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  • भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच

    भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच


    भोपाल । भोपाल के न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बालाजी छोले-भटूरे दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि दुकान में जल रही भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगी थी। इसके बाद आग की लपटें तेजी से फैल गईं और आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। इस हादसे में कई दुकानों और एक दर्जन से ज्यादा रेहड़ियों को नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद करोड़ों रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। अब पुलिस के साथ नगर निगम भी बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती कर रहा है।

    जांच के मुताबिक बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में भट्टी जल रही थी। उसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैलती चली गईं। देखते ही देखते आग ने आसपास की चार अन्य दुकानों को भी प्रभावित किया। इनमें आम्रपाली रेस्टोरेंट विजय स्टोर एक कैफे और मोबाइल की दुकान शामिल थीं। हादसे के बाद आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने लापरवाही और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के मुताबिक आग की शुरुआत भट्टी के पास रखे कपड़े से हुई थी।

    दूसरी ओर नगर निगम यह भी जांच कर रहा है कि संबंधित दुकान में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं। फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच के बाद इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यह घटना एक बार फिर बाजारों में अग्नि सुरक्षा और दुकानों के आसपास रखे सामान से पैदा होने वाले खतरे को लेकर सवाल खड़े करती है।

    आग लगने के दौरान दमकल वाहनों को बाजार में आगे बढ़ने में परेशानी हुई थी। दुकानों के सामने रखे सामान और रेहड़ियों के कारण रास्ता बाधित होने की बात सामने आई थी। इसी के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को करीब तीन घंटे तक मॉकड्रिल की गई और दो दमकल वाहनों को बाजार में चलाकर रास्तों की स्थिति देखी गई। जहां दमकलों के आगे बढ़ने में बाधा आई वहां निगम के अमले ने सामान जब्त किया।

    नगर निगम अब रेहड़ी संचालकों को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि तय स्थान पर नहीं जाने वाले हॉकर्स के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग की जा रही है। दुकानदारों को चेतावनी दी गई है कि निर्धारित सीमा से आगे सामान रखने पर कार्रवाई होगी।

    इस घटना के बाद बाजार में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर व्यापक सवाल भी उठ रहे हैं। हादसे वाली जगह से करीब 100 फीट की दूरी पर दो अन्य छोले-भटूरे की दुकानें संचालित हो रही हैं। आसपास नमकीन की दुकानें भी हैं जहां भट्टियां जलती हैं। ऐसे में सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है।

    भोपाल के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंता का विषय रही है। चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए करीब 22 लाख रुपये का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था। लेकिन जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इसकी प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव पर भी सवाल उठे थे। जुमेराती इब्राहिमपुरा नदीम रोड और घोड़ा नक्कास समेत अन्य बाजारों में भी सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच की जरूरत है।

    बैरागढ़ के संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 17 दिसंबर 2017 को लगी आग में 100 से ज्यादा कपड़ा दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। इसके बाद फायर सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए थे लेकिन उनके रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। न्यू मार्केट की घटना ने साफ कर दिया है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है। समय पर जांच नियमित रखरखाव और दमकल वाहनों के लिए रास्ते खुले रखना भी उतना ही जरूरी है।


  • भीषण आग पर लगेगी लगाम, मध्य प्रदेश के 21 शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेंगे आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहन, जानिए खास खूबियां

    भीषण आग पर लगेगी लगाम, मध्य प्रदेश के 21 शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेंगे आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहन, जानिए खास खूबियां


