Tag: Fireworks

  • ग्रीन पटाखों में बैरियम नाइट्रेट पर बढ़ा विवाद, केंद्र की दो एजेंसियों के मतभेद पर सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

    ग्रीन पटाखों में बैरियम नाइट्रेट पर बढ़ा विवाद, केंद्र की दो एजेंसियों के मतभेद पर सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

    नई दिल्ली । दिवाली के दौरान कम प्रदूषण वाले विकल्प के रूप में प्रचारित किए गए ग्रीन पटाखों की पर्यावरणीय सुरक्षा पर नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार से जुड़े दो प्रमुख वैज्ञानिक और नियामक संस्थानों के बीच ग्रीन पटाखों में प्रयुक्त बैरियम नाइट्रेट को लेकर मतभेद सामने आने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दोनों पक्षों के अलग-अलग निष्कर्षों को देखते हुए अदालत से इस विषय पर अंतिम निर्णय देने का अनुरोध किया है।

    ग्रीन पटाखों को पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने वाला विकल्प माना गया था। इन्हें विकसित करने का उद्देश्य वायु प्रदूषण और ठोस अपशिष्ट को कम करना था, ताकि त्योहारों के दौरान पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को सीमित किया जा सके। इसी लक्ष्य के तहत वैज्ञानिक संस्थानों ने नए फॉर्मूलेशन तैयार किए थे और उनके आधार पर व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति भी दी गई थी।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ग्रीन पटाखों में प्रयुक्त बैरियम नाइट्रेट पर गंभीर आपत्ति दर्ज की। बोर्ड का मानना है कि बैरियम यौगिक प्रदूषण फैलाने वाले प्रमुख तत्वों में शामिल हैं और पटाखों में इनका उपयोग पर्यावरणीय दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। बोर्ड ने यह भी कहा कि इस विषय पर पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों के अनुरूप बैरियम साल्ट के उपयोग पर स्पष्ट प्रतिबंध की व्याख्या की जानी चाहिए और किसी भी मात्रा में इसका इस्तेमाल अदालत की भावना के विपरीत माना जा सकता है।

    दूसरी ओर, सीएसआईआर-नीरी का कहना है कि उसने केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप ऐसे ग्रीन पटाखों का फॉर्मूलेशन विकसित किया था, जिनसे पारंपरिक पटाखों की तुलना में प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आती है। संस्थान के परीक्षणों के अनुसार इन पटाखों से पीएम10 और पीएम2.5 जैसे सूक्ष्म कणों के उत्सर्जन में 40 से 60 प्रतिशत तक कमी देखी गई। इसी आधार पर कई प्रकार के प्रकाश आधारित ग्रीन पटाखों के उत्पादन की सिफारिश की गई थी।

    इसी वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर उद्योग से जुड़े संगठनों ने संशोधित फॉर्मूलेशन तैयार किए, जिनमें बैरियम नाइट्रेट की मात्रा कम रखते हुए अन्य ऑक्सीडाइजर का उपयोग किया गया। आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा प्रक्रियाओं के बाद संबंधित प्राधिकरणों से स्वीकृति मिलने पर पिछले कुछ वर्षों से ऐसे ग्रीन पटाखों का उत्पादन और बिक्री भी होती रही है। इन्हें दिवाली सहित अन्य अवसरों पर कम प्रदूषण वाले विकल्प के रूप में बाजार में उपलब्ध कराया गया।

    हालांकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि ग्रीन पटाखों के प्रदूषण संबंधी दावों की तुलना पूरी तरह बैरियम-रहित विकल्पों से नहीं की गई है। बोर्ड का तर्क है कि उपलब्ध अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि वर्तमान ग्रीन पटाखे वास्तव में सबसे सुरक्षित और कम प्रदूषण फैलाने वाले विकल्प हैं। इसलिए इस विषय पर और स्पष्ट वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता है।

    दोनों संस्थाओं के परस्पर विरोधी दृष्टिकोण को देखते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट किया है कि ग्रीन पटाखों के व्यावसायिक उत्पादन और उनके उपयोग को लेकर अंतिम निर्णय अदालत ही करे। अब न्यायालय के फैसले पर यह निर्भर करेगा कि आने वाले समय में ग्रीन पटाखों के मौजूदा फॉर्मूलेशन को जारी रखा जाएगा, उनमें संशोधन होगा या उनके उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश लागू किए जाएंगे। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पटाखा उद्योग तीनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • ट्रंप प्रशासन के भव्य स्वतंत्रता दिवस समारोह का पर्यावरण पर असर: 8.5 लाख पटाखे दागने के दावे के बीच वॉशिंगटन में 'कोड पर्पल' अलर्ट, पीएम 2.5 का स्तर मानकों से कई गुना ऊपर पहुंचा

