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  • खाद्य सुरक्षा पर सवाल, देश में 1.85 लाख नमूने फेल, राजस्थान में सिर्फ 31 मामलों में दोषियों को सजा

    खाद्य सुरक्षा पर सवाल, देश में 1.85 लाख नमूने फेल, राजस्थान में सिर्फ 31 मामलों में दोषियों को सजा

    नई दिल्ली ।देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई के आंकड़े खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती दिखाते हैं। वर्ष 2025-26 में देशभर में 2,23,808 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें 40,023 नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बावजूद दोषियों को सजा मिलने वाले मामलों की संख्या 1,918 रही। यानी जांच में खामियां सामने आने के मुकाबले सजा तक पहुंचने वाले मामले काफी कम हैं।

    पिछले पांच वर्षों के आंकड़े भी इसी स्थिति की ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच देशभर में 8.86 लाख खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 1,85,780 नमूने फेल पाए गए। इन मामलों में 1,39,507 का निपटारा जुर्माना लगाकर किया गया, जबकि केवल 6,203 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के अलग-अलग परिणाम सामने आए हैं।

    सजा की दर में पिछले वर्षों के दौरान कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह अब भी पांच प्रतिशत से कम है। वर्ष 2021-22 में 32,935 नमूने फेल हुए और 671 मामलों में सजा हुई। अगले वर्ष 44,626 नमूनों के फेल होने पर 1,188 मामलों में दोषियों को सजा मिली। वर्ष 2023-24 में सजा की दर 3.4 प्रतिशत और 2024-25 में 3.7 प्रतिशत रही। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई।

    राजस्थान के आंकड़े विशेष रूप से ध्यान खींचते हैं। वर्ष 2025-26 में राज्य में 17,325 खाद्य नमूनों की जांच की गई, जिनमें 4,594 नमूने फेल पाए गए। यह कुल जांचे गए नमूनों का 26.5 प्रतिशत है। फेल नमूनों की संख्या के मामले में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि, राज्य में केवल 31 मामलों में दोषियों को सजा मिली। फेल नमूनों की संख्या के मुकाबले यह दर एक प्रतिशत से भी कम है।

    मध्य प्रदेश में भी स्थिति में सुधार की जरूरत दिखाई देती है। वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में फेल हुए खाद्य नमूनों के करीब चार प्रतिशत मामलों में ही सजा हुई। यह राष्ट्रीय औसत 4.8 प्रतिशत से कम है। ऐसे में राज्य में खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच, कानूनी प्रक्रिया और दोषियों को सजा दिलाने की व्यवस्था पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

    छत्तीसगढ़ में इसी अवधि के दौरान 2,065 खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 214 नमूने फेल पाए गए, जो कुल नमूनों का लगभग 10.4 प्रतिशत है। हालांकि, नमूनों के फेल होने की दर अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी आवश्यक बनी रहती है।

    दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में खाद्य नमूनों के फेल होने का आंकड़ा काफी अधिक रहा। वर्ष 2025-26 में वहां 39,519 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 20,427 फेल मिले। यह कुल नमूनों का 51.7 प्रतिशत है। इसके बावजूद राज्य में 342 मामलों में ही सजा हुई। हरियाणा में 31 प्रतिशत और झारखंड में 27.8 प्रतिशत नमूने फेल हुए। महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 17.4 प्रतिशत और पंजाब में 13.2 प्रतिशत रहा।

    कुछ राज्यों में दोषियों को सजा मिलने की दर बेहतर दर्ज की गई। तमिलनाडु में 3,984 फेल नमूनों के मुकाबले 857 मामलों में सजा हुई, जबकि केरल में 1,863 फेल नमूनों के मुकाबले 330 मामलों में दोषियों को सजा मिली। इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, झारखंड, गोवा, असम, बिहार और पुडुचेरी में दिए गए आंकड़ों के अनुसार किसी मामले में सजा दर्ज नहीं हुई।