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश में आगजनी की बड़ी घटनाओं से निपटने और राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के लिए अग्निशमन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। प्रदेश के 16 नगर निगमों और पांच प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में 12 हजार लीटर पानी की क्षमता वाले 21 आधुनिक वाटर बाउजर तैनात किए जाएंगे। मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी ने इन वाहनों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन वाहनों के मिलने से शहरी इलाकों के साथ औद्योगिक क्षेत्रों में भी आग लगने की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
    इन आधुनिक वाहनों को विशेष रूप से बड़ी आग की घटनाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। इनमें हाई प्रेशर पंप वाटर मॉनिटर और फोम सिस्टम जैसी सुविधाएं होंगी। इनकी सहायता से आग पर पानी और फोम की तेज बौछार डालकर उसे नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। बहुमंजिला इमारतों औद्योगिक इकाइयों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर आग लगने की स्थिति में ये वाहन उपयोगी साबित हो सकते हैं।
    योजना के तहत ग्वालियर भोपाल इंदौर जबलपुर उज्जैन देवास मुरैना सतना सागर रतलाम रीवा कटनी सिंगरौली छिंदवाड़ा बुरहानपुर और खंडवा नगर निगमों को आधुनिक वाटर बाउजर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा पीथमपुर मंडीदीप बानमोर मालनपुर और मेघनगर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के चलते आग से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधनों की जरूरत रहती है।
    इन वाटर बाउजर की क्षमता 12 हजार लीटर होगी और इनका कुल भार करीब 28 टन रहने का उल्लेख किया गया है। वाहनों में 304 ग्रेड स्टेनलेस स्टील से बने टैंक लगाए जाएंगे। टैंक के भीतर 10 कंपार्टमेंट और बाफल प्लेट्स होंगी जो वाहन चलते समय पानी के बहाव को नियंत्रित करने में मदद करेंगी। इससे वाहन का संतुलन बनाए रखने और संचालन को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
    वाहनों में हाई प्रेशर सेंट्रीफ्यूगल पंप लगाए जाएंगे। सामान्य दबाव पर ये पंप प्रति मिनट 3000 लीटर पानी उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे जबकि हाई प्रेशर मोड में इनकी क्षमता 250 लीटर प्रति मिनट होगी। सामान्य मोड में दबाव 10 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर और हाई प्रेशर मोड में 40 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है। अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर आग बुझाने की कार्रवाई की जा सकेगी।
    आधुनिक वाटर बाउजर में जीपीएस मोबाइल डेटा टर्मिनल लाइट मास्ट और ऑटोमैटिक प्राइमिंग सिस्टम जैसी तकनीकी सुविधाएं भी दी जाएंगी। जीपीएस से वाहन की लोकेशन जानने में मदद मिलेगी जबकि लाइट मास्ट रात के समय या कम रोशनी वाले स्थानों पर बचाव कार्यों को आसान बना सकता है। वाटर मॉनिटर के जरिए आग की ओर पानी की तेज बौछार छोड़ी जा सकेगी।
    योजना में केवल वाहन खरीदने पर ही जोर नहीं दिया गया है बल्कि कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की व्यवस्था भी रखी गई है। अनुबंध होने के 10 महीने के भीतर वाहनों की आपूर्ति पूरी करने का लक्ष्य है। इसके बाद 12वें महीने तक संबंधित नगरीय निकायों के अग्निशमन कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक संबंधित फायर स्टेशन पर कम से कम दो प्रायोगिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें वाहन चलाने उपकरणों के इस्तेमाल रखरखाव और आपातकालीन परिस्थितियों में कार्रवाई करने की जानकारी दी जाएगी।
    बड़े वाटर बाउजर के साथ प्रदेश के 90 नगरीय निकायों के लिए 111 मिनी वाटर टेंडर खरीदने की प्रक्रिया भी चल रही है। इनकी क्षमता 550 लीटर होगी जिसमें 500 लीटर पानी और 50 लीटर फोम शामिल रहेगा। छोटे आकार के ये वाहन संकरी गलियों घनी बस्तियों और ऐसे स्थानों पर पहुंचने में मदद करेंगे जहां बड़े फायर ब्रिगेड वाहनों को ले जाना मुश्किल होता है।
    ग्वालियर इंदौर भोपाल जबलपुर और उज्जैन नगर निगमों को तीन-तीन मिनी वाटर टेंडर देने की योजना है। अन्य नगर निगमों को दो-दो वाहन मिलेंगे जबकि शेष नगरीय निकायों के लिए भी वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। बड़े वाटर बाउजर और छोटे मिनी टेंडर की खरीद से प्रदेश में अग्निशमन संसाधनों का विस्तार करने की तैयारी है। हालांकि इन व्यवस्थाओं का वास्तविक लाभ वाहनों की समय पर आपूर्ति कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जरूरत के समय त्वरित तैनाती पर निर्भर करेगा।
  • अस्पतालों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की नजर, 5 जनहित याचिकाओं पर सरकार से मांगा ताजा स्टेटस रिपोर्ट

    अस्पतालों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की नजर, 5 जनहित याचिकाओं पर सरकार से मांगा ताजा स्टेटस रिपोर्ट


