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  • भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी

    भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    मौसम के बदलते मिजाज (Changing Weather patterns) और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने इस साल चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ‘अल नीनो’ (Super El Nino) का वह खतरनाक रूप है, जो इस साल पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित कर रहा है। प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का पानी जब असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो उस मौसमी घटना को ‘अल नीनो’ कहते हैं। इसका असर भारत (India) पर अभी से देखने को मिल रहा है।

    हालांकि दक्षिणी राज्य केरल के लिए अच्छी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए अगले 5 दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम में हो रहे अचानक बदलाव को देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


    इन जिलों में जारी हुआ ‘येलो अलर्ट’

    IMD के 5-दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अप्रैल, 2026 के लिए केरल के चार प्रमुख जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है:- पथानामथिट्टा, इडुक्की, कुन्नूर, कासरगोड।

    मौसम विभाग के अनुसार, ‘येलो अलर्ट’ का अर्थ है कि लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में 24 घंटों के भीतर 64.5 मिमी से 115.5 मिमी के बीच भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।


    ‘सुपर अल नीनो’ क्या है?

    जब समुद्र की सतह का तापमान अपने दीर्घकालिक औसत से 2°C (या उससे अधिक) ऊपर चला जाता है, तो यह एक असाधारण और विनाशकारी रूप ले लेता है, जिसे वैज्ञानिक ‘सुपर अल नीनो’ कहते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और कई ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स ने चेतावनी दी है कि 2026 में मई-जुलाई तक यह स्थिति हावी हो सकती है। कुछ विशेषज्ञ इसे पिछले 140 सालों के सबसे ताकतवर चक्रों में से एक मान रहे हैं। इसका सीधा असर वैश्विक तापमान में वृद्धि और मौसम के चरम रूप के तौर पर सामने आता है।

    मॉनसून और अल नीनो (El Nino) से इसका संबंध

    गर्मियों के मौसम में अचानक होने वाली यह भारी बारिश जलवायु परिवर्तन और विशेष रूप से अल नीनो प्रभाव का परिणाम है, जिसका सीधा असर भारत के मॉनसून चक्र पर पड़ता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है।

    प्री-मॉनसून गतिविधियां: अल नीनो में प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। भले ही अल नीनो आमतौर पर भारत में मुख्य ‘दक्षिण-पश्चिम मॉनसून’ (जून से सितंबर) को कमजोर कर देता है, लेकिन मॉनसून से ठीक पहले (प्री-मॉनसून) के चरण में यह बहुत ही अस्थिर मौसम उत्पन्न कर सकता है।

    ला नीना से अल नीनो का संक्रमण: साल 2026 की शुरुआत में ‘ला नीना’ का प्रभाव कमजोर हुआ है और यह ‘अल नीनो’ की तरफ बढ़ रहा है। समुद्र के बढ़ते तापमान और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव के इस जटिल टकराव के कारण ही केरल में एकाएक बेमौसम भारी बारिश और तूफान देखने को मिल रहे हैं।

    मॉनसून के मौसम पर ‘छाया’: यह अप्रत्याशित बारिश इस बात का संकेत है कि इस साल मुख्य मॉनसून चक्र में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। मॉनसून की शुरुआत से पहले ही कहीं अचानक तीव्र बारिश तो कहीं लू (हीटवेव) चलने जैसी स्थितियां बन रही हैं।


    भारत में अभी से इतनी ‘आग’ क्यों बरस रही है?

    अप्रैल 2026 में ही उत्तर प्रदेश (बांदा, फतेहपुर, इटावा जैसे जिले), मध्य प्रदेश और कई अन्य हिस्सों में तापमान 45-46°C को पार कर गया है। इसके पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण एक साथ काम कर रहे हैं। साल की शुरुआत में ला नीना (ठंडा चरण) खत्म हो गया है और पृथ्वी तेजी से ‘अल नीनो’ के गर्म चरण में जा रही है। इससे वायुमंडल में गर्माहट काफी तेजी से बढ़ रही है।

    उत्तर और मध्य भारत के ऊपर बादलों का कोई कवर नहीं है। साफ आसमान के कारण सूरज की किरणें बिना किसी रुकावट के सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे हवा का एक ‘गर्म गुंबद’ बन गया है जो गर्मी को बाहर नहीं निकलने दे रहा। उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों की मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी है। हवा में नमी न के बराबर है और वहां से आने वाली सूखी महाद्वीपीय हवाएं तापमान को सीधे बढ़ा रही हैं, जिससे शहरों का माहौल किसी भट्टी जैसा हो गया है।


    इस साल कैसा रहेगा मॉनसून और कब होगी बारिश?