    दूध और डेयरी उत्पादों की जांच भी चिंता का विषय है। वर्ष 2025-26 में इनके 39,351 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 14,668 फेल मिले। यानी लगभग 37.3 प्रतिशत नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। दूध रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तु है, इसलिए इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

    खाद्य सुरक्षा कानून, 2006 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने और जेल का प्रावधान है। असुरक्षित खाद्य पदार्थ से गंभीर नुकसान होने पर छह साल तक की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि असुरक्षित भोजन से किसी की मौत होती है, तो उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

    हालांकि, हर फेल नमूना मिलावट का मामला नहीं होता। इसमें असुरक्षित खाद्य पदार्थ, निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पाद और गलत लेबल वाले सामान भी शामिल हो सकते हैं। सरकार के मुताबिक, करीब 98 प्रतिशत खाद्य कारोबारी राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

    खाद्य पदार्थों की निगरानी के लिए वर्ष 2025-26 में देशभर में 5,20,566 निरीक्षण किए गए। वर्ष 2024-25 में 4,01,391 और 2023-24 में 3,57,072 निरीक्षण हुए थे। पिछले पांच वर्षों में 4,461 लाइसेंस निलंबित और 11,493 लाइसेंस रद्द किए गए। इन आंकड़ों के बीच सबसे अहम चुनौती यह है कि जांच में खामी मिलने के बाद मामलों का प्रभावी निपटारा हो और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ समय पर कानूनी कार्रवाई हो।

  • मध्य प्रदेश एफडीए ने पतंजलि के गाय घी के एक बैच को असुरक्षित बताया, बाजार से वापस मंगाने का आदेश

    मध्य प्रदेश एफडीए ने पतंजलि के गाय घी के एक बैच को असुरक्षित बताया, बाजार से वापस मंगाने का आदेश

    मध्य प्रदेश: खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पतंजलि फूड्स लिमिटेड के गाय के घी के एक विशेष बैच को असुरक्षित बताते हुए बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नमूना नहीं पाए जाने के बाद की गई। कंपनी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा है कि वह नियामक के आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी। मामले में कार्रवाई बुरहानपुर जिले में संबंधित बैच को लेकर की गई है।

    कंपनी के अनुसार, मध्य प्रदेश एफडीए ने गाय के घी के संबंधित बैच का नमूना लेकर जांच कराई थी। जांच में नमूना खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमों के तहत निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके बाद नियामक ने संबंधित उत्पाद को वापस मंगाने का निर्देश जारी किया। यह मामला खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 के तहत निर्धारित प्रावधानों से जुड़ा है। इन नियमों में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा से संबंधित मानक तय किए गए हैं।

    पतंजलि फूड्स ने स्पष्ट किया है कि वह मध्य प्रदेश एफडीए के नामित अधिकारी द्वारा जारी आदेश को चुनौती देने के लिए अपील दायर कर रही है। कंपनी का कहना है कि इस कार्रवाई से उसके वित्तीय और परिचालन कारोबार पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है। उसके मुताबिक, संभावित प्रभाव संबंधित गाय के घी के बैच के मूल्य तक सीमित रहेगा। हालांकि, नियामक की कार्रवाई के बाद संबंधित बैच को बाजार से वापस मंगाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

    इस घटनाक्रम के बीच कंपनी के शेयर में भी गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध शेयर बाजार आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को पतंजलि फूड्स का शेयर बीएसई पर एक प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ 351 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 52 सप्ताह के दौरान शेयर ने 613.95 रुपये का उच्चतम और 328.05 रुपये का न्यूनतम स्तर दर्ज किया। एक साल की अवधि में कंपनी के शेयर में करीब 41 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि तीन वर्षों में इसमें लगभग 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि, पांच साल की अवधि में शेयर ने करीब पांच प्रतिशत का सकारात्मक रिटर्न दिया है।

    पतंजलि फूड्स इससे पहले भी खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर नियामकीय कार्रवाई का सामना कर चुकी है। जून में कंपनी के ज्वार के आटे के एक विशेष बैच को लेकर विवाद सामने आया था। उस समय केरल के कन्नूर जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने जांच में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए जाने के बाद संबंधित बैच की बिक्री पर रोक लगा दी थी।

