Tag: Floods

  • हिमालय में बार-बार क्यों आती है तबाही? बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का कनेक्शन समझिए

    हिमालय में बार-बार क्यों आती है तबाही? बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का कनेक्शन समझिए


    काठमांडू।
    नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। खूबसूरत पहाड़ों और घाटियों के लिए पहचाना जाने वाला हिमालय दरअसल प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना, भूकंप और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं समय-समय पर बड़े संकट में बदल जाती हैं।

    लेकिन आखिर हिमालय से सटे इलाकों में आपदाओं का खतरा इतना ज्यादा क्यों है? इसके पीछे भूगर्भीय बनावट, पहाड़ों की ढलान, भारी बारिश और तेजी से बदलती जलवायु जैसे कई कारण एक साथ काम करते हैं।

    भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर है बड़ी वजह

    हिमालय दुनिया की सबसे युवा प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। इसका निर्माण भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार टक्कर से हुआ है। खास बात यह है कि दोनों प्लेटों की गति आज भी जारी है।

    इन प्लेटों की लगातार हलचल पृथ्वी के भीतर भूगर्भीय तनाव पैदा करती है। इसी कारण हिमालयी क्षेत्र तकनीकी रूप से बेहद सक्रिय है और यहां भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है।

    हिमालय से जुड़े भारत के कई हिस्से भी उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्रों में आते हैं, खासकर भूकंपीय क्षेत्र IV और V में शामिल इलाके।

    पहाड़ों की युवा संरचना क्यों बढ़ाती है खतरा?

    हिमालय की अपेक्षाकृत युवा भूगर्भीय संरचना का एक परिणाम यह भी है कि यहां कई जगह मिट्टी, चट्टान और तलछट अपेक्षाकृत अस्थिर हैं। तेज बारिश होने पर यही सामग्री ढलानों से नीचे खिसकने लगती है।

    इससे भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। जब बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा अचानक नीचे आता है तो सड़कें, पुल और बस्तियां इसकी चपेट में आ सकती हैं।

    खड़ी ढलानें पानी को बना देती हैं खतरनाक

    हिमालय का भूभाग बेहद खड़ा है। यहां गहरी घाटियां और तीखी ढलानें हैं। भारी बारिश के दौरान पानी पहाड़ों पर ज्यादा देर ठहरने के बजाय तेजी से नीचे की ओर बहता है और संकरी नदी घाटियों में पहुंच जाता है।

    तेज बहाव अपने साथ चट्टान, मिट्टी, पेड़ और दूसरे मलबे को भी बहाकर ले जा सकता है। यही प्रक्रिया अचानक आने वाली बाढ़ को और ज्यादा विनाशकारी बना देती है।

    संकरी घाटियों में पानी का वेग बहुत तेजी से बढ़ सकता है। इसका सीधा असर नदी किनारे बने घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे पर पड़ता है।

    जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई मुश्किल

    हिमालय की प्राकृतिक संवेदनशीलता के ऊपर अब जलवायु परिवर्तन का अतिरिक्त दबाव भी पड़ रहा है। हिमालय को कई बार ‘तीसरा ध्रुव’ कहा जाता है क्योंकि ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर यहां बड़ी मात्रा में बर्फ और ग्लेशियर मौजूद हैं।

    बढ़ते तापमान के कारण कई ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं। इसके साथ ही जमी हुई जमीन और पहाड़ी ढलानों की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

    ग्लेशियर की झील फटी तो तबाही और तेज

    ग्लेशियरों के पिघलने से उनके आसपास बनी झीलों का आकार बढ़ सकता है। इन झीलों को रोकने वाली प्राकृतिक बर्फ, चट्टान या मलबे की दीवार अगर पानी के दबाव, भूस्खलन या किसी अन्य वजह से टूट जाए तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है।

    इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है।

    ऐसी बाढ़ कुछ ही समय में निचली घाटियों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती है। खासकर उन इलाकों में खतरा ज्यादा होता है जहां बस्तियां और बुनियादी ढांचा नदियों के बेहद करीब बना हुआ है।

    बादल फटने से कुछ मिनटों में बदल सकते हैं हालात

    हिमालयी इलाकों में बादल फटना भी अचानक बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। इसमें बेहद कम समय में एक छोटे क्षेत्र में बहुत ज्यादा बारिश होती है।

    पहाड़ी इलाकों में इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। अचानक हुई मूसलाधार बारिश एक साथ भूस्खलन, मलबा प्रवाह और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं को जन्म दे सकती है।

    नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और अतिरिक्त पानी का भार पहले से कमजोर पहाड़ी ढलानों को अस्थिर कर सकता है।

    हिमालय में आपदाएं अलग-अलग नहीं, एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं

    हिमालयी क्षेत्रों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यहां एक प्राकृतिक घटना दूसरी आपदा को जन्म दे सकती है। भारी बारिश से ढलान कमजोर होता है, भूस्खलन नदी का रास्ता रोक सकता है और बाद में जमा पानी अचानक निकलकर बाढ़ ला सकता है। वहीं ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झीलों के टूटने पर भी निचले इलाकों में अचानक जलप्रलय आ सकता है।

    यानी हिमालय में भूगर्भीय सक्रियता, खड़ी ढलान, अस्थिर चट्टानें, भारी बारिश, ग्लेशियरों में बदलाव और जलवायु परिवर्तन मिलकर आपदा का जोखिम बढ़ाते हैं।

    इसीलिए नेपाल, भारत, भूटान और हिमालय से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, शुरुआती चेतावनी प्रणाली, नदी घाटियों में सुरक्षित निर्माण और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

  • UP: कुशीनगर में गंडक नदी में मिले 4 और शव, नेपाल बाढ़ के बाद अब तक 13 शव बरामद

    UP: कुशीनगर में गंडक नदी में मिले 4 और शव, नेपाल बाढ़ के बाद अब तक 13 शव बरामद


    नई दिल्ली।
    नेपाल (Nepal) में आई भीषण बाढ़ (Devastating floods) की तबाही का असर अब सीमा पार उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भी दिखने लगा है. कुशीनगर (Kushinagar) में गंडक नदी (Gandak River) से रविवार को चार और शव बरामद किए गए. पिछले चार दिनों में नदी से अब तक कुल 13 शव निकाले जा चुके हैं, जिनके नेपाल से बहकर आने की आशंका जताई जा रही है।

    रविवार को SDRF की टीम छितौनी बांध के भेड़ियारी ठोकर नंबर-3 के पास नदी की निगरानी कर रही थी. इसी दौरान जवानों को पानी में चार शव दिखाई दिए. टीम नदी में उतरी और सभी को बाहर निकाल लिया. इनमें दो महिलाएं और दो पुरुष हैं. इससे एक दिन पहले भी इसी इलाके में तीन शव मिले थे. बरामद शवों की जानकारी नेपाल के पड़ोसी जिले के अधिकारियों को दे दी गई है. हालांकि, अभी तक किसी की पहचान नहीं हो पाई है।

    खड्डा थाने के पुलिस अधिकारी संदीप कुमार सिंह के मुताबिक, जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद चारों शवों को मोर्चरी भेज दिया गया. कुशीनगर की मोर्चरी में जगह भर जाने के कारण बाकी शवों को गोरखपुर भेजा गया है. पुलिस शवों की पहचान कराने की कोशिश कर रही है, ताकि पता चल सके कि इनमें नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोग कौन हैं.


    नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही

    नेपाल में 26 अगस्त को तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद भारी बाढ़ आई थी. बर्फ, चट्टानों और मलबे के तेज बहाव ने कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया. बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा, जबकि कई हाइड्रोपावर स्टेशन भी तबाह हो गए. भोटेकोशी नदी के रास्ते आगे बढ़े बाढ़ के पानी ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई. नेपाल में रविवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 788 पहुंच गई थी. वहीं, 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए गए हैं।

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में 275 से ज्यादा भारतीय नागरिक संपर्क से बाहर हैं. इनके अलावा 128 भारतीय मूल के लोगों से भी संपर्क नहीं हो पाया है. रविवार को मंत्रालय ने 149 लोगों के सुरक्षित बचाए जाने की सूची जारी की. कुशीनगर में मिले शवों की पहचान होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इनमें नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोग शामिल हैं या नहीं।

  • बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर

    बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर


    काठमांडो। नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी तंत्र में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाने के बाद अब राजधानी काठमांडो की आपूर्ति व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। देश के प्रमुख सप्लाई रूट पृथ्वी हाईवे के बंद होने से काठमांडो घाटी में खाद्य सामग्री, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है। हाईवे को पूरी तरह कब तक खोला जा सकेगा, इसकी अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजधानी में जरूरी वस्तुओं की नियमित आपूर्ति बनाए रखना है।

    पृथ्वी हाईवे बंद होने से काठमांडो की सप्लाई क्यों प्रभावित?