    भारत में कृषि और अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले मॉनसून पर इस साल ‘अल नीनो’ की स्पष्ट छाया मंडरा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने लंबी अवधि के पूर्वानुमान में यह तस्वीर साफ कर दी है। IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून से सितंबर) के “सामान्य से नीचे” रहने की संभावना सबसे अधिक है। देश भर में इस बार औसतन मात्र 92% बारिश (LPA का) होने का अनुमान है।

    कब आएगा मॉनसून?

    आमतौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट से टकराता है। हालांकि मानसून अपने समय पर दस्तक दे सकता है, लेकिन जुलाई-अगस्त तक अल नीनो पूरी तरह हावी हो जाएगा। इससे मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और बारिश के वितरण में भारी असमानता देखने को मिल सकती है। बारिश कम होने और तापमान अधिक रहने से धान, दलहन और गन्ने जैसी खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जो एक बड़ी आर्थिक चिंता का विषय है।

  • Telangana: हैदराबाद से चेन्नई जा रही चारमीनार एक्सप्रेस में लगी आग

    Telangana: हैदराबाद से चेन्नई जा रही चारमीनार एक्सप्रेस में लगी आग


    हैदराबाद।
    तेलंगाना (Telangana) के यादद्री भुवनगिरी ज़िले (Yadadri Bhuvanagiri district) में स्थित अलेर रेलवे स्टेशन के पास चारमीनार एक्सप्रेस (Charminar Express) में आग लग गई. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना ट्रेन के S5 कोच में हुई, जहां अचानक धुआं उठता देखा गया और कुछ ही देर में आग की लपटें दिखाई देने लगीं।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रेन जैसे ही अलेर स्टेशन के नज़दीक पहुंची, यात्रियों ने कोच के अंदर धुआं देखा. स्थिति को भांपते हुए यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग तत्काल कोच से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे. बताया जा रहा है कि ट्रेन को तुरंत रोका गया, जिससे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकलने का मौका मिला. शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि अभी इस घटना पर रेलवे की तरफ से कोई बयान नहीं जारी किया गया है।

    आग कैसे लगी, जांच के बाद ही होगा साफ
    घटना की सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारी और स्थानीय राहत दल मौके पर पहुंचे. आग पर काबू पाने के प्रयास किए गए और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश जारी है. कुछ सूत्रों का कहना है कि आग संभवतः शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी के कारण लगी हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    ट्रेन में आग की घटना के कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं. जिनमें कोच से धुआं और आग निकलती दिखाई दे रही है. वहीं ट्रेन में यात्रा कर रहे एक अन्य यात्री ने बताया कि ट्रेन में अचानक आग लग गई. जिससे कोच धुएं से भर गया. घबराए यात्रियों ने चेन खींच दी और ट्रेन रुक गई. हालांकि, ट्रेन रुकने से पहले ही कई यात्री कूद गए थे।

  • ऑस्ट्रेलिया में तेल रिफाइनरी हादसा सरकार बोली सप्लाई पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर

    ऑस्ट्रेलिया में तेल रिफाइनरी हादसा सरकार बोली सप्लाई पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया में तेल रिफाइनरी में लगी आग के बाद ईंधन आपूर्ति को लेकर उठी चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस घटना का देश की फ्यूल सप्लाई पर बहुत कम असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि रिफाइनरी में लगी आग गंभीर जरूर थी, लेकिन उत्पादन काफी हद तक सामान्य बना हुआ है।

