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  • कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    नई दिल्ली । कर्नाटक सरकार ने पनीर की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर की बिक्री पर बड़ा फैसला लिया है। राज्य में दूध से तैयार नहीं होने वाले ऐसे पनीर उत्पादों की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है। यह आदेश 17 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुका है। अब कर्नाटक में पनीर के नाम से वही उत्पाद बेचा जा सकेगा, जो निर्धारित खाद्य मानकों के अनुसार दूध से तैयार किया गया हो।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब बाजार में पारंपरिक डेयरी पनीर के अलावा कई तरह के नॉन-डेयरी और एनालॉग उत्पाद भी उपलब्ध हैं। अधिकारियों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं को सही जानकारी के साथ उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। जांच के दौरान लिए गए कुछ नमूनों में मिलावट नहीं पाए जाने के बावजूद नॉन-डेयरी पनीर के स्वरूप और उसकी बिक्री को लेकर नियामकीय स्तर पर यह कार्रवाई की गई है।

    एनालॉग पनीर और सामान्य पनीर में मुख्य अंतर उनके इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का है। पारंपरिक पनीर मुख्य रूप से दूध से तैयार किया जाता है, जिसमें दूध के प्रोटीन और वसा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दूसरी ओर, एनालॉग पनीर बनाने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति तेल, वनस्पति वसा और अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों को पनीर के नाम से बाजार में बेचे जाने पर अब कर्नाटक में रोक रहेगी।

    नए नियम के तहत खाद्य कारोबारियों, दुकानदारों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों को ऐसे एनालॉग पनीर को बेचने के साथ-साथ उसका भंडारण, वितरण, आपूर्ति या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो गैर-डेयरी सामग्री से तैयार पनीर जैसे उत्पादों को सामान्य पनीर के तौर पर बाजार में उपलब्ध कराते हैं।

    हालांकि, सरकार की ओर से लगाई गई यह रोक हर तरह के नॉन-डेयरी खाद्य उत्पाद पर लागू नहीं होगी। जिन उत्पादों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई की ओर से पहले से अलग खाद्य मानक निर्धारित हैं, वे इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगे। इनमें फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन वस्तुओं को उनके निर्धारित मानकों और लेबलिंग नियमों के तहत बेचा जा सकेगा।

    इस फैसले के बाद कर्नाटक में खाद्य कारोबारियों के लिए उत्पाद की सही पहचान और लेबलिंग का महत्व और बढ़ गया है। पनीर के नाम पर ऐसे उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकेगी, जो निर्धारित दूध आधारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। सरकार का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्पष्टता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को वास्तविक उत्पाद की जानकारी उपलब्ध कराना है।

    राज्य में यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू किया गया है। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और जांच के जरिए नियमों के पालन पर नजर रखी जाएगी। कर्नाटक का यह कदम ऐसे उत्पादों को लेकर बढ़ती नियामकीय सख्ती का संकेत माना जा रहा है, जिनके नाम और स्वरूप को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

  • बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप

    बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप


    नई दिल्ली
    । बेंगलुरु के कई नामी थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों में खाद्य सुरक्षा को लेकर हुई जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों की जांच के दौरान कुछ होटलों में फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर्ड दूध और डेयरी उत्पाद, खराब हालत में रखा चिकन, मटन और मछली तथा नियमों के अनुरूप नहीं रखे गए खाद्य पदार्थ मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 7 अगस्त को चलाए गए इस विशेष निरीक्षण अभियान में शहर के सभी जोन को शामिल किया गया।

    इस अभियान के तहत 30 टीमों ने बेंगलुरु के कुल 26 थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने होटलों की रसोई, खाद्य भंडारण व्यवस्था, लेबलिंग और साफ-सफाई समेत कई मानकों की जांच की। इस दौरान कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग में भी नियमों का पालन नहीं किया गया था। अधिकारियों को कई ऐसे उत्पाद मिले जिनकी निर्धारित उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी थी। कुछ किचन में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