    जबलपुर  । मध्य प्रदेश में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर दायर पांच जनहित याचिकाओं पर जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से ताजा स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सोमवार को मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मौजूदा स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट पेश करने के लिए चार दिन का समय मांगा गया जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। इस दौरान सरकार की ओर से दी जाने वाली ताजा रिपोर्ट में अब तक की कार्रवाई और मौजूदा स्थिति का ब्यौरा सामने आने की उम्मीद है।

    लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिकाओं में प्रदेश में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरटीआई के जरिए मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया है कि जबलपुर शहर में करीब 160 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इनमें से 63 संस्थानों का पंजीयन वर्ष 2019 से 2021 के बीच किए जाने की जानकारी सामने आई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन पंजीयन प्रक्रियाओं में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं इसकी जांच जरूरी है।

    जनहित याचिकाओं में जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में निजी अस्पतालों के पंजीयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि नए अस्पतालों और नर्सिंग होम का भौतिक सत्यापन किए बिना केवल ऑनलाइन आवेदन और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन जारी किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं बताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं के पंजीयन से पहले जरूरी मानकों की जांच होना महत्वपूर्ण है।

    मामले में फायर सेफ्टी की अनुमति भी प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि यदि किसी निजी अस्पताल के पास जरूरी अग्नि सुरक्षा मंजूरी उपलब्ध नहीं है तो उसे पंजीयन किस आधार पर दिया गया। इसी तरह नगर निगम से मिलने वाली आवश्यक अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जनहित याचिकाओं में अस्पतालों के पंजीयन की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने और संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने अदालत को बताया कि सरकार पहले अपनी रिपोर्ट पेश कर चुकी है। हालांकि मामले की वर्तमान स्थिति बताने वाली ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार दिन का समय मांगा गया। हाईकोर्ट ने सरकार को समय देते हुए यह भी निर्देश दिया कि नई रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराई जाएं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा और अमिताभ गुप्ता ने पक्ष रखा। अब 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में हाईकोर्ट के सामने सरकार की ताजा स्टेटस रिपोर्ट होगी। इसके आधार पर अदालत निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन को लेकर लगाए गए आरोपों तथा सरकार की ओर से की गई कार्रवाई पर आगे विचार करेगी। मामले की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि पंजीयन प्रक्रिया को लेकर सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और आगे किन स्तरों पर कार्रवाई की जानी है।

  • छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं देवास में फायर सेफ्टी खामियों पर कोचिंग क्लास सील नगर निगम का अभियान तेज

    छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं देवास में फायर सेफ्टी खामियों पर कोचिंग क्लास सील नगर निगम का अभियान तेज


    देवास । देवास में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने कोचिंग संस्थानों की जांच का विशेष अभियान शुरू किया है। अभियान के दौरान रामनगर चौराहे के पास स्थित डीसी कोचिंग क्लासेस में गंभीर सुरक्षा खामियां मिलने पर नगर निगम ने संस्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। कार्रवाई के बाद शहर के अन्य कोचिंग संस्थानों में भी हड़कंप की स्थिति बन गई है।

    नगर निगम की टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि भवन में आपातकालीन निकास के लिए बनाई गई सीढ़ियां और रैंप बेहद खराब स्थिति में थे। ऐसी स्थिति में किसी भी आपातकाल के दौरान छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने में गंभीर खतरा हो सकता था। इसके अलावा कक्षाओं में भी कई आवश्यक सुरक्षा और मूलभूत व्यवस्थाओं का अभाव पाया गया।

    निरीक्षण में सबसे बड़ी लापरवाही फायर सेफ्टी को लेकर सामने आई। संस्थान में आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो पर्याप्त अग्निशमन उपकरण उपलब्ध थे और न ही सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए गए थे। नगर निगम अधिकारियों ने इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए कोचिंग संस्थान को सील करने की कार्रवाई की।

    कार्रवाई के दौरान नगर निगम के अधिकारी जितेंद्र सिसौदिया सहित निगम की टीम मौके पर मौजूद रही। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा नियमों का पालन सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    डीसी कोचिंग क्लासेस के अलावा नगर निगम की टीम ने शहर के अन्य कोचिंग संस्थानों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान संचालकों को भवन सुरक्षा फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास सहित सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन संस्थानों में खामियां पाई जाएंगी उनके खिलाफ भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    नगर निगम ने कहा कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने सभी कोचिंग संचालकों से अपील की है कि वे निर्धारित सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दें और समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर लें ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