    काठमांडो के लिए नागढुंगा से भरतपुर तक पृथ्वी हाईवे का करीब 180 किलोमीटर हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग के जरिए राजधानी में बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ, पेट्रोलियम उत्पाद और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं पहुंचती हैं।

    बुधवार की बाढ़ में कम से कम 19 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं त्रिशूली कॉरिडोर और आसपास के राजमार्गों पर करीब 40 किलोमीटर सड़क बह गई। काठमांडो घाटी ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता पुलिस अधीक्षक नरेश राज सुबेदी ने बताया कि अधिकारी रास्ता बहाल करने के लिए पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, लेकिन शुक्रवार तक हाईवे खुलने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    वैकल्पिक रास्तों से पहुंच रहा सामान

    सड़क विभाग के इंजीनियर राजीव मानंधर के मुताबिक शुक्रवार शाम तक गल्छी वाले हिस्से में बारी-बारी से एकतरफा यातायात शुरू कर दिया गया था। वहीं गलौंडी-घाटबेसी-जारेखेत हिस्से में दोनों दिशाओं से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी।

    हालांकि बारिश होने पर इन रास्तों को दोबारा बंद करना पड़ सकता है। भूस्खलन के बाद सड़कों पर जमा मलबा हटाने का काम लगातार चल रहा है और शाम पांच बजे तक अर्थमूवर मशीनों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा कुछ वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी काठमांडो में जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।

    कालिमाटी बाजार में सब्जियों की आवक घटी

    पृथ्वी हाईवे बंद होने का असर काठमांडो के प्रमुख कालिमाटी फल एवं सब्जी बाजार में भी दिखाई दिया है। मंगलवार को यहां 775 टन सब्जियां, फल और मछली पहुंची थी। बुधवार को आवक 771 टन रही, लेकिन गुरुवार को यह घटकर सिर्फ 477 टन रह गई।

    बाजार विकास बोर्ड के सूचना अधिकारी बिनय श्रेष्ठ के अनुसार पृथ्वी हाईवे से आने वाला सामान रास्ते में फंसा हुआ है। इस मार्ग से सब्जियों की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है, हालांकि अन्य रास्तों से कुछ सामान बाजार तक पहुंच रहा है।

    चार-पांच दिन का ईंधन स्टॉक

    हाईवे बंद होने के कारण पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने फिलहाल लोगों को राहत दी है। निगम के मुताबिक थानकोट डिपो में मौजूद पेट्रोलियम उत्पाद चार से पांच दिन तक चलने के लिए पर्याप्त हैं।

    निगम के उप निदेशक मनोज कुमार ठाकुर ने कहा कि इस अवधि के भीतर पृथ्वी हाईवे के खुलने की उम्मीद है। इसलिए लोगों को ईंधन की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार भी जरूरी वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    कालाबाजारी पर सरकार की नजर

    आपदा के बीच सरकार को इस बात की भी चिंता है कि कहीं कारोबारी कृत्रिम कमी पैदा कर सामान महंगा न कर दें। वाणिज्य, आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने लोगों से बाजार में कालाबाजारी या कृत्रिम कमी से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की अपील की है।

    विभाग और स्थानीय प्रशासन बाजारों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने त्योहारों के मौसम तथा आपदा प्रबंधन की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक समन्वय इकाई बनाई है। संबंधित सरकारी एजेंसियों को भी इसी तरह की इकाइयां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    रसुवा से धादिंग तक भारी तबाही

    बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी तंत्र में अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता और प्रभावित लोगों में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

    बाढ़ से सरकारी और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान हुआ है। इसे हाल के वर्षों की बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से राहत अभियान के साथ-साथ राजधानी की आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

    उपभोक्ता संगठनों ने मांगी सख्ती

    उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से वैकल्पिक मार्गों के जरिए जरूरी सामान की आपूर्ति बनाए रखने और संकट का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

    उपभोक्ता अधिकार संरक्षण-नेपाल मंच के महासचिव विष्णु प्रसाद तिमिल्सिना ने कहा कि कालाबाजारी, कृत्रिम कमी और मनमाने तरीके से कीमत बढ़ाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि संकट के समय लोगों को यह भरोसा मिलना जरूरी है कि सरकार उनके साथ है और जरूरी वस्तुओं की कमी नहीं होने दी जाएगी

  • लिरुंग ग्लेशियर टूटने से त्रिशूली में आई प्रलयंकारी बाढ़, 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज तबाह

    लिरुंग ग्लेशियर टूटने से त्रिशूली में आई प्रलयंकारी बाढ़, 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज तबाह


    नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने उत्तरी इलाकों में भारी तबाही मचा दी। जिन क्षेत्रों में कभी पर्यटन और आबादी की रौनक दिखाई देती थी, वहां अब बाढ़ के बाद मलबा और तबाही का मंजर नजर आ रहा है। कई घर और बस्तियां पूरी तरह बह गईं, जबकि बड़ी संख्या में मकान मलबे में तब्दील हो गए।

    तिब्बत से निकलकर नेपाल आने वाली त्रिशूली नदी में अचानक आए तेज बहाव ने इस तबाही को और भयावह बना दिया। यह नदी तेज धारा और व्हाइट वाटर राफ्टिंग के लिए जानी जाती है, लेकिन बुधवार को इसका रूप बेहद विनाशकारी हो गया। नदी में पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा आया, जिसकी चपेट में आने से कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

    बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 35 मोटरेबल ब्रिज, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर सड़क बुरी तरह प्रभावित हुई है। तेज बहाव के सामने मजबूत कंक्रीट के पुल भी टिक नहीं सके। कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं।

    1,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद हुई तबाही में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उनकी तलाश लगातार की जा रही है।

    इस आपदा के बीच कई लोगों की जान भी बचाई गई है। हालांकि, बाढ़ और मलबे की तेज लहर ने जिन इलाकों को अपनी चपेट में लिया, वहां रहने वाले लोगों के लिए बच निकलना बेहद मुश्किल था।

    भूकंप और GLOF के बाद सामने आई नई वजह

    नेपाल में अचानक आई बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआत में कई तरह की आशंकाएं सामने आई थीं। पहले इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया और बाद में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की संभावना भी जताई गई।

    हालांकि, बाद में सैटेलाइट तस्वीरों और भूकंपीय आंकड़ों के विश्लेषण से एक अलग तस्वीर सामने आई। जांच के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लिरुंग ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा था। इसके बाद बड़ी मात्रा में मलबा और पानी नीचे की ओर तेजी से बढ़ा और त्रिशूली नदी में विनाशकारी बाढ़ की स्थिति बन गई।

    यानी जिस घटना ने शुरुआत में सिर्फ एक प्राकृतिक हलचल का रूप लिया था, उसने कुछ ही समय में नदी के बहाव को प्रलयंकारी बना दिया। अब नेपाल में राहत और पुनर्निर्माण के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों को फिर से जोड़ना है, जहां सड़कें, पुल और बस्तियां बाढ़ की चपेट में आकर तबाह हो गई हैं।

  • नेपाल में अचानक बाढ़ की 3 थ्योरी, भारत तक पहुंच सकता है पानी, बिहार-UP में अलर्ट

    नेपाल में अचानक बाढ़ की 3 थ्योरी, भारत तक पहुंच सकता है पानी, बिहार-UP में अलर्ट


    नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन में भारी तबाही मचाई। कई पुल टूट गए और बिजली ढांचे को नुकसान पहुंचा। शुरुआती जांच में बाढ़ की वजह को लेकर तीन संभावनाएं सामने आई हैं—पहाड़ से मलबा गिरने से नदी का रास्ता रुकना, भूकंपीय गतिविधि और ग्लेशियल झील का फटना। हालांकि, अभी इनमें से किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है।

    बाढ़ का पानी तिब्बत सीमा के पास ल्हेंदे नदी के ऊपरी हिस्से से आने की बात कही जा रही है। बुधवार सुबह करीब 9 बजे पानी नेपाल के रसुवा जिले में पहुंचा और इसके बाद तेज बहाव नुवाकोट और धादिंग तक फैल गया। रसुवागढ़ी, न्यू त्रिशूली ब्रिज और मालेखु ब्रिज के आसपास बाढ़ से भारी नुकसान की जानकारी सामने आई है।

    नदी में मलबा गिरने से बनी झील जैसी स्थिति?
    पहली आशंका यह है कि पहाड़ से बर्फ, चट्टानें और मलबा खिसककर नदी में गिर गया। इससे नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए रुक गया और पीछे पानी जमा होता रहा। दबाव बढ़ने पर यह रुकावट टूट गई और जमा पानी तेज सैलाब के रूप में नीचे की ओर बह निकला।

    नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को रसुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर दूर बर्फ और चट्टानों के खिसकने के निशान मिले हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में भी नदी का फैलाव अचानक बढ़ता दिखाई दिया है। हालांकि, इन तस्वीरों से अभी यह साबित नहीं होता कि बाढ़ ग्लेशियर झील फटने से ही आई।

