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  • थाईलैंड के फुकेत में भारी बारिश के बाद बाढ़, तीन जिलों में जनजीवन प्रभावित और करीब 100 परिवारों पर संकट…

    थाईलैंड के फुकेत में भारी बारिश के बाद बाढ़, तीन जिलों में जनजीवन प्रभावित और करीब 100 परिवारों पर संकट…


    नई दिल्ली । थाईलैंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल फुकेत द्वीप पर भारी बारिश के बाद बाढ़ से हालात बिगड़ गए हैं। रातभर हुई मूसलाधार बारिश के कारण सोमवार को प्रांत के कई इलाकों में पानी भर गया। दक्षिणी द्वीपीय प्रांत के तीनों जिले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें प्रांतीय राजधानी फुकेत शहर भी शामिल है। जलभराव के कारण सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ और कई स्थानों पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    प्रांत के उप-गवर्नर रोमडोन हाइयावाए के मुताबिक, सोमवार सुबह के बाद बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा था। हालांकि, कई निचले इलाकों में जलभराव बना हुआ था। प्रशासन ने इन क्षेत्रों में छोटे वाहनों को ले जाने से बचने की सलाह दी है। पानी घटने के बावजूद प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है।

    भारी बारिश के कारण फुकेत के कुछ हिस्सों में भूस्खलन भी हुआ है। प्रशासनिक अधिकारी मलबा हटाने के काम में जुटे हैं। उनकी कोशिश है कि मिट्टी और पत्थर नहरों में न पहुंचें, क्योंकि इससे जलमार्गों में रुकावट पैदा हो सकती है और पानी की निकासी प्रभावित होने का खतरा रहता है। बाढ़ के बाद कई जगहों पर जमा मलबे को हटाना भी चुनौती बना हुआ है।

    सोशल मीडिया पर साझा किए गए फोटो और वीडियो में बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में घुसता और सड़कों पर जमा होता दिखाई दिया। कई मार्गों पर पानी भरने के कारण यातायात बंद करना पड़ा। कुछ जगहों पर मिट्टी और पत्थरों के ढेर में वाहन आंशिक रूप से दबे हुए नजर आए। इन हालात ने स्थानीय लोगों की आवाजाही और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित किया है।

    उप-गवर्नर के अनुसार, बाढ़ से करीब 100 परिवार प्रभावित हुए हैं। हालांकि, अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जलभराव वाले इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने और छोटे वाहनों के साथ जोखिम लेने से बचने की सलाह दी गई है।

    थाईलैंड के मौसम विभाग ने दक्षिणी क्षेत्र में बुधवार तक लगातार भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने से अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में फुकेत सहित प्रभावित इलाकों में प्रशासन के सामने जलनिकासी, मलबा हटाने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती बनी हुई है।

    यह संकट केवल फुकेत तक सीमित नहीं है। थाईलैंड के आपदा रोकथाम एवं न्यूनीकरण विभाग के अनुसार, देश के कई हिस्सों में सितंबर के मध्य से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। सोमवार तक बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 83 लोगों की मौत होने की सूचना दी गई है। लगातार बारिश और जलभराव ने कई क्षेत्रों में जनजीवन को प्रभावित किया है।

    सितंबर के अंत में राजधानी बैंकॉक में भी कई दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद बाढ़ आ गई थी। उस दौरान हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था और सामान्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। फुकेत में ताजा बाढ़ की घटना के बीच मौसम विभाग की चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन के लिए आने वाले दिनों में संभावित बारिश के मद्देनजर सतर्कता बनाए रखना और प्रभावित इलाकों में पानी की निकासी सुनिश्चित करना अहम होगा।

  • जबलपुर में भारी बारिश से बरगी बांध लबालब, 17 गेट खोले गए, नर्मदा के घाट डूबे और 10 गांवों का संपर्क टूटा

    जबलपुर में भारी बारिश से बरगी बांध लबालब, 17 गेट खोले गए, नर्मदा के घाट डूबे और 10 गांवों का संपर्क टूटा


    मध्य प्रदेश:   में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच जबलपुर का बरगी बांध पानी से लबालब भर गया है। बांध के कैचमेंट क्षेत्र मंडला और डिंडोरी में लगातार बारिश होने से जलस्तर तेजी से बढ़ा। स्थिति को देखते हुए बांध के 17 गेट खोलकर नर्मदा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के निचले इलाकों में भी असर दिखाई देने लगा है।

