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  • टोस्ट पैकेट में छिपकली मिलने से हड़कंप, खाद्य विभाग ने जांच के लिए भेजे सैंपल

    टोस्ट पैकेट में छिपकली मिलने से हड़कंप, खाद्य विभाग ने जांच के लिए भेजे सैंपल


    शिवपुरी । शिवपुरी शहर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक टोस्ट पैकेट के अंदर मरी हुई छिपकली मिलने से हड़कंप मच गया। मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और पैकिंग व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है।

    प्रशासन ने तुरंत शुरू की कार्रवाई
    घटना की जानकारी मिलते ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) सक्रिय हो गया और संबंधित ब्रांड के टोस्ट के सैंपल एकत्र किए। इन नमूनों को जांच के लिए भोपाल स्थित खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है, जहां विस्तृत परीक्षण किया जाएगा।

    सैंपल जांच के लिए भेजे गए
    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और खाद्य विभाग के उप संचालक डॉ. संजय ऋषीश्वर के अनुसार, “शुद्ध बेकरर्स” के “शुद्ध स्पेशल सूजी टोस्ट” के पैकेट का नमूना जांच के लिए लिया गया है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की जा रही है।

    शिकायत के बाद खुला मामला
    यह पूरा मामला तब सामने आया जब कृष्ण विहार कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत की कि उसने बच्चों के लिए टोस्ट खरीदा था, जिसमें खोलने पर मरी हुई छिपकली मिली। इसके बाद यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

    जांच रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई
    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में लापरवाही या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित निर्माता और विक्रेता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    खाद्य सुरक्षा पर उठे सवाल
    इस घटना के बाद शहर में पैकेज्ड फूड की गुणवत्ता और निरीक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों ने मांग की है कि बाजार में बिकने वाले सभी खाद्य उत्पादों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए ताकि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

  • मुंबई में परिवार की मौत के बाद तरबूज पर सवाल, क्या इससे हो सकती है फूड प्वाइजनिंग? डॉक्टरों ने बताया सच

    मुंबई में परिवार की मौत के बाद तरबूज पर सवाल, क्या इससे हो सकती है फूड प्वाइजनिंग? डॉक्टरों ने बताया सच


    नई दिल्ली।
    गर्मियों में तरबूज को सबसे ताजगी देने वाले फलों में गिना जाता है, लेकिन हाल ही में मुंबई में हुई एक दर्दनाक घटना ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के बाद आशंका जताई जा रही है कि मामला फूड प्वाइजनिंग से जुड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि परिवार ने पहले बिरयानी खाई थी और उसके बाद घर में रखा तरबूज खाया था। कुछ ही घंटों बाद सभी की तबीयत बिगड़ गई और उल्टी-दस्त जैसे लक्षण सामने आए। अस्पताल पहुंचने पर सभी की मौत हो गई।

    पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और इसे फिलहाल संदिग्ध फूड प्वाइजनिंग मानते हुए खाद्य सामग्री को जांच के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही मौत के कारणों की स्पष्ट पुष्टि हो सकेगी।

    क्या तरबूज से हो सकती है मौत?
    इस घटना के बाद यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या तरबूज खाना जानलेवा भी हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, तरबूज खुद में सुरक्षित फल है, लेकिन अगर यह दूषित हो जाए या गलत तरीके से स्टोर किया जाए तो इसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे फूड प्वाइजनिंग हो सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज में पानी और प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए खराब या संक्रमित होने पर यह बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है। कुछ मामलों में इसमें मिठास बढ़ाने के लिए बाहरी पदार्थ मिलाने की भी आशंका रहती है, जो जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

    डॉक्टरों के मुताबिक फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द शामिल हैं। इसकी गंभीरता बैक्टीरिया के प्रकार और व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि केवल तरबूज को दोष देना सही नहीं है। फूड प्वाइजनिंग किसी भी दूषित भोजन या असुरक्षित तरीके से रखे गए खाने से हो सकती है, इसलिए पूरे मामले की जांच के बाद ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

  • क्या आप भी खा रहे हैं स्टिकर वाला फल? सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है यह छोटा सा लापरवाही

    क्या आप भी खा रहे हैं स्टिकर वाला फल? सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है यह छोटा सा लापरवाही


    नई दिल्ली । बाजार से फल खरीदते समय अक्सर हम उनकी चमक और उन पर लगे आकर्षक स्टिकर्स को देखकर उनकी क्वालिटी का अंदाजा लगाते हैं। लेकिन यही छोटे-छोटे स्टिकर्स आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। Food Safety and Standards Authority of India ने हाल ही में इसको लेकर चेतावनी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    विशेषज्ञों के अनुसार फलों पर लगे इन स्टिकर्स को चिपकाने के लिए जिस गोंद का इस्तेमाल किया जाता है वह खाने योग्य नहीं होता। जब हम फल खाते समय केवल स्टिकर हटाकर उसे सीधे खा लेते हैं तो कई बार उस गोंद का हिस्सा फल पर ही रह जाता है और अनजाने में हमारे शरीर के अंदर चला जाता है। यह धीरे-धीरे शरीर में केमिकल जमा कर सकता है और लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    स्टिकर के नीचे का हिस्सा और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इस जगह पर धूल मिट्टी और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं जो सामान्य पानी से धोने पर पूरी तरह साफ नहीं होते। इसके अलावा फलों पर छिड़के गए पेस्टिसाइड भी स्टिकर के नीचे फंस जाते हैं और वही हिस्सा सबसे ज्यादा जहरीला बन सकता है।