    जांच के दौरान कुछ होटलों में वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने के नियमों का भी पालन नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की सही जानकारी उपलब्ध नहीं थी और जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा स्टोरेज में एक्सपायर्ड दूध, डेयरी और बेकरी उत्पाद पाए गए। सब्जियों में फफूंदी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण से जुड़ी खामियां भी सामने आईं।

    कार्रवाई के दौरान द ललित अशोक के एनेक्स साउथ परिसर से 76 किलो मीट और 200 किलो सब्जियां जब्त की गईं। इसके अलावा 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध भी जब्त कर नष्ट किया गया। शांग्री-ला बेंगलुरु से 15 किलो मीट और फोर सीजन्स होटल बेंगलुरु से 19 किलो मीट जब्त किया गया। विवांता बैंगलोर व्हाइटफील्ड में तीन किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए, जबकि ताज यशवंतपुर से 72 किलो मीट और मछली जब्त की गई।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रेडिसन ब्लू के द एट्रिया परिसर में सामने आई, जहां कुल 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें 50 किलो चिकन, 23 किलो मीट, 23 किलो मछली और सात किलो सब्जियां शामिल थीं। अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन वाले होटलों को नोटिस भी जारी किए हैं। अब आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।

    पूरे अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल भी लिए गए हैं। इनमें चाय पाउडर, चिकन, मटन, मछली, खाद्य तेल, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, टोमैटो सॉस, नींबू का रस, चीज, पापड़, काजू, अदरक, काली मिर्च, मसाले और दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल संबंधित होटलों से लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति और स्पष्ट होगी तथा उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • एफएसएसएआई का स्विट्ज फूड्स पर बड़ा एक्शन, फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस सस्पेंड

    एफएसएसएआई का स्विट्ज फूड्स पर बड़ा एक्शन, फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस सस्पेंड

    नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए स्विट्ज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड का फूड बिजनेस लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। एफएसएसएआई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक कंपनी सभी कमियों को दूर कर खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित नहीं करती तब तक वह किसी भी प्रकार की खाद्य उत्पादन या व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं कर सकेगी। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    एफएसएसएआई के अनुसार कंपनी के विनिर्माण संयंत्र के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि खाद्य पदार्थों का निर्माण पैकेजिंग और भंडारण बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में किया जा रहा था जिससे खाद्य सामग्री के दूषित होने का गंभीर खतरा बना हुआ था। फैक्ट्री परिसर में साफ सफाई और सैनिटेशन की स्थिति भी बेहद खराब मिली। विशेष रूप से क्रेट वॉशिंग एरिया नॉन वेज रिसीविंग एरिया और गाजर काटने वाली मशीन के आसपास अत्यधिक गंदगी पाई गई।

    निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों ट्रॉलियों ट्रे मोल्ड एचडीपीई क्रेट और अन्य उपकरणों की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं किया जा रहा था। उत्पाद भंडारण क्षेत्र के ऊपर से एयर कंडीशनिंग पाइपलाइन का पानी रिस रहा था जबकि क्रेट साफ करने वाली मशीन भी खराब स्थिति में मिली। इन कमियों को खाद्य सुरक्षा मानकों के लिए गंभीर खतरा माना गया।

    एफएसएसएआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उपकरणों वेंटिलेशन सिस्टम और भोजन के संपर्क में आने वाले कई बर्तनों पर जंग और क्षरण पाया गया। एग्जॉस्ट फैन पर कीट रोकने वाली जालियां नहीं लगी थीं जिससे मक्खियों और अन्य कीड़ों के प्रवेश का खतरा बना हुआ था। निरीक्षण के दौरान परिसर में मक्खियां मच्छर फ्रूट फ्लाई मकड़ी के जाले और अन्य कीटों का भारी प्रकोप भी पाया गया।