    उस मामले में भी कंपनी ने नियामकीय जानकारी साझा करते हुए बताया था कि उसे कन्नूर जिला खाद्य सुरक्षा कार्यालय से ज्वार के आटे के एक विशेष बैच की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश मिला है। मौजूदा मामले में भी कार्रवाई किसी खास बैच तक सीमित बताई गई है। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे कंपनी के सभी गाय के घी उत्पादों पर लागू कार्रवाई नहीं माना जा सकता।

    मध्य प्रदेश में हुई इस कार्रवाई के बाद संबंधित बैच की वापसी और कंपनी की प्रस्तावित अपील पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल कंपनी ने वित्तीय और परिचालन प्रभाव को सीमित बताया है, जबकि नियामक की जांच में संबंधित घी के नमूने का निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरना कार्रवाई का आधार बना है।

  • त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    नई दिल्ली । गाजियाबाद में त्योहारों के मौसम को देखते हुए मिठाई और खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से जिले के सभी मिठाई विक्रेताओं के लिए मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना अनिवार्य होगा। नए प्रावधान को प्रभावी तरीके से लागू करने से पहले दुकानदारों को इसकी जानकारी देने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।

    इस अभियान के लिए जिले में 18 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में 18 टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वाले व्यापारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रही हैं। व्यापारियों को नए नियम के बारे में जानकारी देने के साथ यह भी बताया जा रहा है कि मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना क्यों जरूरी है और नए प्रावधान का पालन किस तरह किया जाना है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग का जोर फिलहाल व्यापारियों को नियमों के बारे में पर्याप्त जानकारी देने पर है। अधिकारियों का मानना है कि त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले दुकानदारों को नए प्रावधान की जानकारी मिलने से उन्हें अपनी व्यवस्था उसके अनुसार तैयार करने का समय मिल जाएगा। विभाग का उद्देश्य जागरूकता के जरिए नियमों के पालन को बढ़ावा देना है, ताकि बाद में नियमों के उल्लंघन की स्थिति कम से कम हो।

    विभाग के मुताबिक त्योहारों को लेकर विशेष अभियान 15 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा। हालांकि, इससे पहले ही गठित 18 टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण कर रही हैं। निरीक्षण के दौरान दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में उपलब्ध खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों को तैयार करने की प्रक्रिया और प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई की स्थिति भी देखी जा रही है।

    जांच के दौरान खाद्य सामग्री को तैयार करने से लेकर उसके भंडारण तक निर्धारित नियमों के पालन की स्थिति भी देखी जा रही है। विभाग की टीमें यह जांच कर रही हैं कि खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार और सुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है या नहीं। इस दौरान खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए जा रहे हैं।

    निरीक्षण के दौरान लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी भी दी जा रही है। विभाग की ओर से व्यापारियों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि नए प्रावधान लागू होने से पहले वे अपनी व्यवस्था में जरूरी बदलाव कर सकें।

    सहायक खाद्य आयुक्त सुरेश मिश्रा के मुताबिक फिलहाल खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है और 18 टीमों के माध्यम से नियमित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उनके अनुसार शासन से आदेश मिलने के बाद त्योहारों को लेकर विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। इस दौरान खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण, खाद्य सामग्री की जांच और नियमों के पालन पर विभाग की कार्रवाई जारी रहेगी।

    15 अक्टूबर से लागू होने वाले ‘Use By Date’ के प्रावधान को लेकर विभाग ने व्यापारियों तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। त्योहारों से पहले चलाए जा रहे इस जागरूकता अभियान के साथ नियमित निरीक्षण और खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने की कार्रवाई भी जारी है। विभाग का प्रयास है कि मिठाई विक्रेता नए नियम को समझें और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उसका पालन सुनिश्चित करें।

  • कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले KMC की बड़ी कार्रवाई, 592 प्रतिष्ठानों की जांच में 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित

    कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले KMC की बड़ी कार्रवाई, 592 प्रतिष्ठानों की जांच में 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले खाद्य सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। कोलकाता नगर निगम की टीम ने शहर में खाद्य कारोबार से जुड़े 592 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगहों पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, लाइसेंस और रसोई की स्वच्छता से संबंधित अनियमितताएं सामने आईं। कार्रवाई के बाद 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।

    नगर निगम प्रशासन के अनुसार यह अभियान ‘फूड सेफ्टी वीक’ के तहत चलाया गया। इसका उद्देश्य दुर्गा पूजा से पहले शहर में खाद्य प्रतिष्ठानों की व्यवस्था और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच करना था। अभियान के दायरे में होटल, क्लब, रेस्टोरेंट, बाजार और बाजारों में संचालित अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों को शामिल किया गया। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान खाद्य सामग्री के भंडारण, निर्माण, बिक्री, गुणवत्ता और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई जैसे कई पहलुओं की जांच की।

    निरीक्षण के दौरान करीब 1,224 किलोग्राम खाद्य सामग्री को नष्ट किया गया। अधिकारियों को कई स्थानों पर ऐसी खाद्य सामग्री मिली, जिसे खाने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया। कुछ प्रतिष्ठानों में भंडारित छेना में फफूंद पाई गई, जबकि कुछ जगहों पर बड़ी मात्रा में खराब मांस बरामद हुआ। एक बड़े स्वीट शॉप के रेफ्रिजरेटर के अंदर कॉकरोच मिलने की बात भी सामने आई। इन स्थितियों को देखते हुए संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जांच में लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताएं भी सामने आईं। कुछ प्रतिष्ठानों के पास खाद्य सामग्री बेचने के लिए रिटेल लाइसेंस मौजूद था, लेकिन जरूरी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नहीं था। इसका मतलब था कि संबंधित प्रतिष्ठान खाद्य सामग्री की बिक्री के लिए अधिकृत थे, लेकिन उसके निर्माण से जुड़ी आवश्यक अनुमति उनके पास नहीं थी। अधिकारियों ने ऐसी कमियों को भी निरीक्षण और कार्रवाई का हिस्सा बनाया।

    नगर निगम प्रशासन की ओर से बताया गया कि निलंबित किए गए प्रतिष्ठानों को नियमों का पालन करना होगा। यदि संबंधित प्रतिष्ठान आवश्यक मानकों को पूरा करते हैं और कमियों को दूर करते हैं, तो उनके लाइसेंस की स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी। कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य कारोबारियों को नियमों के पालन के लिए जिम्मेदार बनाना भी है।

    नगर निगम की म्यूनिसिपल एडमिनिस्ट्रेटर स्मिता पांडे ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि पहले लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई नियमित रूप से नहीं की जाती थी, लेकिन अब विभाग को ऐसी कार्रवाई करने की पूरी छूट है। उनके अनुसार शहर में खाद्य कारोबार से जुड़े लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों को अभियान में शामिल किया गया।

    दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में बड़ी संख्या में लोग रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का रुख करते हैं। ऐसे में त्योहार से पहले खाद्य सुरक्षा को लेकर की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नगर निगम को उम्मीद है कि कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठान खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भंडारण और रसोई की स्वच्छता को लेकर अधिक सावधानी बरतेंगे।

  • कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    नई दिल्ली । कर्नाटक सरकार ने पनीर की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर की बिक्री पर बड़ा फैसला लिया है। राज्य में दूध से तैयार नहीं होने वाले ऐसे पनीर उत्पादों की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है। यह आदेश 17 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुका है। अब कर्नाटक में पनीर के नाम से वही उत्पाद बेचा जा सकेगा, जो निर्धारित खाद्य मानकों के अनुसार दूध से तैयार किया गया हो।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब बाजार में पारंपरिक डेयरी पनीर के अलावा कई तरह के नॉन-डेयरी और एनालॉग उत्पाद भी उपलब्ध हैं। अधिकारियों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं को सही जानकारी के साथ उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। जांच के दौरान लिए गए कुछ नमूनों में मिलावट नहीं पाए जाने के बावजूद नॉन-डेयरी पनीर के स्वरूप और उसकी बिक्री को लेकर नियामकीय स्तर पर यह कार्रवाई की गई है।