    भूकंप वाली थ्योरी कमजोर
    दूसरी आशंका भूकंप से जुड़ी थी। बाढ़ से कुछ समय पहले तिब्बत के इलाके में कंपन दर्ज किया गया था। शुरुआत में इसे भूकंप माना गया, लेकिन अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के अपडेट के मुताबिक भूकंपीय गतिविधि लैंडस्लाइड की वजह से दर्ज हुई थी। इससे बाढ़ के पीछे भूकंप को मुख्य कारण मानने की संभावना कमजोर हुई है।

    क्या ग्लेशियल झील फटी?
    तीसरी संभावना GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की है। पहाड़ों पर बनी बर्फीली झील का पानी अचानक बाहर निकलने पर नीचे की ओर बेहद तेज बहाव बन सकता है।

    नेपाल के मौसम विभाग के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी मिन कुमार आर्याल के अनुसार, भोटेकोशी में आई बाढ़ केवल बारिश की वजह से नहीं हुई। रसुवा में पिछले 24 घंटे में 7 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश नहीं हुई थी। ऐसे में ग्लेशियल झील के फटने की आशंका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल बाढ़ की असली वजह स्पष्ट नहीं है और तीनों संभावनाओं की जांच जारी है।

    भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
    नेपाल से निकलने वाली नदियों के जरिए बाढ़ का पानी भारत तक पहुंच सकता है। त्रिशूली नदी देवघाट में काली गंडकी से मिलकर नारायणी बनती है। भारत में वाल्मीकिनगर के पास यही नदी गंडक कहलाती है। इसलिए गंडक के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। केंद्रीय जल आयोग ने बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक किनारे बसे इलाकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बिहार के 6 जिलों में निगरानी
    बिहार में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली पर नजर रखी जा रही है। पश्चिम चंपारण नेपाल से आने वाले पानी के रास्ते में पड़ने वाला पहला बड़ा भारतीय जिला है। बेतिया, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में NDRF की टीमें तैनात की गई हैं, जबकि SDRF भी संवेदनशील क्षेत्रों में मौजूद है।

    यूपी के महराजगंज-कुशीनगर भी अलर्ट
    गंडक में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर जिलों को भी सतर्क किया गया है। गंडक आगे हाजीपुर और सोनपुर के पास गंगा में मिलती है। हालांकि, मैदानी इलाकों में पहुंचने के बाद नदी फैलती है, जिससे पानी की रफ्तार कम होने की संभावना रहती है। वहीं कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा का रास्ता अलग है। नेपाल से आई इस बाढ़ का सीधा पानी इन नदियों में नहीं जाने की बात कही जा रही है।

    फिलहाल भारत में सबसे ज्यादा निगरानी नारायणी से वाल्मीकिनगर और फिर गंडक के रास्ते उत्तर बिहार तक के इलाकों में है। नेपाल में बाढ़ की वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन पानी के भारत पहुंचने का रास्ता तय है नेपाल से नारायणी, नारायणी से गंडक और फिर गंगा।

  • नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने मचाई तबाही, 100 मौतों का दावा; बालेन शाह बोले- ‘एकजुट होने की जरूरत’

    नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने मचाई तबाही, 100 मौतों का दावा; बालेन शाह बोले- ‘एकजुट होने की जरूरत’


    काठमांडू।
    नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार तड़के नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से नदी किनारे बसे कई इलाकों में पानी घुस गया। बाढ़ से घरों, सड़कों और कई महत्वपूर्ण ढांचों को नुकसान पहुंचने की खबर है। इसके बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया है।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 100 लोगों के मौत हो चुकी है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 1000 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। हालांकि, अलग-अलग स्तर पर सामने आ रहे आंकड़ों में अंतर है और स्थानीय प्रशासन की ओर से मृतकों, लापता लोगों और संपत्ति के नुकसान का अंतिम आंकड़ा जारी किया जाना बाकी है।

    कई बस्तियां बाढ़ की चपेट में

    उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष चमेली गुरुङ के मुताबिक, भोटेकोशी नदी के उफान से करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं। इनमें स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मैलुंग, सल्लेतार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार जैसे इलाके शामिल हैं।

    बाढ़ की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। नदी के आसपास रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू किया गया।

    राहत और बचाव अभियान जारी

    सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान चला रही हैं। अब तक कई शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है।

