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  • शिमला में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा…. कई इलाके बेहद संवेदनशील

    शिमला में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा…. कई इलाके बेहद संवेदनशील


    शिमला।
    राजधानी शिमला (Shimla) पर भूकंप (Earthquake) ही नहीं अब भूस्खलन (Landslides) और फ्लैश फ्लड (Flash Floods) जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। नगर निगम की ओर से कराए गए मल्टी-हैजार्ड क्लाइमेट रिस्क एंड वल्नरेबिलिटी असेसमेंट (सीआरवीए) (Multi-Hazard Climate Risk and Vulnerability Assessment – CRVA) अध्ययन में भूस्खलन को एक बढ़ते खतरे के रूप में शामिल किया है।

    दूसरी ओर इन आपदाओं से बचाव के लिए नगर निगम ने स्ट्रॉम वाटर मैनेजमेंट प्लान तो तैयार किया है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने के लिए बजट नहीं मिल रहा है। निगम का अपना खजाना भी खाली पड़ा है। ऐसे में तीन साल से 77 करोड़ रुपये का यह प्लान फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। नगर निगम शिमला ने इस साल पहली बार 75 करोड़ रुपये का जलवायु बजट पेश किया था। इसके तहत शहर में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले संभावित नुकसान का अध्ययन करवाया है।

    करीब दस वर्षों के आंकड़ों और प्राकृतिक आपदाओं के विश्लेषण पर आधारित इस अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि शिमला के लिए नई आपदा प्रबंधन नीति तैयार की जाए, जिसमें जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को प्राथमिकता दी जाए। रिपोर्ट के अनुसार भविष्य में बादल फटना, अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड), भूस्खलन और अनियोजित निर्माण शहर के लिए बड़ी चुनौतियां बन सकते हैं। इनसे निपटने के लिए मास्टर प्लान तैयार करना जरूरी है।

    77 करोड़ का मास्टर प्लान फाइलों में बंद
    शहर में भूस्खलन का एक बड़ा कारण बारिश के पानी की निकासी बाधित होना है। शहर में बढ़ते निर्माण के चलते अंग्रेजों के समय बनाए गए कई नाले बंद हो चुके हैं। बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था बेहतर करने के लिए नगर निगम ने शहर के नालों का सर्वे करवाया है। इसके आधार पर 77 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। निगम ने बजट जारी करने के लिए केंद्र सरकार को इसका प्रस्ताव भेजा था, लेकिन तीन साल से इसे मंजूरी नहीं मिली है। निगम का अपना खजाना भी खाली है। ऐसे में भूस्खलन के खतरे को स्वीकार करने के बावजूद इससे बचाव की योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि शहर में जल निकासी व्यवस्था बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वार्डों, खासकर संवेदनशील इलाकों में नालों और नालियों को व्यवस्थित करने के लिए उनका चैनलाइजेशन किया जा रहा है।

    शहर में यह हैं भूस्खलन के संवेदनशील इलाके
    भूस्खलन के लिहाज से शहर के कृष्णानगर, शिव बावड़ी, फागली, लोअर कैथू, अपर कैथू, समरहिल, बालूगंज, टूटीकंडी, संजौली, ढली, भराड़ी, जाखू की ढलानें और नवबहार के कुछ हिस्से सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। इन इलाकों में खड़ी ढलानें, कमजोर भूगर्भीय संरचना, अनियोजित निर्माण, पहाड़ियों की कटिंग और खराब जल निकासी व्यवस्था जोखिम को और बढ़ा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में भूस्खलन और जमीन धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं। वर्ष 2023 में समरहिल, शिव बावड़ी, कृष्णानगर और फागली, जबकि वर्ष 2025 में बैनमोर, कृष्णानगर, हिमलैंड, पंथाघाटी और न्यू शिमला में जमीन धंसने की घटनाएं हो चुकी हैं।

  • देशभर में 11 सितंबर तक भारी बारिश के आसार… उत्तराखंड-हिमाचल में फ्लैश फ्लड की चेतावनी

    देशभर में 11 सितंबर तक भारी बारिश के आसार… उत्तराखंड-हिमाचल में फ्लैश फ्लड की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    देशभर में मौसम प्रणालियों (Weather systems) की सक्रियता के चलते उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के तमाम हिस्सों में 11 सितंबर तक तेज बारिश (Heavy rain), आंधी-तूफान की संभावना है। कुछ इलाकों में बिजली भी गिर सकती है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड (Uttarakhand) के आठ और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के एक जिले में अगले 24 घंटे के दौरान अचानक बाढ़ (Flash flood) का खतरा है। बिहार में प्रमुख नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने से बाढ़ का कहर बरकरार है और 16 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की ऊंची चोटियों पर सीजन की पहली बर्फबारी हुई है।


    आईएमडी की बुलेटिन में क्या?

    भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से शनिवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, चंपावत, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और उत्तरकाशी जिलों व हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में 6 सितंबर सुबह 11:30 बजे तक अचानक बाढ़ आ सकती है। पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 6 सितंबर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 8 सितंबर तक व्यापक वर्षा के आसार हैं।

    एमपी में बारिश का कहर जारी: आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
    मध्यप्रदेश में मानसून अब बाढ़ और उफनती नदियों वाला दौर दिखा रहा है। पूर्वी हिस्से में लगातार बारिश के बाद अब पश्चिम और उत्तरी जिलों में भी मानसून सक्रिय है। नर्मदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। भोपाल के भदभदा और कलियासोत के साथ बरगी बांध के गेट भी खोले गए हैं। नदी-नालों के उफान और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कई इलाकों में लोगों को सतर्क किया गया है। मौसम केंद्र ने रविवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना और सतना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, उज्जैन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, जबलपुर, मंडला, रीवा, सीधी, सिंगरौली समेत कई जिलों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है।


    राजस्थान में मानसून फिर एक्टिव, 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    राजस्थान में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। शनिवार को जयपुर समेत कई जिलों में दिनभर बारिश हुई। आज भी 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। लगातार बारिश के कारण कई नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। सवाई माधोपुर, बारां, बूंदी और कोटा में कई जगह नदी की रपट डूब गईं। बारिश के कारण पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में दिन के तापमान में 6 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई। जयपुर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, दौसा और सवाई माधोपुर समेत कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे रहा। इससे दिन में भी मौसम ठंडा हो गया। मौसम विभाग के अनुसार बारिश का दौर 8 सितंबर तक जारी रह सकता है। इसके बाद करीब एक सप्ताह तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है।


    हिमाचल में परियोजना को नुकसान

    हिमाचल प्रदेश में शिमला जिले के काशापाट पंचायत के कंडे में शुक्रवार रात बादल फटने से नोगली खड्ड में बाढ़ आ गई। इससे सेरीपुल स्थित गंगाधारी जलविद्युत परियोजना के भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में मलबा लेकर आया, जो प्रोजेक्ट की संरचनाओं के आसपास जमा हो गया है। प्रदेश में 85 सड़कें, 51 पेयजल योजनाएं और 29 बिजली ट्रांसफार्मर भी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचे इलाकों में शनिवार को मौसम की पहली बर्फबारी हुई। गुमरी-जोजिला मार्ग के ऊंचे पहाड़ों, गुलमर्ग के ऊंचे इलाकों और पीर पंजाल रेंज में ऊंचे इलाके बर्फ से चमक उठे। ताटाकूटी पीक की चोटी और ऊपरी ढलानों पर भी हल्की बर्फबारी दर्ज की गई।


    मध्य और पूर्वी भारत में बढ़ा खतरा

    आईएमडी के अनुसार, मध्य भारत में पश्चिमी मध्य प्रदेश में 6-7 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में 5-8 सितंबर, छत्तीसगढ़ में 8-11 सितंबर और विदर्भ में 11 सितंबर को व्यापक वर्षा का अनुमान है। पूर्वी भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 11 सितंबर तक व्यापक वर्षा होगी। बिहार में 7 से 11 सितंबर तक भारी बारिश होगी।


    क्यों हो रही है इतनी बारिश?

    मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तरी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र शनिवार सुबह कमजोर होकर उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश व दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर स्थित हो गया है, जिसके अगले दो दिनों में पूर्व-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही निचले क्षोभमंडल में दक्षिणी हरियाणा से दक्षिणी असम तक और दक्षिणी गुजरात से उत्तरी बांग्लादेश तक दो अलग-अलग निम्न दबाव के क्षेत्र सक्रिय हैं।