    एनालॉग पनीर और सामान्य पनीर में मुख्य अंतर उनके इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का है। पारंपरिक पनीर मुख्य रूप से दूध से तैयार किया जाता है, जिसमें दूध के प्रोटीन और वसा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दूसरी ओर, एनालॉग पनीर बनाने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति तेल, वनस्पति वसा और अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों को पनीर के नाम से बाजार में बेचे जाने पर अब कर्नाटक में रोक रहेगी।

    नए नियम के तहत खाद्य कारोबारियों, दुकानदारों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों को ऐसे एनालॉग पनीर को बेचने के साथ-साथ उसका भंडारण, वितरण, आपूर्ति या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो गैर-डेयरी सामग्री से तैयार पनीर जैसे उत्पादों को सामान्य पनीर के तौर पर बाजार में उपलब्ध कराते हैं।

    हालांकि, सरकार की ओर से लगाई गई यह रोक हर तरह के नॉन-डेयरी खाद्य उत्पाद पर लागू नहीं होगी। जिन उत्पादों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई की ओर से पहले से अलग खाद्य मानक निर्धारित हैं, वे इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगे। इनमें फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन वस्तुओं को उनके निर्धारित मानकों और लेबलिंग नियमों के तहत बेचा जा सकेगा।

    इस फैसले के बाद कर्नाटक में खाद्य कारोबारियों के लिए उत्पाद की सही पहचान और लेबलिंग का महत्व और बढ़ गया है। पनीर के नाम पर ऐसे उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकेगी, जो निर्धारित दूध आधारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। सरकार का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्पष्टता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को वास्तविक उत्पाद की जानकारी उपलब्ध कराना है।

    राज्य में यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू किया गया है। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और जांच के जरिए नियमों के पालन पर नजर रखी जाएगी। कर्नाटक का यह कदम ऐसे उत्पादों को लेकर बढ़ती नियामकीय सख्ती का संकेत माना जा रहा है, जिनके नाम और स्वरूप को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

  • बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप

    बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप


    नई दिल्ली
    । बेंगलुरु के कई नामी थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों में खाद्य सुरक्षा को लेकर हुई जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों की जांच के दौरान कुछ होटलों में फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर्ड दूध और डेयरी उत्पाद, खराब हालत में रखा चिकन, मटन और मछली तथा नियमों के अनुरूप नहीं रखे गए खाद्य पदार्थ मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 7 अगस्त को चलाए गए इस विशेष निरीक्षण अभियान में शहर के सभी जोन को शामिल किया गया।

    इस अभियान के तहत 30 टीमों ने बेंगलुरु के कुल 26 थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने होटलों की रसोई, खाद्य भंडारण व्यवस्था, लेबलिंग और साफ-सफाई समेत कई मानकों की जांच की। इस दौरान कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग में भी नियमों का पालन नहीं किया गया था। अधिकारियों को कई ऐसे उत्पाद मिले जिनकी निर्धारित उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी थी। कुछ किचन में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

    जांच के दौरान कुछ होटलों में वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने के नियमों का भी पालन नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की सही जानकारी उपलब्ध नहीं थी और जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा स्टोरेज में एक्सपायर्ड दूध, डेयरी और बेकरी उत्पाद पाए गए। सब्जियों में फफूंदी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण से जुड़ी खामियां भी सामने आईं।

    कार्रवाई के दौरान द ललित अशोक के एनेक्स साउथ परिसर से 76 किलो मीट और 200 किलो सब्जियां जब्त की गईं। इसके अलावा 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध भी जब्त कर नष्ट किया गया। शांग्री-ला बेंगलुरु से 15 किलो मीट और फोर सीजन्स होटल बेंगलुरु से 19 किलो मीट जब्त किया गया। विवांता बैंगलोर व्हाइटफील्ड में तीन किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए, जबकि ताज यशवंतपुर से 72 किलो मीट और मछली जब्त की गई।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रेडिसन ब्लू के द एट्रिया परिसर में सामने आई, जहां कुल 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें 50 किलो चिकन, 23 किलो मीट, 23 किलो मछली और सात किलो सब्जियां शामिल थीं। अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन वाले होटलों को नोटिस भी जारी किए हैं। अब आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।