  • अलीगंज अग्निकांड में बड़ा एक्शन, LDA के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों से होगी पूछताछ

    अलीगंज अग्निकांड में बड़ा एक्शन, LDA के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों से होगी पूछताछ


    लखनऊ। अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के 100 से अधिक वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है। वर्ष 2014 से 2026 तक इस भवन से जुड़े अधिकारियों का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है और सूची तैयार कर एसआईटी को सौंपी जाएगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

    22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित चार मंजिला कोचिंग कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे के बाद एलडीए ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, जिसने अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को सौंप दी है।

    रिपोर्ट में सामने आईं कई गंभीर खामियां
    जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार भवन में निर्धारित मानकों से अधिक निर्माण किया गया था। इसके अलावा आने-जाने का रास्ता बेहद संकरा था, जबकि आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी और बचाव के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं थे। प्रारंभिक जांच में इन्हीं कमियों को हादसे की प्रमुख वजह माना गया है।

    अब एसआईटी यह जांच करेगी कि भवन निर्माण की स्वीकृति, निरीक्षण और मानकों के पालन में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही और कहीं प्रशासनिक लापरवाही तो नहीं हुई।

    हादसे का घटनाक्रम
    22 जून को दोपहर करीब 2:15 बजे अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित चार मंजिला इमारत में आग लग गई। स्थानीय लोगों ने शुरुआती स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैलने लगी। दोपहर 2:30 बजे फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। करीब 3:10 बजे पहली दमकल मौके पर पहुंची और आग की गंभीरता को देखते हुए कुल 13 दमकल गाड़ियों को बुलाया गया। कई घंटे की मशक्कत के बाद शाम लगभग 6:30 बजे आग पर काबू पाया गया। इस दर्दनाक हादसे में 15 युवाओं की मौत हो गई।

    कोचिंग संस्थानों पर भी कार्रवाई
    हादसे के बाद प्रशासन ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। जांच के दौरान भवन और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पाए जाने पर फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले अन्य संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रहेगी।

    अब सभी की नजर एसआईटी जांच पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

  • उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने फायर सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए मेडिकल कॉलेज के मरम्मत कार्य जल्द पूर्ण करने के दिए निर्देश

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने फायर सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए मेडिकल कॉलेज के मरम्मत कार्य जल्द पूर्ण करने के दिए निर्देश


    भोपाल । उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक कर विभागीय योजनाओं, निर्माण कार्यों और मानव संसाधन से जुड़ी प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कार्यों में समयबद्धता और गुणवत्ता दोनों का ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। इसी कड़ी में उन्होंने श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा में फायर सेफ्टी से संबंधित लंबित मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही कॉलेज में आवश्यक नवीन कार्यों की स्वीकृति के लिए सभी औपचारिकताएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा, ताकि कोई भी सुरक्षा संबंधी चूक न रहे और कॉलेज में सेवाओं का सुचारू संचालन हो सके।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में फायर सेफ्टी एक संवेदनशील विषय है और इसे किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने निर्देश दिए कि फायर सेफ्टी से जुड़े सभी मुद्दों की सूची तैयार कर, मरम्मत और नवीनीकरण कार्य जल्द से जल्द शुरू किए जाएं। साथ ही, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और कार्य की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

    इसके अलावा उन्होंने 16 जिला चिकित्सालयों और क्रिटिकल केयर हेल्थ ब्लॉकों के लिए आवश्यक पदों की स्वीकृति संबंधी प्रस्ताव को प्राथमिकता से तैयार करने और समस्त औपचारिकताएं पूर्ण कर कैबिनेट अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस संबंध में उन्होंने कहा कि मानव संसाधन की कमी से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए समय रहते पदों की स्वीकृति और भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों में फर्नीचर और अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के साथ-साथ उपकरणों और संसाधनों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है, ताकि कॉलेजों का संचालन शुरू होते ही मरीजों और छात्रों को सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए और कहा कि किसी भी तरह की देरी स्वास्थ्य सेवा के विस्तार में बाधा बन सकती है।

    बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री धनराजु एस सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि सभी योजनाओं और निर्माण कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा होती रहे और समय-समय पर आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि विभागीय लक्ष्य समय पर हासिल हो सकें।