    प्रधानमंत्री अल्बानीज अपने ब्रुनेई और मलेशिया के आधिकारिक दौरे को बीच में छोड़कर वापस लौटे और Viva Energy की रिफाइनरी का निरीक्षण किया। यह रिफाइनरी जिलॉन्ग शहर के पास स्थित है, जो मेलबर्न से करीब 65 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है।

    बताया गया कि बुधवार रात उपकरण में खराबी के कारण रिफाइनरी में आग लग गई थी, जिसे गुरुवार दोपहर तक काबू में कर लिया गया। घटना के समय को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि उसी समय मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पहले से प्रभावित है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की स्थिति नियंत्रण में है।

    रिफाइनरी के दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में अल्बानीज ने बताया कि डीजल और एविएशन फ्यूल का लगभग 80 प्रतिशत उत्पादन जारी है। वहीं पेट्रोल उत्पादन, जो देश की कुल सप्लाई का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा देता है, फिलहाल 60 प्रतिशत क्षमता पर चल रहा है और आने वाले दिनों में इसके बढ़ने की उम्मीद है।

    सरकार ने भरोसा दिलाया है कि ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही शनिवार को फ्यूल स्टॉकपाइल के स्तर को लेकर नियमित साप्ताहिक अपडेट भी जारी किया जाएगा, जिससे स्थिति पर नजर रखी जा सके।

    गौरतलब है कि यह रिफाइनरी ऑस्ट्रेलिया की केवल दो सक्रिय रिफाइनरियों में से एक है, इसलिए इस तरह की घटना का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि शुरुआती आशंकाओं के विपरीत, उत्पादन पर सीमित असर की खबर ने राहत दी है। फायर और रेस्क्यू अधिकारियों के अनुसार, आग लगने की वजह तकनीकी खराबी थी और घटना की जांच जारी है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।

  • MP: सागर में डॉक्टर ने खुद ही कार में आग लगाकर की थी पत्नी की हत्या…सहयोगी के साथ गिरफ्तार

    MP: सागर में डॉक्टर ने खुद ही कार में आग लगाकर की थी पत्नी की हत्या…सहयोगी के साथ गिरफ्तार


    सागर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) में पत्नी की हत्या कर उसे सड़क दुर्घटना का रूप देने की साजिश का पुलिस ने खुलासा करते हुए आरोपी पति और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार सानौधा थाना क्षेत्र (Sanodha Police Station area) के चनाटौरिया टोल टैक्स प्लाजा (Chanatoriya Toll Tax Plaza) के पास कार में आग लगने की घटना को पहले हादसा बताया गया था, लेकिन जांच के दौरान यह मामला हत्या का निकला। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गढ़ाकोटा निवासी आरोपी BAMS डॉक्टर अपनी पत्नी को कार में लेकर मौके पर पहुंचा था और घटना से पहले मायके पक्ष को फोन कर पत्नी को हार्ट अटैक आने की बात कही थी। बाद में कार में आग लगने को दुर्घटना बताया था। जली हुई कार से उसकी पत्नी का कंकाल मिला था।

    जांच में सामने आया कि आरोपी के किसी अन्य महिला से संबंध थे, जिसके चलते पति-पत्नी के बीच विवाद होता था। इसी प्रेम-प्रसंग के चलते डॉक्टर ने घर पर ही पत्नी का गला घोंटकर हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए। इसके बाद उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश रची और घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की।

    यूं खुली डॉक्टर के झूठ की पोल
    जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल पर माचिस की तीली और ज्वलनशील पदार्थ मिले थे, जबकि आरोपी डॉक्टर कार में CNG ब्लास्ट होने का दावा कर रहा था। हालांकि जांच में यह बात पूरी तरह झूठी निकली। क्योंकि जांच में पता चला कि CNG के टैंक में गैस थी ही नहीं और डॉक्टर पिछले दो दिनों से पेट्रोल का उपयोग कर रहा था। आरोपी द्वारा सीसीटीवी फुटेज डिलीट करना और बार-बार बयान बदलने की वजह से भी वह पुलिस जांच के घेरे में आ गया।

