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  • भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर शिकंजा, बिहार में साइबर अभियान के तहत 128 केस दर्ज, 16 गिरफ्तारियां और 823 पोस्ट हटाई गईं

    भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर शिकंजा, बिहार में साइबर अभियान के तहत 128 केस दर्ज, 16 गिरफ्तारियां और 823 पोस्ट हटाई गईं

    पटना । बिहार में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, भ्रामक और विधि-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री के खिलाफ पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया है। मार्च से जून 2026 के बीच राज्यभर में साइबर निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई को तेज करते हुए कुल 128 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जबकि इस दौरान 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई राज्य में बढ़ते डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और अफवाह फैलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए की गई है।

    राज्य पुलिस के अनुसार इस अवधि में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और संबंधित सेवा प्रदाताओं को कुल 453 टेकडाउन नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों के माध्यम से 856 आपत्तिजनक और भ्रामक यूआरएल हटाने का अनुरोध किया गया, जिनमें से 823 यूआरएल को प्लेटफॉर्म्स द्वारा पहले ही हटा दिया गया है। इसके अलावा 9 सोशल मीडिया हैंडल, आईडी और चैनलों को पूरी तरह निष्क्रिय किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, सार्वजनिक संस्थानों और आम नागरिकों के खिलाफ गलत जानकारी और आपत्तिजनक सामग्री साझा की जा रही थी। ऐसी पोस्ट्स से सामाजिक तनाव बढ़ने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी, जिसके चलते विशेष निगरानी और कार्रवाई की गई।

    साइबर इकाइयों की ओर से बताया गया है कि यह अभियान केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना भी है। पुलिस लगातार ऐसे अकाउंट्स और कंटेंट पर नजर रख रही है जो अफवाह फैलाने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। इसके तहत संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी भी की जा रही है।

    बिहार पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। पुलिस का कहना है कि जनता की जागरूकता और सहयोग से ही साइबर अपराधों और अफवाहों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

  • अदिति यादव पर अभद्र टिप्पणी मामले में सख्त हुए सीएम योगी, बोले- बेटी का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

    अदिति यादव पर अभद्र टिप्पणी मामले में सख्त हुए सीएम योगी, बोले- बेटी का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि किसी भी बेटी के सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता और ऐसी टिप्पणियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, उन्होंने पुलिस अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेटियों के प्रति सम्मान भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा किसी भी परिस्थिति में अपमानजनक भाषा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में बेटियों और महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपनी भाषा और व्यवहार में विशेष संयम बरतना चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है।

    इस दौरान उन्होंने राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों को भी मर्यादित भाषा के उपयोग की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति, परिवार, महिला, बुजुर्ग या सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक शिष्टाचार के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत हमलों में बदलने की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत जीवन और परिवार के सदस्यों को विवादों में घसीटना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने सभी दलों से अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जिम्मेदार आचरण के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

    मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिली। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों ने महिलाओं के सम्मान और सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्र भाषा के उपयोग को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई लोगों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों और व्यक्तिगत हमलों के मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई ऐसे मामलों पर नियंत्रण स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को महिलाओं के सम्मान, सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग से जुड़े व्यापक मुद्दों के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी रहेगी।