    जांच में दीवारों पर सीलन उखड़ता पेंट टूटी हुई फर्श की टाइलें और कई स्थानों पर तेल तथा ग्रीस की मोटी परत भी देखी गई। अर्धनिर्मित और तैयार खाद्य उत्पादों को अलग अलग रखने के नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसी तरह शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को भी निर्धारित मानकों के अनुसार अलग नहीं रखा गया। कई कच्चे और अर्धनिर्मित उत्पादों पर निर्माण तिथि या उपयोग की अंतिम तिथि का उल्लेख भी नहीं था। तैयार खाद्य पदार्थ गंदी ट्रे में बिना किसी सुरक्षात्मक लाइनर के रखे गए थे जबकि कोल्ड स्टोरेज में खाद्य सामग्री के साथ कबाड़ भी रखा मिला।

    एफएसएसएआई ने यह भी पाया कि कटे हुए चिकन को सामान्य कमरे के तापमान पर डीफ्रॉस्ट किया जा रहा था जो खाद्य सुरक्षा मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है। तापमान नियंत्रण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी और निरीक्षण के दौरान एक तैयार चिकन सैंडविच बिना अनिवार्य लेबलिंग के पाया गया।

    इन सभी गंभीर कमियों को देखते हुए प्राधिकरण ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया और निर्देश दिया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के सभी प्रावधानों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित होने तक कोई भी खाद्य व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं की जाएगी। एफएसएसएआई ने दोहराया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ आगे भी सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

  • 16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई

    16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । देश में लगातार सामने आ रहे फूड पॉइजनिंग के मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में 16 राज्यों में भोजन से जुड़ी बीमारियों के मामले दर्ज होने और 11 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की खबर ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना केवल किसी एक राज्य या एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह संकेत देती है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

    फूड पॉइजनिंग तब होती है जब दूषित भोजन या पेय पदार्थ शरीर में पहुंचकर बैक्टीरिया वायरस परजीवी या हानिकारक रसायनों के माध्यम से संक्रमण फैला देते हैं। इसके कारण उल्टी दस्त पेट दर्द बुखार कमजोरी और कई बार गंभीर स्थिति तक पैदा हो सकती है। छोटे बच्चों बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में इसका खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खराब गुणवत्ता वाले कच्चे पदार्थों का उपयोग स्वच्छता की अनदेखी निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही गलत तरीके से पैकेजिंग और खाद्य पदार्थों का अनुचित भंडारण फूड पॉइजनिंग की प्रमुख वजह बनते हैं। यदि किसी कंपनी द्वारा तय मानकों का पालन नहीं किया जाता तो बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है।

    भारत में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई पर है। यह संस्था खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तय करती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। समय समय पर खाद्य नमूनों की जांच भी की जाती है लेकिन देश की विशाल आबादी और तेजी से बढ़ते खाद्य बाजार को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उपभोक्ताओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पैक्ड फूड खरीदते समय निर्माण तिथि समाप्ति तिथि एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और पैकेज की स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खरीदते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा भोजन खाने से बचना चाहिए और हमेशा साफ पानी का ही उपयोग करना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति को भोजन करने के कुछ समय बाद लगातार उल्टी दस्त तेज बुखार या पेट में असहनीय दर्द जैसी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

    16 राज्यों में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि कंपनियों विक्रेताओं और उपभोक्ताओं सभी को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी होगी। सुरक्षित भोजन हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए गुणवत्ता नियंत्रण सख्त निगरानी तथा जनजागरूकता तीनों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि सभी स्तरों पर जिम्मेदारी के साथ काम किया जाए तो फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है और लोगों का स्वास्थ्य बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • उपभोक्ता शिकायतों पर एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई, स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी, एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर मांगा जवाब

