को भी रियल टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित करने में मदद मिल रही है। वर्तमान में यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है।

    तेजी से बढ़ते यूपीआई उपयोग से साफ है कि भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत स्थिति बना रहा है। आने वाले समय में यूपीआई के और अधिक देशों तक विस्तार की संभावना है, जिससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • शेयर बाजार में शानदार आगाज़: ‘किश्त’ की पैरेंट कंपनी ने पहले दिन ही निवेशकों को कराया मुनाफा

    शेयर बाजार में शानदार आगाज़: ‘किश्त’ की पैरेंट कंपनी ने पहले दिन ही निवेशकों को कराया मुनाफा

    नई दिल्ली ।डिजिटल फाइनेंस और ऑनलाइन लोन सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से उभर रही OnEMI Technology Solutions ने शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत कर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कंपनी के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होते ही निवेशकों को अच्छा मुनाफा मिला, जिससे IPO में हिस्सा लेने वाले लोगों के चेहरे खिल उठे।

    कंपनी के शेयर अपने तय इश्यू प्राइस से करीब 11 प्रतिशत ऊपर खुले। शुरुआती कारोबार में ही शेयरों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला और यह लिस्टिंग निवेशकों के लिए फायदे का सौदा साबित हुई। बाजार में पहले से ही इस IPO को लेकर उत्साह बना हुआ था और लिस्टिंग के बाद वह भरोसा और मजबूत होता दिखाई दिया।

    हालांकि कुछ निवेशकों को इससे भी अधिक प्रीमियम की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा बाजार की अस्थिर परिस्थितियों के बीच इस प्रदर्शन को मजबूत शुरुआत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेंडिंग सेक्टर की बढ़ती मांग ने कंपनी के प्रति निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।

    करीब 926 करोड़ रुपये के इस IPO को निवेशकों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। अंतिम दिन तक यह इश्यू कई गुना सब्सक्राइब हुआ, जिससे साफ संकेत मिला कि बाजार में कंपनी को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है। खास बात यह रही कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने कंपनी में सबसे अधिक रुचि दिखाई।

    संस्थागत निवेशकों के अलावा गैर-संस्थागत और रिटेल निवेशकों ने भी IPO में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में आवेदन मिलने से यह इश्यू बाजार में चर्चा का विषय बन गया। IPO खुलने से पहले ही कंपनी ने एंकर निवेशकों के जरिए बड़ी रकम जुटाकर अपनी मजबूत स्थिति का संकेत दे दिया था।

    OnEMI Technology Solutions की शुरुआत साल 2016 में हुई थी। कंपनी डिजिटल लेंडिंग और पेमेंट सेवाओं के क्षेत्र में काम करती है और अपने प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों को कई तरह की वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी पर्सनल लोन, छोटे कारोबारियों के लिए लोन, EMI फाइनेंसिंग और अन्य डिजिटल क्रेडिट सेवाओं के माध्यम से तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रही है।

    बीते कुछ वर्षों में कंपनी ने करोड़ों यूजर्स तक अपनी पहुंच बनाई है। बड़ी संख्या में ग्राहकों के जुड़ने और डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ने से कंपनी का कारोबार लगातार मजबूत हुआ है। कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट भी तेजी से बढ़ा है, जो उसके विस्तार और ग्राहकों के भरोसे को दर्शाता है।

    वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो कंपनी ने आय और मुनाफे दोनों में लगातार सुधार दर्ज किया है। यही वजह है कि निवेशकों ने कंपनी के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। डिजिटल फाइनेंस सेक्टर में बढ़ते अवसरों के कारण कंपनी को आगे भी मजबूत ग्रोथ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कंपनी ने संकेत दिया है कि IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से अपने फाइनेंस कारोबार को और मजबूत करने में किया जाएगा। इसके जरिए कंपनी ज्यादा लोन ग्रोथ हासिल करने और डिजिटल फाइनेंस मार्केट में अपनी स्थिति को और बेहतर बनाने की योजना पर काम करेगी।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में डिजिटल क्रेडिट और ऑनलाइन फाइनेंस सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए विकास के बड़े अवसर मौजूद हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी रहेगी कि कंपनी अपनी मौजूदा ग्रोथ को भविष्य में किस तरह बनाए रखती है।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गोल्ड निवेश में पारदर्शिता और सुविधा का बढ़ता रुझान..

    डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गोल्ड निवेश में पारदर्शिता और सुविधा का बढ़ता रुझान..


    नई दिल्ली :
     अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर सोना खरीदने की पारंपरिक परंपरा अब डिजिटल रूप में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसी कड़ी में एक प्रमुख डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म ने अपने यूजर्स को 24 कैरेट डिजिटल गोल्ड खरीदने का आसान और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराया है। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो बिना किसी भौतिक झंझट के निवेश करना चाहते हैं और तकनीक के माध्यम से अपनी बचत को बढ़ाना चाहते हैं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार यूजर्स 99.99 प्रतिशत शुद्धता वाला डिजिटल गोल्ड सीधे ऐप के माध्यम से खरीद सकते हैं। यह गोल्ड विश्वसनीय और प्रमाणित प्लेटफॉर्म्स के जरिए उपलब्ध कराया जाता है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इस व्यवस्था के तहत ग्राहकों को भरोसेमंद निवेश का अनुभव मिलता है और उन्हें गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की चिंता नहीं रहती।

    डिजिटल गोल्ड खरीदने के लिए कई पेमेंट विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें यूपीआई, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और वॉलेट जैसे माध्यम शामिल हैं। यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को उनकी सुविधा के अनुसार भुगतान करने की स्वतंत्रता देती है और पूरी प्रक्रिया को सरल और तेज बनाती है।

    इस प्लेटफॉर्म की एक खास विशेषता यह है कि ग्राहक बहुत छोटी राशि से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। मात्र 10 रुपये से शुरुआत कर धीरे धीरे निवेश बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा नियमित निवेश के लिए दैनिक या मासिक आधार पर निवेश करने की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे उपयोगकर्ता समय के साथ अपनी बचत को व्यवस्थित तरीके से बढ़ा सकते हैं।

    डिजिटल गोल्ड की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी लिक्विडिटी है। उपयोगकर्ता जब चाहें अपना गोल्ड बेच सकते हैं और राशि सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकते हैं। इससे यह निवेश पारंपरिक सोने की तुलना में अधिक लचीला और सुविधाजनक बन जाता है।

    देशभर में बड़ी संख्या में लोग इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, जिससे डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। यह विकल्प विशेष रूप से उन लोगों के बीच तेजी से स्वीकार किया जा रहा है जो डिजिटल माध्यमों के जरिए निवेश करना पसंद करते हैं।

    अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर पर यह सुविधा पारंपरिक विश्वास और आधुनिक तकनीक का संतुलित मेल प्रस्तुत करती है, जहां लोग आसानी से सुरक्षित निवेश कर सकते हैं और अपनी वित्तीय योजनाओं को मजबूत बना सकते हैं।