    आरोपी डॉक्टर और दो सहयोगी गिरफ्तार
    पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी डॉक्टर नीलेश कुर्मी सहित उसके सहयोगी रामकृष्ण कुर्मी और शुभम कुर्मी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी डॉक्टर ने इस अपराध में शामिल होने के लिए सहयोगियों को दो-दो लाख रुपए का लालच दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

  • लंदन में यहूदी प्रार्थना स्थल के बाहर एम्बुलेंस में आग, पुलिस ने माना घृणा अपराध

    लंदन में यहूदी प्रार्थना स्थल के बाहर एम्बुलेंस में आग, पुलिस ने माना घृणा अपराध

    लंदन। लंदन में यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर कथित तौर पर बड़ा हमला हुआ है। उत्तरी लंदन के इलाके गोल्डर्स ग्रीन में एक यहूदी प्रार्थना स्थल के बाहर खड़ी कई एम्बुलेंस में आग लगा दी गई। घटना के बाद रात के आसमान में लपटें और काला धुआं दिखाई दिया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।

    लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया कि अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और मामले को यहूदी-विरोधी घृणा अपराध के तौर पर जांचा जा रहा है। एहतियातन आसपास के कुछ निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

    चार एम्बुलेंस जलकर खाक
    जानकारी के मुताबिक यह एम्बुलेंस यहूदी स्वयंसेवी बचाव समूह Hatzola North West से जुड़ी थीं। संगठन के अध्यक्ष Shloimy Richman ने बताया कि छह में से चार एम्बुलेंस पूरी तरह नष्ट हो गईं। उन्होंने इसे जानबूझकर की गई आगजनी बताते हुए कहा कि यह यहूदी समुदाय पर सीधा हमला है।

    सीसीटीवी में दिखे नकाबपोश संदिग्ध
    सुरक्षा फुटेज में तीन नकाबपोश व्यक्ति एक एम्बुलेंस के पास जाते और उसमें आग लगाते दिखाई दिए।

    वीडियो में तड़के करीब 1:36 बजे का समय दर्ज है और स्थान Machzikei Hadath के पास बताया गया है, जो पास के आराधनालय से मेल खाता है। पुलिस ने कहा है कि तीन संदिग्धों की तलाश जारी है, हालांकि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

    धमाकों से जागे लोग
    स्थानीय निवासी Charlie Richards ने बताया कि उन्होंने देर रात कई धमाकों की आवाज सुनी। उनके द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में एक बड़ा नारंगी विस्फोट और आसमान में उठता घना धुआं दिखाई दे रहा है।

    घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस संभावित घृणा अपराध के एंगल से जांच कर रही है। समुदाय के लोग इस हमले से सदमे में हैं और जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला: तेल स्टोरेज टैंकों में लगी आग, सुल्तान ने ईरानी राष्ट्रपति से जताई नाराजगी, मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ा

    ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला: तेल स्टोरेज टैंकों में लगी आग, सुल्तान ने ईरानी राष्ट्रपति से जताई नाराजगी, मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ा

     
     