    हालांकि, 1000 से ज्यादा लोगों के बह जाने का दावा फिलहाल आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हुआ है। प्रशासन की ओर से लापता लोगों और प्रभावित परिवारों का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। ऐसे में आपदा की वास्तविक स्थिति का आकलन राहत अभियान आगे बढ़ने के बाद ही हो सकेगा।

    बालेन शाह ने की एकजुट होने की अपील

    आपदा के बीच काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने लोगों से एकजुट होकर प्रभावित परिवारों की मदद करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुश्किल वक्त में सभी को साथ खड़े होने की जरूरत है।

    नेपाल में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे और बेहतर आपदा प्रबंधन की जरूरत को सामने ला दिया है।

  • दिल्ली में बारिश से बढ़ा यमुना का जलस्तर, असम में बाढ़ से 98 मौतें, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

    दिल्ली में बारिश से बढ़ा यमुना का जलस्तर, असम में बाढ़ से 98 मौतें, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय है। रविवार को दिल्ली समेत उत्तर भारत, मध्य भारत और दक्षिणी राज्यों के कई इलाकों में बारिश होने की संभावना है। राजधानी में पिछले आठ दिनों से बारिश का दौर जारी है, जिसके चलते यमुना नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, असम में बाढ़ के कारण अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है। हिमाचल प्रदेश और केरल में भी बारिश से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

    कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम बंगाल और उससे सटे उत्तरी ओडिशा के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। यह सिस्टम 8 अगस्त को विकसित हुआ और अब पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

    रविवार को छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा असम, मेघालय, बिहार, पूर्वी राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, केरल, तटीय कर्नाटक, लक्षद्वीप, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भी बारिश हो सकती है।

    दिल्ली में हल्की बारिश, यमुना का जलस्तर बढ़ा
    राजधानी दिल्ली में लगातार बारिश के चलते यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। रविवार को दिल्ली में हल्की बारिश का अनुमान है। हरियाणा और पंजाब में भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। लगातार हो रही बारिश के कारण राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में मौसम का असर साफ दिखाई दे रहा है।

    ओडिशा-छत्तीसगढ़ में ऑरेंज अलर्ट
    IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तरी ओडिशा के आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण ओडिशा में भारी बारिश की संभावना है। इसे देखते हुए ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    हिमालयी राज्यों में भी अगले दिनों बारिश
    जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमालयी इलाकों में अगले छह से सात दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। दक्षिण भारत में भी मानसून सक्रिय रहेगा। रविवार को तटीय कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप और माहे में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में पूर्वी, मध्य, उत्तरी और दक्षिणी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है।

  • देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से बिगड़े हालात… असम में बाढ़ से 47 मौतें, लाखों लोग प्रभावित

    देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से बिगड़े हालात… असम में बाढ़ से 47 मौतें, लाखों लोग प्रभावित


    नई दिल्ली ।
    देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश (Monsoon Rain) का कहर लगातार जारी है। सबसे गंभीर स्थिति असम (Assam) में है, जहां बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 47 हो गई है। पिछले 24 घंटों में छह और लोगों की जान गई है। वहीं, बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 7.21 लाख से अधिक हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, राज्य के 11 जिलों के 37 राजस्व सर्किलों और 883 गांवों में बाढ़ (Flood) का असर है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और हालात और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।


    कौन से जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?

    एएसडीएमए (ASDMA) के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर जिला है, जहां करीब 3.75 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद चराइदेव में 1.86 लाख और जोरहाट में 1.15 लाख लोग प्रभावित हैं। गोलाघाट, होजाई, कामरूप, डिब्रूगढ़, नगांव, कामरूप (मेट्रो), कार्बी आंगलोंग और तिनसुकिया समेत कुल 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। पिछले दिन तक 10 जिलों में 6.43 लाख लोग प्रभावित थे, लेकिन लगातार बारिश के कारण स्थिति और गंभीर हो गई।


    राहत और बचाव कार्य कहां तक पहुंचा?