    पूरे अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल भी लिए गए हैं। इनमें चाय पाउडर, चिकन, मटन, मछली, खाद्य तेल, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, टोमैटो सॉस, नींबू का रस, चीज, पापड़, काजू, अदरक, काली मिर्च, मसाले और दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल संबंधित होटलों से लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति और स्पष्ट होगी तथा उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • एफएसएसएआई का स्विट्ज फूड्स पर बड़ा एक्शन, फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस सस्पेंड

    एफएसएसएआई का स्विट्ज फूड्स पर बड़ा एक्शन, फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस सस्पेंड

    नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए स्विट्ज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड का फूड बिजनेस लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। एफएसएसएआई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक कंपनी सभी कमियों को दूर कर खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित नहीं करती तब तक वह किसी भी प्रकार की खाद्य उत्पादन या व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं कर सकेगी। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    एफएसएसएआई के अनुसार कंपनी के विनिर्माण संयंत्र के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि खाद्य पदार्थों का निर्माण पैकेजिंग और भंडारण बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में किया जा रहा था जिससे खाद्य सामग्री के दूषित होने का गंभीर खतरा बना हुआ था। फैक्ट्री परिसर में साफ सफाई और सैनिटेशन की स्थिति भी बेहद खराब मिली। विशेष रूप से क्रेट वॉशिंग एरिया नॉन वेज रिसीविंग एरिया और गाजर काटने वाली मशीन के आसपास अत्यधिक गंदगी पाई गई।

    निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों ट्रॉलियों ट्रे मोल्ड एचडीपीई क्रेट और अन्य उपकरणों की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं किया जा रहा था। उत्पाद भंडारण क्षेत्र के ऊपर से एयर कंडीशनिंग पाइपलाइन का पानी रिस रहा था जबकि क्रेट साफ करने वाली मशीन भी खराब स्थिति में मिली। इन कमियों को खाद्य सुरक्षा मानकों के लिए गंभीर खतरा माना गया।

    एफएसएसएआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उपकरणों वेंटिलेशन सिस्टम और भोजन के संपर्क में आने वाले कई बर्तनों पर जंग और क्षरण पाया गया। एग्जॉस्ट फैन पर कीट रोकने वाली जालियां नहीं लगी थीं जिससे मक्खियों और अन्य कीड़ों के प्रवेश का खतरा बना हुआ था। निरीक्षण के दौरान परिसर में मक्खियां मच्छर फ्रूट फ्लाई मकड़ी के जाले और अन्य कीटों का भारी प्रकोप भी पाया गया।

    जांच में दीवारों पर सीलन उखड़ता पेंट टूटी हुई फर्श की टाइलें और कई स्थानों पर तेल तथा ग्रीस की मोटी परत भी देखी गई। अर्धनिर्मित और तैयार खाद्य उत्पादों को अलग अलग रखने के नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसी तरह शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को भी निर्धारित मानकों के अनुसार अलग नहीं रखा गया। कई कच्चे और अर्धनिर्मित उत्पादों पर निर्माण तिथि या उपयोग की अंतिम तिथि का उल्लेख भी नहीं था। तैयार खाद्य पदार्थ गंदी ट्रे में बिना किसी सुरक्षात्मक लाइनर के रखे गए थे जबकि कोल्ड स्टोरेज में खाद्य सामग्री के साथ कबाड़ भी रखा मिला।

    एफएसएसएआई ने यह भी पाया कि कटे हुए चिकन को सामान्य कमरे के तापमान पर डीफ्रॉस्ट किया जा रहा था जो खाद्य सुरक्षा मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है। तापमान नियंत्रण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी और निरीक्षण के दौरान एक तैयार चिकन सैंडविच बिना अनिवार्य लेबलिंग के पाया गया।