     
    नई दिल्ली। ओमान के दक्षिणी शहर सलालाह के पोर्ट पर तेल स्टोरेज टैंकों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले की सूचना मिली है। ओमानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद पोर्ट के फ्यूल स्टोरेज टैंकों में आग भड़क गई, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे ने पुष्टि की कि पोर्ट पर मौजूद किसी व्यापारी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा।
    घटना के बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को फोन कर इस हमले पर अपनी गहरी नाराजगी जताई। सुल्तान ने कहा कि ओमान मौजूदा संघर्ष में तटस्थ है और अपनी सुरक्षा व क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
    तुर्किये के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोआन ने मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि ईरान में जारी युद्ध को तुरंत रोकना होगा, वरना पूरा क्षेत्र आग की चपेट में आ सकता है। एर्दोआन ने कहा कि कूटनीति के माध्यम से ही इस संकट का समाधान संभव है और तुर्किये अभी भी दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।
    इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बताया कि अमेरिका के सहयोग से चल रहा अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, और इस ऑपरेशन की कोई निश्चित समयसीमा नहीं है।
    इस बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति पर असर को देखते हुए घोषणा की कि उसके 32 सदस्य देश आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में उतारेंगे। IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने बताया कि यह एजेंसी के इतिहास में सबसे बड़ा तेल रिलीज होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम युद्ध के कारण तेल आपूर्ति में आई बाधा को दूर करने के लिए उठाया गया है।
    28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर से केवल 10% तक ही पहुंच पाया है। IEA ने कहा कि आपातकालीन भंडार से तेल सदस्य देशों की परिस्थितियों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाएगा।
    1974 में स्थापित IEA के इतिहास में यह छठी बार है जब सदस्य देश मिलकर रणनीतिक भंडार से तेल जारी कर रहे हैं। इससे पहले 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 के हरिकेन कैटरीना, 2011 के लीबिया युद्ध और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऐसा कदम उठाया गया था। IEA के 32 सदस्य देशों में अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। भारत इस एजेंसी का सदस्य नहीं है, लेकिन 2017 से यह IEA का एसोसिएट देश है।
    ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला, सुल्तान की नाराजगी, मध्यस्थता के प्रयास और 32 देशों द्वारा 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारने की योजना के बीच, मिडिल-ईस्ट में तनाव और ऊर्जा संकट गहराता दिखाई दे रहा है।

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  • जबलपुर मेडिकल कॉलेज में बायोमेडिकल कचरे में भीषण आग, डीन ने लापरवाही की जांच के निर्देश दिए

    जबलपुर मेडिकल कॉलेज में बायोमेडिकल कचरे में भीषण आग, डीन ने लापरवाही की जांच के निर्देश दिए


    नई दिल्ली। जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के बाहर सोमवार रात को बायोमेडिकल कचरे के ढेर में अचानक आग लग गई। अस्पताल के पिछले हिस्से में सड़क किनारे जमा कचरे से उठी लपटें देखते ही देखते फैल गईं, जिससे परिसर में हड़कंप मच गया। सूचना पाते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

    सौभाग्य रहा कि आग और धुआं अस्पताल की मुख्य इमारतों तक नहीं पहुँचा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगते समय शीशियों के टूटने और पटाखों जैसी आवाजों से अंदाजा लगाया जा रहा था कि सामान्य कचरे के साथ बायोमेडिकल वेस्ट भी वहां मिला हुआ था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेडिकल वेस्ट को अलग रंग के बैग (पीला, लाल, सफेद, नीला) में संग्रहित करना और अधिकृत एजेंसी के माध्यम से ही नष्ट करना जरूरी है। खुले में पड़ा संक्रमित कचरा संक्रमण फैलाने का बड़ा खतरा बन सकता है, खासकर अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में जहां रोजाना हजारों मरीज और परिजन आते हैं।

    डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने आग को गंभीर मामले के रूप में लिया और सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों की लापरवाही से कचरा खुले में पड़ा रहा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मेडिकल अधीक्षक को कहा गया कि भविष्य में बायोमेडिकल कचरे का निपटान नियमों के अनुसार ही सुनिश्चित किया जाए।

    आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, आग लगने के समय किसी मरीज या कर्मचारी को चोट नहीं आई। डीन ने मामले की पूरी जांच के निर्देश देते हुए बताया कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इस घटना ने प्रशासन और अस्पताल अधिकारियों की सतर्कता की चुनौती सामने ला दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया होता, तो यह न केवल संपत्ति के नुकसान बल्कि स्वास्थ्य जोखिम के लिए भी गंभीर साबित हो सकता था।

    मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कहा कि भविष्य में सभी बायोमेडिकल कचरे का समय पर निपटान और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी और नियमित ऑडिट की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

  • Bhopal: होटल में चल रहा था शादी समारोह.. अचानक भड़की आग, मची अफरा-तफरी

    Bhopal: होटल में चल रहा था शादी समारोह.. अचानक भड़की आग, मची अफरा-तफरी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के एक होटल (Hotel) में सोमवार रात को भीषण आग लग गई। बताया जाता है कि जिस समय यह घटना हुई उस वक्त शादी समारोह (Wedding Ceremony) चल रहा था। आग लगने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं और राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

