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  • नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी

    नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी


    नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 579 हो गई है, जबकि करीब 2 हजार लोग अब भी लापता हैं। भारत के भी सैकड़ों नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। आपदा का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी जुड़ा है, लेकिन चीन की ओर से अब तक सिर्फ 5 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। इससे चीन की ओर से वास्तविक नुकसान और जनहानि की जानकारी छिपाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन में तबाही, लेकिन जानकारी बेहद सीमित

    द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का सरकारी मीडिया भी इस आपदा को लेकर व्यापक रिपोर्टिंग नहीं कर रहा है। कुछ पत्रकार प्रभावित इलाकों में पहुंचते हैं, लेकिन वहां पीड़ितों और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के बजाय रिपोर्टिंग मुख्य रूप से सरकारी राहत एवं बचाव प्रयासों तक सीमित रहती है। रिपोर्टों में चीन की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों को प्रमुखता दी जाती है, जबकि आम लोगों की स्थिति सामने नहीं आ रही है।

    नेपाल में बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि चीन के प्रभावित हिस्सों में भी नुकसान व्यापक हो सकता है। इसके बावजूद चीन की ओर से जनहानि और तबाही का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    तिब्बत में पत्रकारों और स्थानीय लोगों पर पाबंदियों का आरोप

    चीन तिब्बत पर अपना दावा करता है, जबकि तिब्बत की स्वायत्तता और स्वतंत्रता की मांग लंबे समय से उठती रही है। रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों की पहुंच पर कड़े प्रतिबंध हैं। स्थानीय लोगों के पत्रकारों से बातचीत करने पर भी कार्रवाई का खतरा रहता है।

    तिब्बत में भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को लेकर भी चीन की नीतियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है। ऐसे में मौजूदा आपदा के दौरान भी स्थानीय लोगों की आवाज और जमीनी हालात के सामने न आने पर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन ने भेजी राहत टीम, शी जिनपिंग ने की बैठक

    जानकारी के मुताबिक, चीन ने प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव दल भेजे हैं। हालांकि, इन टीमों ने मौके पर किस स्तर पर और क्या काम किया, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    चीनी मीडिया ने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की। वहीं, प्रीमियर ली कियांग ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा भी किया।

    दो और ग्लेशियरों पर नजर

    नेपाल के मौसम विभाग के अधिकारियों ने अब दो और ग्लेशियरों पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश शुरू की है। ये दोनों ग्लेशियर उस ग्लेशियर के आसपास स्थित हैं, जिसके टूटने के बाद बुधवार को विनाशकारी बाढ़ आई थी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में आगे किसी और आपदा की आशंका को लेकर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

    4 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया

    नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताजा अपडेट के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक करीब 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। हालांकि लापता लोगों की संख्या अभी भी बढ़ रही है और ताजा आंकड़े के अनुसार 1,924 लोग लापता हैं।

    बचाव अभियान को तेज करने के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 15,000 से ज्यादा जवानों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है।

    लापता विदेशियों के आंकड़े अलग-अलग

    लापता विदेशी नागरिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग सरकारी आंकड़े सामने आए हैं। एक सरकारी रिपोर्ट में 517 विदेशी नागरिकों और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लापता होने की बात कही गई है।

    वहीं, नेपाल पुलिस के पहले जारी आंकड़ों में लापता विदेशी नागरिकों की संख्या 575 बताई गई थी। इनमें 36 देशों के नागरिक शामिल हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक लापता विदेशियों में 65 अमेरिकी, 62 यूक्रेनी और 33 ब्रिटिश नागरिक भी हैं।

    इसके अलावा प्रभावित इलाकों से 149 नेपाली पर्यटक और 1,407 स्थानीय नागरिक भी लापता बताए गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोज, राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं।

  • Weather Alert: एमपी, यूपी, राजस्थान और हिमाचल में भारी बारिश से संकट, दिल्ली में 60 किलोमीटर प्रति घंटे हवाओं की चेतावनी

    Weather Alert: एमपी, यूपी, राजस्थान और हिमाचल में भारी बारिश से संकट, दिल्ली में 60 किलोमीटर प्रति घंटे हवाओं की चेतावनी

    नई दिल्ली । देश के कई राज्यों में मानसून की सक्रियता के कारण भारी बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में लगातार बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गई हैं, नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं।

    राजस्थान के झालावाड़ में भारी बारिश के कारण मनोहर थाना क्षेत्र के झीकनी गांव स्थित सरकारी स्कूल में पानी भर गया। स्कूल में मौजूद 30 से अधिक विद्यार्थी पानी के बीच फंस गए। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। क्षेत्र में पानी की स्थिति को देखते हुए कालीसिंध बांध के 12 गेट भी खोले गए हैं।