    बरगी बांध के 17 गेट करीब 2.38 मीटर की ऊंचाई तक खोले गए हैं। इन गेटों के जरिए लगभग 6,121 क्यूमेक पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। बांध में पानी का भराव इतना अधिक है कि कई गेटों से पानी तेज बहाव के साथ बाहर निकल रहा है। जलस्तर में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर नर्मदा नदी के आसपास के क्षेत्रों पर पड़ा है।

    नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण जबलपुर और आसपास के प्रमुख घाटों में पानी भर गया है। नदी के बढ़ते बहाव के चलते घाटों के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। लगातार बारिश और बांध से छोड़े जा रहे पानी के कारण स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

    नर्मदा के बढ़ते जलस्तर का असर नदी किनारे बसे गांवों के आवागमन पर भी पड़ा है। जानकारी के अनुसार बरगी नगर, बिजौरा, बांदरकोला, खापा, बसा, दुर्गा नगर और प्रेम नगर समेत आसपास के करीब 10 गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है। पानी बढ़ने के कारण इन क्षेत्रों में आने-जाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन को अलर्ट किया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। लोगों से डूब क्षेत्र और जलभराव वाले स्थानों से दूर रहने तथा नदी और घाटों के आसपास नहीं जाने की अपील की गई है।

    नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। प्रशासन की ओर से जलस्तर और नदी के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

    भारी बारिश का असर केवल बरगी बांध तक सीमित नहीं है। बांध के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार पानी आने से जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से बांध से पानी की निकासी बढ़ानी पड़ी। 17 गेट खोलकर पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा के बहाव में भी तेजी आई है।

    प्रशासन की ओर से निचले इलाकों के लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से जलमग्न घाटों और नदी के तेज बहाव वाले हिस्सों में जाने से बचने को कहा गया है। लगातार बारिश के बीच बांध और नदी के जलस्तर पर निगरानी जारी है।

    फिलहाल बरगी बांध से पानी की निकासी जारी है और नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। करीब 10 गांवों का संपर्क प्रभावित होने तथा घाटों के जलमग्न होने के कारण स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • बिहार में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान, सम्राट चौधरी के साथ बोट से प्रभावित गांवों और खेतों का किया दौरा

    बिहार में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान, सम्राट चौधरी के साथ बोट से प्रभावित गांवों और खेतों का किया दौरा

    नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को बिहार के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। दोनों नेताओं ने बोट से हाजीपुर के तेरसिया और सरायपुर गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ के पानी में डूबे खेतों और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को करीब से देखा।

    बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने लोगों से बाढ़ के कारण हुए नुकसान के बारे में पूछा। ग्रामीणों से फसलों, मकानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी ली गई। इस दौरान प्रभावित लोगों ने बाढ़ के कारण सामने आ रही परेशानियों के बारे में भी केंद्रीय मंत्री को बताया।

    शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बोट के जरिए उन इलाकों का निरीक्षण किया, जहां बाढ़ का पानी फैला हुआ है। तेरसिया और सरायपुर गांवों के साथ आसपास के खेतों में पानी भरने की स्थिति को भी देखा गया। दौरे का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित लोगों की मौजूदा स्थिति और उन्हें हो रही परेशानियों की जानकारी प्रत्यक्ष रूप से लेना था।

    मौके पर मौजूद अधिकारियों से भी बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की स्थिति से केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री को अवगत कराया। शिवराज सिंह चौहान ने राहत कार्यों की प्रगति भी देखी और प्रभावित इलाकों में लोगों तक पहुंचाई जा रही सहायता की जानकारी ली।

    दौरे के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बाढ़ से प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को समझने के लिए ग्रामीणों से बातचीत की और नुकसान की जानकारी ली।

    बिहार के हाजीपुर क्षेत्र में बाढ़ के कारण गांवों और खेतों में पानी पहुंचने से प्रभावित लोगों के सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी हुई हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का संयुक्त दौरा स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेने के उद्देश्य से किया गया। निरीक्षण के दौरान प्रभावित गांवों, जलमग्न खेतों और राहत कार्यों की स्थिति पर ध्यान दिया गया।

    शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उनके सामने मौजूद समस्याओं को समझने का प्रयास किया। उन्होंने फसल और मकानों को हुए नुकसान की जानकारी ली, जबकि अधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और राहत-बचाव कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की। दौरे के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की ओर से प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने की बात दोहराई गई।