    राजधानी भोपाल में शादी समारोह में लगी आग इतनी भयानक थी कि लपटें कई मीटर ऊंची उठती रहीं. शादी खजूरी थाना क्षेत्र के भौंरी स्थित एक होटल में हो रही थी. उस दौरान शादी समारोह में लगभग 170-200 लोग मौजूद थे और आग लगते ही लोग इधर-उधर भागने लगे. आग और भगदड़ के बीच शादी समारोह में रखे एक गैस सिलेंडर में ब्लास्ट (Cylinder Blast) हो गया. इससे और ज्यादा अफरा-तफरी मच गई. लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे. सूचना मिलने के बाद दमकल (Fire Department) और पुलिस (Bhopal Police) भी पहुंच गई. आग के दौरान होटल में कई लोग भी फंस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए जेसीबी मशीन बुलानी पड़ी. इससे दीवार तुड़वाकर रास्ता बनाया और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला.


    तीन फायर स्टेशनों से पहुंची गाड़ियां

    गांधीनगर, बैरागढ़ और फतेहगढ़ फायर स्टेशन से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया. लोगों का कहना है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी और देखते ही देखते लपटें करीब 50 फीट तक ऊपर उठने लगीं . हालांकि, आग लगने की स्पष्ट वजह नहीं पता चली है. पुलिस इसकी जांच कर रही है. करीब आधी रात तक मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया और रात में ही आग पूरी तरह बुझा दी गई. राहत की बात यह रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया।

    बता दें कि भोपाल में एक दिन पहले भी आग लगने की घटना हुई थी। भोपाल के इंटर स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) के सामने स्थित मेहता इंडस्ट्री के गोदाम में रविवार दोपहर पौने चार बजे आग लग गई थी। फैक्ट्री के पिछले हिस्से में बने गोदाम में रखे लकड़ी और प्लाईवुड के सामान ने आग पकड़ ली जिससे लपटें उठने लगीं। भोपाल में कल हुई आग की घटना की खबर मिलते ही नगर निगम की 12 दमकलें वहां पहुंच गईं और दो घंटे की मेहनत के बाद आग को बुझा दिया गया। फायर ब्रिगेड ने गोदाम के पीछे की टिन की दीवार काटकर पानी और झाग का छिड़काव किया। इस आग में गोदाम पूरी तरह जलकर राख हो गया है लेकिन अच्छी बात यह है कि किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई है।

    आग लगने के समय फैक्ट्री के पास वाली झुग्गी बस्ती के लोग घरों का सामान बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर चले गए। आग लगने का कारण अभी पता नहीं चल पाया है। फैक्ट्री मालिक अरुण जैन ने भी मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों से बात की। दमकल और पुलिस कर्मियों की सावधानी से बड़ी दुर्घटना टल गई। हालांकि गोदाम में रखा सामान पूरी तरह जल गया।

  • दिल्ली मेट्रो स्टाफ क्वार्टर में लगी भीषण आगपति-पत्नी और बेटी की जलकर मौत

    दिल्ली मेट्रो स्टाफ क्वार्टर में लगी भीषण आगपति-पत्नी और बेटी की जलकर मौत


    नई दिल्ली । दिल्ली के बाहरी इलाके के आदर्श नगर में स्थित दिल्ली मेट्रो के स्टाफ क्वार्टर में एक भयंकर आग लगने से एक ही परिवार के तीन सदस्य जलकर मर गए। यह दर्दनाक घटना बीती रात 2:39 बजे हुईजब दमकल विभाग को सूचना मिली कि डीएमआरसी के स्टाफ क्वार्टर में आग लग गई है। तुरंत बाद दमकल की छह गाड़ियाँ मौके पर भेजी गईंलेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दमकल विभाग के अनुसारआग पांचवीं मंजिल पर लगी थी। जब उनकी टीम ने आग बुझाई और अंदर प्रवेश कियातो उन्होंने तीन जले हुए शव पाए।
    मृतकों की पहचान 42 वर्षीय अजय38 वर्षीय नीलम और उनकी 10 वर्षीय बेटी जान्हवी के रूप में हुई है। परिवार के अन्य सदस्य या कोई अन्य व्यक्ति मौके पर नहीं थाऔर यह तीनों एक कमरे में सो रहे थे जब यह दुर्घटना हुई।दमकल विभाग ने आग के कारणों के बारे में जानकारी दी है कि यह घरेलू सामान में आग लगने की सूचना थीलेकिन आग के स्रोत और कारण की पूरी जांच अभी की जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी हैऔर फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी है ताकि आग लगने के कारणों का पता लगाया जा सके।

