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  • E20 फ्यूल को लेकर फैली गलत जानकारी पर हरदीप पुरी का जवाब, बोले- 20% से ज्यादा मिश्रण की योजना नहीं

    E20 फ्यूल को लेकर फैली गलत जानकारी पर हरदीप पुरी का जवाब, बोले- 20% से ज्यादा मिश्रण की योजना नहीं


    नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने फिलहाल अपनी नीति में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मौजूदा 20 प्रतिशत सीमा को बढ़ाने की अभी कोई योजना नहीं है। उन्होंने E20 ईंधन को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारी पर भी चिंता जताई और कहा कि सरकार आयातित कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है।

    हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को दक्षिण गोवा में आयोजित 29वें ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान यह बात कही। उनसे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ाने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम किया है और फिलहाल इसे 20 प्रतिशत से अधिक करने की योजना नहीं है। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में E20 नीति में किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।

    E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य इसके इस्तेमाल के जरिए विदेशों से कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च को कम करना और देश में वैकल्पिक ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा की बचत से जोड़कर देखा जाता है।

    पुरी ने दावा किया कि E20 ईंधन को लेकर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह ईंधन वाहनों के अनुकूल है। हालांकि मंत्री ने यह भी माना कि वर्ष 2003 से पहले निर्मित कुछ पुराने वाहनों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से संबंधित समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए वाहन की उम्र और निर्माता की ओर से निर्धारित ईंधन संबंधी दिशा निर्देशों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    E20 के इस्तेमाल से इंजन को नुकसान पहुंचने की शिकायतों पर मंत्री ने कहा कि ईंधन के परिवहन और भंडारण से जुड़ी समस्याएं भी चर्चा का विषय रही हैं। उन्होंने बताया कि मिश्रित ईंधन के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले टैंकरों का उपयोग अन्य कामों में भी किया जाता था। इंजन खराब होने के दावों पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बड़े पैमाने पर ऐसी समस्या होती तो इसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता। हालांकि वास्तविक प्रभाव वाहन के मॉडल उसकी तकनीकी अनुकूलता और रखरखाव जैसी बातों पर निर्भर कर सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने E20 नीति से देश को 1.60 लाख करोड़ रुपये की बचत होने का दावा भी किया। उनके मुताबिक इसमें से 1.40 लाख करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादन से कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिला है और किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने का अवसर मिला है। सरकार का तर्क है कि जैव ईंधन की मांग बढ़ने से कृषि आधारित उद्योगों को बाजार मिल सकता है।

    इसी बीच सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत E100 यानी लगभग पूरी तरह एथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। ऐसे वाहन अलग-अलग अनुपात वाले एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के लिए बनाए जाते हैं। हालांकि E100 वाहनों की अनुमति और सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की सीमा दो अलग-अलग नीतिगत विषय हैं।

    फिलहाल सरकार ने E20 से आगे मिश्रण बढ़ाने की योजना से इनकार किया है। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे अपने वाहन की पुस्तिका में दिए गए ईंधन संबंधी निर्देशों का पालन करें और किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में अधिकृत सर्विस सेंटर से सलाह लें।

  • पेट्रोल के विकल्प के रूप में 100% एथेनॉल को मंजूरी, अब E100 ईंधन से चलेंगी खास गाड़ियां

    पेट्रोल के विकल्प के रूप में 100% एथेनॉल को मंजूरी, अब E100 ईंधन से चलेंगी खास गाड़ियां


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश में 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में संशोधन करते हुए E100 ईंधन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से भारत में फ्लेक्स फ्यूल तकनीक को बढ़ावा मिलने का रास्ता खुल गया है। सरकार का मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने से कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा पेट्रोल गाड़ियों में भी सीधे E100 ईंधन इस्तेमाल किया जा सकेगा।

    क्या है E100 ईंधन

    E100 का मतलब ऐसा ईंधन है जिसमें 100 प्रतिशत एथेनॉल होता है। एथेनॉल एक जैव ईंधन है जिसे मुख्य रूप से गन्ने और मक्के जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जा सकता है। सामान्य पेट्रोल की तुलना में इसका स्रोत अलग है और इसके इस्तेमाल से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की संभावना रहती है। सरकार के नए नियमों के तहत वाहन उत्सर्जन संबंधी प्रावधानों में E85 के साथ E100 को भी शामिल किया गया है। इससे इस तरह के ईंधन पर चलने वाले वाहनों के लिए नियामकीय व्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    सामान्य पेट्रोल कारों में नहीं डाल सकेंगे E100