    राजस्थान के बाड़मेर और बीकानेर में भी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बाड़मेर में रविवार रात करीब ढाई घंटे हुई तेज बारिश के बाद निचले इलाकों में दुकानों और घरों तक पानी पहुंच गया। श्रीडूंगरगढ़ में सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी जमा होने की जानकारी सामने आई है। कई प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर भी जलभराव हुआ।

    उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, शारदा और सरयू समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। फर्रुखाबाद और बिजनौर क्षेत्रों में गंगा का पानी हाईवे तक पहुंच गया है। कई सड़कें डूबने से आवागमन प्रभावित हुआ है। करीब 40 गांवों के बाढ़ की चपेट में होने की जानकारी है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों तक पहुंचने वाले कई रास्ते जलमग्न हो गए हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर के छह प्रवेश द्वारों में से मुख्य गंगा द्वार को भी बढ़ते जलस्तर के कारण बंद किया गया है। मणिकर्णिका घाट तक पानी पहुंचने से अंतिम संस्कार और अन्य गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।

    मध्य प्रदेश में भी बारिश का असर कई जिलों में देखने को मिल रहा है। भोपाल में लगातार बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर गया है। डिंडौरी में नर्मदा नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने की स्थिति बनी हुई है। राजगढ़ में निर्माणाधीन पुल से एक कार बह जाने की घटना में नौ लोगों की मौत हुई, जबकि दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण 124 सड़कें बंद हैं और 255 बिजली ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं। मंडी में सबसे अधिक 51 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में 39 और शिमला में 13 सड़कें बंद होने से आवाजाही प्रभावित है। इस मानसून में प्रदेश में बारिश और अन्य संबंधित घटनाओं से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है।

    सिक्किम में तेज बारिश के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग दस पर मलबा आने से सड़क बंद हो गई। यह मार्ग सिक्किम को पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है। सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

    उत्तराखंड के सभी जिलों में बारिश का दौर जारी है और चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट की स्थिति बताई गई है। वहीं बिहार के 12 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी है। ओडिशा में भी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना के कारण 16 अगस्त तक भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

    दिल्ली में भी अगले कुछ घंटों के दौरान तेज आंधी और भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है। ऐसे में देश के कई हिस्सों में प्रशासन और स्थानीय लोगों को जलभराव, बाढ़ और तेज हवाओं को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

  • नर्मदा उफान पर, घाट-मंदिर जलमग्न; छोटे पुल-रपटे डूबे, जोहिला बांध के पांच गेट खुले

    नर्मदा उफान पर, घाट-मंदिर जलमग्न; छोटे पुल-रपटे डूबे, जोहिला बांध के पांच गेट खुले


    उमरिया।
    मंडला जिले में पिछले 24 घंटे से हो रही तेज बारिश के चलते नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने से नर्मदा किनारे स्थित मंदिर और घाट जलमग्न हो गए हैं। मंडला शहर का छोटा रपटा पुल भी पूरी तरह डूब गया है और पानी पुल के ऊपर से बह रहा है।

    नर्मदा में बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। माहिष्मती घाट, सहस्रधारा सहित प्रमुख घाटों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। लोगों को नदी के पास जाने, नहाने और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने से रोका जा रहा है।

    पांच-छह छोटे पुल और रपटे जलमग्न

    लगातार बारिश के कारण जिले के करीब पांच-छह छोटे पुल और रपटे भी जलमग्न होने की सूचना है। प्रशासन ने ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद कराया है। चौकीदारों की तैनाती के साथ पुलिस और होमगार्ड की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

    जोहिला बांध के पांच गेट खुले

    उमरिया जिले में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण जोहिला बांध का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। पानी की बढ़ती आवक को देखते हुए बांध प्रबंधन ने रविवार को इस मानसून में पहली बार एक साथ पांच गेट खोलकर पानी की निकासी शुरू की। गेट खुलने के बाद तेज बहाव के साथ पानी बाहर निकल रहा है।

    बांध प्रबंधन के अनुसार गेट क्रमांक दो को दो मीटर, तीन को तीन मीटर, चार को तीन मीटर, पांच को दो मीटर और छह को दो मीटर तक खोला गया है। पांचों गेट से कुल 12 मीटर पानी की निकासी की जा रही है। इससे करीब 50 हजार क्यूसेक पानी प्रति सेकंड की दर से बाहर निकल रहा है।

    बांध देखने पहुंच रहे लोग

    जोहिला बांध के पांच गेट एक साथ खोले जाने की सूचना के बाद आसपास के लोग बांध का नजारा देखने पहुंचने लगे हैं। पाली निवासी शिवम गुप्ता ने बताया कि इससे पहले एक और दो गेट खुले थे, लेकिन पांच गेटों से एक साथ पानी निकलते देखना अलग अनुभव है।