    राज्य में 103 राहत शिविरों में 24,124 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है, जबकि 255 राहत वितरण केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक ड्रोन के जरिए भोजन, पेयजल और दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं। बाढ़ के कारण 25,375.44 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। साथ ही कई स्थानों पर सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

    कौन-कौन सी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं?
    बाढ़ की स्थिति इसलिए भी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि डिब्रूगढ़ के खोवांग में बुर्हीदिहिंग, शिवसागर में दिखो और देसांग, गोलाघाट के नुमालीगढ़ में धनसिरी तथा श्रीभूमि में कुशियारा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक राज्य के कई इलाकों में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है।

    गुजरात में बारिश ने कैसी तबाही मचाई?
    गुजरात के वलसाड, नवसारी, सूरत और तापी जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। सबसे अधिक प्रभावित वलसाड जिले के उमरगाम तालुका में बुधवार सुबह से गुरुवार सुबह तक महज 16 घंटे में 1,100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। राज्य सरकार के अनुसार, अब तक 1,200 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। सूरत में 1,500 और नवसारी के 11 गांवों से 200 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। तापी जिले में बारिश से जुड़ी एक व्यक्ति की मौत हुई है। 300 से अधिक सड़कें अस्थायी रूप से बंद हैं और राज्य परिवहन निगम की 200 से ज्यादा बस सेवाएं प्रभावित हुई हैं।


    सूरत में बारिश से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बंद

    गुजरात के सूरत में भारी बारिश के कारण अंबिका नदी उफान पर आ गई है। नदी का पानी पुल के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। सुरक्षा के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे 4) पर ईएनए (पलसाना) और खरेल (नवसारी) के बीच वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन स्थिति पर नज़र रखे हुए है। पानी का स्तर कम होते ही यातायात फिर से शुरू कर दिया जाएगा।


    जम्मू-कश्मीर में बारिश से हालात कितने गंभीर हैं?

    जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही बारिश के कारण तवी, चिनाब और झेलम समेत कई नदियां उफान पर हैं। भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाओं के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा। बारिश से जुड़े हादसों में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है। खराब मौसम के कारण अमरनाथ, वैष्णो देवी और शिवखोड़ी यात्राएं लगातार पांचवें दिन भी स्थगित रहीं। कटड़ा में लगभग 15 हजार श्रद्धालु फंसे हुए हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय ने 24 और 25 जुलाई को होने वाली परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं।


    राजस्थान में मौसम विभाग ने क्या चेतावनी जारी की है?

    मौसम विभाग ने 24 और 25 जुलाई के बीच अजमेर, कोटा, जोधपुर और उदयपुर संभाग में भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, जयपुर, भरतपुर और बीकानेर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।


    हिमाचल प्रदेश में बादल फटने से क्या असर पड़ा?

    हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला समेत कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू और ऊना में गुरुवार को तेज बारिश हुई। चंबा जिले के साच जोत क्षेत्र में बादल फटने से चुराह उपमंडल के सतरूंडी नाला, रानीकोट और कार्थ नाला में अचानक बाढ़ आ गई। इससे कई मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें सड़कों पर आ गईं। प्रदेश में 136 सड़कें बंद हैं, जबकि कई इलाकों में बिजली और पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

  • यूपी में बारिश का कहर, सड़कों पर दिखे मगरमच्छ; घरों में घुसा पानी, 66 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    यूपी में बारिश का कहर, सड़कों पर दिखे मगरमच्छ; घरों में घुसा पानी, 66 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार सुबह से लखनऊ, कानपुर, बाराबंकी, प्रयागराज, वाराणसी समेत करीब 20 शहरों में रुक-रुककर तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश की संभावना जताई है, जबकि 66 जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

    सबसे चिंताजनक स्थिति लखीमपुर खीरी में देखने को मिली, जहां शारदा नदी का पानी गांवों में घुस गया। बाढ़ के साथ मगरमच्छ भी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच गए। खेतों, सड़कों और गांवों में मगरमच्छों के दिखाई देने से लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और प्रशासन प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    प्रयागराज में बीते 24 घंटों के दौरान हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। कई सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और अंडरपास में करीब दो फीट तक पानी भर जाने से यातायात रोकना पड़ा। जलभराव के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लगा और लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। वहीं कौशांबी में घरों के भीतर पानी भर जाने से सोफा, कुर्सियां और अन्य घरेलू सामान पानी में तैरते नजर आए। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।

    वाराणसी और प्रयागराज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की कई सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। काशी में करीब 50 छोटे मंदिरों तक नदी का पानी पहुंच गया है। उन्नाव और फिरोजाबाद के सरकारी अस्पतालों में भी घुटनों तक पानी भर गया, जिससे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शामली में नहर टूटने से करीब 10 फीट सड़क धंस गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

    खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं। पीलीभीत और बहराइच में सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण प्रदेश में 24 जुलाई तक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद भी कई इलाकों में अगले तीन से चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी।

    लगातार हो रही बारिश और आकाशीय बिजली की घटनाओं ने भी जनहानि बढ़ाई है। पिछले तीन दिनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। राहत एवं बचाव दल भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