  • नेपाल में बाढ़ का संकट थमा नहीं, कई इलाकों में फिर भारी बारिश और आंधी का अलर्ट, बढ़ी नई आफत की आशंका

    नेपाल में बाढ़ का संकट थमा नहीं, कई इलाकों में फिर भारी बारिश और आंधी का अलर्ट, बढ़ी नई आफत की आशंका


    नई दिल्ली । नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से पैदा हुआ संकट अभी खत्म नहीं हुआ है और इसी बीच मौसम ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को देश के कई हिस्सों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बिजली चमकने का खतरा बताया गया है। बाढ़ से पहले ही प्रभावित लोगों के सामने मौसम की नई चुनौती खड़ी हो गई है।

    मौसम विभाग ने मधेश, कोशी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश की चेतावनी दी है। पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। कोशी, बागमती और गंडकी के ऊंचे हिस्सों में बारिश के साथ बिजली चमक सकती है और बर्फबारी भी हो सकती है। लुंबिनी और कर्णाली के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में भी बर्फ गिरने की संभावना जताई गई है।

    26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 1,377 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं 5,326 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा में 6,827 लोग घायल हुए हैं। बाढ़ के कारण 7,570 घर टूट गए या क्षतिग्रस्त हुए हैं। बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी मुश्किलें पैदा हुई हैं।

    प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल के कारोबार और खासकर चीन के साथ होने वाले व्यापार पर भी पड़ा है। रसुवागढ़ी और तातोपानी सीमा मार्गों को नुकसान पहुंचने के कारण सामान से भरे करीब 500 से 600 कंटेनर अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं। इसके अलावा 200 से अधिक नेपाली कंटेनर बाढ़ के पानी में बह चुके हैं। इससे सीमा के रास्ते होने वाली सामान की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।

    फंसे हुए सामान को वैकल्पिक रास्ते से आगे भेजने की कोशिश की जा रही है। करीब 176 ट्रकों को कोराला मार्ग से भेजने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन इस रास्ते से सामान को पहुंचने में करीब 10 से 12 दिन लग रहे हैं। इससे व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लग सकता है।

    बाढ़ से नेपाल को आर्थिक रूप से भी भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन में देश को चार लाख करोड़ नेपाली रुपये से अधिक के नुकसान की बात सामने आई है। इसमें घरों, सड़कों तथा सरकारी और निजी संपत्तियों को हुआ नुकसान शामिल है। नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद यह आंकड़ा करीब 30 प्रतिशत तक और बढ़ सकता है।

    नेपाल सरकार के सामने अब प्रभावित क्षेत्रों में राहत और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की बड़ी चुनौती है। सरकार के अनुमान के अनुसार देश के पुनर्निर्माण और टूटे हुए ढांचे की मरम्मत के लिए चार से पांच अरब डॉलर तक की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से नेपाल दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सहायता मांग रहा है। ऐसे समय में भारी बारिश, आंधी और बर्फबारी की नई चेतावनी ने पहले से प्रभावित इलाकों में चिंता और बढ़ा दी है।

  • 11 दिन बाद भी नेपाल में तबाही का असर बरकरार, चीन-नेपाल व्यापार मार्ग तबाह होने से आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

    11 दिन बाद भी नेपाल में तबाही का असर बरकरार, चीन-नेपाल व्यापार मार्ग तबाह होने से आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली । नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और हिमस्खलन के 11 दिन बाद भी तबाही का मंजर जारी है। चीन-नेपाल के बीच जमीनी व्यापार का प्रमुख केंद्र ग्यिरोंग पोर्ट और उससे जुड़ी सीमा चौकी पूरी तरह तबाह हो चुकी है। लगातार सामने आ रहीं तस्वीरें इसकी भयावह स्थिति बयां कर रही हैं। चीन ने नेपाल में हुई इस तबाही से हुए नुकसान पर भले ही चुप्पी साध रखी हो, लेकिन इस आर्थिक गलियारे के ठप होने से नेपाल की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति शृंखला पर असर साफ दिखने लगा है। भारत के जाने-माने भू-रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि इस रास्ते होने वाला व्यापार पूरी तरह ठप होने से काठमांडो को अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए भारत पर और अधिक निर्भर होना पड़ेगा।