    माला गुप्ता ने बताया कि तेज बहाव के साथ बांध से निकलते पानी का दृश्य आकर्षक है। एक साथ पांच गेट खुलना आम तौर पर देखने को नहीं मिलता। हालांकि, बांध पर सुरक्षा कर्मी तैनात हैं और लोगों को पानी के तेज बहाव वाले क्षेत्र से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है।

    सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क

    बांध के गेट खुलने के बाद लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। लोगों को पानी के नजदीक जाने से रोका जा रहा है। प्रशासन और बांध प्रबंधन ने लोगों से तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने और सावधानी बरतने की अपील की है।

    प्रशासन ने नर्मदा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए भी लोगों से नदी और जलमग्न पुल-पुलियों से दूरी बनाए रखने को कहा है। संबंधित विभागों को स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

  • असम बाढ़ त्रासदी में मदद के लिए आगे आए अनुपम खेर, मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए 5 लाख रुपये

    असम बाढ़ त्रासदी में मदद के लिए आगे आए अनुपम खेर, मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए 5 लाख रुपये

    नई दिल्ली । असम में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर आगे आए हैं। उन्होंने प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे परिवारों की सहायता के लिए असम मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख रुपये का योगदान दिया है। अभिनेता ने यह राशि आरटीजीएस के माध्यम से राहत कोष में भेजी, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों को मजबूती मिल सके। अनुपम खेर का यह कदम आपदा के समय जरूरतमंद लोगों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

    असम इन दिनों भीषण बाढ़ की समस्या से जूझ रहा है, जिसके कारण कई जिलों में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। ऐसे समय में सामाजिक संस्थाओं, आम नागरिकों और सार्वजनिक हस्तियों की ओर से मिल रही मदद प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

    अनुपम खेर ने बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति अपनी चिंता जताते हुए कुछ दिन पहले लोगों से असम की सहायता के लिए आगे आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि आपदा के समय छोटी से छोटी मदद भी प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकती है। इसके बाद उन्होंने स्वयं पहल करते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक सहायता प्रदान की।

    अभिनेता का यह योगदान अनुपम खेर फाउंडेशन के माध्यम से किए जा रहे सामाजिक कार्यों की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अनुपम खेर समय-समय पर जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए विभिन्न अभियानों से जुड़े रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में भी वह अपनी भागीदारी निभाते रहे हैं।

    असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा, रहने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार और विभिन्न संगठन लगातार काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिए जुटाई जा रही राशि का इस्तेमाल प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने और पुनर्वास कार्यों को गति देने में किया जा रहा है।

    अनुपम खेर ने अपने योगदान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि प्राकृतिक आपदा के समय समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर प्रभावित लोगों की सहायता करनी चाहिए। उनका कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। असम में जारी राहत अभियान के बीच अभिनेता की यह पहल कई लोगों को मदद के लिए प्रेरित कर सकती है।

    असम में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लगातार राहत कार्य जारी हैं और देश के विभिन्न हिस्सों से लोग सहायता के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक मिलकर प्रभावित परिवारों को इस कठिन समय से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

  • भीषण बाढ़ की तबाही से कराहते असम के लिए आगे आए बॉलीवुड सितारे, आलिया भट्ट और सलमान खान ने संभाला राहत मोर्चा

    भीषण बाढ़ की तबाही से कराहते असम के लिए आगे आए बॉलीवुड सितारे, आलिया भट्ट और सलमान खान ने संभाला राहत मोर्चा

    नई दिल्ली । पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम इन दिनों विनाशकारी बाढ़ की चपेट में है, जिससे व्यापक स्तर पर जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच फिल्म जगत की हस्तियों ने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए मदद के प्रयास तेज कर दिए हैं। अभिनेत्री आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया के जरिए आम जनता से आगे आकर राहत कार्यों में योगदान देने की अपील की है, वहीं अभिनेता सलमान खान की संस्था जमीनी स्तर पर राहत सामग्री पहुंचाने के काम में जुट गई है।

    असम में बने हालात पर गहरी चिंता जताते हुए आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की वजह से अब तक साठ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होने को मजबूर हुए हैं। हर साल असम को इस भीषण त्रासदी का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद बुनियादी स्तर पर तैयारियां नाकाफी नजर आती हैं। उन्होंने आपदा प्रभावितों को तत्काल और दीर्घकालिक पुनर्वास सहायता देने की जरूरत पर जोर दिया।