    उपभोक्ता शिकायतों पर एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई, स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी, एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों के आधार पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी इंस्टामार्ट के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नौ अलग-अलग नोटिस जारी किए हैं। इन शिकायतों में ग्राहकों को एक्सपायर्ड, खराब, दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्य उत्पादों की आपूर्ति किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। नियामक ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए कंपनी से निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

    जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। इनमें एक प्रमुख मामला ऐसे अंडों की बिक्री का बताया गया है, जिन्हें उस ब्रांड नाम के तहत बेचा जा रहा था जो कंपनी के मौजूदा खाद्य लाइसेंस में स्वीकृत उत्पाद श्रेणी के अंतर्गत शामिल नहीं था। नियामक ने निर्देश दिया है कि वैध अनुमति प्राप्त होने तक ऐसे उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस में संशोधन के लिए आवेदन किया जाए।

    शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ पैक्ड खाद्य उत्पाद एक्सपायरी तिथि समाप्त होने के बाद भी ग्राहकों तक पहुंचाए गए। इनमें प्रोटीन सप्लीमेंट और नमकीन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री या आपूर्ति उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। इसी कारण नियामक ने इस मामले को विशेष रूप से गंभीरता से लिया है।

    एक अन्य शिकायत में ऑर्गेनिक अंडों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राहकों को ऐसे अंडे उपलब्ध कराए गए जिनमें सड़न, दुर्गंध और संक्रमण जैसे संकेत मौजूद थे, जिससे वे मानव उपभोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो गए थे। इसी प्रकार एक तैयार खाद्य उत्पाद के खराब और बदबूदार होने की भी शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद उसकी गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि शिकायत दर्ज होने और संबंधित मामले की जानकारी दिए जाने के बावजूद प्रभावी सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए। इसके अतिरिक्त शिशुओं के लिए तैयार एक खाद्य उत्पाद के खराब और असुरक्षित स्थिति में मिलने की शिकायत भी दर्ज हुई। इतना ही नहीं, एक मामले में ग्राहक द्वारा दोषपूर्ण उत्पाद लौटाने के बाद वही उत्पाद दोबारा आपूर्ति किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिसे नियामक ने गंभीर लापरवाही की श्रेणी में माना है।

    एफएसएसएआई ने कंपनी से उसके खाद्य सुरक्षा प्रबंधन तंत्र, गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया, शिकायत निवारण व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही प्रत्येक शिकायत पर की गई कार्रवाई और सुधारात्मक कदमों का पूरा विवरण भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    नियामक ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने और खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू

    दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू


    नई दिल्ली। दिल्ली से भोपाल आ रही नई दिल्ली रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस में शनिवार सुबह यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी लापरवाही सामने आई। ट्रेन में नाश्ते के दौरान यात्रियों को ऐसी ब्रेड परोसी गई जिसकी उपयोग अवधि एक दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। घटना का पता चलते ही पूरे कोच में हड़कंप मच गया और यात्रियों ने रेलवे की खानपान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

    जानकारी के अनुसार ट्रेन के सी फोर कोच में यात्रा कर रहे करीब चौहत्तर यात्रियों को नाश्ते के साथ ब्रेड दी गई थी। इनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे। अधिकांश यात्रियों ने बिना पैकेट देखे ब्रेड खा ली। बाद में एक यात्री की नजर ब्रेड के पैकेट पर लिखी उपयोग अवधि पर पड़ी तो पता चला कि उसकी अंतिम तिथि दस जुलाई थी जबकि इसे ग्यारह जुलाई को यात्रियों को परोसा गया। इसके बाद यात्रियों में फूड पॉयजनिंग की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई।

    यात्रियों का कहना है कि यह मामला केवल एक कोच तक सीमित नहीं था। ट्रेन के अन्य हिस्सों में रखे गए कैटरिंग पैकेटों में भी उसी तारीख वाली ब्रेड मौजूद थी। इससे आशंका जताई जा रही है कि कई अन्य कोचों में भी यात्रियों को एक्सपायरी खाद्य सामग्री परोसी गई होगी। इस घटना ने रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