    ट्रंप प्रशासन के भव्य स्वतंत्रता दिवस समारोह का पर्यावरण पर असर: 8.5 लाख पटाखे दागने के दावे के बीच वॉशिंगटन में 'कोड पर्पल' अलर्ट, पीएम 2.5 का स्तर मानकों से कई गुना ऊपर पहुंचा

    नई दिल्ली । संयुक्त राज्य अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एक भव्य समारोह के बाद वहां की वायु गुणवत्ता में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में आयोजित इस भव्य जश्न के दौरान हुई अत्यधिक आतिशबाजी के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस आतिशबाजी से उत्पन्न हुए सघन धुएं और हानिकारक कणों के चलते कुछ घंटों के लिए अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन दुनिया का सबसे अधिक प्रदूषित प्रमुख शहर बन गया, जिसने पर्यावरणविदों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताओं को अत्यधिक बढ़ा दिया है।

    इस विशाल आयोजन की जिम्मेदारी व्हाइट हाउस की ‘फ्रीडम 250’ पहल के तहत ‘पायरोटेक्निको’ नामक कंपनी को सौंपी गई थी। इस कंपनी ने समारोह के दौरान लगभग 8.5 लाख आतिशबाजियां एक साथ दागकर एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने का लक्ष्य रखा था। वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाली वैश्विक संस्था ‘आईक्यूएयर’ (IQAir) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस विशाल और सघन आतिशबाजी के प्रदर्शन के तुरंत बाद ही शहर का वायु प्रदूषण सूचकांक अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया, जिसने वॉशिंगटन को वैश्विक प्रदूषण रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचा दिया।

    यह पूरा आयोजन प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के बीच संपन्न हुआ। 4 जुलाई को क्षेत्र में भीषण गर्मी का प्रकोप था और शाम के समय आए तेज गरज-चमक वाले तूफान के कारण मुख्य आतिशबाजी कार्यक्रम अपने निर्धारित समय से एक घंटे से अधिक की देरी से, मध्यरात्रि के आसपास शुरू हो सका। स्थानीय स्तर पर पहले से ही आतिशबाजी के कारण हवा खराब हो रही थी, लेकिन मुख्य शो शुरू होते ही आसमान में धुएं का गुबार छा गया। हवा के रुख के कारण यह हानिकारक धुआं सीधे दर्शकों की ओर फैल गया, जिससे कई प्रमुख इलाकों में दृश्यता बेहद कम हो गई।

    शहर के विभिन्न वायु निगरानी केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, वातावरण में बेहद सूक्ष्म और हानिकारक प्रदूषक कणों यानी पीएम 2.5 (PM2.5) का स्तर एक समय पर 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से भी ऊपर दर्ज किया गया। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) द्वारा तय किए गए 24 घंटे के सुरक्षित औसत मानक 35 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की तुलना में यह स्तर कई गुना अधिक और बेहद चिंताजनक था। ये सूक्ष्म कण मानव स्वास्थ्य, विशेषकर फेफड़ों और श्वसन तंत्र के लिए अत्यंत घातक माने जाते हैं।

    प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को देखते हुए प्रशासन को वॉशिंगटन और उसके आस-पास के क्षेत्रों में ‘कोड पर्पल’ श्रेणी का अलर्ट जारी करना पड़ा। इसका सीधा अर्थ यह है कि हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी थी कि वह सामान्य नागरिकों के स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती थी। इस वायु प्रदूषण का व्यापक असर न केवल राजधानी तक सीमित रहा, बल्कि इसके पड़ोसी राज्यों वर्जीनिया और मैरीलैंड के कई हिस्सों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई।

    वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रविवार को समय पर बारिश नहीं हुई होती, तो स्थिति और भी अधिक गंभीर हो सकती थी। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के वायुमंडलीय वैज्ञानिक रसेल डिकरसन के अनुसार, बारिश ने वातावरण में फैले इस अत्यधिक धुएं और प्रदूषण को साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे रविवार दोपहर तक वायु गुणवत्ता पुनः सामान्य स्तर पर आ सकी। इसके बाद वॉशिंगटन प्रदूषण रैंकिंग में नीचे खिसक गया। वहीं दूसरी ओर, इस आतिशबाजी के जरिए पूर्व में फिलीपींस द्वारा बनाए गए 8.11 लाख आतिशबाजी के रिकॉर्ड को तोड़ने के दावे पर ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने कहा है कि साक्ष्यों की पूरी समीक्षा के बाद ही आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।