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  • वायुसेना के बेड़े में पुराने कार्गो विमानों की जगह लेंगे 60 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट….₹1 लाख करोड़ का टेंडर जारी

    वायुसेना के बेड़े में पुराने कार्गो विमानों की जगह लेंगे 60 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट….₹1 लाख करोड़ का टेंडर जारी


    नई दिल्ली ।
    भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के पुराने हो रहे कार्गो विमानों (Cargo planes) के बेड़े को बदलने की तैयारी तेज हो गई है। रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (Multirole Transport Aircraft) खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है। इस परियोजना में भारतीय कंपनियों को प्रमुख भूमिका दी गई है। HAL, टाटा और महिंद्रा इस दौड़ में शामिल हैं।


    किन भारतीय कंपनियों के साथ कौन-सी विदेशी कंपनियां मैदान में हैं?

    महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की एम्ब्राएर के साथ साझेदारी की है और उसके C-390 ट्रांसपोर्ट विमान की पेशकश की जाएगी। वहीं, टाटा ने लॉकहीड मार्टिन के साथ हाथ मिलाया है और C-130 विमान की पेशकश करेगा। C-130 पहले से ही भारतीय वायुसेना में विशेष अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।


    कितने विमान भारत में बनाए जाएंगे?

    इस कार्यक्रम के तहत करीब 20 प्रतिशत विमान सीधे तैयार स्थिति में भारतीय वायुसेना को मिलेंगे। बाकी विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा गया है। विमानों का निर्माण भारतीय कंपनियों और मूल विमान निर्माता कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रमों के जरिए किया जाएगा। इस परियोजना में HAL की भी भूमिका रहेगी।


    वायुसेना के पास अभी कितने C-130J विमान हैं?

    भारतीय वायुसेना के बेड़े में फिलहाल 12 C-130J Super Hercules विमान हैं। इसके अलावा, वायुसेना Airbus के साथ C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। करीब 70 C-295 विमान वायुसेना में शामिल किए जाने हैं, जिनमें अधिकांश का निर्माण भारत में किया जाएगा।


    क्या वायुसेना के आधुनिकीकरण का हिस्सा है यह योजना?

    मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खरीद वायुसेना के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। वायुसेना ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भी टेंडर जारी किया है। इसके अलावा, पुराने हॉक ट्रेनर विमानों को बदलने और पायलट प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए 100 से अधिक ट्रेनर विमानों को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है।


    क्या इन विमानों से हवा में ईंधन भरने का काम भी लिया जाएगा?

    मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल केवल सैनिकों और उपकरणों की तेज आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। भारतीय वायुसेना इन विमानों का इस्तेमाल हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर के रूप में भी कर सकती है। इसके अलावा, इनसे उपकरणों और सैनिकों को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

  • इंडिगो की कमाई बढ़ी लेकिन मुनाफा घाटे में बदला, ईंधन खर्च और छोटी फ्लीट बनी बड़ी वजह

    इंडिगो की कमाई बढ़ी लेकिन मुनाफा घाटे में बदला, ईंधन खर्च और छोटी फ्लीट बनी बड़ी वजह

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन इंडिगो को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में घाटे का सामना करना पड़ा है। कंपनी ने अप्रैल से जून 2026 की अवधि के लिए स्टैंडअलोन आधार पर 382 करोड़ रुपये के शुद्ध घाटे की जानकारी दी है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में उसे 2,161 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। कंपनी के वित्तीय नतीजों से स्पष्ट है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, ईंधन की बढ़ती कीमतों और परिचालन लागत में तेज वृद्धि ने उसके प्रदर्शन को प्रभावित किया।

    कंसोलिडेटेड आधार पर भी कंपनी का प्रदर्शन दबाव में रहा। इस अवधि में इंडिगो को 238 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज करना पड़ा, जबकि एक वर्ष पहले इसी तिमाही में उसे 2,176 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। हालांकि कंपनी की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली और कुल राजस्व 25,614.1 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 21,542.6 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 18.9 प्रतिशत अधिक है।

    राजस्व में वृद्धि के बावजूद कंपनी का कुल खर्च काफी तेजी से बढ़ा। अप्रैल-जून तिमाही में कुल परिचालन व्यय 25,852.5 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 19,231.9 करोड़ रुपये था। यानी कुल खर्च में लगभग 34.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कंपनी के अनुसार इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण विमान ईंधन की कीमतों में तेज उछाल रहा, जिसने परिचालन लागत पर सीधा असर डाला।

    ईंधन खर्च के आंकड़े भी इस दबाव को स्पष्ट करते हैं। पहली तिमाही में इंडिगो का ईंधन पर खर्च बढ़कर 10,832.9 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक वर्ष पहले यही खर्च 5,832.6 करोड़ रुपये था। सालाना आधार पर इसमें लगभग 85.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कंपनी की लागत संरचना पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

    कंपनी की परिचालन लाभप्रदता में भी गिरावट दर्ज की गई। पहली तिमाही में ईबीआईटीडीएआर 5,738.6 करोड़ रुपये से घटकर 3,832.5 करोड़ रुपये रह गया। इसी अवधि में ईबीआईटीडीएआर मार्जिन भी 28.8 प्रतिशत से घटकर 16.5 प्रतिशत पर आ गया। इससे संकेत मिलता है कि आय बढ़ने के बावजूद बढ़ती लागत ने लाभप्रदता को काफी प्रभावित किया।

    इंडिगो के बेड़े में भी इस दौरान कमी दर्ज की गई। 30 जून 2026 तक कंपनी के पास कुल 432 विमान थे, जबकि 31 मार्च 2026 को यह संख्या 441 थी। यानी तिमाही के दौरान कंपनी का बेड़ा नौ विमानों तक घट गया। कंपनी ने बताया कि डैम्प लीज पर संचालित विमानों की संख्या 20 से घटकर 7 रह जाने के कारण फ्लीट का आकार कम हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन उद्योग पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ईंधन लागत और अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में ईंधन कीमतों की दिशा, अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात की स्थिति और परिचालन लागत पर नियंत्रण कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगे। फिलहाल इंडिगो की आय में वृद्धि सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन बढ़ते खर्च ने उसकी लाभप्रदता पर दबाव बनाए रखा है।