    महंगाई का दिखने लगा असर

    बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत ट्रांस-हिमालय कनेक्टिविटी नेटवर्क में चीन ग्यिरोंग क्रॉसिंग को एक रणनीतिक केंद्र मानता है। ग्यिरोंग बंद होने से आपूर्ति शृंखला बाधित हो गई है। इससे चीनी सामानों की कमी हो रही है और नेपाल के घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। यहां दोनों देशों के बीच ट्रकों की आवाजाही, माल की चेकिंग, क्लियरेंस और स्टोरेज के लिए बड़े ड्राई पोर्ट और गोदाम बने थे।

    लाखों टन मलबा साफ करने के बाद ही शुरू हो पाएगा मार्ग

    तबाही के बाद व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बहाल करने में अभी काफी समय लगेगा। भारी मालवाहक ट्रैफिक सुरक्षित रूप से फिर से शुरू होने से पहले इंजीनियरों को लाखों टन मलबा साफ करना होगा, ऊंचे पहाड़ी रास्तों को स्थिर करना होगा, हिमस्खलन के कारण ऊपर की ओर बनी झीलों के खतरे को कम करना होगा और बह चुके पुलों का पुनर्निर्माण करना होगा।

    चमत्कार: दो और जिंदगियां बचाई गईं

    अब इसे कुदरत का करिश्मा कहें या चमत्कार, नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के 11वें दिन शनिवार को मलबे में दबे एक चार मंजिला मकान से एक बुजुर्ग महिला को जिंदा निकाला गया। परिजनों ने महिला के जीवित मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी और उनका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर दिया था। वहीं, बचाव दलों ने अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना से जुड़ी एक सुरंग से एक चीनी नागरिक को भी सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के अनुसार, नुवाकोट जिले के बिदुर शहर में 60 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठ एक चार मंजिला इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर कीचड़ और मलबे के नीचे फंसी हुई थीं।

    अब तक 1,344 की मौत

    26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आए हिमस्खलन के बाद भोटेकोशी नदी में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। देश भर में मृतकों का आंकड़ा 1,344 तक पहुंच गया है, जबकि 589 विदेशी नागरिकों सहित लगभग 5,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें भारत के भी 250 से अधिक नागरिक शामिल हैं। तेज धारा देख पहाड़ की ओर भागे 130 लोग, सामने ही बह गया एक साथी… गोरखपुर। पिपराइच निवासी आशुतोष उपाध्याय हाइड्रो पावर में काम कर रहे थे। बचकर किसी तरह पहुंचे हैं। बताया अचानक सभी लोग भागने लगे। नदी की तेज होती धारा देखकर मैं और करीब 130 लोग जान बचाने के लिए पहाड़ की ओर भागे। हम लोग तो बच गए पर एक साथी सामने ही बह गया।

  • मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश और कई क्षेत्रों में अतिवृष्टि की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को भोपाल स्थित होमगार्ड कार्यालय के एसडीआरएफ स्टेट कमांड सेंटर का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदेश में बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों, संभावित बाढ़ और राहत एवं बचाव अभियानों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और बचाव दलों की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कमांड सेंटर से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आपदा प्रबंधन की स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों और संबंधित टीमों से प्रभावित इलाकों की जानकारी ली तथा राहत कार्यों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने बचाव एवं राहत अभियान में जुटे personnel से संवाद भी किया और उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल बारिश का दौर जारी है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की आवश्यकता पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लगातार वर्षा के कारण निचले इलाकों में पानी भरने जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिससे नागरिकों के साथ-साथ पशुधन के लिए भी चुनौती उत्पन्न हो सकती है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक महीने के दौरान एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने मिलकर 2783 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। अचानक आई बाढ़ और जलभराव जैसी परिस्थितियों में इन टीमों की तत्परता से कई लोगों और मवेशियों को बचाने में मदद मिली है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दो से चार दिनों में प्रदेश में ऐसी कोई गंभीर आपात स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन बचाव दलों को लगातार सतर्क रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की स्थिति में कुछ ही समय के भीतर पानी का स्तर बढ़ने से निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन, पुलिस और बचाव दलों की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।

    डॉ. यादव ने आपदा प्रबंधन में पुलिस और बचाव दलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवानों ने अचानक आई बाढ़ जैसी परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए नागरिकों और पशुधन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार का प्रयास है कि संकट की स्थिति में प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश का मौसम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले कुछ दिनों में भी वर्षा की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से सीधा संवाद भी किया और वहां की परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए। सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा तथा किसी भी संभावित आपदा में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखना है।

  • नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा, त्रिशूली परियोजना के लापता कर्मियों की तलाश में भारतीय और नेपाली दल जुटे

    नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा, त्रिशूली परियोजना के लापता कर्मियों की तलाश में भारतीय और नेपाली दल जुटे

    नई दिल्ली ।नेपाल में आई भीषण बाढ़ और अचानक आई जल आपदा के बाद हालात अब भी बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गुरुवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 1252 हो गई और करीब 5083 लोगों के लापता होने का अनुमान है। शव नहीं मिलने या पहचान नहीं होने के कारण कई परिवार प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर रहे हैं।

    त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कई कर्मचारी भी बाढ़ के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच परियोजना में काम करने वाले एक कर्मचारी ने आरोप लगाया कि बाढ़ आने से पहले चीन की कंपनी के एक सुपरवाइजर ने 265 कर्मचारियों को सुरंग के भीतर छोड़ दिया और खुद बाहर निकल गया।

    कर्मी के अनुसार सुरंग के अंदर मौजूद मजदूरों ने एक तेज आवाज सुनी थी। इसके बाद उन्होंने अपने सुपरवाइजर से सुरंग से बाहर निकलने की अनुमति मांगी थी। इस घटना से परियोजना में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा और आपदा के समय प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल उठे हैं।

    लापता लोगों की तलाश में भारत भी नेपाल की मदद कर रहा है। भारतीय सुरंग बचाव दल नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे पावर हाउस में बचाव अभियान चला रहा है। भारतीय दूत ने स्याब्रूबेसी स्थित भारतीय टनल बचाव दल के आधार शिविर का दौरा किया और अभियान की प्रगति की जानकारी ली।

    बचाव दलों ने विशेष उपकरणों की मदद से सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक का निरीक्षण किया है। अब सुरंग के और अंदर जाने के लिए भारी उपकरण लाने की तैयारी की जा रही है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय और नेपाली दल बचाव कार्य जारी रखे हुए हैं।

    इस बीच नेपाल के उत्तरी हिस्सों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश होने के कारण जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसका असर भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के अलावा रसुवा और नुवाकोट जिलों से होकर बहने वाली छोटी नदियों और जलधाराओं पर भी पड़ सकता है।

    नेपाल में हालिया तबाही के बाद हिमनदों की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। तिब्बती पठार के ग्लेशियरों में बदलाव और उनके अस्थिर होने की आशंका को भविष्य में अचानक बाढ़ के संभावित कारणों से जोड़ा जा रहा है। पिछले कुछ दशकों में इस क्षेत्र के ग्लेशियरों में उल्लेखनीय कमी आने की बात भी सामने आई है।

    26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई थी। इससे उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी नुकसान हुआ। मौजूदा परिस्थितियों में लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता फिर बढ़ा दी है।

    राहत सामग्री के वितरण को व्यवस्थित करने के लिए नेपाल सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की है। इसके तहत निजी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को नेपाल में राहत सामग्री सीधे भेजने या ले जाने से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा। सीमा पर राहत सामग्री के लिए निर्धारित कस्टम प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उसे आगे ले जाने की अनुमति दी जाएगी।

    बाढ़ के बाद जारी बचाव अभियान में भारत की सहायता से सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। वहीं नेपाल में दोबारा बढ़ते जलस्तर और संभावित आपदा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तथा बचाव एजेंसियां सतर्क हैं। लगातार निगरानी, समय पर चेतावनी और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

  • नेपाल बाढ़ के बाद हिमालयी राज्यों में ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन के खतरे पर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कीं

    नेपाल बाढ़ के बाद हिमालयी राज्यों में ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन के खतरे पर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कीं

    नई दिल्ली ।नेपाल में पिछले सप्ताह आई भयावह बाढ़ के बाद भारत सरकार ने हिमालयी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में संभावित प्राकृतिक आपदाओं को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। ग्लेशियल झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ और हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए केंद्र ने बचाव और तैयारी की मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की है।

    गुरुवार को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद संवेदनशील स्थानों की पहचान, निगरानी व्यवस्था और किसी संभावित आपदा से पहले चेतावनी जारी करने के उपायों पर चर्चा की गई।

    बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों तथा संबंधित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और वैज्ञानिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी तैयारियों की जानकारी साझा की।

    ग्लेशियल झीलों की लगातार निगरानी को बैठक में प्रमुख प्राथमिकता के तौर पर रखा गया। अधिकारियों से संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और बर्फ से ढके क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने को कहा गया, ताकि वहां होने वाले बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सके।

    हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों के फटने से अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आने का खतरा रहता है। ऐसे में प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्रों और पानी के प्रवाह के रास्तों की पहले से पहचान करना आपदा प्रबंधन की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

    बैठक में अत्यधिक जोखिम वाले स्थानों को चिह्नित करने और संभावित जलप्रवाह मार्गों का निर्धारण करने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य खतरे की स्थिति में संबंधित प्रशासन को समय रहते सूचना देना और प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई शुरू करना है।

    केंद्रीय गृह सचिव ने जोखिम बढ़ने की स्थिति में संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों की सक्रिय निगरानी को जरूरी बताया। समय पर चेतावनी मिलने से प्रशासन को राहत और बचाव के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने तथा निकासी की प्रक्रिया शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

    बैठक में राज्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में आपदा से निपटने की तैयारियों और रणनीतियों की जानकारी दी। इसके बाद राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासन तथा वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संभावित ग्लेशियल झील विस्फोट या हिमस्खलन जैसी घटनाओं से निपटने की तैयारी केवल आपदा आने के बाद राहत और बचाव तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जोखिम की पहले पहचान, निवारक कदम और स्थानीय समुदायों की तैयारी को भी योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

    राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी आपदा प्रबंधन तैयारियों की नियमित समीक्षा करने की सलाह दी गई। साथ ही प्रारंभिक चेतावनी और निकासी व्यवस्था में मौजूद कमियों को पहचानकर उनमें समय रहते सुधार करने को कहा गया।

    इस पूरी कवायद का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के संभावित प्रभाव को कम करना और प्रशासन की प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है। खास तौर पर संवेदनशील इलाकों में निगरानी, चेतावनी और स्थानीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

  • नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी

    नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी


    नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 579 हो गई है, जबकि करीब 2 हजार लोग अब भी लापता हैं। भारत के भी सैकड़ों नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। आपदा का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी जुड़ा है, लेकिन चीन की ओर से अब तक सिर्फ 5 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। इससे चीन की ओर से वास्तविक नुकसान और जनहानि की जानकारी छिपाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन में तबाही, लेकिन जानकारी बेहद सीमित

    द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का सरकारी मीडिया भी इस आपदा को लेकर व्यापक रिपोर्टिंग नहीं कर रहा है। कुछ पत्रकार प्रभावित इलाकों में पहुंचते हैं, लेकिन वहां पीड़ितों और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के बजाय रिपोर्टिंग मुख्य रूप से सरकारी राहत एवं बचाव प्रयासों तक सीमित रहती है। रिपोर्टों में चीन की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों को प्रमुखता दी जाती है, जबकि आम लोगों की स्थिति सामने नहीं आ रही है।

    नेपाल में बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि चीन के प्रभावित हिस्सों में भी नुकसान व्यापक हो सकता है। इसके बावजूद चीन की ओर से जनहानि और तबाही का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    तिब्बत में पत्रकारों और स्थानीय लोगों पर पाबंदियों का आरोप

    चीन तिब्बत पर अपना दावा करता है, जबकि तिब्बत की स्वायत्तता और स्वतंत्रता की मांग लंबे समय से उठती रही है। रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों की पहुंच पर कड़े प्रतिबंध हैं। स्थानीय लोगों के पत्रकारों से बातचीत करने पर भी कार्रवाई का खतरा रहता है।

    तिब्बत में भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को लेकर भी चीन की नीतियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है। ऐसे में मौजूदा आपदा के दौरान भी स्थानीय लोगों की आवाज और जमीनी हालात के सामने न आने पर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन ने भेजी राहत टीम, शी जिनपिंग ने की बैठक

    जानकारी के मुताबिक, चीन ने प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव दल भेजे हैं। हालांकि, इन टीमों ने मौके पर किस स्तर पर और क्या काम किया, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    चीनी मीडिया ने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की। वहीं, प्रीमियर ली कियांग ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा भी किया।

    दो और ग्लेशियरों पर नजर

    नेपाल के मौसम विभाग के अधिकारियों ने अब दो और ग्लेशियरों पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश शुरू की है। ये दोनों ग्लेशियर उस ग्लेशियर के आसपास स्थित हैं, जिसके टूटने के बाद बुधवार को विनाशकारी बाढ़ आई थी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में आगे किसी और आपदा की आशंका को लेकर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