  • देशभर में हो रही झमाझम बारिश….कई राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ ने मचाई तबाही

    देशभर में हो रही झमाझम बारिश….कई राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ ने मचाई तबाही


    नई दिल्ली।
    पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) के पहुंचने के बाद झमाझम बारिश (Heavy downpour) हो रही है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, विशेषतौर पर हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) में तो बारिश प्रचंड चरण में है। शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश में वर्षा जनित घटनाओं में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। दोनों राज्यों में मूसलाधार बारिश से नदियां और पहाड़ी नाले उफान पर हैं, बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा रखी है।

    उत्तराखंड के यमुनोत्री हाईवे के साथ दोनों राज्यों में सैकड़ों सड़के बंद हैं, संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार को मूसलाधार बारिश से स्थिति इतनी भयावह हुई कि कई क्षेत्रों में स्कूलों को बंद करना पड़ा। मौसम विभाग ने इन दोनों राज्यों समेत उत्तर-पश्चिम भारत और देश के कई अन्य हिस्सों में तीन-चार दिन भार बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    हिमाचल प्रदेश में खराब मौसम की सबसे भारी मार सिरमौर और सोलन जिलों में पड़ी है। कुल्लू जिले में पहाड़ी से गिरे बड़े पत्थर की चपेट में आने से 70 वर्ष के एक व्यक्ति की जान चली गई। कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर भी कई जगह भूस्खलन में लोगों के घायल होने की खबर है। त्रिपुरा में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। राज्य के उनकोटी, खोवाई और धलाई जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। बाढ़ और बारिश के कारण करीब 11 हजार लोग बेघर हो गए हैं, जबकि 4,027 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।


    देहरादून समेत सात जिलों में स्कूल बंद

    मूसलाधार बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन से उत्तराखंड में भी जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 118 सड़कें बंद हैं। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग को बारिश और बार-बार हो रहे भूस्खलन के चलते अभी तक खोला नहीं जा सका है। भारी बारिश के चलते देहरादून समेत सात जिलों में शुक्रवार को 12वीं तक के स्कूल बंद रहे। हरिद्वार जिले के भगवानपुर में उफनती नदी में डूबने से 18 साल के एक लड़के की मौत हो गई है।


    हरियाणा, पंजाब व यूपी में भारी बारिश

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों के दौरान कई राज्यों में मूसलाधार बारिश हुई। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, बिहार और पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों में भारी से बहुत बारिश (7-20 सेमी) दर्ज की गई। इन राज्यों के साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा, राजस्थान, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात क्षेत्र, कच्छ, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, केरल, रायलसीमा, तेलंगाना और कर्नाटक के अंदरूनी इलाकों में कुछ जगहों पर 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलीं।


    वायनाड में मृतक संख्या सात हुई

    केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन वाली जगह से शुक्रवार को एक और शव मिला, जिससे इस आपदा में मरने वालों की संख्या 7 हो गई है। बरामद शव की पहचान पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर निवासी सर्वेयर राकेश गुचैत के रूप में हुई है। उनका शव यहां मीनाक्षी पुल के पास से निकाला गया। हिमाचल प्रदेश के कंस्ट्रक्शन मैनेजर विक्रम राणा अभी भी लापता हैं। गुरुवार तक, भूस्खलन वाली जगह से छह शव बरामद किए गए थे। बता दें कि सात जुलाई को अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी टनल प्रोजेक्ट वाली जगह पर भूस्खलन हुआ था। यह टनल वायनाड और कोझिकोड जिलों को जोड़ने के लिए बनाई जा रही है।


    पुणे में इमारत में अभी भी दबे हैं आठ लोग, 30 ट्रेनों को किया गया रद्द

    मुंबई में शुक्रवार को तो बारिश से राहत मिली, लेकिन पुणे में कूड़े के पहाड़ के नीचे गिरने से दबी इमारत में अभी भी 8 लोग फंसे हुए हैं। हादसे के तीन दिन बाद भी उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका है। अधिकारियों ने बताया कि लोगों को बाहर निकालने के लिए मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इमारत के सामने वाला हिस्सा पूरी तरह मलबे में दबा है, इसलिए लोगों को पीछे से रास्ता बनाकर निकालने की कोशिशें की जा रही हैं। भोर घाट खंड में भारी भूस्खलन के चलते मुंबई-पुणे कॉरिडोर पर रेल सेवा बाधित हुई, जिसके 17 जुलाई से पहले सुचारू होने की संभावना नहीं है। इसके चलते लंबी दूरी की 30 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।