Tag: Flyovers

  • रांची में बनेंगे तीन नए फ्लाईओवर, 2,335 करोड़ रुपये होंगे खर्च, शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने की तैयारी तेज

    रांची में बनेंगे तीन नए फ्लाईओवर, 2,335 करोड़ रुपये होंगे खर्च, शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने की तैयारी तेज

    नई दिल्ली ।झारखंड की राजधानी रांची में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और शहर के सुनियोजित विकास के लिए तीन नए फ्लाईओवर बनाने की तैयारी की जा रही है। इन प्रस्तावित परियोजनाओं पर कुल 2,335.87 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। नगर विकास विभाग ने तीनों फ्लाईओवर से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर लिया है।

    प्रस्ताव के अनुसार पहला फ्लाईओवर बिरसा चौक से तुपुदाना चौक तक बनाया जाना है। इसका प्रस्तावित मार्ग टेंडर हार्ट स्कूल के आसपास से होकर जाएगा। दूसरा फ्लाईओवर कटहल मोड़ से दलादिली चौक के बीच प्रस्तावित है। तीसरी परियोजना लालपुर, फिरायालाल और डंगराटोली क्षेत्र को जोड़ने वाले इंटीग्रेटेड फ्लाईओवर की है।

    इन तीनों परियोजनाओं का उद्देश्य रांची के ऐसे इलाकों में यातायात का दबाव कम करना है, जहां बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है। प्रस्तावित फ्लाईओवर बनने के बाद प्रमुख मार्गों पर वाहनों के आवागमन को अलग स्तर पर ले जाने में मदद मिल सकती है, जिससे सड़क पर जाम की समस्या कम करने की योजना है।

    फिलहाल तीनों फ्लाईओवर की परियोजनाएं प्रस्ताव के शुरुआती चरण में हैं। इनके अंतिम अनुमोदन, बजट आवंटन और निर्माण कार्य शुरू करने की समयसीमा को लेकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों परियोजनाओं का निर्माण किस तारीख से शुरू होगा।

    राज्य में शहरी विकास और राजधानी के भविष्य के विस्तार को लेकर हाल में अधिकारियों के साथ चर्चा की गई थी। इस दौरान रांची के सुनियोजित विकास और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहर में अधोसंरचना तैयार करने से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया गया। इसी क्रम में राजधानी के सौंदर्यीकरण और विकास से संबंधित रिपोर्ट तथा डिजाइन भी प्रस्तुत किया गया।

    रांची में कुछ अन्य फ्लाईओवर और कॉरिडोर की प्रक्रिया इससे पहले आगे बढ़ चुकी है। करमटोली-चिरौंदी, अरगोड़ा-चापूटोली और हरमू रोड फ्लाईओवर के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण एजेंसियों के चयन की जानकारी दी गई है। इन परियोजनाओं का निर्माण जल्द शुरू होने की संभावना है।

    करमटोली-चिरौंदी कॉरिडोर की लंबाई करीब तीन किलोमीटर प्रस्तावित है। यह करमटोली चौक से साइंस सिटी होते हुए चिरौंदी तक जाने वाला मार्ग होगा। वहीं अरगोड़ा-चापूटोली कॉरिडोर करीब चार किलोमीटर लंबा होगा और हरमू रोड से डिबडीह ब्रिज तक सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है।

    हरमू रोड फ्लाईओवर का निर्माण सहजानंद चौक के आसपास से जज कॉलोनी के नजदीक तक प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के जरिए राजधानी के अलग-अलग हिस्सों के बीच यातायात संपर्क बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

    प्रस्तावित फ्लाईओवर से घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सड़क यातायात का दबाव कम करने पर भी जोर है। इन इलाकों में वाहनों की अधिक आवाजाही के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती है। फ्लाईओवर बनने से मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    रिंग रोड से कनेक्टिविटी भी इन परियोजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुछ प्रस्तावित मार्गों के अंतिम छोर रिंग रोड के नजदीक तक पहुंचने की योजना है। इससे शहर के अंदरूनी हिस्सों से बाहर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सुगम मार्ग मिल सकता है।

    रांची में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए सड़क अधोसंरचना के विस्तार की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। तीन नए फ्लाईओवर का प्रस्ताव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। हालांकि इनके निर्माण से पहले प्रशासनिक मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा।

  • विंध्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अधोसंरचना परियोजनाओं को समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश, उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    विंध्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अधोसंरचना परियोजनाओं को समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश, उप मुख्यमंत्री शुक्ल


    भोपाल । भोपाल में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में विंध्य क्षेत्र में चल रही सड़क फ्लाइओवर और पुल-पुलिया निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सुदृढ़ और प्रभावी अधोसंरचना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग नियमित और प्रभावी रूप से की जाए ताकि निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण हो सके।

    बैठक में रीवा फ्लाइओवर संस्कृत विश्वविद्यालय लक्ष्मण बाग के समीप प्रस्तावित एप्रोच रोड मऊगंज बायपास और मऊगंज–पटेरा औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़क सहित अन्य प्रमुख अधोसंरचना परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति प्रगति और शेष कार्य पर विस्तृत चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिन कार्यों में अंतर्विभागीय समन्वय की आवश्यकता है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र हल किया जाए।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक स्तर की स्वीकृतियों भूमि संबंधी मुद्दों तकनीकी अड़चनों और मैदानी समस्याओं की पहचान कर त्वरित और यथोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधोसंरचना परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    उन्होंने क्षेत्र के औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत अधोसंरचना की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। बेहतर सड़क संपर्क और परिवहन सुविधाएं निवेश आकर्षित करने में सहायक होंगी जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के सभी क्षेत्रों में संतुलित और समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उप मुख्यमंत्री ने अधोसंरचनात्मक विकास को शासन की प्राथमिकताओं में शामिल बताया और कहा कि सभी परियोजनाओं का समयबद्ध पूर्ण होना विंध्य क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों की प्रगति नियमित रूप से रिपोर्ट की जाए और किसी भी बाधा को तुरंत दूर किया जाए।

    बैठक में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुखवीर सिंह सहित संबंधित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अधिकारियों से कहा कि अधोसंरचना विकास केवल सड़क और पुल निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ है। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्णता से न केवल जनता को लाभ मिलेगा बल्कि क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

    उप मुख्यमंत्री ने बैठक का समापन करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार विंध्य क्षेत्र के समग्र और संतुलित विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। अधोसंरचना परियोजनाओं को समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करना इस प्रयास का अहम हिस्सा है और यह क्षेत्र की दीर्घकालीन प्रगति सुनिश्चित करेगा।