    इस दुखद घटना ने न केवल उस परिवार को नुकसान पहुँचायाबल्कि समूचे इलाके को भी झकझोर दिया है। लोग इस घटना के कारणों और सुरक्षा के मानकों पर सवाल उठा रहे हैं।यह घटना मेट्रो स्टाफ क्वार्टर में सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन की आवश्यकता को भी उजागर करती है।दमकल विभाग और पुलिस के अधिकारी घटनास्थल पर लगातार जांच कर रहे हैं।

    वे यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह आग कोई शॉर्ट सर्किट या किसी और तकनीकी कारण से लगी थीया फिर यह कोई और कारण हो सकता है।फिलहालहादसे के बाद आसपास के लोगों और स्थानीय प्रशासन में भी चिंता का माहौल है। इस हादसे ने यह भी दिखाया कि दिल्ली जैसे बड़े शहरों में आग जैसी घटनाओं से बचने के लिए और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत हैविशेष रूप से ऐसी इमारतों में जहां परिवार रहते हैं।

  • भोपाल के संजय नगर में बिजली डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट में लगी भीषण आग राहत की बात – कोई जनहानि नहीं

    भोपाल के संजय नगर में बिजली डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट में लगी भीषण आग राहत की बात – कोई जनहानि नहीं


    भोपाल । भोपाल के शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र स्थित संजय नगर में शुक्रवार रात एक बिजली डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट डीपी में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग की लपटें आसमान तक उठती हुईं और इलाके में घना धुआं फैल गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    घटना का समय और स्थान
    यह घटना शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे के आसपास की है। संजय नगर क्षेत्र में एक बिजली पोल पर लगे डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट डीपी से अचानक चिंगारी निकली जिसके बाद आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग तेज़ी से फैलने लगी और आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए।

    आग फैलने का कारण

    स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में पोल के ऊपर से तेज आवाज के साथ चिंगारी निकली उसके बाद आग की लपटें उठने लगीं। प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की आशंका जताई जा रही है हालांकि बिजली विभाग की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। डीपी में लगी आग से तारों में जलन हुई जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

    दमकल वाहन का न पहुंच पाना

    घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड को बुलाया गया लेकिन संजय नगर की संकरी गलियों के कारण दमकल वाहन मौके तक नहीं पहुंच सका। इस बीच बिजली विभाग ने आग के फैलने की संभावना को देखते हुए क्षेत्र की बिजली आपूर्ति तुरंत बंद कर दी जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

    स्थानीय लोगों की सतर्कता

    आग की लपटें तेज हो गईं तो स्थानीय लोगों ने बाल्टियों और अन्य संसाधनों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने आग बुझा दी। अगर यह प्रयास समय पर न किया जाता तो आग पास के घरों तक फैल सकती थी।

    प्रशासन और बिजली विभाग की प्रतिक्रिया
    घटना की जानकारी मिलने के बाद बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और जली हुई डीपी का निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि डीपी को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इलाके में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बिजली आपूर्ति बहाल करने की कोशिश की जा रही है। बिजली विभाग ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए इलाके में लगे पुराने उपकरणों की जांच की जाएगी। स्थानीय निवासियों ने भी यह मांग की है कि जर्जर बिजली ढांचे की समय रहते मरम्मत की जाए ताकि ऐसी घटनाएं फिर से न हों।