    इन सभी गंभीर कमियों को देखते हुए प्राधिकरण ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया और निर्देश दिया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के सभी प्रावधानों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित होने तक कोई भी खाद्य व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं की जाएगी। एफएसएसएआई ने दोहराया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ आगे भी सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

  • 16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई

    16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । देश में लगातार सामने आ रहे फूड पॉइजनिंग के मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में 16 राज्यों में भोजन से जुड़ी बीमारियों के मामले दर्ज होने और 11 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की खबर ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना केवल किसी एक राज्य या एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह संकेत देती है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

    फूड पॉइजनिंग तब होती है जब दूषित भोजन या पेय पदार्थ शरीर में पहुंचकर बैक्टीरिया वायरस परजीवी या हानिकारक रसायनों के माध्यम से संक्रमण फैला देते हैं। इसके कारण उल्टी दस्त पेट दर्द बुखार कमजोरी और कई बार गंभीर स्थिति तक पैदा हो सकती है। छोटे बच्चों बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में इसका खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खराब गुणवत्ता वाले कच्चे पदार्थों का उपयोग स्वच्छता की अनदेखी निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही गलत तरीके से पैकेजिंग और खाद्य पदार्थों का अनुचित भंडारण फूड पॉइजनिंग की प्रमुख वजह बनते हैं। यदि किसी कंपनी द्वारा तय मानकों का पालन नहीं किया जाता तो बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है।

    भारत में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई पर है। यह संस्था खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तय करती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। समय समय पर खाद्य नमूनों की जांच भी की जाती है लेकिन देश की विशाल आबादी और तेजी से बढ़ते खाद्य बाजार को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उपभोक्ताओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पैक्ड फूड खरीदते समय निर्माण तिथि समाप्ति तिथि एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और पैकेज की स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खरीदते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा भोजन खाने से बचना चाहिए और हमेशा साफ पानी का ही उपयोग करना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति को भोजन करने के कुछ समय बाद लगातार उल्टी दस्त तेज बुखार या पेट में असहनीय दर्द जैसी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

    16 राज्यों में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि कंपनियों विक्रेताओं और उपभोक्ताओं सभी को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी होगी। सुरक्षित भोजन हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए गुणवत्ता नियंत्रण सख्त निगरानी तथा जनजागरूकता तीनों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि सभी स्तरों पर जिम्मेदारी के साथ काम किया जाए तो फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है और लोगों का स्वास्थ्य बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • उपभोक्ता शिकायतों पर एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई, स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी, एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर मांगा जवाब

    उपभोक्ता शिकायतों पर एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई, स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी, एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों के आधार पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी इंस्टामार्ट के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नौ अलग-अलग नोटिस जारी किए हैं। इन शिकायतों में ग्राहकों को एक्सपायर्ड, खराब, दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्य उत्पादों की आपूर्ति किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। नियामक ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए कंपनी से निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

    जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। इनमें एक प्रमुख मामला ऐसे अंडों की बिक्री का बताया गया है, जिन्हें उस ब्रांड नाम के तहत बेचा जा रहा था जो कंपनी के मौजूदा खाद्य लाइसेंस में स्वीकृत उत्पाद श्रेणी के अंतर्गत शामिल नहीं था। नियामक ने निर्देश दिया है कि वैध अनुमति प्राप्त होने तक ऐसे उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस में संशोधन के लिए आवेदन किया जाए।

    शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ पैक्ड खाद्य उत्पाद एक्सपायरी तिथि समाप्त होने के बाद भी ग्राहकों तक पहुंचाए गए। इनमें प्रोटीन सप्लीमेंट और नमकीन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री या आपूर्ति उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। इसी कारण नियामक ने इस मामले को विशेष रूप से गंभीरता से लिया है।

