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  • उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में फाग उत्सव:महिलाओं और युवतियों ने फूलों-गुलाल से खेली होली

    उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में फाग उत्सव:महिलाओं और युवतियों ने फूलों-गुलाल से खेली होली

    उज्जैन। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में होली के दूसरे दिन फाग उत्सव बड़े भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं और युवतियों ने भजन-कीर्तन के बीच फूलों और गुलाल से होली खेली। भगवान श्रीकृष्ण-बलराम की शिक्षा स्थली पर श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते हुए उत्सव का आनंद लिया।

    आश्रम परिसर में भजन-कीर्तन की मधुर धुनें गूंजती रहीं। “रंग मत डाले रे कान्हा”, “जुल्म कर डारयो सितम कर डारयो” और “आज ब्रज में होली रे रसिया” जैसे भजनों पर महिलाएं झूमती और नाचती नजर आईं। भक्ति संगीत के बीच पूरा आश्रम परिसर उत्सवमय हो गया और श्रद्धालु भगवान की भक्ति में सराबोर दिखाई दिए।

    उज्जैन को महाकाल की नगरी और भक्ति भाव की नगरी कहा जाता है। यहां अनेक प्राचीन मंदिर और धार्मिक परंपराएं हैं, जिनमें होली का पर्व भी विशेष तरीके से मनाया जाता है। सांदीपनि आश्रम में आयोजित यह फाग उत्सव इन्हीं प्राचीन परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    कीर्ति व्यास ने बताया कि होली का पर्व रंगपंचमी तक पांच दिनों तक मनाया जाता है। इसी परंपरा के तहत दूज के दिन भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ फूलों और गुलाल से होली खेली जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस अवसर पर देश-विदेश से श्रद्धालु भी आश्रम पहुंचते हैं और भजन-कीर्तन के बीच फाग उत्सव का आनंद लेते हैं।

    कमला देवी व्यास ने आगे कहा कि सांदीपनि आश्रम में हर साल फाग उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगकर इस आयोजन में शामिल होते हैं। यह उत्सव प्रतिवर्ष बड़े आनंद और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

  • उज्जैन में फाग महोत्सव की धूम, भक्तों ने मंदिरों में गुलाल-फूल से खेली होली, अन्य शहरों से भी उमड़े श्रद्धालु

    उज्जैन में फाग महोत्सव की धूम, भक्तों ने मंदिरों में गुलाल-फूल से खेली होली, अन्य शहरों से भी उमड़े श्रद्धालु


    उज्जैनधर्मनगरी उज्जैन में फाल्गुन मास के आगमन के साथ ही फाग महोत्सव का भव्य आयोजन शुरू हो गया है। शनिवार को शहर के प्रमुख मंदिरों में भक्तों ने रंग-बिरंगी होली खेलते हुए भगवान के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा दिखाई। नई पेठ स्थित गजलक्ष्मी मंदिर, छत्री चौक का गोपाल मंदिर और खाटू श्याम जी मंदिर में भक्तों ने गुलाल और फूलों से भगवान के चरणों को सजाया और भजन-कीर्तन के मधुर गीतों के बीच पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    मंदिरों में फाग उत्सव का आयोजन भक्ति, संगीत और रंगों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु अपने परिवार के साथ शामिल होकर भगवान के चरणों में प्रार्थना करते हुए गुलाल उड़ाते और फूलों की होली खेलते नजर आए। भजन-कीर्तन और कीर्तन के बीच भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा की रासलीला का स्मरण करते हुए होली के पारंपरिक उत्सव में भाग लिया।

    इस बार फाग महोत्सव में उज्जैन के अलावा देवास, इंदौर, रतलाम और आसपास के अन्य शहरों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर प्रशासन और पुजारियों ने बताया कि फाल्गुन मास में होली का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और राधा के साथ गोपियों द्वारा खेली गई होली की परंपरा का प्रतीक है। पुजारी अनिमेश शर्मा ने बताया कि यह उत्सव भक्तों के लिए भक्ति और उल्लास का अवसर होता है और प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी के बाद फाल्गुन मास की शुरुआत से इसे विशेष रूप से मनाया जाता है।

    फाग महोत्सव के दौरान मंदिरों में रंगों के साथ-साथ फूलों और पिचकारियों का भी आनंद लिया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में रंगीन गुलाल डालते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया और भक्ति गीतों में सम्मिलित होकर उत्सव का आनंद लिया। मंदिरों में साफ-सफाई और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, ताकि बड़े पैमाने पर आए श्रद्धालु सुरक्षित रूप से इस रंगीन महोत्सव में भाग ले सकें।

    इस साल फाग महोत्सव में मंदिरों की सजावट भी आकर्षक थी। मंदिरों में फूलों और रंग-बिरंगी वस्तुओं से विशेष आयोजन किया गया, जिससे भक्तों को न केवल भक्ति का अनुभव मिला बल्कि होली के पारंपरिक रंगों का भी आनंद लेने का अवसर मिला।

    शहरवासियों और मंदिर प्रशासन ने फाग महोत्सव को सफल बनाने के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं का ख्याल रखा। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस उत्सव के दौरान मंदिरों में रंग और फूलों से होली खेलना भगवान के प्रति उनकी आस्था और प्रेम को दर्शाता है।

    उज्जैन में फाग महोत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व रखता है बल्कि यह शहर में पर्यटन और सामाजिक मेलजोल को भी बढ़ावा देता है। इस उत्सव ने पूरे शहर को रंगों और खुशियों से सराबोर कर दिया।