Tag: Food Safety Department

  • दीपावली से पहले खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, ट्रेन से उतारते ही पकड़ा 700 किलो नकली पनीर, सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू

    दीपावली से पहले खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, ट्रेन से उतारते ही पकड़ा 700 किलो नकली पनीर, सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू


    नई दिल्ली। दीपावली से पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 700 किलो से अधिक एनालॉग पनीर जब्त किया है। यह खेप ट्रेन के जरिए मुरैना से भोपाल लाई गई थी। अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन के बाहर माल उतारे जाने के दौरान इसे अपने कब्जे में ले लिया। जब्त किए गए पनीर की कीमत करीब 2.5 लाख रुपये बताई गई है। अब विभागीय टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में पनीर किसके लिए मंगाया गया था और इसे किन दुकानों होटलों या रेस्टोरेंट तक पहुंचाया जाना था।

    जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मंगलवार देर रात करीब दो बजे कार्रवाई की। रेलवे स्टेशन पर पनीर के बड़े पैकेट पहुंचने के बाद टीम ने जांच शुरू की और माल को जब्त कर लिया। विभाग ने बिल्टी और बिल से संबंधित जानकारी के आधार पर प्रकरण दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की। बुधवार सुबह तक इस मामले में जांच जारी थी। मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इसे लेकर सामने आई यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    सप्लाई कहां होनी थी इसकी जांच जारी

    खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम अब खेप के पूरे सप्लाई नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों का पता लगाने पर जोर है कि पनीर मुरैना से किस व्यक्ति या कारोबारी ने भेजा था। भोपाल में इसे किसने मंगाया था और इसे किन प्रतिष्ठानों तक पहुंचाया जाना था। जांच में यदि किसी होटल रेस्टोरेंट डेयरी या अन्य कारोबारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जब्त माल के गंतव्य और उससे जुड़े लोगों के बारे में जांच की जा रही है।

    क्या होता है एनालॉग पनीर

    एनालॉग पनीर को आम तौर पर पारंपरिक दूध से बने पनीर के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है। इसे बनाने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी लागत अपेक्षाकृत कम होने के कारण कुछ बाजारों में इसकी मांग बनी रहती है। हालांकि इसकी सामग्री और पोषण संबंधी विशेषताएं असली दूध से बने पनीर से अलग हो सकती हैं। उपभोक्ताओं के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि वे जो उत्पाद खरीद रहे हैं उसकी सही पहचान और सामग्री की जानकारी उन्हें मिले।

    प्रदेश में प्रतिबंध के बाद भी सामने आया मामला

    करीब तीन महीने पहले मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाया था। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी चिंता जताई थी और मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित राज्यों से संपर्क करने का फैसला किया था। इसके बावजूद भोपाल में बड़ी मात्रा में एनालॉग पनीर की खेप पहुंचने का मामला सामने आया है। इससे प्रतिबंध के पालन और खाद्य उत्पादों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    त्योहारों के दौरान दूध और उससे बने उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी सही पहचान सुनिश्चित करना जरूरी हो जाता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि जब्त पनीर कहां खपाया जाना था और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

  • देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर जांच से मचा हड़कंप 6 डेयरियों में पहुंची संयुक्त टीम एक के दूध पर शक सैंपल अब भोपाल में होगा टेस्ट

    देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर जांच से मचा हड़कंप 6 डेयरियों में पहुंची संयुक्त टीम एक के दूध पर शक सैंपल अब भोपाल में होगा टेस्ट


    देवास। देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर खाद्य विभाग ने गुरुवार को बड़ी जांच कार्रवाई की। खाद्य विभाग राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम ने उज्जैन रोड स्थित कई दूध डेयरियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उज्जैन से पहुंची चलित प्रयोगशाला की मदद से करीब छह डेयरियों में दूध की रैपिड किट के जरिए जांच की गई। जांच के दौरान ज्यादातर डेयरियों में दूध निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया। हालांकि एक डेयरी के दूध की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को आशंका हुई जिसके बाद वहां से सैंपल लेकर विस्तृत जांच के लिए भोपाल भेजा गया है।

    अधिकारियों के मुताबिक मौके पर की गई प्रारंभिक जांच के आधार पर दूध की गुणवत्ता को लेकर जहां संदेह सामने आया वहां से नमूना सुरक्षित तरीके से लिया गया। अब इस सैंपल की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी। भोपाल से रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दूध में वास्तव में किसी तरह की मिलावट या गुणवत्ता संबंधी कमी है या नहीं। अधिकारियों ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयुक्त जांच टीम में नायब तहसीलदार हरिओम ठाकुर और खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र ठाकुर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल रहे। टीम ने डेयरियों में पहुंचकर दूध की गुणवत्ता की जांच करने के साथ वहां उपलब्ध अन्य दूध उत्पादों को भी देखा। अधिकारियों ने बताया कि जांच का उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना और दूध तथा दूध से बने उत्पादों में किसी तरह की मिलावट की संभावना को सामने लाना है।

    जांच के दौरान डेयरियों में मौजूद दूध उत्पादों की भी पड़ताल की गई। इनमें सुक्रोज की मात्रा की जांच भी शामिल रही। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध उत्पादों से जुड़े जरूरी तथ्यों को दर्ज किया। इस तरह की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि उपभोक्ताओं को बेचे जा रहे दूध और अन्य उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

    खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान ज्यादातर दुकानों पर दूध तय मानकों के अनुसार मिला। हालांकि एक डेयरी से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर किसी डेयरी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। भोपाल से आने वाली प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    दूध रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा खाद्य पदार्थ है और बड़ी संख्या में लोग इसका सीधे सेवन करते हैं। ऐसे में इसकी गुणवत्ता को लेकर समय समय पर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। देवास में हुई इस कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर भोपाल भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट पर है। यदि जांच में दूध मानकों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित डेयरी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल प्रशासन रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

  • भोपाल में 27 क्विंटल मावा जब्त: टोल प्लाजा पर खाद्य सुरक्षा टीम की बड़ी कार्रवाई, मिलावट की आशंका

    भोपाल में 27 क्विंटल मावा जब्त: टोल प्लाजा पर खाद्य सुरक्षा टीम की बड़ी कार्रवाई, मिलावट की आशंका



    भोपाल। भोपाल के खजूरी सड़क स्थित टोल प्लाजा के पास खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को एक वाहन से लगभग 27 क्विंटल मावा जब्त किया। इस कार्रवाई के दौरान विभाग ने मावा के साथ 45 किलो पनीर भी बरामद किया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि मावा और पनीर में मिलावट की आशंका है, इसलिए इसे आगे की जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है। इसकी बाजार कीमत लगभग 6 लाख रुपये आंकी गई है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई होली के त्योहार से पहले की गई है। त्योहार के चलते मिठाई और डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में विभाग ने होटलों, रेस्टोरेंट और डेयरी संचालकों पर विशेष निगरानी रखी हुई है। विभाग के अमले ने लगातार दुकानों, वाहनों और गोदामों में छापेमारी कर नमूने इकट्ठा किए हैं।

    इस दौरान मावा और पनीर के पांच-पांच नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मिलावट पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य आम जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।

    अधिकारियों के अनुसार पिछले एक महीने में विभाग की टीम ने भोपाल के विभिन्न इलाकों में नमकीन, मिठाई, पनीर, तेल, मैदा, बेसन सहित अन्य खाद्य पदार्थों के कुल 234 नमूने लिए हैं। इन नमूनों की जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

    खाद्य सुरक्षा विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे संदिग्ध या मिलावटयुक्त खाद्य पदार्थों की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें। विभाग ने कहा कि त्योहारों के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। मावा और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों में मिलावट होने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

    भोपाल में यह कार्रवाई विभाग की सतर्कता और त्योहारों से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रति जागरूकता को दर्शाती है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे समय पर मिलावट रोकने के लिए नियमित जांच और वाहन चेकिंग जरूरी है। साथ ही, टोल प्लाजा जैसी संवेदनशील जगहों पर कार्रवाई से अवैध व्यापारियों पर भी नियंत्रण रखा जा सकता है।

    इस बड़ी बरामदगी के साथ ही विभाग ने चेतावनी दी है कि मिलावट और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का व्यापार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता से आग्रह किया गया है कि वे अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा के लिए केवल प्रमाणित और भरोसेमंद उत्पाद ही खरीदें।

  • मंदसौर में 'जहरीले' घी की फैक्ट्री सील: केमिकल डालकर बना रहे थे नकली घी, अहमदाबाद के दो जालसाज गिरफ्तार

    मंदसौर में 'जहरीले' घी की फैक्ट्री सील: केमिकल डालकर बना रहे थे नकली घी, अहमदाबाद के दो जालसाज गिरफ्तार


    मंदसौर । जनता की सेहत से खिलवाड़ कर अपनी जेबें भरने वाले मिलावटखोरों के खिलाफ मंदसौर पुलिस ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। सीतामऊ फाटक क्षेत्र के एक घर में पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने देर रात दबिश देकर नकली घी बनाने के एक बड़े कारखाने का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने गुजरात के अहमदाबाद निवासी दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो केमिकल और सोयाबीन तेल के मिश्रण से ‘मौत का घी’ तैयार कर रहे थे।

    केमिकल से आती थी असली घी जैसी खुशबू पुलिस ने जब मौके पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। घर के भीतर बड़े-बड़े बर्तनों में सोयाबीन तेल को उबालकर उसमें घातक केमिकल मिलाया जा रहा था। इस विशेष केमिकल का उपयोग घी में असली खुशबू और दानेदार बनावट लाने के लिए किया जाता था, ताकि आम आदमी असली और नकली में फर्क न कर सके। पुलिस ने मौके से करीब 150 लीटर तैयार नकली घी, भारी मात्रा में सोयाबीन तेल, गैस चूल्हे, बड़े बर्तन और खुशबू फैलाने वाला केमिकल जब्त किया है।

    अहमदाबाद से सीखा ‘मिलावट का हुनर’ गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गोपाल और संजय के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से अहमदाबाद के रहने वाले हैं और वहीं से नकली घी बनाने का यह काला हुनर सीखकर आए थे। आरोपी लंबे समय से मंदसौर में किराए का घर लेकर इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहे थे। पूछताछ में सामने आया है कि वे इस नकली घी को सस्ते दामों पर ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों और छोटे दुकानदारों को सप्लाई करते थे, जहाँ लोग कम कीमत के चक्कर में इसे खरीद लेते थे।

    सख्त धाराओं में केस दर्ज, सैंपल लैब भेजे राजस्व पुलिस और खाद्य विभाग की टीम ने बरामद घी के सैंपल लेकर उन्हें प्रयोगशाला के लिए भेज दिया है। फूड सेफ्टी ऑफिसर का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद इसमें और भी गंभीर धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। फिलहाल, पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और खाद्य अपमिश्रण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन आरोपियों के तार और कहां-कहां जुड़े हैं और इन्होंने अब तक कितने क्विंटल नकली घी बाजार में खपाया है।