    सरकार के इस फैसले को लेकर वाहन मालिकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वे अपनी मौजूदा कार या बाइक में E100 ईंधन भरवा सकेंगे। इसका जवाब नहीं है। सामान्य पेट्रोल या E20 पेट्रोल पर चलने वाले वाहन अपने आप E85 या E100 ईंधन के अनुकूल नहीं हो जाते। इन ईंधनों का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकेगा जिन्हें इनके लिए विशेष रूप से डिजाइन और प्रमाणित किया गया हो। इसलिए मौजूदा वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी में बदलाव कराने या अचानक ईंधन बदलने की जरूरत नहीं है।

    फ्लेक्स फ्यूल तकनीक कैसे करती है काम

    फ्लेक्स फ्यूल तकनीक से लैस वाहनों को पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रण पर चलने के लिए तैयार किया जाता है। ऐसे वाहनों में इंजन और ईंधन प्रणाली को इस तरह बनाया जाता है कि वे निर्धारित ईंधन मिश्रण के अनुसार काम कर सकें। कौन सा ईंधन इस्तेमाल किया जा सकता है यह संबंधित वाहन के डिजाइन और प्रमाणन पर निर्भर करेगा। भविष्य में वाहन निर्माता कंपनियां इस तकनीक के अनुरूप नए मॉडल पेश कर सकती हैं। यह व्यवस्था सामान्य पेट्रोल वाहनों का विकल्प है न कि उन्हें तुरंत बंद करने का आदेश।

    देश को क्या होंगे फायदे

    भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में एथेनॉल जैसे घरेलू स्तर पर उत्पादित किए जा सकने वाले ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की संभावना है। इसके अलावा एथेनॉल के उपयोग से वाहनों के कुछ प्रदूषक उत्सर्जन में कमी आ सकती है। हालांकि वास्तविक पर्यावरणीय लाभ एथेनॉल के उत्पादन के तरीके और वाहन की तकनीक पर भी निर्भर करेंगे।

    क्या पेट्रोल गाड़ियां बंद हो जाएंगी

    E100 ईंधन को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां बंद कर दी जाएंगी। यह वाहन चालकों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प विकसित करने की दिशा में कदम है। अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में फ्लेक्स फ्यूल तकनीक का इस्तेमाल पहले से किया जा रहा है। भारत में भी इस तकनीक का विस्तार वाहन निर्माताओं की तैयारी ईंधन की उपलब्धता और उपभोक्ताओं की मांग पर निर्भर करेगा। फिलहाल आम वाहन मालिकों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि वे अपनी गाड़ी में केवल वही ईंधन इस्तेमाल करें जिसकी निर्माता कंपनी ने अनुमति दी है।

  • सरकार का 'फ्लेक्स फ्यूल' पर बड़ा दांव, एथेनॉल के दम पर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी!

    सरकार का 'फ्लेक्स फ्यूल' पर बड़ा दांव, एथेनॉल के दम पर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी!


    नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी दिखाई है। सरकार का उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में एथेनॉल के उपयोग को बढ़ाना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नीति स्तर पर इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श की तैयारी की जा रही है, जिसमें तेल कंपनियों, ऑटोमोबाइल क्षेत्र और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर एक स्पष्ट रणनीति तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया में ऐसे उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो मौजूदा ईंधन नीतियों को आगे बढ़ाते हुए एथेनॉल मिश्रण के स्तर को बढ़ा सकें और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के उपयोग को आसान बना सकें।

    वर्तमान में देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम लागू है। अब सरकार ऐसे वाहनों को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है जो उच्च स्तर के एथेनॉल मिश्रण, यहां तक कि 85 प्रतिशत तक, पर भी आसानी से चल सकें। इससे न केवल वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन में कृषि आधारित कच्चे माल का उपयोग किया जाता है।

    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को अपनाना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्यों को पहले तय समय से पहले हासिल करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे इस क्षेत्र में तेजी लाई जा सके।

    एथेनॉल उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें कच्चे माल के दायरे का विस्तार, उत्पादन के लिए कृषि क्लस्टर विकसित करना और अतिरिक्त खाद्यान्न का उपयोग शामिल है। चावल और चीनी जैसे संसाधनों का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। इसके अलावा, एथेनॉल की खरीद के लिए तय मूल्य और कर में रियायत जैसे कदम भी इस क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

    यह पहल न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक स्थिरता के लिए भी लाभकारी मानी जा रही है। फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के माध्यम से भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव का संकेत देता है।