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  • स्पेन की जीत के सबसे बड़े हीरो बने मिकेल मेरिनो लगातार दो नॉकआउट मुकाबलों में विजयी गोल कर रचा विश्व कप इतिहास

    स्पेन की जीत के सबसे बड़े हीरो बने मिकेल मेरिनो लगातार दो नॉकआउट मुकाबलों में विजयी गोल कर रचा विश्व कप इतिहास


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्पेन के मिडफील्डर मिकेल मेरिनो ने ऐसा इतिहास रच दिया है जिसे विश्व फुटबॉल लंबे समय तक याद रखेगा। बेल्जियम के खिलाफ खेले गए रोमांचक क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मेरिनो ने बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर उतरने के महज दो मिनट बाद निर्णायक गोल दागकर स्पेन को 2-1 की शानदार जीत दिला दी। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई और मेरिनो ने अपने नाम ऐसा रिकॉर्ड दर्ज करा लिया जो अब तक कोई खिलाड़ी नहीं बना सका।

    मिकेल मेरिनो फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में एक ही टूर्नामेंट के दो अलग अलग नॉकआउट मुकाबलों में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी के रूप में विजयी गोल करने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर बन गए हैं। इससे पहले उन्होंने प्री क्वार्टर फाइनल में पुर्तगाल के खिलाफ भी अंतिम क्षणों में गोल कर स्पेन को जीत दिलाई थी। अब बेल्जियम के खिलाफ भी उन्होंने वही कारनामा दोहराते हुए अपनी टीम को सेमीफाइनल का टिकट दिला दिया। इसके साथ ही वह स्पेन के लिए विश्व कप में 80वें मिनट के बाद दो अलग मुकाबलों में निर्णायक गोल करने वाले पहले खिलाड़ी भी बन गए हैं।

    इस विश्व कप में मेरिनो का योगदान बेहद खास रहा है। स्पेन ने अब तक छह मुकाबले खेले हैं जिनमें उन्हें केवल एक मैच में शुरुआती एकादश में मौका मिला जबकि बाकी पांच मुकाबलों में वह सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतरे। इसके बावजूद उन्होंने हर अवसर पर अपनी उपयोगिता साबित करते हुए टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई है। उनकी मौजूदगी ने स्पेन के कोच की रणनीति को भी नई पहचान दी है क्योंकि हर बार जरूरत पड़ने पर मेरिनो ने टीम की उम्मीदों पर खरा उतरकर मैच का रुख बदल दिया।

    बेल्जियम के खिलाफ मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने आक्रामक फुटबॉल खेली। लगातार दबाव का असर 30वें मिनट में देखने को मिला जब लैमिन यामल की शानदार दौड़ और पेड्रो पोरो के सटीक क्रॉस के बाद फैबियन रुइज ने रिबाउंड पर गोल करते हुए स्पेन को बढ़त दिला दी। हालांकि बेल्जियम ने हार नहीं मानी और पहले हाफ के आखिर में चार्ल्स डी केटेलेयर ने शानदार हेडर लगाकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।

    दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने कई अवसर बनाए लेकिन कोई भी बढ़त हासिल नहीं कर सका। मुकाबला अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था। तभी 86वें मिनट में स्पेन के कोच ने मिकेल मेरिनो को मैदान पर उतारा। यह फैसला कुछ ही क्षणों में मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ। 88वें मिनट में पाउ क्यूबार्सी के शॉट पर बेल्जियम के गोलकीपर गेंद को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सके और मेरिनो ने मौके का शानदार फायदा उठाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। इस गोल ने स्पेन को 2-1 की यादगार जीत दिला दी।

    मेरिनो के ऐतिहासिक प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि फुटबॉल में केवल शुरुआती एकादश ही नहीं बल्कि बेंच पर बैठे खिलाड़ी भी मैच का सबसे बड़ा हीरो बन सकते हैं। उनकी सूझबूझ आत्मविश्वास और सही समय पर किए गए शानदार फिनिश ने स्पेन को खिताब की दौड़ में मजबूत दावेदार बना दिया है। अब सेमीफाइनल में स्पेन का सामना फ्रांस जैसी मजबूत टीम से होगा जहां एक बार फिर सभी की नजरें मेरिनो पर टिकी रहेंगी कि क्या वह अपनी गोल्डन टच से टीम को फाइनल तक पहुंचाने का कमाल कर पाएंगे।

  • रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे लियोनेल मेसी वर्ल्ड कप में माराडोना का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ फिर चमके अर्जेंटीना के कप्तान

    रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे लियोनेल मेसी वर्ल्ड कप में माराडोना का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ फिर चमके अर्जेंटीना के कप्तान


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी लगातार नए इतिहास रच रहे हैं। काबो वर्डे के खिलाफ खेले गए राउंड ऑफ 32 मुकाबले में मेसी ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम करते हुए विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा असिस्ट करने वाले खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर डिएगो माराडोना का वर्षों पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