    कई लोग यह मानते हैं कि स्टिकर लगे फल बेहतर क्वालिटी या एक्सपोर्ट ग्रेड के होते हैं लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। दरअसल इन स्टिकर्स का उपयोग केवल फल की पहचान और बिलिंग के लिए किया जाता है जिसे PLU कोड कहा जाता है। कई बार बाजार में साधारण फलों पर भी नकली स्टिकर्स लगाकर उन्हें महंगा और प्रीमियम दिखाया जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खासकर बच्चों के लिए यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि उनका पाचन तंत्र संवेदनशील होता है। लगातार ऐसे केमिकल्स के संपर्क में आने से इम्युनिटी पर भी असर पड़ सकता है।

    इससे बचने के लिए कुछ आसान सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले केवल स्टिकर हटाना पर्याप्त नहीं है बल्कि जिस जगह स्टिकर लगा था उसे हल्का सा काटकर निकाल देना चाहिए। इसके अलावा फलों को हमेशा बहते पानी में अच्छी तरह रगड़कर धोना चाहिए ताकि उनकी सतह पर मौजूद गंदगी और केमिकल्स हट सकें।

    जहां तक संभव हो सेब या नाशपाती जैसे फलों का छिलका उतारकर खाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। सख्त फलों को साफ करने के लिए मुलायम ब्रश का इस्तेमाल भी किया जा सकता है ताकि उनके कोनों में फंसी गंदगी बाहर निकल सके। हालांकि फलों को साफ करने के लिए साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे और अधिक नुकसान हो सकता है।

    यह छोटी-सी सावधानी आपको और आपके परिवार को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचा सकती है। इसलिए अगली बार जब भी फल खरीदें तो केवल उनकी चमक नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा का भी ध्यान जरूर रखें।

  • दूध सुरक्षा पर सख्ती, उत्पादक और विक्रेता लाइसेंस के बिना नहीं कर सकेंगे व्यापार: FSSAI

    दूध सुरक्षा पर सख्ती, उत्पादक और विक्रेता लाइसेंस के बिना नहीं कर सकेंगे व्यापार: FSSAI


    नई दिल्ली। देश में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने गुरुवार को नया नियम लागू किया। इसके तहत सभी दूध उत्पादक और दूध विक्रेता, डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर, अपने व्यवसाय को चलाने से पहले एफएसएसएआई के साथ अनिवार्य पंजीकरण या लाइसेंस प्राप्त करेंगे।

    उद्देश्य और लाभ
    एफएसएसएआई ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य दूध में मिलावट की घटनाओं को रोकना, खाद्य सुरक्षा अनुपालन को मजबूत करना और सुरक्षित भंडारण तथा स्वच्छ आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इससे आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा होगी और उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित दूध उपलब्ध होगा।

    राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश
    एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे विशेष पंजीकरण अभियान चलाएं और दूध उत्पादकों एवं विक्रेताओं के लाइसेंस और पंजीकरण का कड़ाई से सत्यापन करें। राज्य स्तर पर अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि सभी व्यवसायियों के पास एफएसएसएआई का प्रमाणपत्र उपलब्ध हो।

    संसद में उठे थे मिलावट के मामले
    इससे पहले बीते महीने दूध और खाद्य उत्पादों में मिलावट का मुद्दा संसद में उठ चुका था। Raghav Chadha ने कंपनियों पर आरोप लगाया कि वे सेहतमंद और ऊर्जा बढ़ाने वाले झूठे दावों के तहत हानिकारक पदार्थों वाले उत्पाद बेच रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि दूध में यूरिया, पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन, आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर, फलों के जूस में सिंथेटिक फ्लेवर और आर्टिफिशियल रंग, खाने के तेल में मशीन का तेल, मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा, चाय में सिंथेटिक रंग और पोल्ट्री उत्पादों में एनाबॉलिक स्टेरॉयड मिलाए जाते हैं। यहां तक कि देशी घी की मिठाइयों में वनस्पति तेल और डालडा का इस्तेमाल किया जाता है।

    एफएसएसएआई की सलाह और अभियान
    एफएसएसएआई ने सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों से अपील की है कि वे स्थानीय अधिकारियों, डेयरी सहकारी समितियों, स्कूलों, और समुदायों के साथ मिलकर व्यापक अभियान चलाएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के पास वैध लाइसेंस हो और किसी भी प्रकार की मिलावट को रोका जा सके।

    भविष्य के लिए प्रभाव
    इस पहल से न केवल दूध की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यह उपभोक्ताओं में विश्वास बढ़ाने और डेयरी उद्योग में जवाबदेही स्थापित करने में भी मदद करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसका प्रभावी कार्यान्वयन हुआ, तो दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट की घटनाओं में काफी कमी आएगी।

    एफएसएसएआई का यह कदम दूध और डेयरी उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद देने के लिए एक महत्वपूर्ण और समयोचित पहल है।