    दिल्ली से भोपाल यात्रा कर रहे एक यात्री ने बताया कि नाश्ता करने के बाद जब एक्सपायरी डेट का पता चला तो सभी यात्री हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत रेल मदद ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई ताकि मामले की तत्काल जांच हो सके। कई अन्य यात्रियों ने भी ऑनलाइन उपभोक्ता आयोग के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    यात्रियों का कहना है कि यदि इस तरह की लापरवाही एक प्रीमियम ट्रेन में हो सकती है तो अन्य ट्रेनों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता और रेलवे को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए और अधिक सख्त व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

    मामले में आईआरसीटीसी के क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि संबंधित ट्रेन का संचालन नॉर्दर्न रेलवे के अधीन है और भोजन भी वहीं से लोड किया जाता है। हालांकि उन्होंने स्थानीय स्तर पर जांच या कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद यात्रियों में नाराजगी और बढ़ गई क्योंकि वे जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी इसी शताब्दी एक्सप्रेस के भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर शिकायत सामने आई थी। एक यात्री ने सोशल मीडिया पर रेल मंत्री और आईआरसीटीसी को टैग करते हुए भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। लगातार दो दिनों में सामने आई इन घटनाओं ने रेलवे की खानपान व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यात्रियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा देखने को नहीं मिलेगी।

  • एफएसएसएआई का सख्त निर्देश: खाद्य कारोबार में जंग लगे चाकू और क्षतिग्रस्त कटिंग टूल्स पर रोक, नियम तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    एफएसएसएआई का सख्त निर्देश: खाद्य कारोबार में जंग लगे चाकू और क्षतिग्रस्त कटिंग टूल्स पर रोक, नियम तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली । देश में खाद्य सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्राधिकरण ने सभी खाद्य कारोबारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि खाद्य पदार्थों के उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और वितरण के दौरान केवल फूड-ग्रेड तथा जंग-रोधी चाकू, ब्लेड और अन्य कटिंग उपकरणों का ही उपयोग किया जाए। यह निर्देश ऐसे समय में जारी किया गया है जब विभिन्न क्षेत्रों से खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाले जंग लगे और क्षतिग्रस्त उपकरणों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आई हैं।

    एफएसएसएआई के अनुसार कई खाद्य प्रतिष्ठानों में ऐसे चाकू और कटिंग टूल्स उपयोग में पाए गए हैं जो जंग लगे हुए, टूटे-फूटे, दरारयुक्त या अत्यधिक खराब स्थिति में हैं। कुछ मामलों में पेंट किए गए या क्षतिग्रस्त उपकरणों के इस्तेमाल की भी जानकारी मिली है। ऐसे उपकरण खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। नियामक का मानना है कि इनकी वजह से खाद्य उत्पादों में भौतिक, रासायनिक और सूक्ष्मजीव संबंधी दूषण की आशंका बढ़ जाती है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मौजूदा नियम पहले से ही यह निर्धारित करते हैं कि भोजन के संपर्क में आने वाले सभी उपकरण, बर्तन और सतहें सुरक्षित, गैर-विषाक्त और जंग-रोधी सामग्री से निर्मित होनी चाहिए। इसके बावजूद यदि कहीं अनुपयुक्त उपकरणों का इस्तेमाल हो रहा है तो यह निर्धारित मानकों और स्वच्छता संबंधी प्रावधानों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।

