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  • जातिसूचक टिप्पणी के आरोप से गरमाया मामला, प्रशासन पर दबाव

    जातिसूचक टिप्पणी के आरोप से गरमाया मामला, प्रशासन पर दबाव


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले के कोतवाली थाने में दर्ज एक FIR को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि FIR में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने शिकायत दर्ज करते समय जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। इस मामले के सामने आने के बाद सामाजिक संगठन भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मंगलवार को संगठन के पदाधिकारियों ने कटनी पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने FIR से आपत्तिजनक शब्दों को हटाने की भी अपील की है।

    30 मई की घटना से शुरू हुआ मामला
    मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 30 मई का है। कोतवाली थाना क्षेत्र के खरहनी फाटक निवासी अशोक अहिरवार (42) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पड़ोसियों मुरेरी चौधरी, उनकी पत्नी, अजुदन चौधरी और संजय चौधरी ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। पीड़ित जब रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो ड्यूटी पर मौजूद प्रधान आरक्षक नितिन जायसवाल ने उनकी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की। आरोप है कि इसी FIR के विवरण में मोहल्ले के नाम का उल्लेख करते समय अनुचित रूप से जातिसूचक शब्द शामिल कर दिए गए।

    सामाजिक संगठन का विरोध, कार्रवाई की मांग
    घटना सामने आने के बाद भीम आर्मी आजाद एकता मिशन ने इसे अनुसूचित जाति समाज का अपमान बताया है। संगठन के जिला उपाध्यक्ष संदीप चौधरी ने कहा कि पुलिस का कार्य निष्पक्ष रूप से पीड़ित की सहायता करना और समानता बनाए रखना है, लेकिन इस तरह के शब्दों का उपयोग गंभीर आपत्ति का विषय है। उन्होंने मांग की कि संबंधित प्रधान आरक्षक पर तत्काल कार्रवाई की जाए और FIR रिकॉर्ड को संशोधित कर आपत्तिजनक शब्द हटाए जाएं।

    पुलिस अधीक्षक का बयान, जांच के आदेश
    इस मामले पर पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संभवतः FIR में वही विवरण दर्ज किया गया होगा जो शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    जांच पर टिकी निगाहें
    फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। एक ओर सामाजिक संगठन कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • इंदौर जमीन केस: सूरज रजक का आरोप, रेमन का परिवार एकतरफा FIR कराने में शामिल

    इंदौर जमीन केस: सूरज रजक का आरोप, रेमन का परिवार एकतरफा FIR कराने में शामिल

    इंदौर। शहर में एक विवाद ने नया मोड़ लिया है जहां कारोबारी और क्रिकेट टीम मालिक सूरज रजक ने रेमन कक्कर और उनके परिवार पर जमीन को लेकर FIR दर्ज कराने के आरोपों का जवाब दिया है। सूरज रजक का कहना है कि उक्त जमीन के सौदे में परिवार ने उन्हें 50 लाख रुपये सालाना किराए पर देने की सहमति दी थी और उनके दोनों भाई उनकी मां और पत्नी भी इस डील के गवाह थे। सूरज ने कहा कि एफआईआर करने से पहले मेरा पक्ष नहीं सुना गया और यह एकतरफा एफआईआर दर्ज की गई।

    सूरज रजक ने बताया कि जमीन पर कब्जे का आरोप निराधार है। उन्होंने कहा कि यह पूरा परिवार पहले भी जमीन के विवादों में शामिल रहा है और कई मामलों में पैसे हड़पने के आरोपों पर कोर्ट में केस चल रहे हैं। सूरज के अनुसार परिवार ने पहले किसी और के साथ जमीन का सौदा किया और उसके पैसे हड़प लिए। उन्होंने कहा कि जमीन पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं था बल्कि परिवार की सहमति से काम शुरू किया गया।

    सूरज ने दैनिक भास्कर को चैटिंग और बातचीत की जानकारी साझा करते हुए बताया कि रेमन के भाई रणधीर सलूजा ने खुद उन्हें जमीन दिखाने के लिए ले जाया। जमीन देखने के बाद उन्होंने नक्शा बनाने के लिए कहा। नक्शा तैयार होने के बाद सूरज ने इसे परिवार को भेजा और काम शुरू किया। तभी अचानक रेमन कक्कर ने एफआईआर दर्ज करवा दी जो उनके परिवार के आपसी विवाद का हिस्सा है।

    सूरज ने कहा कि रेमन के पति ने भी उनसे कहा कि बंटी सलूजा से बात कर लें। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने रेमन की मां से मुलाकात की तो उन्होंने जमीन बेचने की इच्छा जाहिर की। सूरज ने आरोप लगाया कि रेमन मानसिक रूप से अस्थिर हैं और उनका परिवार पहले भी कई लोगों से करोड़ों रुपए हड़प चुका है। उन्होंने कहा कि आज भी उक्त जमीन पर नगर निगम का कुर्की बोर्ड लगा हुआ है।

    सूरज ने आगे बताया कि FIR की जानकारी उन्हें रात को मीडिया के माध्यम से मिली। उनका कहना है कि पुलिस को FIR दर्ज करने से पहले उनका पक्ष लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पता होता कि रेमन की सहमति नहीं है तो वे जमीन पर काम ही नहीं करते।

    इस मामले में रेमन के भाई रणधीर सलूजा और उनका परिवार सूरज रजक के आरोपों को खारिज कर रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी कोई सहमति नहीं दी और उनका कोई संपर्क नहीं था। परिवार का कहना है कि यह पूरी कहानी झूठ पर आधारित है और FIR करने का निर्णय कानूनी रूप से सही था।

    यह विवाद इंदौर में जमीन के सौदों परिवारिक मतभेद और सरकारी जमीन के मसलों को लेकर उत्पन्न हुआ है। सूरज रजक का दावा है कि उनके खिलाफ आरोप झूठे हैं और परिवार ने उन्हें जमीन के उपयोग की अनुमति दी थी। वहीं रेमन और उनका परिवार इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के निर्णय से ही सच्चाई सामने आएगी।