    इस मुकाबले में मेसी ने अपना नौवां विश्व कप असिस्ट दर्ज किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड डिएगो माराडोना के नाम था जिन्होंने अपने विश्व कप करियर में आठ असिस्ट किए थे। मेसी अब नौ असिस्ट के साथ इस सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं और एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ गोल करने वाले खिलाड़ी ही नहीं बल्कि अपनी टीम के लिए मौके तैयार करने में भी सबसे आगे हैं।

    मेसी ने काबो वर्डे के खिलाफ मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 29वें मिनट में अर्जेंटीना के लिए पहला गोल भी दागा। लिसेंड्रो मार्टिनेज के बेहतरीन पास को उन्होंने शानदार तरीके से गोल में बदलकर अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। यह विश्व कप में उनके करियर का 20वां गोल भी रहा। इस उपलब्धि के साथ वह पहले ही विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी के रूप में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।

    मेसी ने इस टूर्नामेंट में एक और खास उपलब्धि भी हासिल की। वह फीफा विश्व कप इतिहास के पहले खिलाड़ी बन गए जिन्होंने लगातार आठ मुकाबलों में गोल करने का रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा वह दो अलग अलग विश्व कप संस्करणों में सात सात गोल करने वाले पहले फुटबॉलर भी बन चुके हैं। विश्व कप 2026 में भी वह सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं जबकि फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे छह गोल के साथ उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी हैं।

    काबो वर्डे के खिलाफ मुकाबला अर्जेंटीना के लिए आसान नहीं रहा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर थीं और मैच अतिरिक्त समय में पहुंच गया। अतिरिक्त समय में मेसी के एक आक्रमण को रोकने की कोशिश में काबो वर्डे के खिलाड़ी डिने बोर्गस से आत्मघाती गोल हो गया जिसने मुकाबले का रुख बदल दिया। इसी गोल की बदौलत अर्जेंटीना ने रोमांचक मुकाबला 3-2 से जीतकर अगले दौर में जगह बनाई।

    विश्व फुटबॉल में लियोनेल मेसी का यह शानदार प्रदर्शन एक बार फिर उनकी महानता की पुष्टि करता है। लगातार रिकॉर्ड तोड़ते हुए वह न केवल अर्जेंटीना बल्कि विश्व फुटबॉल के इतिहास में अपने नाम को और अधिक सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा रहे हैं।

  • जब फुटबॉल बना विरासत, वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरी पिता और बेटे की ये 5 जोड़ियां

    जब फुटबॉल बना विरासत, वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरी पिता और बेटे की ये 5 जोड़ियां


    नई दिल्ली । फुटबॉल के सबसे बड़े मंच FIFA World Cup में जहां हर खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलना सपना मानता है, वहीं कुछ परिवार ऐसे भी रहे हैं जिनमें यह सपना दो पीढ़ियों तक पूरा हुआ। कई दिग्गज खिलाड़ियों ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व कप में जगह बनाई।

    1. लुइस और मारियो पेरेज (मेक्सिको)
    पिता लुइस पेरेज ने 1930 के विश्व कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व किया था। उनके बेटे मारियो पेरेज ने 1950 के वर्ल्ड कप में राष्ट्रीय टीम की ओर से खेला। हालांकि दोनों ही अपने-अपने विश्व कप में गोल नहीं कर सके।

    2. मार्टी और जोस वैंटोलरा (स्पेन/मेक्सिको)
    मार्टी वैंटोलरा 1934 में स्पेन की टीम का हिस्सा थे, जबकि उनके बेटे जोस वैंटोलरा ने 1970 में मेक्सिको के लिए विश्व कप खेला। दोनों ही खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो पाए।

    3. डोमिंगोस और अदेमिर दा गुइया (ब्राजील)
    डोमिंगोस ने 1938 में Brazil national football team की ओर से विश्व कप खेला। उनके बेटे अदेमिर दा गुइया 1974 में ब्राजील टीम का हिस्सा रहे, लेकिन सीमित अवसरों में उन्हें भी गोल नहीं मिला।

    4. रोजर और पैट्रिस रियो (फ्रांस)
    रोजर रियो ने 1934 में France national football team के लिए विश्व कप खेला। उनके बेटे पैट्रिस रियो 1978 में फ्रांस की टीम में शामिल रहे, लेकिन वे भी गोल नहीं कर सके।

    5. निकोले और इओन लुपस्कु (रोमानिया)
    निकोले लुपस्कु ने 1970 विश्व कप में रोमानिया का प्रतिनिधित्व किया। उनके बेटे इओन लुपस्कु 1990 और 1994 के वर्ल्ड कप में टीम का हिस्सा रहे और कुल 8 मैच खेले, लेकिन गोल नहीं कर पाए।

    विरासत की कहानी
    ये सभी जोड़ियां इस बात का प्रतीक हैं कि विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाली फुटबॉल परंपरा भी है, जहां एक ही परिवार का नाम दो अलग-अलग युगों में इतिहास बनाता है।