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  • अंत्योदय योजना में नया फॉर्मूला प्रस्तावित, प्रति व्यक्ति 7 किलो राशन देने की तैयारी से बड़े परिवारों को मिलेगा फायदा

    अंत्योदय योजना में नया फॉर्मूला प्रस्तावित, प्रति व्यक्ति 7 किलो राशन देने की तैयारी से बड़े परिवारों को मिलेगा फायदा

    नई दिल्ली । देश के सबसे गरीब और वंचित परिवारों तक खाद्य सुरक्षा का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार राशन वितरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार ने अंत्योदय अन्न योजना के तहत लागू मौजूदा परिवार-आधारित राशन प्रणाली को संशोधित करते हुए प्रति व्यक्ति आधार पर अनाज वितरण का प्रस्ताव रखा है। इस बदलाव को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में संशोधन के माध्यम से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार अब अंत्योदय अन्न योजना के पात्र परिवारों को परिवार की कुल सदस्य संख्या के आधार पर प्रति व्यक्ति सात किलोग्राम अनाज प्रतिमाह उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि किसी भी परिवार को मिलने वाले कुल राशन की अधिकतम सीमा 35 किलोग्राम ही रखी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से बड़े परिवारों को मौजूदा व्यवस्था की तुलना में अधिक न्यायसंगत लाभ मिल सकेगा।

    वर्तमान में अंत्योदय अन्न योजना के तहत लाभार्थी परिवारों को उनके सदस्यों की संख्या की परवाह किए बिना हर महीने 35 किलोग्राम अनाज प्रदान किया जाता है। दूसरी ओर प्राथमिकता श्रेणी के लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम अनाज मिलता है। इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से यह तर्क दिया जाता रहा है कि बड़े परिवारों में प्रति सदस्य उपलब्ध अनाज की मात्रा अपेक्षाकृत कम रह जाती है, जबकि वे सबसे कमजोर आर्थिक वर्ग में शामिल होते हैं।

    खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी संशोधन मसौदे में इस असमानता को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। विभाग का कहना है कि परिवार आधारित व्यवस्था प्रारंभिक चरण में कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई थी, लेकिन समय के साथ परिवारों के आकार में अंतर के कारण लाभ वितरण में असंतुलन दिखाई देने लगा है। ऐसे में सदस्य-आधारित प्रणाली अधिक व्यावहारिक और न्यायपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है।

    यदि प्रस्तावित नियम लागू होता है तो दो सदस्य वाले अंत्योदय परिवार को प्रतिमाह 14 किलोग्राम अनाज मिलेगा, जबकि तीन सदस्य होने पर 21 किलोग्राम और चार सदस्य होने पर 28 किलोग्राम अनाज आवंटित किया जा सकेगा। पांच या उससे अधिक सदस्यों वाले परिवारों को अधिकतम 35 किलोग्राम राशन मिलता रहेगा। इस प्रकार बड़े परिवारों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुरूप लाभ सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।

    सरकार ने इस प्रस्ताव को खाद्य और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव मानव जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की खाद्य आवश्यकताओं को केंद्र में रखकर योजनाओं का संचालन किया जाता है। इसका उद्देश्य केवल खाद्यान्न उपलब्ध कराना नहीं बल्कि जरूरतमंद आबादी के लिए पर्याप्त और सुलभ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत वर्तमान में करोड़ों लाभार्थियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से चावल और गेहूं उपलब्ध कराया जा रहा है। हाल के वर्षों में मुफ्त राशन वितरण की व्यवस्था ने गरीब परिवारों को राहत पहुंचाई है। अब सरकार इस प्रणाली को अधिक संतुलित और जरूरत आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक 2026 के मसौदे पर सरकार ने आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। 13 जुलाई तक प्राप्त होने वाले सुझावों के आधार पर प्रस्ताव का अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा। यदि संशोधन को मंजूरी मिलती है तो देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव माना जाएगा, जिसका सीधा प्रभाव लाखों अंत्योदय परिवारों पर पड़ सकता है।

  • जलवायु संकट और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच भारत का संदेश, छोटे किसानों को मजबूत किए बिना सुरक्षित नहीं होगा खाद्य भविष्य

    जलवायु संकट और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच भारत का संदेश, छोटे किसानों को मजबूत किए बिना सुरक्षित नहीं होगा खाद्य भविष्य

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत ने ब्रिक्स देशों से छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास तेज करने का आह्वान किया है। भारत का मानना है कि दुनिया की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और टिकाऊ कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए किसानों को आर्थिक, तकनीकी और संस्थागत रूप से सक्षम बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

    इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सदस्य देशों के बीच गहरा सहयोग वैश्विक कृषि व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ब्रिक्स देश अपनी सामूहिक क्षमता, अनुभव और संसाधनों का प्रभावी उपयोग करें तो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक और दूरगामी बदलाव संभव हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र अनेक जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता बढ़ रही है, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है और वैश्विक कृषि बाजारों में अस्थिरता किसानों के लिए नई कठिनाइयां पैदा कर रही है। इन परिस्थितियों में छोटे किसानों की सुरक्षा और समृद्धि को प्राथमिकता देना आवश्यक हो गया है।

    कृषि मंत्री ने कहा कि दुनिया के अधिकांश देशों में छोटे और सीमांत किसान खाद्य उत्पादन की रीढ़ हैं। यदि इन्हें आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता, बेहतर बाजार और नवाचार आधारित कृषि प्रणालियों तक पहुंच मिलती है तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक मजबूत और स्थिर बनेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों का सशक्तिकरण ही खाद्य सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है।

    भारत की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि पिछले एक दशक में देश के कृषि क्षेत्र ने लगातार उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर लगभग 4.5 प्रतिशत रही है, जो इस क्षेत्र की मजबूती और क्षमता को दर्शाती है। खाद्यान्न उत्पादन में निरंतर वृद्धि ने देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया है।

    उन्होंने जानकारी दी कि भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच चुका है। वहीं गेहूं उत्पादन करीब 118 मिलियन टन के स्तर पर पहुंच गया है। बागवानी क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है और इसका उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक हो चुका है। इसके अलावा मत्स्य उत्पादन 19 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर गया है, जो कृषि से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक विकास का संकेत है।

    सम्मेलन के दौरान मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कृषि नीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखता है और कृषि क्षेत्र में साझा प्रगति का समर्थन करता है।

    चौहान ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित कर रहा है, जिसके माध्यम से करोड़ों लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि देश की लगभग 43 प्रतिशत कार्यशक्ति कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है, जिससे यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।

    उन्होंने विशेष रूप से इस तथ्य पर जोर दिया कि भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। ऐसे में उनकी आय, उत्पादकता और संसाधनों तक पहुंच बढ़ाना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत का मानना है कि ब्रिक्स देशों का साझा सहयोग कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार बना सकता है।

  • भारत के चीनी निर्यात पर रोक से नेपाल में बढ़ी टेंशन, त्योहारों से पहले सप्लाई संकट का डर, बालेन शाह सरकार के सामने नई चुनौती

    भारत के चीनी निर्यात पर रोक से नेपाल में बढ़ी टेंशन, त्योहारों से पहले सप्लाई संकट का डर, बालेन शाह सरकार के सामने नई चुनौती



    नई दिल्ली। भारत के चीनी निर्यात पर अस्थायी रोक से नेपाल में चिंता बढ़ गई है। भारत सरकार ने घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर तक रोक लगा दी है। इस फैसले का सीधा असर पड़ोसी देश नेपाल पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, खासकर त्योहारों के सीजन में जब चीनी की मांग सबसे ज्यादा रहती है।

    नेपाल में दशैन, तिहार और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान चीनी की खपत तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में भारत से सप्लाई बाधित होने पर बाजार में कमी और कीमतों में उछाल की स्थिति बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही मौसम और कृषि उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे में यह कदम नेपाल की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

    काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के इस फैसले से नेपाली बाजारों में अस्थिरता की स्थिति बन सकती है। नेपाल के अधिकारी भी मानते हैं कि भारत के व्यापारिक फैसलों का सीधा असर उनकी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, क्योंकि नेपाल कई जरूरी वस्तुओं के लिए भारत पर निर्भर है।

    नेपाल के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक सप्लाई स्रोत तलाशने की कोशिश करेंगे। साथ ही भारत से सरकारी स्तर पर बातचीत की संभावना भी जताई गई है, ताकि त्योहारों के समय आवश्यक आपूर्ति बाधित न हो।

    व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल की सबसे बड़ी चुनौती लॉजिस्टिक्स और सीमित विकल्प हैं। भारत के अलावा अन्य देशों से आयात करना महंगा साबित होता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ता है। इसी वजह से नेपाल की खाद्य सुरक्षा नीति को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले महीनों में नेपाल में चीनी की कमी और महंगाई दोनों बढ़ सकती हैं।