    4 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया

    नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताजा अपडेट के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक करीब 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। हालांकि लापता लोगों की संख्या अभी भी बढ़ रही है और ताजा आंकड़े के अनुसार 1,924 लोग लापता हैं।

    बचाव अभियान को तेज करने के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 15,000 से ज्यादा जवानों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है।

    लापता विदेशियों के आंकड़े अलग-अलग

    लापता विदेशी नागरिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग सरकारी आंकड़े सामने आए हैं। एक सरकारी रिपोर्ट में 517 विदेशी नागरिकों और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लापता होने की बात कही गई है।

    वहीं, नेपाल पुलिस के पहले जारी आंकड़ों में लापता विदेशी नागरिकों की संख्या 575 बताई गई थी। इनमें 36 देशों के नागरिक शामिल हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक लापता विदेशियों में 65 अमेरिकी, 62 यूक्रेनी और 33 ब्रिटिश नागरिक भी हैं।

    इसके अलावा प्रभावित इलाकों से 149 नेपाली पर्यटक और 1,407 स्थानीय नागरिक भी लापता बताए गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोज, राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं।

  • Weather Alert: एमपी, यूपी, राजस्थान और हिमाचल में भारी बारिश से संकट, दिल्ली में 60 किलोमीटर प्रति घंटे हवाओं की चेतावनी

    Weather Alert: एमपी, यूपी, राजस्थान और हिमाचल में भारी बारिश से संकट, दिल्ली में 60 किलोमीटर प्रति घंटे हवाओं की चेतावनी

    नई दिल्ली । देश के कई राज्यों में मानसून की सक्रियता के कारण भारी बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में लगातार बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गई हैं, नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं।

    राजस्थान के झालावाड़ में भारी बारिश के कारण मनोहर थाना क्षेत्र के झीकनी गांव स्थित सरकारी स्कूल में पानी भर गया। स्कूल में मौजूद 30 से अधिक विद्यार्थी पानी के बीच फंस गए। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। क्षेत्र में पानी की स्थिति को देखते हुए कालीसिंध बांध के 12 गेट भी खोले गए हैं।

    राजस्थान के बाड़मेर और बीकानेर में भी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बाड़मेर में रविवार रात करीब ढाई घंटे हुई तेज बारिश के बाद निचले इलाकों में दुकानों और घरों तक पानी पहुंच गया। श्रीडूंगरगढ़ में सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी जमा होने की जानकारी सामने आई है। कई प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर भी जलभराव हुआ।

    उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, शारदा और सरयू समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। फर्रुखाबाद और बिजनौर क्षेत्रों में गंगा का पानी हाईवे तक पहुंच गया है। कई सड़कें डूबने से आवागमन प्रभावित हुआ है। करीब 40 गांवों के बाढ़ की चपेट में होने की जानकारी है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों तक पहुंचने वाले कई रास्ते जलमग्न हो गए हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर के छह प्रवेश द्वारों में से मुख्य गंगा द्वार को भी बढ़ते जलस्तर के कारण बंद किया गया है। मणिकर्णिका घाट तक पानी पहुंचने से अंतिम संस्कार और अन्य गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।

    मध्य प्रदेश में भी बारिश का असर कई जिलों में देखने को मिल रहा है। भोपाल में लगातार बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर गया है। डिंडौरी में नर्मदा नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने की स्थिति बनी हुई है। राजगढ़ में निर्माणाधीन पुल से एक कार बह जाने की घटना में नौ लोगों की मौत हुई, जबकि दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण 124 सड़कें बंद हैं और 255 बिजली ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं। मंडी में सबसे अधिक 51 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में 39 और शिमला में 13 सड़कें बंद होने से आवाजाही प्रभावित है। इस मानसून में प्रदेश में बारिश और अन्य संबंधित घटनाओं से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है।

    सिक्किम में तेज बारिश के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग दस पर मलबा आने से सड़क बंद हो गई। यह मार्ग सिक्किम को पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है। सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

    उत्तराखंड के सभी जिलों में बारिश का दौर जारी है और चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट की स्थिति बताई गई है। वहीं बिहार के 12 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी है। ओडिशा में भी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना के कारण 16 अगस्त तक भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

    दिल्ली में भी अगले कुछ घंटों के दौरान तेज आंधी और भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है। ऐसे में देश के कई हिस्सों में प्रशासन और स्थानीय लोगों को जलभराव, बाढ़ और तेज हवाओं को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।