    एफएसएसएआई ने अपने निर्देश में कहा है कि सभी खाद्य कारोबारी यह सुनिश्चित करें कि उनके यहां उपयोग में आने वाले चाकू, ब्लेड और अन्य कटिंग उपकरण पूरी तरह साफ-सुथरे और कार्यक्षम स्थिति में हों। इनमें जंग, टूट-फूट, दरार, रंग उखड़ने या किसी अन्य प्रकार की ऐसी खामी नहीं होनी चाहिए जिससे खाद्य पदार्थ दूषित होने का जोखिम उत्पन्न हो। इसके साथ ही उपकरणों की नियमित सफाई, सैनिटाइजेशन और आवश्यकता पड़ने पर स्टरलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाने पर भी जोर दिया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य उत्पादन और प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की गुणवत्ता सीधे तौर पर उपभोक्ता स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। यदि कटिंग उपकरणों से धातु के कण, जंग या अन्य हानिकारक तत्व खाद्य सामग्री में मिल जाएं तो यह खाद्य जनित बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। यही वजह है कि खाद्य सुरक्षा मानकों में उपकरणों की गुणवत्ता और रखरखाव को अत्यधिक महत्व दिया जाता है।

    नियामक संस्था ने खाद्य कारोबारियों को सलाह दी है कि वे अपने प्रतिष्ठानों में मौजूद सभी पुराने, जंग लगे या अनुपयोगी कटिंग टूल्स की तत्काल समीक्षा करें और आवश्यक होने पर उन्हें बदल दें। इसके साथ ही समय-समय पर उपकरणों की जांच और रखरखाव की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की भी सिफारिश की गई है ताकि दूषण की संभावनाओं को न्यूनतम किया जा सके।

    एफएसएसएआई ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जारी एडवाइजरी का पालन न करने वाले कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आर्थिक दंड सहित अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य देशभर में खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद पहुंचाना है।

  • क्या किचन स्पंज से होता है कैंसर? जानिए वायरल दावे की सच्चाई और असली खतरा क्या है

    क्या किचन स्पंज से होता है कैंसर? जानिए वायरल दावे की सच्चाई और असली खतरा क्या है

    नई दिल्ली । किचन में रोज इस्तेमाल होने वाला स्पंज या स्क्रबर अचानक चर्चा में है, क्योंकि सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल रहा है कि यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इस दावे ने कई लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी तरह भ्रामक और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं है।

    असल में किचन स्पंज का सबसे बड़ा मुद्दा कैंसर नहीं बल्कि उसमें पनपने वाले बैक्टीरिया हैं। जब स्पंज लंबे समय तक गीला रहता है और उसमें खाने के छोटे कण फंस जाते हैं, तो यह बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है। ऐसे में इसका उपयोग करने पर ये हानिकारक सूक्ष्मजीव बर्तनों और भोजन तक पहुंच सकते हैं, जिससे पेट से जुड़ी बीमारियां, फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक किसी भी विश्वसनीय शोध में यह साबित नहीं हुआ है कि किचन स्पंज सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है। इसलिए इसे लेकर जो दावा वायरल हो रहा है, वह एक मिथक से ज्यादा कुछ नहीं है। कैंसर जैसी बीमारी के कारण जटिल और लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं, जिनका संबंध सामान्य घरेलू स्पंज से नहीं पाया गया है।

    विशेषज्ञ यह जरूर मानते हैं कि खराब किचन हाइजीन कई तरह के संक्रमणों को बढ़ावा दे सकती है। गंदा स्पंज बैक्टीरिया का स्रोत बन सकता है, जो खाने की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे नियमित रूप से साफ करना और समय-समय पर बदलना जरूरी माना जाता है।

    सेहत विशेषज्ञों के अनुसार किचन स्पंज को कुछ हफ्तों के अंतराल पर बदल देना चाहिए और इस्तेमाल के बाद उसे पूरी तरह सूखने देना चाहिए। इसके अलावा गर्म पानी से समय-समय पर उसकी सफाई करना और अलग-अलग कामों के लिए अलग स्क्रबर का उपयोग करना भी बेहतर माना जाता है।

    कुल मिलाकर, किचन स्पंज से कैंसर होने का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है, लेकिन साफ-सफाई की अनदेखी निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए असली ध्यान डर पर नहीं, बल्कि सही हाइजीन आदतों पर देना चाहिए।