    एक अन्य शिकायत में ऑर्गेनिक अंडों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राहकों को ऐसे अंडे उपलब्ध कराए गए जिनमें सड़न, दुर्गंध और संक्रमण जैसे संकेत मौजूद थे, जिससे वे मानव उपभोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो गए थे। इसी प्रकार एक तैयार खाद्य उत्पाद के खराब और बदबूदार होने की भी शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद उसकी गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि शिकायत दर्ज होने और संबंधित मामले की जानकारी दिए जाने के बावजूद प्रभावी सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए। इसके अतिरिक्त शिशुओं के लिए तैयार एक खाद्य उत्पाद के खराब और असुरक्षित स्थिति में मिलने की शिकायत भी दर्ज हुई। इतना ही नहीं, एक मामले में ग्राहक द्वारा दोषपूर्ण उत्पाद लौटाने के बाद वही उत्पाद दोबारा आपूर्ति किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिसे नियामक ने गंभीर लापरवाही की श्रेणी में माना है।

    एफएसएसएआई ने कंपनी से उसके खाद्य सुरक्षा प्रबंधन तंत्र, गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया, शिकायत निवारण व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही प्रत्येक शिकायत पर की गई कार्रवाई और सुधारात्मक कदमों का पूरा विवरण भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    नियामक ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने और खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू

    दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू


    नई दिल्ली। दिल्ली से भोपाल आ रही नई दिल्ली रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस में शनिवार सुबह यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी लापरवाही सामने आई। ट्रेन में नाश्ते के दौरान यात्रियों को ऐसी ब्रेड परोसी गई जिसकी उपयोग अवधि एक दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। घटना का पता चलते ही पूरे कोच में हड़कंप मच गया और यात्रियों ने रेलवे की खानपान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

    जानकारी के अनुसार ट्रेन के सी फोर कोच में यात्रा कर रहे करीब चौहत्तर यात्रियों को नाश्ते के साथ ब्रेड दी गई थी। इनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे। अधिकांश यात्रियों ने बिना पैकेट देखे ब्रेड खा ली। बाद में एक यात्री की नजर ब्रेड के पैकेट पर लिखी उपयोग अवधि पर पड़ी तो पता चला कि उसकी अंतिम तिथि दस जुलाई थी जबकि इसे ग्यारह जुलाई को यात्रियों को परोसा गया। इसके बाद यात्रियों में फूड पॉयजनिंग की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई।

    यात्रियों का कहना है कि यह मामला केवल एक कोच तक सीमित नहीं था। ट्रेन के अन्य हिस्सों में रखे गए कैटरिंग पैकेटों में भी उसी तारीख वाली ब्रेड मौजूद थी। इससे आशंका जताई जा रही है कि कई अन्य कोचों में भी यात्रियों को एक्सपायरी खाद्य सामग्री परोसी गई होगी। इस घटना ने रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

    दिल्ली से भोपाल यात्रा कर रहे एक यात्री ने बताया कि नाश्ता करने के बाद जब एक्सपायरी डेट का पता चला तो सभी यात्री हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत रेल मदद ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई ताकि मामले की तत्काल जांच हो सके। कई अन्य यात्रियों ने भी ऑनलाइन उपभोक्ता आयोग के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    यात्रियों का कहना है कि यदि इस तरह की लापरवाही एक प्रीमियम ट्रेन में हो सकती है तो अन्य ट्रेनों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता और रेलवे को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए और अधिक सख्त व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

    मामले में आईआरसीटीसी के क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि संबंधित ट्रेन का संचालन नॉर्दर्न रेलवे के अधीन है और भोजन भी वहीं से लोड किया जाता है। हालांकि उन्होंने स्थानीय स्तर पर जांच या कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद यात्रियों में नाराजगी और बढ़ गई क्योंकि वे जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी इसी शताब्दी एक्सप्रेस के भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर शिकायत सामने आई थी। एक यात्री ने सोशल मीडिया पर रेल मंत्री और आईआरसीटीसी को टैग करते हुए भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। लगातार दो दिनों में सामने आई इन घटनाओं ने रेलवे की खानपान व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यात्रियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा देखने को नहीं मिलेगी।