    अभिनेत्री ने स्पष्ट किया है कि वह जल्द ही जमीनी स्तर पर कार्य कर रही प्रामाणिक संस्थाओं का विवरण साझा करेंगी, ताकि लोग सही माध्यमों से आर्थिक या सामग्री के रूप में योगदान दे सकें। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों का सहारा बनने की गुजारिश की है। कई परिवारों द्वारा अपने प्रियजनों, मवेशियों और आजीविका के साधनों को खो देने की घटना बेहद पीड़ादायक है।

    दूसरी ओर, अभिनेता सलमान खान ने अपने धर्मार्थ संगठन और स्थानीय प्रशंसक समूहों के माध्यम से राहत अभियान शुरू कर दिया है। गुवाहाटी से राहत सामग्री जुटाकर बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में पहुंचाई जा रही है। विशेषकर शिवसागर जिले के ग्रामीण इलाकों में जलभराव से जूझ रहे परिवारों को तत्काल राहत के रूप में भोजन के पैकेट और दैनिक आवश्यकता का सामान वितरित किया जा रहा है।

    आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कई प्रमुख जिलों में जलस्तर खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, कामरूप समेत सात से अधिक जिलों के सैकड़ों गांव पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न होने से फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। ऐसे विकट समय में सामाजिक संगठनों और मशहूर हस्तियों की ओर से की जा रही पहल से राहत कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत

    उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले दस दिनों से जारी बारिश के कारण प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटीय गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। खेत, सड़कें और निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। कई स्थानों पर मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते दिखाई दिए, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।

    सोनभद्र जिले में घाघरा नदी के तेज बहाव ने जिला जेल को जोड़ने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा बहा दिया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। वहीं गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और चेतावनी स्तर के पार पहुंचने के बाद प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। जिले की सभी बाढ़ चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। पिछले एक सप्ताह में नदी करीब 10 फीट ऊपर आ चुकी है। अस्सी घाट से नमो घाट तक करीब 50 छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

    मौसम का असर राजधानी लखनऊ, नोएडा, कानपुर, आगरा और अन्य शहरों में भी देखने को मिल रहा है। बुधवार सुबह से कई स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 10 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।

    बारिश के बीच हादसों का सिलसिला भी जारी है। उन्नाव में तेज हवा के दौरान चलती बाइक पर अचानक पेड़ गिर गया, जिससे युवक की गर्दन टूट गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना लगातार खराब मौसम के बीच सावधानी बरतने की जरूरत को भी रेखांकित करती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में व्यापक बारिश हुई। अब मानसूनी ट्रफ दक्षिण की ओर खिसक रही है, जिससे अगले एक-दो दिनों में कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद बारिश में कुछ कमी आने की संभावना है, लेकिन 26 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होकर प्रदेश में तेज बारिश का नया दौर शुरू कर सकता है।

  • हीटवेव और बाढ़ से निपटने के लिए अमित शाह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग… दिए ये निर्देश

    हीटवेव और बाढ़ से निपटने के लिए अमित शाह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग… दिए ये निर्देश


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने रविवार को दिल्ली में एक हाई लेवल मीटिंग (High Level Meeting.) में देश में संभावित बाढ़ और हीट वेव (Floods and Heat Waves) से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमें ‘जीरो कैजुअल्टी डिजास्टर मैनेजमेंट’ के लिए काम करना होगा.

    मीटिंग में देश के हर राज्य में बाढ़ संकट प्रबंधन टीमों (FCMT) के गठन, हीटवेव से कृषि क्षेत्र को होने वाले नुकसान को न्यूनतम रखने और मौसम संबंधी योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर फोकस किया गया।

    इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और सेंट्रल वाटर कमीशन के मौसम और बाढ़ संबंधी पूर्वानुमान के समय को 3 दिन से बढ़ाकर 7 दिन करने की बात भी कही गई।


    एनडीएमए के दिशानिर्देशों का पालन

    गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि आपदाओं को लेकर नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के पालन की राज्य, जिला और नगरपालिका स्तर पर नियमित समीक्षा की जानी चाहिए।

    जल संचय और चेक डैम परियोजनाओं के जरिए जलस्तर सुधारने और जल संरक्षण की संभावनाओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया. इसके अलावा कैम्पा फंड का इस्तेमाल पर्यावरण संतुलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को और प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है.

    साथ ही, कम से कम 60 जोखिम वाली झीलों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की योजना पर काम करने के निर्देश दिए हैं. सभी राज्यों में स्टेट-लेवल इंटीग्रेटेड रिज़र्वॉयर ऑपरेशंस लागू करने पर भी जोर दिया गया. मौसम संबंधी पूर्वानुमानों और चेतावनियों का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार की बात भी कही गई.